दिवाली पर मेरी एक गुजारिश

 
Source: तन्मय अग्रवाल     Designation: Journalist
 
 
 
| Email  Print Comment
 
 
 
 
http://unified.bhaskar.com/city_blogger_author_images/thumb_image/100143_thumb.jpg पटाखों के शोर से हार्ट अटैक आ सकता है। पटाखों से निकलने वाले धुएं से फेंफड़ों में संक्रमण हो सकता है। पटाखे का धुआं आंखों में जाने से आप अंधे हो सकते हैं. ये और इस तरह की 2560 बातें हमें दीपावली से पहले विभिन्न आयोजनों के जरिये सुनने को मिलती हैं।


टीवी पर दिखने और अखबार में छपने में मकसद से लोग ऐसी अच्छी बातें करते हैं। यदि हम इन बातों के सार पर गौर फरमाएं तो हम पाएंगे कि सभी का संदेश इको फ्रेंडली दीपावली मनाना होता है। इको फ्रेंडली दीपावली यानी प्रदूषण मुक्त दीपावली। पटाखों से दूर शांति के साथ सेलिब्रेट की जाने वाली दीपावली।


इन आयोजनों में कई लोग पटाखे न जलाने की लंबी चौड़ी शपथ लेते हैं, कसमें खाते हैं। इनमें से मुठ्ठी भर लोग अपनी कमस के प्रति पूरी तरह वफादार होते हैं, जो काबिले तारीफ है। पटाखों और शोरगुल से दूर ये लोग शांति से दीपावली मनाते हैं और पड़ोसियों को भी सुखद संदेश देते हैं। इसके ठीक विपरीत, भाषण देने और बड़ी-बड़ी बातें करने वाले अधिकांश लोगों को तो अपने संकल्प का ख्याल भी नहीं होता।


संकल्प याद दिलाने पर कुछ लोग तो बड़ी बेशर्मी से कहते हैं, अरे! हमारे भाषण को सच समझना कुत्ते की पूंछ सीधी होने की कल्पना करने के समान है। (शपथ लेने वाले एक शख्स ने पिछले साल मुझसे यह बातें कहीं थीं।)। कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो कसम की खातिर कम से कम पटाखे जलाते हैं और खुद में गर्व महसूस करते हैं, जो कि स्वाभाविक है।


मैं ये बातें इसलिए कर रहा हूं क्योंकि दीपावली का त्योहार बेहद करीब है और ऐसी कसमों और संकल्पों का दौर एक बार फिर शुरू हो गया है। इस तरह का संकल्प लेना बहुत ही सरहानीय है, बशर्ते वो सच्चे दिल से लिया जाए और पूरी निष्ठा से निभाया जाए। उम्मीद पर दुनिया कायम है, इस सोच के साथ यह उम्मीद करता हूं कि इस साल लोग झूठी कसमें नहीं खाएंगे।


अपने संकल्प पर, अपनी शपथ पर कायम रहेंगे और शांति से दीपावली की खुशियां बांटने की कोशिश करेंगे। इस लेख को पढऩे वाले हर शख्स से मेरी एक गुजारिश है, हो सके तो पैसों पर आग न लगाएं यानी पटाखे न जलाएं। बहुत मन करे तो प्रकृति का कत्ल होने से बचाने के मकसद से कम से कम पटाखे जलाकर अपनी इच्छा को आग के साथ ही दफन कर दें।


लेकिन, इस बात का ध्यान जरूर रखें कि पटाखे न फोडऩे का संकल्प लेने वाला व्यक्ति अगर आपको कहीं पटाखे जलाते हुए मिले तो उसे दो बातें जरूर सुनाएं, ताकि झूठ से परे, सच के आईना में वो अपना काला चेहरा देख सके। मैं आपको बताना चाहूंगा कि एक आदर्श व्यक्ति के विचारों से प्रेरित होकर पिछले दो सालों से मैंने पटाखों से तौबा कर रखी है।


इसलिए बनाएं पटाखों से दूरी
नंबर वन- मेहनत से कमाए गए पैसों में आग लगाकर खुश होने की बजाय किसी गरीब को रोटी खिलाना ज्यादा बेहतर होगा।
नंबर टू- खुशियां मनाने के नाम पर हर साल पटाखे जलाते समय बड़ी तादाद में लोग जख्मी हो जाते हैं, खुदा न करें, लेकिन कहीं इस साल आप हो गए तो..।
नंबर थ्री- चार मीटर तक 125 डेसिबल का शोर करने वाले पटाखों पर कानूनन पाबंदी है, तो कानून क्यों तोडऩा दोस्तों।
नंबर चार- वायु और ध्वनि प्रदूषण के साथ ही फेंफड़े की बीमारी, आंख की बीमारी, बहरापन, हार्ट अटैक का डर आदि आदि आदि।
 
आपके विचार
 
अपने विचार पोस्ट करने के लिए लॉग इन करें

लॉग इन करे:
या
अपने बारे में बताएं
 
 

दिखाया जायेगा

 
 

दिखाया जायेगा

 
कोड:
1 + 6

 
विज्ञापन

बड़ी खबरें

 

रोचक खबरें

 

बॉलीवुड

 

जीवन मंत्र

 
 

क्रिकेट

 

 

जोक्स

 

पसंदीदा खबरें

 
 
| Glamour
-->

फोटो फीचर