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<title>bhaskar</title>
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<title><![CDATA[आसान नहीं वित्तीय समावेश की मंजिल]]></title>
<description><![CDATA[इस महीने की 3 तारीख को आरबीआई के गवर्नर डॉ. डी. सुब्बाराव ने वार्षिक मौैद्रिक समीक्षा पेश की। वार्षिक समीक्षा इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि इसमें मौद्रिक नीति के अलावा विकास और रेग्यूलेशन पॉलिसी भी शामिल होती है। मौद्रिक नीति के तहत कई कदम उठाए जाने का जिक्र होता है। लेकिन हमारा आज का यह कॉलम आम आदमी पर पडऩे वाली मौद्रिक नीति के असर तक ही सीमित रहेगा।
देश का चालू खाते का घाटा काफी बढ़ गया है। वित्त वर्ष 2012-13 में यह जीडीपी के पांच फीसदी तक पहुंच गया है। मार्च, 2013 तक&nbsp; खुदरा महंगाई दर बढ़ कर 10.4 फीसदी तक पहुंच गई थी। (हालांकि अप्रैल में यह घट कर 9.4 फीसदी तक पहुंच गई है) । इस पृष्ठभूमि में आरबीआई ने रेपो रेट घटा दी। रेपो रेट, वह रेट है जिस पर सरकारी प्रतिभूतियों के एवज में आरबीआई, बैंकों को लोन देता है।
रेपो रेट में इस कटौैती से यह 7.5 फीसदी से घट कर 7.25 फीसदी पर चली आई। रेपो रेट में इस कटौती के पीछे तर्क यह रहा कि थोक मूल्य सूचकांक&nbsp; पर आधारित महंगाई दर घट चुकी है। मार्च, 2013 में यह महंगाई दर छह फीसदी पर पहुंच चुकी था। (हालांकि बाद में थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई दर 4.9...]]></description>
<link><![CDATA[http://business.bhaskar.com/article/easy-to-financial-inclusion-4269514-NOR.html]]></link>
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<pubDate>2013-05-21 09:59:00 IST</pubDate>
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<title><![CDATA[आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण है चीनी प्रधानमंत्री की विदेश यात्रा]]></title>
<description><![CDATA[चीन के प्रधानमंत्री ली के छयांग पद संभालने के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा पर गए हैं। इस यात्रा का घरेलू और विदेशी दोनों स्तरों पर काफी महत्व है। 19 मई से शुरू हो रही इस यात्रा के दौरान ली पहले भारत गए हैं और इसके बाद वह पाकिस्तान, स्विट्जरलैंड और जर्मनी की यात्रा पर जाएंगे।
चीन के लिए यह बहुत अच्छा मौका है, जब वह आपसी राजनीतिक विश्वास को बढ़ा सकता है, आर्थिक सहयोग को बढ़ा सकता है साथ ही आपसी और जनता के बीच व्यक्तिगत संबंधों को और मजबूत बना सकता है। ली ने अपनी यात्रा की शुरुआत भारत और पाकिस्तान से की है। इसका मतलब है कि चीन अपने पड़ोसियों के साथ संबंधों की मजबूती पर सबसे ज्यादा जोर दे रहा है।
जहां तक भारत और चीन की बात है तो दोनों के बीच में कई मुद्दों को लेकर मतभेद है, जिसके कारण आपसी विश्वास की भी कमी है। यही कारण है कि दोनों देश चाहते हैं कि आपसी बातचीत के जरिये मुद्दों को सुलझाया जाए और इस बात को सब जानते हैं कि आमने सामने बैठकर बातचीत करने से बेहतर कोई तरीका नहीं है जिससे आपसी विश्वास को बढ़ाया जा सके।
