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और खबरें

जब तक एक-एक आतंकी नष्ट नहीं कर दें, आराम करना ही आतंक होगा

राजनीति


'इंडियन मुजाहिदीन' कुछ नहीं होता। सारा आतंक पाकिस्तान से आता है। दुर्भाग्यवश सरकार भी इस लाइन को बढ़ा रही है।  'होम-ग्रोन' टेरर शब्द हमारी मातृभूमि को बदनाम करने का प्रयास है। इंडियन मुजाहिदीन कहकर, हम भारतीयों को दीन-हीन किया जा रहा है। रोकें इसे।'             ...

Posted by Kalpesh Yagnik |Posted on 86 days ago

शिंदे और जैल सिंह में कई समानताएं

राजनीति


अब तक देश के गृहमंत्री रहे हर राजनेता को इस पद पर काबिज रहे पहले शख्स की छाया में रहना पड़ा है। नॉर्थ ब्लॉक में गृहमंत्री के  कार्यालय तक जाने वाली सीढ़ियों पर सरदार पटेल की एक आदमकद तस्वीर लगी है। उन्हें किताबों में भारत के लौहपुरुष के रूप में महिमामंडित किया गया...

Posted by Rajdeep Sardesai |Posted on 86 days ago

देश को महत्व देंगे तो जख्म भर जाएंगे

राजनीति


आने वाले सप्ताह में भारतीय इतिहास के एक काले अध्याय गोधरा में ट्रेन को जलाए जाने और इसके बाद हुए दंगों की 11वीं सालगिरह होगी। इस घटना को मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर भरपूर जगह दी गई है। इसके विविध पहलुओं की चर्चा की गई है। इसका विश्लेषण किया गया है। इसने देश की राजनीति...

Posted by Chetan Bhagat |Posted on 86 days ago

असुरक्षा से बाहर आएं नीतीशजी!

राजनीति


डियर नीतीशजी, मुझे  नवंबर 2010 का पटना दौरा आज भी याद है। उस वक्त आपने अपने विरोधियों को चारों खाने चित करते हुए शानदार चुनावी जीत हासिल की थी। आम आदमी के बीच उल्लास का माहौल था। हवाई अड्डे पर मिले ट्रैक्सी ड्राइवर से लेकर, होटल के रिसेप्शन स्टाफ, लिट्टी-चोखा स्टॉल...

Posted by Chetan Bhagat |Posted on 86 days ago

हेलिकॉप्टर घूस स्कैंडल में कई सफेद झूठ और कुछ काले सच

राजनीति


'अब फ्रांस के साथ रक्षा घोटाला होगा’                           - सोशल मीडिया पर 14 फरवरी 2013 को एक कटाक्ष।                            - कारण : जब रक्षा मंत्रालय हेलिकॉप्टर घूस स्कैंडल पर एक 'फैक्ट शीट’ जारी कर रहा था, उसी समय फ्रांस के साथ 30 हजार करोड़ का...

Posted by Kalpesh Yagnik |Posted on 91 days ago

भास्कर विश्लेषण: हर पहलू में राजनीति इसलिए ढेर सारे अर्थ

राजनीति


प्र. अफजल की फांसी को इतना गोपनीय क्यों रखा गया?उ. मामला नाजुक था। कई पहलुओं से गुप्त रखना न सिर्फ अनिवार्य था वरन् सबसे प्रभावी तरीका भी। एक शब्द की भनक लगते ही हंगामा हो सकता था। शोर वैसे बाद में भी मच सकता है/ मचता ही है। किन्तु 'बाद' में कुछ बचता ही नहीं है। खुदकुशी जैसा...

Posted by Kalpesh Yagnik |Posted on 94 days ago

क्या आपने मोदी-राहुल तुलना शुरू नहीं की है? 'मोर’ से कर सकते हैं

राजनीति


'भारत के युवा को अलग नजरिए से देखने की जरूरत है। युवा राष्ट्र के लिए विकास शक्ति का नया युग है। हमारे युवा स्नेक चार्मर्स (सपेरे) नहीं हैं, वे माउस चार्मर हैं’।                                                                     -नरेन्द्र मोदी,...

Posted by Kalpesh Yagnik |Posted on 94 days ago

राष्ट्रपति स्वयं क्यों नहीं त्याग देते ऐसा निकृष्टतम अधिकार?

राजनीति


'फांसी की सज़ा को माफ करना राष्ट्रपति की इच्छा पर निर्भर नहीं है। यह उनका दायित्व है कि माफी देने से अभियुक्त को लाभ तो हो, लेकिन यह भी ध्यान रखें कि उनके फैसले का पीडि़त परिवार पर क्या असर होगा।'               -जस्टिस अरिजित पसायत और जस्टिस एसएच कपाडिय़ा (2006 में...

Posted by Kalpesh Yagnik |Posted on 112 days ago
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