
जेके टायर इंडस्ट्रीज टाटा मोटर्स और अशोक लेलैंड को कमर्शियल वाहनों के लिए रेडियल टायर की सप्लाई में इजाफा करो जा रही है। कंपनी अगले दो साल में तीन गुना सप्लाई बढ़ाएगी। गौरतलब है कि हाल ही में कंपनी ने रेडियल टायर के उत्पादन में इजाफा कर इसे आठ लाख यूनिट सालाना कर दिया है। कुल उत्पादन में से कंपनी पांच फीसदी ओरिजनल इक्विपमेंट मैन्यूफैक्चर्स (ओईएमएस) को सप्लाई देती है, जबकि बाकी बाजार में बेचती है।
जेके टायर इंडस्ट्रीज के वाइस चेयरमैन व एमडी आर पी सिंघानिया ने बताया कि मौजूदा समय में ओईएमएस को रेडियल उत्पादन का महज पांच फीसदी की सप्लाई होती है। जिसे अगले दो साल में बढ़ाकर 15 फीसदी करना है। उन्होंने बताया कि कमर्शियल वाहनों के टायरों में रेडियलाइजेशन की दर बढ़ रही है। ऐसे में बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की योजना है। उन्होंने बताया कि टाटा मोटर्स और अशोक लेलैंड जैसी कंपनियों में रेडियल टायरों की मांग बढ़ रही है। लिहाजा जेके टायर उन्हें सप्लाई बढ़ाएगी। मौजूदा समय में देश में ट्रकों और बसों में रेडियलाइजेशन की दर करीब 10 फीसदी है। जिसे अगले पांच साल के दौरान बढ़कर 25 फीसदी तक होने की उम्मीद है।
सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्यूफैक्चर्स (सियाम) के आंकड़ों के मुताबिक पिछले वित्त वर्ष के दौरान देश में 3.84 लाख यूनिट कमर्शियल वाहनों की बिक्री हुई है। इसे देखते हुए जेके टायर ने पिछले ही हप्ते अगले दो साल के दौरान रेडियल टायरों की उत्पादन क्षमता बढ़ाकर 12 लाख यूनिट करने की घोषणा की है। मौजूदा उत्पादन क्षमता आठ लाख यूनिट है। क्षमता विस्तार पर कंपनी अगले 3-4 साल के दौरान 1,200 करोड़ रुपये निवेश करेगी। इसके तहत कंपनी दक्षिण भारत में ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट पर भी काम कर सकती है। सिंघानिया ने बताया कि मजबूती और टिकाऊ होने की वजह से कमर्शियल वाहनों में रेडियल टायरों की मांग तेजी से बढ़ रही है।
क्या है रेडियल टायर
आम तौर पर टायर रबर से ही बनते हैं। लेकिन मजबूती और टिकाऊ टायरों की मांग को देखते हुए कंपनियां रेडियल टायर भी बनाने लगी हैं। रेडियल टायर में रबर के साथ कुछ दूसरी वस्तुएं भी मिलाई जाती हैं। जिसमें स्टील, कपड़ा, पोलिएस्टर और नॉयलॉन शामिल होते हैं।