वे छह छंदमुक्त कविताएं सुना लेने के पश्चात् सातवीं के लिए ‘स्टार्ट’ ले रहे थे। ज्ञान की खूंखार चमक चेहरे पर थी। छह सुना लेने की प्रचंड संतुष्टि से आप्लावित दिखाई दे रहे थे। ‘ये लीजिए जनाब, एक और, शीर्षक है अंतर्देशीय-पत्र..’अंतर्देशीय, तुम और मैं..।



पहला पन्ना, भले कर्मो का खाता-बही,



दूसरा पन्ना, संसार के भंवर में नय्या फंसी



तीसरा पन्ना, पास बुलाता दुष्कर्मो का कोहरा,



चौथा पन्ना, लिप्सा-लालसाओं का जाल घना,



पांचवां पन्ना,..



इसके पहले वे कुछ बोलते मैंने निवेदन किया,‘अंतर्देशीय में तो चार ही पन्ने..!’



‘कविता की आत्मा में तर्क मत बैठाओ’ वे बोले।



मैंने समझ लिया बहस करुंगा तो ‘यातना का कालखंड’ ज्यादा बढ़ जाएगा। बोलने को ही था कि वे फिर बोल पड़े।



‘इसी कविता को लो अंतर्देशीय जैसे क्षुद्र प्रतीक में भी जीवन की सगाई व्यक्त...

 

देश में लोकतंत्र है, इस बात का सबसे अच्छा उदाहरण बजट के दिन देखने को मिलता है. एक ही बजट पर तमाम उद्योगपति और जानकार वित्तमंत्री को दो से लेकर दस नम्बर तक देते हैं। - शिवकुमार मिश्र बजट एक ऐसे दस्तावेज को कहते हैं, जो सरकार के न होनेवाले इनकम और ज़रुरत से ज्यादा होनेवाले खर्चे का लेखा-जोखा पेश करता है। इसके साथ-साथ बजट को सरकार के वादों की किताब भी माना जा सकता है। एक ऐसी किताब जिसमें लिखे गए वादे कभी पूरे नहीं होते। सरकार बजट इसलिए बनाती है जिससे उसे पता चल सके कि वह कौन-कौन से काम नहीं कर सकती। जब बजट पूरी तरह से तैयार हो जाता है तो सरकार अपनी उपलब्धि पर खुश होती है। इस उपलब्धि पर कि आनेवाले साल में बजट में लिखे गए काम छोड़कर बाकी सब कुछ किया जा सकता हैं। सरकार का चलना और न चलना उसकी इसी उपलब्धि पर निर्भर करता है। कह सकते हैं कि सरकार है तो बजट है और बजट है तो सरकार...

 

निवेश के लिए मौके मिलेंगे दिनेश ठक्कर, सीएमडी, एंजेल ब्रोकिंग बाजार की उम्मीदों के मुताबिक इस बार का बजट निराशाजनक रहा है। करों में भी किए गए सुधार उतने नहीं हुए जिनकी आस बजट से की जा रही थी। यही वजह है कि बजट के बाद शेयर बाजार में भारी गिरावट देखी गई। लेकिन उम्मीद की जा रही है कि सरकार कारपोरेट जगत के लिए बजट से अलग अपने प्रयास जारी रखेगी। ऐसे में अगर निवेश की सोचें तो इन्फ्रास्ट्रक्चर, आईटी और एफएमसीजी अच्छे साबित हो सकते हैं। बजट में मैट रेट को 10 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी किया गया है। ये कंपनियों के 80 आईए के फायदों के दावों पर जरूर असर डालेगा। इस सेक्टर में को मिला आवंटन इसे निवेश के लिए बेहतर विकल्प बनाता है। इस सेक्टर में निवेश के लिए रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर और आईवीआरसीएल इन्फ्रास्ट्रक्चर बेहतर हो सकते हैं। इस बार के बजट में बैंकिंग सेक्टर के लिए कुछ...

