
कंज्यूमर गुड्स और कार कंपनियों की हाई-ग्रेड (उच्च गुणवत्ता वाली) स्टील की मांग को पूरा करने की तैयारी घरेलू स्टील कंपनियों ने कर ली है। अभी कार और कंज्यूमर गुड्स कंपनियों को अपने इस्तेमाल का 60 फीसदी स्टील आयात करना पड़ता है। इसे देखते हुए अब सभी स्टील कंपनियां अगले दो सालों में हाई-ग्रेड स्टील का उत्पादन दोगुने से ज्यादा करने जा रही हैं।
देश की सबसे बड़ी स्टील कंपनी स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (सेल) अपने कुल विस्तार कार्यक्रम में हाई-ग्रेड स्टील और वैल्यू एडेड उत्पादों की हिस्सेदारी 20 से 25 फीसदी तक रखी है। कंपनी के चेयरमैन एस. रूंगटा ने इस बारे में बिजनेस भास्कर को बताया कि दूसरी तिमाही में कंपनी ने हाई वैल्यू एडेड उत्पादों पर खासा ध्यान रखा है। इसका कंपनी को फायदा भी मिला है। आने वाले दिनों में भी कंपनी इस सेगमेंट पर फोकस करेगी। सेल के अलावा एस्सार स्टील, जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड, इस्पात इंडस्ट्रीज और जेएसडब्लू स्टील जैसी कंपनियां अगले दो-तीन सालों में अपनी उच्च गुणवत्ता वाले स्टील का उत्पादन दोगुने से ज्यादा करने वाली है, ताकि घरेलू मांग को पूरा किया जा सके। इस्पात इंडस्ट्रीज भी अपने विस्तार कार्यक्रम के पूरा होने पर कुल उत्पादन में 20 से 25 फीसदी हाई ग्रेड-स्टील का उत्पादन करेगी। कंपनी के अधिकारी के मुताबिक विस्तार कार्यक्रम में हम ज्यादा से ज्यादा वैल्यू एडेड उत्पादों पर ध्यान रख रहे हैं। स्टील मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक देश में बढ़ती मांग को देखते हुए अभी कंपनियां 70,000 करोड़ रुपये का कार्यक्रम चला रही हैं, जिसे अगले दो-तीन सालों में पूरा हो जाना है।
अभी देश में स्टील का 6.5 करोड़ टन सालाना उत्पादन क्षमता है। इसे अगले दो सालों में 12.4 करोड़ टन करने पर काम चल रहा है। कंपनियों का सबसे ज्यादा जोर हाई-ग्रेड स्टील पर ही है। फिलहाल देश में कुल स्टील उत्पादन में हाई-ग्रेड स्टील की हिस्सेदारी 7-8 फीसदी तक ही होता है। इसे अब 20 फीसदी तक बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है। सेल अपने विस्तार कार्यक्रम में 20 फीसदी से ज्यादा हाई-ग्रेड स्टील उत्पादन पर काम कर रही है। उत्तम गल्वा में आर्सेलर-मित्तल के हिस्सेदारी खरीदने के बाद स्टील कंपनियों का ध्यान इस ओर बढ़ गया है।