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Khushwant Singh


खुशवंत सिंह लेखन जगत की जानी मानी शख्सियत हैं। पत्रकार होने के साथ ही वे उपन्यास और कॉलम लिखते हैं। उनकी नॉवेल 'ट्रेन टू पाकिस्तान' खासी लोकप्रिय है। सरकार द्वारा उन्हें पद्म विभूषण सम्मान से भी नवाज़ा गया है।
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सांपों की समझें अहमियत

Khushwant Singh|Nov 15, 2012, 14:35PM IST
सांप का नाम सुनते ही हमारे शरीर में झुरझुरी-सी दौड़ जाती है। मैंने अपनी जिंदगी में जान-बूझकर एक भी सांप नहीं मारा। हां, कभीकभार गलती से इन्हें कुचल जरूर दिया है। ऐसा ही एक हादसा शिवालिक पहाड़ी के इलाके में हुआ था, जहां पर कालका-अंबाला के रास्ते में एक विशाल किंग कोबरा सड़क क्रॉस करते समय मेरी गाड़ी के नीचे आकर मारा गया था। 

इसी तरह एक बार एक अजगर धरमपुर और कसौली के रास्ते में मेरी गाड़ी के नीचे आकर इस दुनिया से कूच कर गया। यह तो हुई अपने देश की बात, लेकिन विदेशों में भी मेरे साथ ऐसे कई हादसे हुए हैं। एक बार मैं इंग्लैंड में वेल्विन गार्डन सिटी (हर्टपोर्डशायर) स्थित अपने होस्टल से साइकिल पर सवार होकर डेलकॉट टेनिस क्लब की ओर जा रहा था, तभी एक एड्डर सांप मेरी साइकिल के नीचे आ गया। उत्तरी इटली में भी इसी तरह एक बार एक बड़ा-सा सांप मेरे हाथों कुचलकर मर गया। दिल्ली और कसौली में तो शाम को सैर करते वक्त कई बार मेरा सांपों से आमना-सामना हुआ है। 

वैसे कई बार मैंने इन्हें बचाया भी है। एक बार कुछ लड़के हाथों में लाठियां व पत्थर लेकर सांप को मारने के लिए उसके पीछे भाग रहे थे। मैंने उन्हें रोका और हमारे प्राकृतिक संतुलन को बरकरार रखने में सांपों की अहम भूमिका के बारे में उन्हें लंबा-चौड़ा लेक्चर सुना दिया। यदि तमाम सांपों को मार दिया जाए तो दुनियाभर में चूहों के अलावा ऐसे कीड़े-मकोड़ों की भरमार हो जाएगी, जिनका ये सांप भक्षण करते हैं। हाल ही में एक पत्रिका में मैंने रोमुलस विटेकर का एक खूबसूरत लेख पढ़ा था, जो मद्रास जू में एक सर्प उद्यान चलाने के अलावा बंगाल की खाड़ी के तटीय इलाके में एक सर्प व घड़ियाल उद्यान भी चलाते हैं। उनके लेख को पढ़ने के बाद लगा कि मुझे भी सांपों के बचाव के बारे में कुछ लिखना चाहिए। 

हमारे देश में सर्प की तकरीबन 300 प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें से सिर्फ चार तरह के सांप जहरीले होते हैं - कोबरा, करैत, वाइपर और रसैल वाइपर। हमारे यहां हर साल तकरीबन ४५,000 लोग सांपों के काटने की वजह से काल के गाल में समा जाते हैं। यदि हम ग्रामीण डिस्पेंसरियों में सर्पदंश का सीरम आसानी-से उपलब्ध करा सकें, तो मौतों का यह आंकड़ा काफी हद तक कम हो सकता है। सांप के काटने के फौरन बाद व्यक्ति के शरीर में इस सीरम को इंजेक्ट करना जरूरी होता है। इसमें जरा-सी भी देर व्यक्ति की जान ले सकती है। 

इस बात को हमेशा ध्यान में रखें कि सांप कभी पहले से इंसानों पर हमला नहीं करते। वे सिर्फ आत्मरक्षा के लिए ऐसा करते हैं, जब इंसानों द्वारा उन पर हमला किया जाता है। आप उन्हें सम्मान दें, वे आपको सम्मान देंगे। हमारे प्राचीन लोग ऐसा करते भी थे। वे इन्हें ‘नाग देवता’ मानते हुए इनकी पूजा करते थे। 
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