विचारोत्तेजक हिंसामय प्रेमकथा
ब्रेक तो बनता है
विनाश फिल्मों का जलवा
साधक सचिन और च्युइंगम
अंतिम संपादन का अधिकार किसका है
जंगल का शेर और सर्कस का शेर
फिल्मोत्सव के इंद्रधनुष में फैले सतरंगी रंग
मुंबई एकेडमी ऑफ मूविंग इमेजेस (एमएएमआई) फिल्मोत्सव की शुरुआत एक दशक पहले हुई थी। आज यह हमारे क्षेत्र में सबसे महत्वपूर्ण फिल्मोत्सव बन चुका है। इस साल इस उत्सव में कुछ नई चीजें जोड़ी गईं। इसमें एक खंड उन फिल्मकारों के लिए समर्पित किया गया था, जिन्होंने पहली बार किसी फिल्म का निर्माण किया। ‘डाइमेंशन्स मुंबई’ नामक खंड 25 साल से कम उम्र के लोगों द्वारा बनाई गई लघु फिल्मों के लिए...
बाल आधारित फिल्मों का गणित
पति, पत्नी और किताब
प्रेम नाम है मेरा, प्रेम चोपड़ा
असफल ब्रांड का दोहन
खबर है कि विपुल शाह अपनी फिल्म ‘सिंह इज किंग’ के भाग दो का निर्माण करने की सोच रहे हैं। प्राय: सफल फिल्मों की ब्रांड वैल्यू के कारण उनके भाग दो के दोहन की बात की जाती है, जैसे बोनी कपूर ‘वांटेड’ के बाद ‘मोस्ट वांटेड’ की सोच रहे हैं।
हालांकि ‘सिंह इज किंग’ अधिकांश वितरण क्षेत्रों में अपने अधिक मूल्य के कारण असफल रही थी। दरअसल वह एक निहायत साधारण फिल्म थी। फिल्म के...
चीन खतरा है या अवसर ?
हमें एक नए नजरिए से चीन की ओर देखना होगा। हमें उसे एक अवसर के रूप में देखना होगा, न कि खतरे या शत्रु के रूप में। हम चीन से निर्णय लेने की प्रक्रिया में तेजी, निर्णायक प्रशासन और आर्थिक सुधार के मोर्चो पर सबक सीख सकते हैं। यदि हम केवल सेना पर ही ध्यान देते रहे तो हमेशा-हमेशा के लिए ‘खतरे’ के सिंड्रोम में फंस जाएंगे और लड़ाई में उतरने से पहले ही लड़ाई हार जाएंगे।
चीनी कारक एक बार...
पश्चिम की अंधी नकल
अगर कोई आपसे यह सवाल करता है कि यदि आपको दिल्ली से चेन्नई की यात्रा करनी है तो आप इस यात्रा के लिए कौन सा रास्ता चुनना पसंद करेंगे। दो विकल्प हैं, एक है जम्मू होकर चेन्नई जाना और दूसरा है चंडीगढ़ के रास्ते वहां तक का सफर तय करना। इस सवाल के जवाब में आपका उत्तर क्या होगा? अगर कोई व्यक्ति किसी गरीब, निर्धन ग्रामीण से पूछे कि क्या वह ऐसा दूध लेना पसंद करेगा, जिसमें चार प्रतिशत वसा है या कि...
यह गांधी का देश तो नहीं
भारतीयों की अनंत जिज्ञासा
मैं बारंबार पूछे जाने वाले जिस सवाल का सबसे ज्यादा सामना करता हूं, वह है: आप एक साथ एक समय में इतने काम कैसे कर लेते हैं? लोगों को लगता है कि मैं कुछ ज्यादा ही विनम्र हो रहा हूं, जब मैं यह कहता हूं कि मैं तो कुछ भी खास नहीं करता। लेकिन ऐसा ही है। मैं सचमुच यही महसूस करता हूं और ताउम्र ऐसा ही महसूस करता रहा हूं।
हां, मैं लिखता हूं। लेकिन मैं सुनने के लिए,...