 

नईदिल्ली। यह बजट प्रणव मुखर्जी के 80 के दशक के बजटों की याद दिलाता है। 80 के दशक के बजट बचत केंद्रित बजट थे। इन पर 20 सूत्री कार्यक्रमों का वैचारिक व राजनीतिक बोझ लदा रहता था। यह बजट भी चुनावी राजनीति को ध्यान में रखकर निवेश के मामले में वाम तेवरों को लिए हुए है पर ये तेवर दिखाने के ज्यादा है निभाने के कम। निवेश व शेयर बाजार को बढ़ावा देने के नजरिए से यह बजट सूखा-सूखा नजर आता है। आम निवेशक वर्ग को निवेश के लिए आकर्षित करने की किसी तरह की योजना इसमें दिखाई नहीं देती। सरकारी योजनाओं, शेयर बाजार, म्युच्युअल फंड या दूसरे निवेश माध्यमों में किसी तरह की पेशकश इस बजट में नहीं की गई है। मंदी में पिछले साल ढहे शेयर बाजार में सिक्योरिटी ट्रांसेक्शन टैक्स को हटाए जाने को लेकर उम्मीद की जा रही थीं लेकिन ऐसा कुछ नहीं किया गया। हालांकि कमोडिटी बाजारों के लिए जरूर कुछ राहत की...

 

हथिया बरसे चित्त मंडराए, घर बैठे किसान नितराए। इस बार मानसून दगाबाज निकला तो क्या, हथिया में झम-झमा-झम नहीं हुई तो क्या, मूल बात ये है कि मूल नक्षत्र के आखिरी दिन प्रणब मुखर्जी ने वादों की जो बरसात की तो किसान नितराने लगे और कांग्रेसी इतराने। हथिया नक्षत्र वाली कहावत उनके समझ नहीं आएगी जो सेंसेक्स की नब्ज और मार्केट के सेंटीमेंट से देश का बुखार मापते हैं। कुछ समझ नहीं आया कारपोरेट वालों को। प्रणब बंगाली-स्टाइल इंग्लिश में बजट भाषण देते रहे और लिफाफा देखकर खत का मजमून भांप लेने वाले दिग्गज लफ्ज सुनने और हर्फ चुनने में। इनके दरमियान क्या था, वे पकड़ नहीं पाए। दलाल स्ट्रीट में सेंसेक्स धड़ाम से गिर पड़ा, करों में कटौती की आस लिए वेतनभोगी अपने सरों को खुजला रहे थे पर कांग्रेसी अपनी मुस्कान छिपा नहीं पा रहे थे। बजट का तो पता नहीं, अर्थव्यवस्था इनके पल्ले नहीं...

 

इनकम टैक्स में छूट की सीमा का मामला हो या सर्विस टैक्स की कटौती की बात, आम लोगों को निराशा ही हाथ लगी। पिछले कुछ दिनों से आम आदमी के बजट का इंतजार कर रहे आम लोगों को राहत के छींटे भी नसीब नहीं हुए। इनकम टैक्स में छूट ऐसे बड़े लोगों को मिली है जिनकी संख्या बहुत कम है। एफबीटी को खत्म करना बहुत उम्मीद भरा नहीं है, क्योंकि इससे जिन लोगों का फायदा हो रहा था वे भी आम आदमी की श्रेणी में नहीं कहे जा सकते। हां, यदि आम आदमी के लिए कुछ हुआ है तो वह बस इतना ही कि एलसीडी टीवी पर कस्टम ड्यूटी दस से घटाकर पांच प्रतिशत कर देने से उसके घर यह नई टीवी आ सकती है। कस्टम ड्यूटी टॉवेल और रूमाल से भी घटाई गई है जिसके चलते आदमी अपना पसीना तो पौंछ ही सकता है। राहत की फुहारें कुछ दिनों बाद बरसने की उम्मीद है क्योंकि इनकम टैक्स फार्म सरल किया जाएगा। डायरेक्ट टैक्स कोड 45 दिन में लाया जा रहा है,...