चीन,भारत और पाकिस्तान के बीच में मजबूत आपसी संबंध न...]]></description>
<link><![CDATA[http://business.bhaskar.com/article/important-foreign-visit-of-the-chinese-premier-4269521-NOR.html]]></link>
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<pubDate>2013-05-21 09:56:00 IST</pubDate>
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<title><![CDATA[शेयर बाजार में निवेशकों की उम्मीद बरकरार]]></title>
<description><![CDATA[बेहतर संकेत
शेयर बाजार के लिए उम्मीदें बरकरार
भारतीय शेयरों के लिए घर खरीदना बेहतर निवेश
सोना और रियल एस्टेट भी प्राथमिकता जरूरी
म्यूचुअल फं ड में भी निवेश को लेकर उम्मीद जारी
वर्ष, 2013 के दौरान दुनिया भर के निवेशकों को अपने-अपने शेयर बाजारों से बेहतर रिटर्न की उम्मीद है। उभरते बाजारों में 66 फीसदी लोग मानते हैं उनका स्थानीय शेयर बाजार बेहतर प्रदर्शन करेगा भारत में 62 फीसदी निवेशकों से ज्यादा निवेशकों का कहना है कि वह अपने निवेश को लेकर ज्यादा सुरक्षित रवैया अपनाएंगे।
निवेश से ज्यादा सुरक्षा चिंता
फ्रैंकलिन टेम्पलटन इनवेस्मेंट्स के प्रेसिडेंट और सीईओ ग्रेग जॉनसन के मुताबिक निवेशकों के रुख से ऐसा लगता है कि इस समय से मुनाफे से ज्यादा घाटे से बचना ज्यादा अहम है। पिछले पांच साल के दौरान बाजार में उतार-चढ़ाव से निवेशकों की प्राथमिकता निवेश से लाभ कमाने से ज्यादा इसकी सुरक्षा है। इस तरह जोखिम से बचने के लिए निवेशक मौके भी छोड़ रहे हैं।
फ्रैंकलिन टेम्पलटन के सर्वे में हिस्सा लेने वाले सभी देशों के लोगों को सबसे ज्यादा मुनाफा की उम्मीद है।...]]></description>
<link><![CDATA[http://business.bhaskar.com/article/stock-market-investors-continue-to-expect-4269518-NOR.html]]></link>
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<pubDate>2013-05-21 03:18:00 IST</pubDate>
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<title><![CDATA[चीन से व्यापार घाटा बढऩे की कई हैं वजहें]]></title>
<description><![CDATA[अहम वजह - भारत का भारी उद्योग जहां कच्चा माल और अन्य उत्पादित वस्तुओं के लिए चीन पर निर्भर है वहीं देश के छोटे से छोटे उद्योग भी अपने कलपुर्जों के लिए चीन पर निर्भर हैं। ऐसे में निर्यात ना बढऩे का रोना रोने वाले लोगों को सोचने की जरूरत है।
समझ की कमी - जानकारों का मानना है कि इसके पीछे एक तरफ जहां चीजों को गहराई से ना समझ पाना एक वजह है तो वहीं दूसरी तरफ निर्यात का क्षेत्र सीमित होने के कारण भी अंतर बढ़ रहा है और ऊपर से लागत व तकनीकी अंतर तो है ही।
चीन के प्रधानमंत्री ली केछयांग भारत आए हुए हैं। इस यात्रा के दौरान भारत और चीन के बीच में आठ समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इनमें आर्थिक, व्यापारिक और कुछ दूसरे मामले शामिल हैं। ये बात सही है कि दोनों देशों के बीच में व्यापार बढ़ रहा है लेकिन अगर गहराई से आंकड़ों का विश्लेषण किया जाए तो पता चलता है कि यह बढ़त चीन के लिए ज्यादा फायदेमंद है।
भारत और चीन के बीच आयात और निर्यात का अंतर लगातार बढ़ता जा रहा है और खास बात यह है कि यह चीन के पक्ष में काफी ज्यादा झुका है। चीन भारत से आयात कम कर रहा है और निर्यात कहीं ज्यादा...]]></description>
