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अपने कर-वर्ग के अनुसार चुने निवेश के विकल्प

जितेंद्र सोलंकी, सर्टिफायड फाइनेंशियल प्लानर, | Nov 15, 2012, 01:23AM IST
अपने कर-वर्ग के अनुसार चुने निवेश के विकल्प

मैं डेढ़ साल बाद एक घर खरीदना चाहता हूं। मेरे पास कुछ अतिरिक्त पैसे भी हैं। फिलहाल मुझे इन पैसों का निवेश कहां करना चाहिए ताकि रिटर्न भी अच्छा मिले और पूंजी भी सुरक्षित रहे?   - अनिकेत, दिल्ली
-डेट फंडों में समय-सीमा के आधार पर निवेश के विभिन्न विकल्प उपलब्ध हैं। डेढ़ साल की अवधि के लिए मेरे ख्याल से म्यूचुअल फंडों के फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों के मद्देनजर एक अच्छा विकल्प हो सकते हैं। आयकर के नजरिये से तो यह आकर्षक हैं हीं, इन पर मिलने वाला रिटर्न भी बैंकों के फिक्स्ड डिपॉजिट की तुलना में बेहतर होता है।


लेकिन एक बात का ध्यान रखिए कि फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान में लिक्विडिटी अधिक नहीं होती, इसलिए अगर आप इस अवधि के बीच में पैसे निकालना चाहते हैं तो दूसरे विकल्प का सहारा ले सकते हैं। अगर आप न्यूनतम कर-वर्ग में आते हैं तो आपके लिए बैंकों का फिक्स्ड डिपॉजिट भी आकर्षक विकल्प साबित हो सकता है। यद्यपि अल्ट्रा शॉर्ट टर्म बांड फंडों ने भी इस समय अच्छा रिटर्न दिया है लेकिन इन ब्याज दरों की गिरावट का जोखिम होता है। आपको अपनी कर देनदारी को देखते हुए विकल्प का चयन करना चाहिए।
मैंने साल 2009 में एक बीमा पॉलिसी खरीदी थी और मैंने इसका प्रीमियम पिछले छह महीने से नहीं दिया है। मेर पॉलिसी का क्या हुआ होगा? क्या मैं अपने पैसों की निकासी कर सकता हूं?   -राजमंगल, रायपुर
किसी भी पारंपरिक बीमा पॉलिसी के मामले में जब आप सही समय पर प्रीमियम नहीं भरते हैं तो पॉलिसी लैप्स हो जाती है। आपके पास एक विकल्प होता है कि अंतिम पॉलिसी न देने की तारीख से दो साल तक आप फि&52द्भ;र से अपनी पॉलिसी चालू करवा सकते हैं। अगर आप तीन प्रीमियम भर चुके हैं और नियत समयावधि में इसे फिर से चालू नहीं कराते हैं तो आपकी पॉलिसी पेड अप हो जाती है। पेड अप होने के बाद आपकी पॉलिसी का सम एश्योर्ड  दिए गए प्रीमियम के अनुसार कम हो जाता है और उसी आधार पर आपको मैच्योरिटी पर पैसे मिलते हैं।


हालांकि, अगर आप शुरुआती तीन साल के दौरान लगातार प्रीमियम नहीं भरते हैं और पॉलिसी फिर से चालू नहीं करवाते हैं तो दिए गए प्रीमियम से हाथ धोना पड़ सकता है। पारंपरिक पॉलिसियों के सरेंडर चार्ज काफी अधिक होते हैं और यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने कितने वर्षों तक प्रीमियम का भुगतान किया है। आप बीमा कंपनी से संपर्क कर पॉलिसी की सरेंडर वैल्यू जान सकते हैं।
मैं जोखिम कवर के लिए एक टर्म इंश्योरेंस खरीदना चाहता हूं। मैंने कुछ जीवन बीमा एजेंटों से संपर्क किया था। उन्होंने मुझे प्रीमियम रिटर्न टर्म पॉलिसियों के बारे में बताया। क्या मुझे रिटर्न-ऑफ-प्रीमियम पॉलिसी खरीदनी चाहिए?  -अशोक, इंदौर
जब आप अपने परिवार के लिए एक सुरक्षा कवर खरीदना चाहते हैंं तो टर्म इंश्योरेंस सबसे सस्ता विकल्प रहेगा। हालांकि, जीवन बीमा पॉलिसी कई प्रकार के होते हैं। रिटर्न ऑफ प्रीमियम एक ऐसा विकल्प है, जिसमें अगर पॉलिसी लेने वाला व्यक्ति पॉलिसी अवधि के खत्म होने के बाद भी जीवित रहता है तो पॉलिसी अवधि में चुकाया गया कुल प्रीमियम, पॉलिसी लेने वाले व्यक्ति को चुका दिया जाता है। इंश्योरेंस कंपनी भुगतान के लिए 100 से 125 प्रतिशत समेत कई विकल्प देती है। वैसे देखने में यह काफी लुभावना विकल्प लगता है पर ऐसा है नहीं।


पहली बात, जब आप बिना रिटर्न की प्रीमियम पॉलिसी खरीदते हैं तो आप इतने ही प्रीमियम पर अधिक कवरेज या इससे कम प्रीमियम पर इतनी ही कवरेज पाएंगे। वहीं दूसरी चीज है कि अगर आप प्रीमियम विकल्प में बिना किसी रिटर्न वाली पॉलिसी लेते हैं तो आप प्रीमियम की अच्छी-खासी रकम बचा पाएंगे और इस राशि को किसी अन्य जगह निवेश कर आप अपने निवेश को कई गुना बढ़ा सकते हैं।
जितेंद्र सोलंकी, सर्टिफायड फाइनेंशियल प्लानर, जे. एस. फाइनेंशियल एडवाइजर्स, दिल्ली

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