बीमा व्यवसाय से जुड़े ब्रोकर इन दिनों बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीए) से खासे नाराज हैं। उनके अनुसार आए दिन आईआरडीए की ओर से लाइसेंस से संबंधित नए-नए कागजात मांगे जाते हैं। सही दस्तावेज देने के बावजूद आईआरडीए उनके लाइसेंस का नवीनीकरण महीनों तक टालता रहता है। उल्लेखनीय है कि बीमा ब्रोकर तकरीबन दर्जन भर कंपनियों की हजारों पॅालिसियां हर महीने बेचते हैं। हालांकि, लाइसेंस का नवीनीकरण समय से न होने पर उनका व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित होता है।
इंश्योरेंस ब्रोकर एसोसिएशन ऑफ इंडिया के सचिव वी.सीतापति ने बिजनेस भास्कर को बताया कि आईआरडीए समय-समय पर नए दस्तावेजों की मांग करता रहता है। इन दस्तावेजों को उपलब्ध कराने में समय लगता है और उसके अभाव में लाइसेंस का नवीनीकरण अटक जाता है। उन्होंने कहा कि हर इंश्योरेंस ब्रोकर अपने लाइसेंस की वैधता समाप्त होने से तकरीबन दो महीने पहले ही उसके नवीनीकरण से संबंधित तमाम औपचारिक कागजात आईआरडीए को अपलब्ध करा देता है। इसके बावजूद उनके नवीनीकरण के लिए आईआरडीए कोई संज्ञान नहीं लेता है। उन्होंने बताया कि इस साल अगस्त महीने में तकरीबन 60 बीमा ब्रोकरों के लाइसेंस नवीनीकरण की कतार में लगे थे।
इस बाबत एसोसिएशन ने आईआरडीए के चेयरमैन को अवगत कराया तो उन्होंने इस काम को युद्ध स्तर पर निपटाने का आश्वासन दिया। हालांकि, अभी तक व्यवहार में ऐसा कुछ दिखाई नहीं पड़ा है। सीतापति का कहना है कि दो महीने बीत जाने के बाद तो नवीनीकरण की कतार में लगे लाइसेंसों की संख्या में और इजाफा हो गया है। उन्होंने बताया कि बीमा ब्रोकर को 20 साल की पॉलिसी पर महज पांच साल ही कमीशन मिलता है। उनके अनुसार किसी भी ब्रोकर को उसके बीमा व्यवसाय के शुरुआती तीन सालों के दौरान अच्छा व्यवसाय नहीं मिलता है। आईआरडीए को चाहिए कि वह पूंजी संबंधी नियमों में कुछ संशोधन कर।