<link><![CDATA[http://business.bhaskar.com/article/there-are-many-reasons-for-the-increase-in-the-trade-deficit-with-china-4269516-NOR.html]]></link>
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<pubDate>2013-05-21 03:15:00 IST</pubDate>
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<title><![CDATA[राउंड-अप -  इनफ्लेशन इंडेक्स्ड बांड जारी होगा]]></title>
<description><![CDATA[इनफ्लेशन इंडेक्स्ड बांड जारी होगा
भारतीय रिजर्व बैंक ने इन्फ्लेशन इंडेक्स्ड बांड जारी करनेकी घोषणा की है। वित्तीय इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश को बढ़ावा देने और सोने और रियल एस्टेट जैसी अचल संपत्ति में इसे हतोत्साहित करने के लिए हर महीने इन्फ्लेशन इंडेक्स्ड बांड जारी किया जाएगा। इन्फ्लेशन इंडेक्स्ड बांड को इनफ्लेशन लिंक्ड बांड भी कहा जाता है। ये डेट इंस्ट्रूमेंट होते हैं यानि सरकार इनके जरिये ऋण जुटाती है।
लेकिन इसका स्वरूप ऐसा होता है- जिससे निवेश के रिटर्न पर पडऩे वाला महंगाई का नकारात्मक असर कम हो जाए। सरकारी सिक्यूरिटी में छोटे निवेशकों की हिस्सेदारी पांच फीसदी तक सीमित कर दी गई है लेकिन इनफ्लेशन इंडेक्स्ड बांड में ऐसे निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ा कर 20 फीसदी होगी।
महंगाई दर में गिरावट जारी
महंगाई दर में गिरावट का दौर जारी है। इस साल अप्रैल में मुद्रास्फीति की दर गिरावट के साथ 4.89 फीसदी पर आ गई। पिछले नवंबर में मुद्रास्फीति की दर में लगातार कमी आ रही है। इस साल मार्च में यह दर 5.96 फीसदी थी।
महंगाई दर में कमी का रुख देख कर औद्योगिक संगठनों ने...]]></description>
<link><![CDATA[http://business.bhaskar.com/article/round-up-indexed-bonds-will-infleshn-4266911-NOR.html]]></link>
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<pubDate>2013-05-18 01:17:00 IST</pubDate>
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<title><![CDATA[आपका फायदा - छिपे शर्तों के जाल में फंसने से बचें]]></title>
<description><![CDATA[फाइनेंशियल प्रोडक्ट के लेन-देन में इंश्योरेंस एजेंट, रियल एस्टेट एजेंट, बैंक कर्मचारी, फंड एडवाइजर और कार सेल्समैन कई चीजों को छिपा जाते हैं। वे ग्राहकों या उपभोक्ताओं को सही बात नहीं बताते। कई बार ये मिस सेलिंग के मामले बन जाते हैं।
मसलन कई क्रेडिट कार्ड कंपनियां कस्टमर को यह कह कर कार्ड बेचती हैं कि यह फ्री है। लेकिन इस पर भरोसा नहीं करना चाहिए। जब तक ऑफर लिखित में न हो तब तक इसे न लें। दरअसल फ्री क्रेडिट कार्ड पहले साल के लिए ही फ्री होता है। दूसरे साल से इस पर एनुअल फीस लगने लगती है।&nbsp;
कई इंश्योरेंस एजेंट आपको सस्त पर्सनल एक्सीडेंट इंश्योरेंस के बारे में नहीं बताते हैं। जबकि आप सालाना 400 रुपये के प्रीमियम पर पर्सनल एक्सीडेंट इंश्योरेंस कवर ले सक ते हैं । काफी कम एजेंट इसे बेचते हैं क्योंकि पर्सनल एक्सीडेंट इंश्योरेंस पर प्रीमियम कम होता है और उन्हें इस पर काफी कम कमीशन मिलता है। एक और अहम बात। गोल्ड फंड और गोल्ड ईटीएफ एक ही उत्पाद में निवेश करते हैं लेकिन गोल्ड फंड ज्यादा चार्ज वसूलते हैं।