 

वेतन में से पेंशन के नाम से जो पैसा काटा जाता था, वह उस समय के हिसाब से था। अब जब पेंशन के पैसे मिलने शुरू हुए तो इस महंगाई के हिसाब से पैसे काटे जा रहे हैं। आजकल आम आदमी को पेंशन 800 से 1000 रुपए मिलती है, ये पैसे तो हर महीने की सब्जी-भाजी में ही खर्च हो जाएंगे। घरेलू महिला का रोना: आज के समय में हिसाब लगाया जाए तो हरी सब्जी ही 30 रुपए प्रति किलो में मिल रही है। सुना है कुछ दिनों में 3-4 रुपए और बढ़ने वाले हैं। घर में कम से कम छह सदस्य तो होते हैं- सास-ससुर, पति-पत्नी और दो बच्चे। इन सबके नाश्ते में ही सब्जी का अता-पता नहीं रहता। लंच बॉक्स तो दूर की बात है। धनिया 185 रुपए किलो मिल रहा है। हम तो क्या अच्छे खासे कमाने वाले लोग भी धनिया खरीदने की सोच नहीं पा रहे हैं। डीजल-पेट्रोल की कीमतें बढ़ गई, ट्रांसपोर्टर ने अपने पैसे बढ़ा दिए। इसका हर्जाना आम आदमी भुगत रहा है। कॉलेज जाने वाली...

 

वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने अपने बजट भाषण में इसे पूरी तरह आम आदमी का बजट बताया और इसके लिए कई घोषणाएं भी कीं। बजट २क्क्९-१क् से एक तरफ उद्योग जगत खुश नहीं, वहीं दूसरी तरफ उपभोक्ताओं के लिए इसमें कुछ खास राहत नहीं । उपभोक्ताओं पर रियायत की बरसात करते हुए एलसीडी टीवी और मोबाइल फोन सस्ते कर दिए हैं। इसके साथ ही ब्रांडेड ज्वैलरी, स्पोर्ट्स और लेदर प्रोडक्ट्स, पैकेज सॉफ्टवेयर, फुटवेयर आदि की कीमतें भी कम की हैं। इनमें पांच प्रतिशत कस्टम ड्यूटी कम करने के कारण ये उत्पाद सस्ते होंगे। वहीं पांच प्रतिशत कस्टम ड्यूटी लगाए जाने के कारण सोने के बार, सिक्के, चांदी, सेट टॉप बॉक्स और कॉस्मेटिक सर्जरी बजट के बाद महंगी हो जाएंगी। इसके अलावा खाद्य वस्तुओं, दवाइयां, पेपर, कलाकृतियां, प्रेशर कुकर, वाटर फिल्टर, वॉटर प्यूरीफायर को छोड़कर बाकी वस्तुओं पर उत्पाद शुल्क चार से...

 

भोपाल। मानसून की रिमझिम फुहारों के बीच आम बजट सूखा साबित हो रहा है। प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने बार-बार भाषणों में इसे आम आदमी का बजट बताया है। इसमें आम आदमी का कितना खयाल रखा गया है इसका पता इस बात से ही चलता है कि टैक्स छूट के प्रावधानों के तहत सरचार्ज खत्म करने की जो बात की वह बेमानी है। सरचार्ज तो उस समय लगता है, जब ‘आम आदमी’ की आय 10 लाख रुपए से ऊपर होती है। सवाल यह है कि भारत मंे ऐसे कितने प्रतिशत आम आदमी हैं जिनकी आय इतनी होती है। इसी तरह से फ्रिंज बेनिफिट टैक्स (एफबीटी) की जद में भी कितने प्रतिशत लोग आते हैं? बजट में यह भी साफ दिखाई दे रहा है कि इंडस्ट्री के लिए इसमें बहुत कुछ नहीं है। यह डॉ. मनमोहन सिंह सरकार की दूसरी पारी का पहला बजट है। लंबे समय से सरकार आम आदमी को लुभाने के लिए इसे उनका हितकारी बजट बताती आ रही थी इसलिए कुछ प्रावधान तो किए गए हैं। गौरतलब...

 

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी के आम बजट पर बाजार की पहली प्रतिक्रिया बेहद नकारात्मक रही है। इसका कारण यह है कि बाजार को कुछ खास मुद्दों पर वित्त मंत्री से कोई साफ भरोसा नहीं मिला है। पहली बात – यह बजट आर्थिक सुधारों का दूसरा दौर शुरू करने वाला बजट किसी रूप में नहीं लगा।



विनिवेश के बारे में उन्होंने कुछ खास नहीं कहा और जितना कहा वह बाजार को नकारात्मक ही लगा। तेल क्षेत्र में कीमतों का मुद्दा सुलझाने के बारे में सरकार क्या करेगी, इसका उन्होंने कोई संकेत नहीं दिया – बस इतना कहा कि एक समिति बनेगी। विदेशी निवेश के बारे में उन्होंने कुछ खास नहीं कहा।



बैंकिंग सुधारों के बारे में कुछ नहीं कहा गया। श्रम सुधारों के बारे में भी वे चुप रहे। और इन सबके बीच सरकारी खजाने का घाटा (फिस्कल डेफिसिट) 2009-10 में बढ़ कर 6.8% हो जाने का अनुमान रखा गया।



अंतरिम बजट में यह...

