भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने शुक्रवार को असैन्य परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते का उद्देश्य शोध के क्षेत्र में आपसी सहयोग को बढ़ावा देना है। त्नफ्यूजन रिसर्चत्न से संबंधित इस समझौते पर भारत की और से परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष अनिल काकोदकर ने और ईयू की तरफ से बाह्य संबंधों के यूरोपीय आयुक्त बेनिता फररो-वाल्डनर ने दस्तख्त किए।
भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की स्वीडन के प्रधानमंत्री फ्रेडरिक रैनफेल्ट और यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष जोस मैनुएल बोरोसो के साथ भारत-ईयू शिखर वार्ता के बाद इस महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस पर कामकाज अगले साल से शुरू होने की उम्मीद है।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए इसे 10वीं शिखर वार्ता का एक अहम परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि यह समझौता हमार सहयोग में ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा के बढ़ते महत्व को रखांकित करता है।
भारत और ईयू ने इस अवसर पर उम्मीद जताई कि श्रम मानदंडों और पर्यावरण जैसे गैर-व्यापारिक मुद्दों पर मतभेद के बावजूद दोनों पक्षों के बीच एक साल में मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) हो जाएगा। भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने स्वीडन के प्रधानमंत्री फ्रेडरिक रैनफेल्ट और यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष जोस मैनुएल बोरोसो के साथ मिलकर द्विपक्षीय व्यापार एवं निवेश समझौैते की बातचीत पर होने वाली प्रगति की समीक्षा की। मनमोहन सिंह ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत एक साल में संपन्न हो जाएगी।
बाद में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान ईयू की व्यापार आयुक्त कैथरीन ऐस्टोन ने कहा कि व्यापार समझौते की बातचीत के दौरान श्रम मानदंडों और पर्यावरण जैसे गैर-व्यापारिक मुद्दों की बात केवल इस लिहाज से आती है कि हम अपने श्रमिकों को एक बढ़िया अवसर देने की कोशिश कर रहे हैं। पर भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने इस बार में दो-टूक लहजे में कहा कि हम यहां निवेश एवं सेवा क्षेत्र में व्यापार की बातचीत कर रहे हैं, दूसरा कोई भी मुद्दा इस बातचीत का हिस्सा नहीं है।