
सुस्ती को बाय-बाय कर चुकी भारतीय अर्थव्यवस्था के अधिकांश सेक्टर के लिए दूसरी तिमाही के नतीजे जोश जगाने वाले हैं। कुछ सेक्टर के नतीजे जहां बेहद उत्साहवर्धक रहे हैं, वहीं अन्य के लिए यह तिमाही उम्मीदों का कारवां लेकर आई। इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की उड़ान पर सवार सीमेंट उद्योग ने जहां चौके-छक्के लगाए, वहीं बेहतरीन भविष्य के प्रति आश्वस्त आईटी, सीमेंट, दवा और एफएमसीजी जैसे क्षेत्रों ने बेहद महत्वाकांक्षी और भविष्योन्मुख रणनीतियों को अमलीजामा दिया। तभी तो अधिकांश एफएमसीजी कंपनियों ने अपने मुनाफे से अधिक रकम विज्ञापन और प्रमोशन पर खर्च कर डाली।
इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट की तेजी का सीमेंट सेक्टर से सीधा सरोकार है। दूसरी तिमाही के दौरान बड़े शहरों से लेकर गांवों तक में सीमेंट की मांग में तेजी रही। सीमेंट कंपनियों के कारोबार में इस दरम्यान 13 फीसदी की बढ़त रही। देश की प्रमुख कंपनी अल्ट्राटेक सीमेंट को 251 करोड़ रुपये का लाभ हुआ तो एसीसी सीमेंट का कारोबार 1,900 करोड़ से बढ़कर 2,077 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। देश के सभी हिस्सों से सीमेंट की जोरदार मांग रही। इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के अलावा कोयले की कीमतों में कमी आने से भी सीमेंट कंपनियों की लागत में कमी आई जिसका सीधा असर उसके नतीजों पर दिखा। अमेरिका में छंट रही मंदी ने भारतीय आईटी कंपनियों का उत्साह कई गुना कर दिया है। दूसरी तिमाही के नतीजों से यह साबित भी हो गया। हालांकि अभी कंपनियों के नतीजे पुरानी वृद्धि दर से काफी दूर हैं लेकिन आने वाले महीनों में वे बेहतरीन नतीजों के प्रति आश्वस्त हैं। प्रमुख आईटी कंपनियों टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो, एचसीएल और टेक महिंद्रा के नतीजे उत्साहवर्धक रहे हैं।
ऋण व एनपीए से संबंधित आरबीआई के नये नियमों का बैंकिंग सेक्टर के लाभ पर साफ असर दिखा। तभी तो बैंक ऑफ इंडिया के शुद्ध लाभ में 57.61 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई जो चौंकाने वाली है। यह नतीजा भी तब आया है जब उसकी ब्याज आय में 13.28 फीसदी की सम्मानजनक वृद्धि हुई है। सितंबर 2009 में समाप्त तिमाही में बैंक ऑफ इंडिया को 323.34 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ। नये नियमों के तहत उसे इस बार 602.13 करोड़ रुपये का प्रावधान करना पड़ा।
स्टील कंपनियों के नतीजे इस दौरान अपेक्षानुरूप नहीं रहे। लेकिन सरकार द्वारा ढांचागत क्षेत्र में काफी निवेश करने से उसकी मांग में भी 10 फीसदी वृद्धि होने की उम्मीद जताई जा रही है। सेल के चेयरमैन एस. रूंगटा के मुताबिक तीसरी तिमाही में स्टील की मांग 11 से 12 फीसदी के स्तर से बढ़ सकती है। स्टील की कीमतों में पिछले छह महीनों में काफी सुधार आया है। अब कीमतें 36,000 से 38,000 रुपये प्रति टन पर पहुंच गई हैं। एफएमसीजी कंपनियों ने अच्छे नतीजों के बावजूद इस तिमाही में विज्ञापन व प्रमोशन पर अपने लाभ से अधिक खर्च किया है। भारतीय दवा कंपनियों ने सितंबर में खत्म हुई तिमाही में मिला-जुला प्रदर्शन किया है। भारतीय दवा कंपनियों का निर्यात तेजी से बढ़ रहा है और यह सालाना करीब 36,000 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है।