 

बजट विश्लेषण. वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी द्वारा आज प्रस्तुत किया गया बजट में तरफ जहां आम आदमी के हितों का ध्यान रखा गया है वहीं इसमें बढ़ते राजकोषीय घाटे पर नियंत्रण की कवायद भी शामिल है। वित्त वर्ष में वर्तमान बजट देश के विकास दर को बढ़ाने के उद्देश्य से बनाया गया है लेकिन ऐसा कोई असाधारण कदम इस बजट में नजर नहीं आता जिससे बहुत बड़ी उम्मीद की जा सके। सेवा क्षेत्र के लिए कुछ खास नहीं सेवा क्षेत्र ने सरकार को मंदी में बढ़ी राहत दी थी और उम्मीद की जा रहीं थी इसको और मजबूती देने के लिए कोई बड़ी घोषणा नहीं की है। पुराने कार्यक्रमों को बढ़ानें वाला इस बजट में सरकार ने अपने पुराने कायक्रमों जैसे की नरेगा के लिए बजट का आवंटन बढ़ाने का काम किया है। मध्यमवर्ग को धक्का देन वाला यह बजट एक तरफ जहां ग्रामीण क्षेत्र को थोड़ी राहत पहुंचाने वाला है वहीं दूसरी तरफ शहर...

 



नई दिल्ली। लोकसभा में आज प्रणब मुखर्जी चौथी बार आम बजट पेश कर रहे हैं। संसद में ठीक 11 बजे उन्होंने बजट भाषण शुरू किया।


लोकसभा में वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी आज पेश कर रहे हैं 2009-10 के लिए आम बजट



वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी चौथी बार पेश कर रहे हैं आम बजट



25 साल बाद प्रणब कर रहे हैं आम बजट पेश



बजट से उम्मीद सेंसेक्स और निफ्टी उछाल के साथ खुला




कैबिनेट की बैठक खत्म, बजट को मिली कैबिनेट की मंजूरी



प्रणब मुखर्जी का बजट भाषण शुरू



प्रणब बोल - विकास के लिए मिला जनादेश



हर साल 1.20 करोड़ नई नौकरियां



निर्यात क्षेत्र में बढ़त बनाए रखेंगे



स्वास्थ्य क्षेत्र पर खास ध्यान



शिक्षा पर जोर देंगे



कृषि में 4 फीसदी विकास दर



मंदी की मार में 9 फीसदी विकास दर की चुनौती


 

नई दिल्ली. केंद्र सरकार आम बजट में विभिन्न विकास योजनाओं के लिए आवंटन बढ़ा सकती हैं। कोशिश यह होगी कि बजट में इन योजनाओं को ज्यादा से ज्यादा धनराशि देकर वैश्विक मंदी से मुकाबला करने के साथ रोजगार भी पैदा किया जाए।



एक अनुमान के मुताबिक, सामाजिक और ढांचागत क्षेत्र की योजनाओं में नब्बे प्रतिशत अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध कराई जानी चाहिए। सूत्रों के अनुसार योजना आयोग के साथ विचार-विमर्श के बाद सरकार ऐसी योजनाओं के लिए 2009-10 के पूर्ण बजट में अंतरिम बजट की तुलना में करीब 35-40 हजार करोड़ रुपए अतिरिक्त उपलब्ध करा सकती है। इसके साथ ही विकास संबंधी अन्य योजनाओं के लिए अस्सी हजार करोड़ रुपए तक के व्यय का प्रावधान किए जाने की उम्मीद है।



सूत्रों के अनुसार राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (नरेगा) को अंतरिम बजट की तुलना में करीब 9-10 हजार करोड़ रुपए अतिरिक्त उपलब्ध...

