
पिरामल हेल्थ केयर इस समय विदेश में अधिग्रहण की योजना बना रही है। कंपनी अपनी दवाओं के लिए मजबूत और विस्तृत बाजार की संभावनाएं तलाश रही है। उद्योग से जुड़े एक सूत्र के मुताबिक हाल में खुद पिरामल हेल्थकेयर को अधिग्रहीत करने की अफवाह कुछ कंपनियों ने फैलाई थी। मगर इसके विपरीत पिरामल हेल्थकेयर विदेशी अधिग्रहण की कोशिश में लगी है।
पिरामल की निदेशक स्वाति पिरामल कहती हैं कि पिछले साल में दो कंपनियों का अधिग्रहण किया है और हमारी विस्तार योजना जारी है। उन्होंने कहा कि हमने 10 सालों में अभी तक जिन 24 कंपनियों का अधिग्रहण किया है, वे छोटी और प्रयोगशाला स्तर की कंपनियां हैं। पर अब बड़ी कंपनियों की तलाश की जा रही है। हालांकि उन्होंने ऐसी किसी कंपनी के बार में कुछ कहने से इनकार किया।
लेकिन सूत्रों का मानना है कि पिरामल हेल्थकेयर की ऐसी 6 कंपनियों पर नजर है, जो उसके बजट के अनुसार हैं और जिनका अधिग्रहण किया जा सकता है। पिरामल हेल्थकेयर के न्यूज लेटर के मुताबिक वैश्विक स्तर पर फार्मास्यूटिकल बाजार में वित्तीय संकट का असर पूर साल रहा है। इस दौरान बाजार महज 1 से 2 फीसदी की वृद्धि दर हासिल कर पाया है। टॉप 8 कंपनियों का भी यही हाल रहा है। पिरामल को सितंबर की दूसरी तिमाही में 106 करोड़ रुपये का लाभ हुआ था, जबकि उसकी कुल बिक्री 999 करोड़ रुपये दर्ज की गई थी।
बता दें कि पिरामल हेल्थकेयर इस समय कांट्रैक्ट मैन्यूफैक्चरिंग फर्मो में विश्व में टॉप-10 की सूची में शामिल है। इसका अधिकतर राजस्व कांट्रैक्ट रिसर्च और मैन्यूफैक्चरिंग सेवा से आता है। कंपनी इस समय मुंबई मे अपने शोध और अनुसंधान (आरएंडडी) केंद्र में कई मोलिक्यूल बना रही है, जिसमें से पहले चरण में डायबिटीज और कैंसर के मोलिक्यूल विकसित होंगे। इस साल के अंत तक या अगले साल के शुरू तक दो नए मोलिक्यूल के बाजार में आने की संभावना है। ajeetsingh@businessbhaskar.net