इस्लामाबाद.पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को अपना पद छोड़ने के लिए दी गई समयसीमा मंगलवार को समाप्त हो रही है। उन्हें यह मियाद सत्तारूढ़ पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के सहअध्यक्ष आसिफ अली जरदारी ने दी थी। इस बीच सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल नवाज शरीफ की पाकिस्तान मुस्लिम लीग (पीएमएल-एन) ने मुशर्रफ द्वारा त्यागपत्र न दिए जाने की सूरत में उन पर महाभियोग का प्रस्ताव लाने की रणनीति तैयार की है।
महाभियोग संसद सत्र के पहले दिन
पीएमएल-एन के कार्यवाहक संसदीय नेता चौधरी निसार अली ने रविवार को नैशनल असैंबली में कहा, ‘अगर मुशर्रफ अपने इस्तीफे की घोषणा नहीं करते हैं तो फिर पीएमएल-एन अपने सहयोगियों के साथ राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाएगी।’ निसार अली ने कहा कि पीएमएल-एन चाहेगी कि महाभियोग का प्रस्ताव संसद सत्र के पहले ही दिन लाया जाए, क्योंकि मुशर्रफ का एक दिन भी अपने पद पर बने रहना देशहित में नहीं है। निसार अली के मुताबिक, मुशर्रफ ने संविधान के अलावा उस शपथ का भी उल्लंघन किया है, जो उन्होंने सेना में भरती होते समय ली थी।
जरदारी की दो-टूक
इस बीच, आसिफ अली जरदारी ने एक बार फिर कहा है कि उनकी पार्टी मुशर्रफ को एक संवैधानिक राष्ट्रपति के तौर पर स्वीकार नहीं करती है। जरदारी ने कहा, ‘चूंकि हमें देश चलाना है, इसलिए हमें मुशर्रफ के साथ कामकाजी संबंध रखने ही पड़ रहे हैं।’
पूर्व कूटनीतिज्ञ भी मुशर्रफ के खिलाफ
पाकिस्तान के पूर्व राजदूतों और विदेश सचिवों ने भी मुशर्रफ को असंवैधानिक राष्ट्रपति करार देते हुए उन पर महाभियोग चलाए जाने की मांग की है। उन्होंने यह मांग इस्लामाबाद में आयोजित एक प्रैस वार्ता में की है।
पाक सरकार ने तालिबान का साथ छोड़ा
इस्लामाबाद. आत्मघाती हमलों की बाढ़ के बाद पाकिस्तानी सरकार ने सोमवार को तालिबान के साथ हुए विवादास्पद समझौते को तोड़ दिया। पाक सरकार ने तालिबान से यह समझौता पिछले महीने किया था। इस समझौते का अमरीका ने विरोध किया था। प्रधानमंत्री के मीडिया सलाहकार रहमान मलिक ने कहा,‘सुरक्षाबलों पर आतंकियों के लगातार हमलों को देखते हुए स्वात समझौते को खत्म किया गया।’ समझौते के अनुसार आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर हमले रोकने का वादा किया था, हालांकि उस क्षेत्र से घीरे-धीरे सेना हटने लगी थी।