 



मुझे नहीं लगता कि आज रेल बजट शेयर बाजार को कुछ खास उत्साहित कर सका है।हालांकि दोपहर बाद के कारोबार में बाजार ने एक अच्छी रफ्तार पकड़ी, लेकिन रेल बजट की किसी घोषणा के चलते ऐसा नहीं हुआ। दरअसल रेल बजट पेश होने के दौरान तो सेंसेक्स में मोटे तौर पर लगभग 0.5% तक कीहल्की बढ़त दिख रही थी और कुछ देर के लिए सेंसेक्स लाल निशान में भी आ गया। रेल बजट पेश होने के दौरान सेंसेक्स का सबसे ऊपरी स्तर 14,749 का था, जिस पर यह केवल 91 अंक या 0.6% की बढ़त दिखा रहा था।

यह कहा जा सकता है कि रेल बजट पूरा हो जाने के बाद पूरे बाजार की नजरें इस बात पर जम गयीं कि बस आने वाले सोमवार को बजट पेश होना है। आजकल बाजार में किसी घटना की प्रतिक्रिया बड़ी जल्दी आती है और तुरंत ही निपट भी जाती है। बाजार फौरन ही अगले मुद्दे के बारे में सोचने लग जाता है। आज दोपहर बाद जो उछाल आयी, उसका रेल...

 

नई दिल्ली। पांच सालों तक लालू यादव के लोकलुभावने रेल बजट के बाद अब ममता दीदी के रेल बजट ने लोगों की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। यूं तो ममता ने पहले ही घोषणा कर दी है कि यह रेल बजट आम जनता का बजट होगा, लेकिन फिर भी उम्मीदें कम होने का नाम नहीं ले रहीं। पूर्व रेल मंत्री लालू यादव पिछले रेल बजट को याद करते हुए बोले कि रेल का उनके दिल से रिश्ता है। वह चाहते हैं कि हमेशा की तरह रेल बजट लोगों के हित में हो।



 रेल बजट की लाइव हाइलाइट्स 


किसी भी क्षेत्र में यात्री किराया या माल भाड़ा नहीं बढ़ाया जाएगा

 

ममता बोली विकास के लिए गांवों तक पहुंचे, रेल बजट लोगों का बजट लोगों के लिए बजट।

गरीबों के हित में देश का विकास - ममता

विकास में रेलवे की अहम भूमिका

विशेषज्ञों की कमेटी गठित होगी

50 स्टेशनों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाया जाएगा

मुंबई,पुणे,...

 

नई दिल्ली । रेलमंत्री ममता बनर्जी ने कहा लोकसभा में ३ जुलाई को पेश किया जाने वाला रेल बजट आम लोगों का बजट होगा। वह जनता के हित में होगा। बनर्जी ने सर्वदलीय बैठक के बाद कहा कि जनता को रेल बजट से काफी अपेक्षाएं हैं, जबकि उन्हें इस पर काम करने के लिए महज १५ दिन का समय मिला है। इसे रेलवे की मौजूदा हालत देखते हुए तैयार किया है। क्या हैं योजनाएं? नई ट्रेनें, नई व्यवस्था गरीब रथ समेत करीब २५ नई ट्रेनें। गरीब रथ का नाम बदला जा सकता है। (पूर्वी क्षेत्र के लिए खास घोषणाएं) इनमें नॉन-एसी कोच जोड़े जा सकते हैं। ट्रेनों से साइड मिडिल बर्थ हट सकती है। किराया-भाड़ा यात्री किराए में मामूली बदलाव। माल भाड़े में रियायतें। वेंडरों के लिए २क् रुपए के पास। यात्री सुविधाएं स्टेशनों का आधुनिकीकरण १३९ सेवा का विस्तार। ट्रेन के समय की सही सूचना के लिए सैटेलाइट तंत्र।...

