
नई दिल्ली/भोपाल। छह अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान संस्थान (एम्स) खोलने में केंद्र और राज्य सरकारों की ढिलाई के चलते इनके चालू होने में अभी दो साल से भी अधिक समय लग सकता है। इस योजना की घोषणा एनडीए सरकार ने वर्ष 2003 में की थी, जबकि औपचारिक रूप से छह एम्स खोलने की घोषणा यूपीए सरकार ने वर्ष 2005 में की थी। हालांकि, सरकारी ढिलाई के कारण जिस परियोजना को वर्ष 2010 तक अंतत: चालू हो जाना था, उसके अब वर्ष 2012 तक भी चालू होने के आसार कम ही हैं। यूपीए कार्यकाल के पांच साल गुजर जाने के बाद भी ये संस्थान तो नहीं खुल पाए, लेकिन 280 करोड़ रुपये प्रति संस्थान के खर्च का आकलन अब बढ़कर 450 करोड़ रुपये तक जा सकता है।
इसमें कमी सिर्फ केंद्र सरकार की ही नहीं रही है, बल्कि राज्य सरकार की ओर से भी देरी की गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि छह में से पांच जगहों पर पर्यावरणीय अनुमति मिल गई है, परंतु मध्य प्रदेश के भोपाल में खुलने वाले एम्स जैसे संस्थान के लिए अब तक अनुमति नहीं मिली है। मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि मध्य प्रदेश के पर्यावरण विभाग से अभी अनुमति नहीं मिली है, क्योंकि नगर निगम दस करोड़ रुपये की अपनी फीस पर अटका हुआ है। वहीं, अन्य राज्यों ने परियोजना के लिए 100 एकड़ मुफ्त जमीन उपलब्ध करवाई है और कोई फीस नहीं ली है। केंद्र सरकार जल्द ही इस मुद्दे पर मध्य प्रदेश सरकार को पत्र भेजेगी। हालांकि, इस संबंध में भोपाल के महापौर सुनील सूद ने कहा है कि अगर हमार पास केंद्र सरकार का कोई औपचारिक पत्र आता है तो हम निगम फीस को माफ कर देंगे। उम्मीद है मध्य प्रदेश से भी जल्द ही पर्यावरण स्वीकृति मिल जाएगी।
प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (पीएमएसएसवाई) के तहत उड़ीसा के भुवनेश्वर, बिहार के पटना, मध्य प्रदेश के भोपाल, उत्तराखंड के ऋषिकेश, राजस्थान के जोधपुर और छत्तीसगढ़ के रायपुर में एम्स खोले जाने हैं। इन संस्थानों के लिए सरकार ने अस्पताल के सिविल कार्ये समेत मेडिकल कॉलेज, र्न्िसग कॉलेज, आयुष और होस्टल के लिए निविदाएं आमंत्रित की हैं। होस्टल, कॉलेज और अस्पताल बनाने का कुल खर्च 250 से 300 करोड़ रुपये के बीच होगा और छह स्थानों के लिए इस टेंडर की कुल कीमत 1,908 करोड़ रुपये रखी गई है। निविदा जमा करने की अंतिम तिथि 3 दिसंबर 2009 है। इस हिसाब से यह परियोजना वर्ष 2010 के अंत तक पूरी हो जानी चाहिए, लेकिन इसके अब वर्ष 2012 तक खिंचने की आशंका है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव बी.के. प्रसाद का कहना है कि पहले स्वास्थ्य कर्मियों और डॉक्टरों के लिए होस्टल एवं अन्य इन्फ्रास्ट्रक्चर सुविधाएं तैयार की जाएंगी। मेडिकल कॉलेज तैयार होने में 15 महीनों का समय लगेगा। इसी तरह ओपीडी परिसर सहित अस्पताल तैयार होने में 24 महीने का समय लगेगा। वैसे, सरकार ने कांट्रैक्ट मिलने के बाद परियोजना में देरी होने पर जुर्माने का प्रावधान भी रखा है।