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राजनीति

सरकार ने की युवाओं को ग़लत समझने की ऐतिहासिक ग़लती ; देश ने रोक ली



सारा देश, कोई दस दिन से आक्रोशित था। घर-घर में बात हो रही थी। तीखी बात। हर कोई पूछता : आखिर सरकार को हो क्या गया है? वह हमारे 16 साल के बच्चों को सेक्स के लिए उकसाना क्यों चाहती है? 'भास्कर' ने देश में सबसे पहले 'संबंधों' की उम्र कम किए जाने के विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया। जन युद्ध।...

Posted by Kalpesh Yagnik |Posted on  838 days ago
राजनीति

कौन कहता है यह चुनावी बजट नहीं है? जरूर है। जानिए, कैसे?



हमेशा वित्तमंत्री चाणक्य का मूलमंत्र बताते रहे हैं कि ‘कर ऐसे जुटाएं कि किसी को पता ही न चले।’ इस बार उलटा किया : ‘बजट में वोट की राजनीति इस तरह की कि किसी को पता ही न चला’                                                                         ...

Posted by Kalpesh Yagnik |Posted on  856 days ago
राजनीति

देश को महत्व देंगे तो जख्म भर जाएंगे



आने वाले सप्ताह में भारतीय इतिहास के एक काले अध्याय गोधरा में ट्रेन को जलाए जाने और इसके बाद हुए दंगों की 11वीं सालगिरह होगी। इस घटना को मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर भरपूर जगह दी गई है। इसके विविध पहलुओं की चर्चा की गई है। इसका विश्लेषण किया गया है। इसने देश की राजनीति...

Posted by Chetan Bhagat |Posted on  862 days ago
राजनीति

भास्कर विश्लेषण: हर पहलू में राजनीति इसलिए ढेर सारे अर्थ



प्र. अफजल की फांसी को इतना गोपनीय क्यों रखा गया?उ. मामला नाजुक था। कई पहलुओं से गुप्त रखना न सिर्फ अनिवार्य था वरन् सबसे प्रभावी तरीका भी। एक शब्द की भनक लगते ही हंगामा हो सकता था। शोर वैसे बाद में भी मच सकता है/ मचता ही है। किन्तु 'बाद' में कुछ बचता ही नहीं है। खुदकुशी जैसा...

Posted by Kalpesh Yagnik |Posted on  870 days ago
राजनीति

कहां गए वो जुनूनी कांग्रेसी; वो नौजवानों की अनंत भीड़?



'आज का नया भारत अपनी आवाज़ बुलंद करने में ज्यादा सक्षम है। नेताओं से नौजवान अपना हक मांग रहे हैं और वे अब ज्यादा सहन करने को तैयार नहीं हैं।'                                                 -जयपुर कांग्रेस चिंतन शिविर में सोनिया गांधी, 18 जनवरी 2013एक-सवा...

Posted by Kalpesh Yagnik |Posted on  894 days ago
व्यंग्य

वे चिंतित हैं : देश कहीं गर्त में न गिर जाए!



हैं तो वे मूलत: हमारे पुराने मित्र। ऊपर से संवेदनशील हैं। स्वाभाविक है इंसान हैं तो होंगे ही.. जब-तब भावनाओं में बह जाते हैं। हर राष्ट्रीय मुद्दे पर उद्वेलित हो जाते हैं। कांपने लगते हैं। ज्यादा गुस्सा हो जाते हैं तो खांसने भी लगते हैं। ‘हैं जी! क्यों होगा जी! देश गर्त...

Posted by Anuj Khare |Posted on  891 days ago
राजनीति

ब्रांड मोदी के आगे सब बौने



नरेंद्र मोदी की सबसे बड़ी सफलता गुजरात की विकासगाथा को अपने साथ जोड़ने की उनकी काबिलियत है। चुनावी समर के दौरान गुजरात में घूमना किसी शहंशाह के साम्राज्य में विचरण करने जैसा है। इससे पहले कभी किसी राज्य के चुनाव पर किसी एक शख्सियत का इतना प्रभाव नहीं रहा, जितना...