 

पिछले गुरुवार को राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल का अभिभाषण यूपीए सरकार के सुधार कार्यक्रमों के प्रति आश्वासन जगाता है। वरना पिछली सरकार में पांच साल के कार्यकाल में आर्थिक सुधार एक गंदा शब्द बन चुका था। अब जबकि लेफ्ट इस सरकार का हिस्सा नहीं है तो उम्मीद की जा रही है आर्थिक सुधारों की रफ्तार तेज होगी। लेफ्ट की वजह से आर्थिक सुधार रुक गए, यह कहना अर्धसत्य है। बड़बोले लेफ्ट नेताओ की वजह से ऐसा लग सकता है कि वामपंथी दलों ने इसमें रोड़े अटकाए लेकिन यूपीए सरकार का डर-डर कर कदम उठाना भी एक बड़ी वजह रही। सरकार ने लेफ्ट को समझाने की कोई कोशिश नहीं और न ही सुधार कार्यक्रमों में उनको शामिल किया। इससे हुआ यह कि लेफ्ट पूरे विरोध पर उतर आया और सरकार का सुधार कार्यक्रम पटरी से उखड़ गया।

अगर यूपीए की मौजूदा सरकार इस ट्रेंड को बदलना चाहती है तो उसे लोगों को इसका अहसास कराना...

 



 



छह जुलाई को पेश होने वाले आम बजट में केंद्र सरकार तकरीबन 25,000 करोड़ रुपये की आमदनी 3जी और वाइमैक्स बोली प्रक्रिया से दिखा सकती है। डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम (डॉट) के सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार 3जी और ब्रॉडबंड एवं वाइमैक्स (बीडब्ल्यूए) की ऑक्शन प्रक्रिया से होने वाले राजस्व को आम बजट में दिखाने का लगभग निर्णय ले चुकी है। अब सिर्फ रिजर्व प्राइस के मुद्दे पर दूरसंचार और वित्त मंत्रालय की सहमति बाकी है।



सूत्रों का कहना है कि राजस्व आमदनी को बजट में दिखाने पर फैसला लगभग हो चुका है। अब चर्चा सिर्फ इस मुद्दे पर चल रही है कि आमदनी कितनी रहेगी। सूत्रों का कहना है कि केंद्र सरकार चाहती है कि यह आमदनी कम से कम 30,000 करोड़ रुपये बताई जाए। लिहाजा, इसको लेकर दूरसंचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ए. राजा और वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के बीच बातचीत चल रही है।...

 

भास्कर ने 2020 के भारत को देखने की कोशिश की है। यह भारत आर्थिक रूप से विकसित भारत होना चाहिए। लेकिन इसके लिए अगले दस बजट भारत के होने चाहिए। भारत मजबूत होगा तो पूरी अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। भारत यानी वह भारत जो विकास में पीछे छूट गया है। जो देश के मेट्रो शहरों से आधी सदी दूर रहता है। उस भारत को केंद्र में रखकर अगर देश की सरकारें अगले दस बजट बनाती है तो अर्थव्यवस्था के सभी घटकों को मजबूती तो मिलेगी ही। इसके साथ ही यह विकास टिकाऊ और समावेशी भी होगा।



इस कदम की शुरुआत करने का पहला मौका केंद्र में गठित संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की नई सरकार को आगामी छह जुलाई को पेश किये जाने वाले अपने पहले बजट में मिलेगा। अभी तक जो संकेत मिल रहे हैं उसमें यह बात दिख रही है कि शायद इस सरकार का पहला बजट भारत पर ही केंद्रित होगा। यानी इसमें स्टॉक मार्केट, कॉरपोरेट जगत और सेवा...

 

मुंबई। जब छह जुलाई को बजट पेश होगा तो पहले पब्लिक आफर (आईपीओ) में निवेश को प्रोत्साहन मिल सकता है। बताया जाता है कि वित्त मंत्रालय इस प्रस्ताव पर विचार कर रहा है कि आईपीओ बाजार में निवेश पर कुछ टैक्स रियायतें दी जाएं। देश का प्राइमरी मार्केट 18 माह पहले रिलायंस पावर आईपीओ के बाद से खामोश हो गया है। निवेश बैंकिंग के सूत्रों का कहना है कि ऐसा एक प्रस्ताव सेबी के साथ चर्चा में है और यह वित्तमंत्री के बजट भाषण का हिस्सा बन सकता है। क्या है प्रस्ताव आईपीओ में रिटेल निवेश पर डिडक्शन का लाभ आयकर अधिनियम की 80 सी के तहत दिया जा सकता है। अब तक 80सी के तहत इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (ईएलएसएस) और यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (यूलिप्स) को ही आयकर में छूट हासिल है। लेकिन इन सभी निवेश पर तीन साल की लाक इन अवधि लागू है। शेयरों में जितना जोखिम होता है, उसे देखते हुए अब तक...