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Zahida Hina


ज़ाहिदा हिना पाकिस्तान की जानी-मानी उर्दू की लेखिका हैं। उनके कॉलम, कहानियां, निबंध, उपन्यास और नाटक दुनिया भर में प्रकाशित होते रहते हैं। उन्होनें अपनी पहली कहानी तब लिखी थी जब वे 9 साल की थीं। उन्होनें पत्रकार के रूप में कई ... Expand 
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पेशावर में कपूर फैमिली म्यूजियम

Zahida Hina|Nov 15, 2012, 13:51PM IST
राज कपूर का नाम आते ही हसीन और दिल मोह लेने वाली नरगिस का चेहरा आंखों में फिर जाता है। वो फिल्में जिनमें उन दोनों ने एक साथ काम किया और हमारे उपमहाद्वीप के करोड़ों इंसानों को अपना दीवाना बना गईं। मुझे वो दिन याद आते हैं, जब मैं बीबीसी की उर्दू सर्विस में काम कर रही थी और राजजी इस दुनिया से रुख़सत हुए, उर्दू सर्विस के लिए उनका शोक संदेश मैंने तैयार किया था और उसे तैयार करते हुए मेरी आंखों से आंसू गिर रहे थे। राज कपूर हमारी नौउम्री के दिनों के हीरो थे और हीरो भी ऐसे कि उन पर फिल्माए जाने वाले गाने हमारे घरों में भी सुने जाते और गलियों में नौजवान उन्हें गाते फिरते, ‘आवारा हूं, आसमां का तारा हूं..’ और, उन पर फिल्माया गया वो गाना कि ‘सिर पर लाल टोपी रूसी, फिर भी दिल है हिंदुस्तानी..’ और जब वो झूम कर ये तान उड़ाते कि ‘हम बिगड़े दिल शहÊादे राज सिंहासन पर जा बैठे जब-जब करें इरादे’, तो पाकिस्तान के हर ग़रीब मगर पुरजोश नौजवान की आंखों में राज सिंहासन पर बैठने के ख्वाब जुगनुओं की तरह चमकते।

पेशावर, जहां राज कपूर पैदा हुए एक ऐसा शहर है, जिसे अगर इंतेहाओं का शहर कहा जाए तो ग़लत न होगा। एक तरफ वो इंतेहा पसंद हैं, जो यहां सूफियों के मजर भी उड़ा देते हैं और पश्तो अदाकारों और गायकों की, जिन्होंने जान दूभर कर दी है। दूसरी तरफ, इसी पेशावर के लोग इस बात पर नाज करते हैं कि राज कपूर और उनके वालिद पृथ्वीराज कपूर और दादा बशेशर नाथ उनके शहर में पैदा हुए थे। और ये कि लीजेंड्री अदाकार दिलीप कुमार पेशावर में पैदा हुए थे और आज के मेगास्टार शाहरुख़ ख़ान का सारा ख़ानदान पेशावर का है। इन दिनों पेशावर के हवाले से राज कपूर की पांच मंजिला ख़ानदानी हवेली हमारे यहां ख़बरों में है। कपूर साहब के एक फैन शेख़ अमजद रशीद साहब ने ख़ैबर पख़तोन्वा की सूबाई हुकूमत को इस बात पर राजी किया है कि कपूर ख़ानदान की हवेली को अपनी निगरानी में ठीक कराए और फिर उसे कपूर फैमिली म्यूजियम बना दिया जाए। ख़ैबर पख़तोन्वा के संस्कृति मंत्री मियां इफ्तेख़ार हुसैन का कहना है कि हम इस म्यूजियम के लिए जो कुछ भी कर सकेंगे, वो करेंगे। इसकी वजह यह है कि हम इसी तरह आतंकवादियों से लड़ सकते हैं। यहां यह भी बताती चलूं कि मियां इफ्तेख़ार का जवान बेटा इस वार ऑन टेरर में मारा जा चुका है। वो हवेली जिसमें हिंदुस्तानी सिनेमा के दो लीजेंड्री अदाकार पृथ्वीराज कपूर और राज कपूर पैदा हुए वो अंदरूनी शहर है। पेशावरवालों को जब से यह ख़बर मिली है, उनकी ख़ुशी की इंतेहा नहीं है। उनका कहना है कि हम मुहब्बत के नग़में गाने वाले और अमन की सरगर्मियों को बढ़ावा देने वाले लोग हैं। अगर हमारे शहर में राज कपूर म्यूजियम क़ायम होता है तो यह हमारे लिए फख़्र की बात होगी और हमारे दामन से यह दाग़ भी धुलेगा कि हम टेररिस्ट और इंतेहापसंद नहीं हैं। इस म्यूजियम के सिलसिले में राज कपूर के पोते रणबीर कपूर से भी बात हुई है और सिर्फ यही नहीं इस ख़बर से कपूर ख़ानदान के तमाम लोग बेहद खु़श हैं, वो यह कहते हैं कि हम इस म्यूजियम की तक़रीब में शिरकत के लिए ज़रूर आएंगे। पेशावर में लोगों ने अभी से कपूर ख़ानदान की नई नस्ल की राह देखनी शुरू कर दी है। लोगों को सबसे ज़्यादा इंतज़ार करीना कपूर का है। वो पाकिस्तान वालों को बहुत लाडली हैं और सब ही उनकी अदाकारी पर फिदा हैं। पृथ्वीराज, राज कपूर, दिलीप कुमार, शाहरुख़ ख़ान वो नाम हैं, जो दोनों मुल्कों के बीच बिगड़े ताल्लु़कात की अंधेरी रात में हमारे दरमियान जुगनुओं की तरह जगमगाते हैं। ये नाम हमें एक ऐसे रिश्ते की याद दिलाते हैं, जिसे बमों और बारूद से उड़ाया नहीं जा सकता।
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