
लंदन एक अमेरिकी अधिकारी ने इस बात के संकेत दिए हैं कि भारत के साथ हुआ असैनिक परमाणु करार निश्चित रूप से मृतप्राय हो चुका है। अधिकारी ने कहा, करार का खत्म होना भारत के लिए ऐतिहासिक भूल साबित होगा।
एटमी करार को लेकर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के आशा जताने और इस पर कदम बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताने के बावजूद अमेरिकी अधिकारी का यह बयान काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह पूछे जाने पर कि राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के खत्म हो रहे कार्यकाल के दौरान क्या करार लागू कर पाना असंभव हो गया है? अमेरिकी अधिकारी एश्ले टैल्लिस ने कहा, ‘शायद यह सच है।’ टैल्लिस उन अधिकारियों में से एक हैं जिन्होंने करार को आकार दिया है और अब वे कंजरवेटिव पार्टी के राष्ट्रपति प्रत्याशी जॉन मक्केन के प्रचार सहायक की भूमिका निभा रहे हैं।
टैल्लिस ने कहा, ‘यहां तक कि यदि भारत सरकार अपने रुख में अचानक बदलाव लाते हुए आईएईए स्टेज को पूरा भी कर ले तब भी शेष दो स्तरों को पूरा करने के लिए समय नहीं बचता है।’ अंतराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा आयोग (आईएईए) के बोर्ड से भारत के मंजूरी लेने के बाद करार को अंतिम मंजूरी के लिए अमेरिकी कांग्रेस को लौटाने से पहले 45 सदस्यीय परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह से हरी झंडी लेना जरूरी होगा।
भारतीय अधिकारियों की चुप्पी :
अखबार ने कहा है कि इस मुद्दे पर भारतीय अधिकारियों ने खुलकर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया, लेकिन दबी जुबान में कहा कि जॉन मेक्केन के चुने जाने पर करार संभव हो सकेगा। मेक्केन पिछले महीने करार को पूरा समर्थन देने की घोषणा की थी। डेमोक्रेटिक प्रत्याशी ने 2006 में अमेरिकी सिनेट द्वारा पारित बिल में संशोधन का पक्ष लिया है, करार के प्रति उनका रवैया ढुलमुल है।