Posted by Rajdeep Sardesai |Posted on  921 days ago
विविध

आज मुझे अपने पुरुष होने पर शर्म आ रही है



दिल्‍ली में 23 साल की छात्रा से गैंगरेप ने समूचे समाज को हिलाकर रख दिया है। क्या इससे बर्बर भी कुछ हो सकता है? इस घटना के बाद पूरा शहर खौफ में है। यह आतंकी हमले से भी वीभत्स है, क्योंकि इससे न सिर्फ दिल्ली डरी-सहमी है बल्कि देश के लाखों नागरिक भी खौफ में हैं।  समाज में...

Posted by Gyan Gupta |Posted on  927 days ago

राजनीति

कहीं ऐसी तो नहीं है सरबजीत की रहस्यमय कहानी

‘एक बार एक पागल ने पूछा: सुनो, ये पाकिस्तान क्या है? काफी सोचकर दूजे ने जवाब दिया - पाकिस्तान, दरअसल हिंदुस्तान में एक जगह है, जहां उस्तरे बनते हैं! ’                                       - सआदत हसन मंटो की कालजयी कहानी टोबा टेक सिंह से तोशेखाने के घड़ियाल...

Posted by Kalpesh Yagnik |Posted on 790 days ago

सियासी मंच से देश चिंतन...

व्यंग्य

बड़े मंचों से अपनी बात कहने का बड़ा कायदा होता है। जोरदार सलीका होता है। अक्सर कायदा इतना कायदे का हो जाता है या सलीका इतना सलीकेदार हो जाता है कि इनके चक्कर में मूल मुद्दा ही गुम हो जाता है। आइए देखते हैं कैसे..?गंभीर चर्चा के लिए सियासी मंच सजा है। मुद्दा गंभीर है। साथ...

Posted by Anuj Khare |Posted on 802 days ago

किसी तरह की परीक्षा दे रहे हैं? तो इसे जरूर पढ़िए

राजनीति

‘हमसे बड़ी गलती हो जाएगी, इस भय के साथ जीना ही सबसे बड़ी गलती...

Posted by Kalpesh Yagnik |Posted on 806 days ago

शू-स्वागतम् : दोहरे चरित्र से बनी परम्परा

राजनीति

'जूता ग़लत है। मुशर्रफ को जनमत और कानून बाहर फेंक देंगे।'                              - हामिद मीर 29 मार्च 2013 ट्विटर परपाकिस्तान लौटे पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ पर जूता फेंकना किस बात का प्रतीक है? लोग उनसे घृणा कर रहे हैं? या विरोधी दल उनसे डर गए हैं?...

Posted by Kalpesh Yagnik |Posted on 821 days ago

100 महिलाओं पर ज़्यादती चलेगी, किन्तु किसी एक यौन अपराधी पर ज़्यादती नहीं होने देगी यह सरकार!

राजनीति

'चाहे 100 अपराधी छूट जाएं, किसी एक निर्दोष को सज़ा नहीं होनी चाहिए'                                    - भारतीय कानून की मूल भावना के रूप में चर्चित वाक्य                                         इसी से प्रेरित इस बार के कॉलम की हेडलाइन यह...

Posted by Kalpesh Yagnik |Posted on 838 days ago

सरकार 16 साल के बच्चों के ‘संबंध’ वैध करने जा रही है; आप कुछ कहेंगे नहीं?

राजनीति

'16 क्या, सेक्स संबंध तो 14 वर्ष के बच्चों के मान्य होने चाहिए क्योंकि वे अब ‘सहमति’ और शोषण में अंतर बखूबी समझते हैं।'                      - केंद्रीय कानून मंत्रालय का नोट 6 मार्च 2013 को।  'हर दूसरी भारतीय लड़की की कम उम्र में शादी की जा रही है। 470 बच्चियां यहां 18 से...

Posted by Kalpesh Yagnik |Posted on 846 days ago

दिल नहीं, ज़रा दिमाग से सोचिए जनाब!

विविध

  लोग कितने भावुक और मूर्ख हैं। जिधर हवा चली, उधर हो लिए। मीडिया ने जो कहा वही मान लिए। कुंडा में गांव वालों ने डीएसपी की हत्या की, तो लोगों ने राजा भैया को दोषी ठहरा दिया। बिना यथास्थिति जाने हवाबाजी करने लगे। मीडिया ने भी अपना फैसला सुना दिया। हर तरफ एक ही...

Posted by Mukesh Kumar Gajendra |Posted on 852 days ago
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