ईटीएफ सालाना एक फीसदी चार्ज करते हैं जबकि गोल्ड फंड...]]></description>
<link><![CDATA[http://business.bhaskar.com/article/your-advantage-to-avoid-being-caught-in-the-trap-of-hidden-terms-4266908-NOR.html]]></link>
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<pubDate>2013-05-18 01:14:00 IST</pubDate>
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<title><![CDATA[चर्चा में - चांडिल्या पर रहेगी सबकी नजर]]></title>
<description><![CDATA[मिट्टू चांडिल्या को एयर एशिया इंडिया का सीईओ नियुक्त किया गया है। एविएशन क्षेत्र में इस कंपनी को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है इसलिए इसके सीईओ पर भी दुनिया की नजर रहना स्वाभाविक है।
ये अलग बात है कि चांडिल्या अब से पहले सुर्खियों में नहीं रहे लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उनकी नियुक्ति ऐसे ही हो गई है। उन्हें कॉरपोरेट जगत में काम करने का काफी अनुभव है। मिट्टू और एयर एशिया के बारे में एक खास और कॉमन बात यह है कि दोनों ही भारत में अपनी शुरुआत कर रहे हैं।
एयर एशिया जहां अपने परिचालन की शुरुआत करेगी वहीं मिट्टू भारत में अपने एविएशन करियर की शुरुआत करेंगे। इससे पहले मिट्टू एग्जिक्यूटिव सर्च फर्म एगॉन जेंडर में एशिया पैसेफिक क्षेत्र के हेड ऑफ सर्विसेज का काम देखते थे। इससे भी पहले वह अमेरिकी फर्म इंगरसोल में भी काम कर चुके हैं।
जिस तरह उन्होंने भारत में काम नहीं किया उसी तरह से उनकी उच्च शिक्षा भी भारत से बाहर ही हुई है। उनके पास फ्रांस की इनसीड व बीजिंग की शिन्हुआ यूनिवर्सिटी की एमबीए डिग्री है। हालांकि उनकी स्कूली शिक्षा भारत में ही हुई है और...]]></description>
<link><![CDATA[http://business.bhaskar.com/article/discussion-chandilya-be-watched-4266905-NOR.html]]></link>
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<pubDate>2013-05-18 01:11:00 IST</pubDate>
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<title><![CDATA[गलत नीतियां छोड़ें बहुराष्ट्रीय कंपनियां]]></title>
<description><![CDATA[वैश्वीकरण दुनिया के हर कोने में जहां भी है वहीं पर उसके साथ कुछ विरोधाभास जुड़े हैं। अभी पिछले महीने बांग्लादेश में एक इमारत ढह जाने से लगभग ग्यारह सौ लोगों की मौत हो गई। ये लोग इस इमारत में एक गारमेंट फैक्ट्री में काम करते थे।
इन मौतों से पता चलता है कि ये लोग अपनी जान की कीमत पर दुनिया के लिए सस्ती टी-शर्ट उपलब्ध करा रहे थे। ज्यादातर ग्राहक जो बाजार से सामान नहीं खरीदते हैं वे सीधे उसे बनाने वालों से नहीं जुड़े होते हैं इसलिए उन्हें यह नहीं पता होता है कि जिस सामान को हम सस्ता मानकर खरीद रहे हैं उसे तैयार करने में किसने क्या कीमत चुकाई है।
आज इंटरनेट की दुनिया है और ग्राहक चाहे तो यह इस बात का पता लगा सकते हैं कि कहां क्या हो रहा है। लेकिन बांग्लादेश में जिस तरह से यह हादसा हुआ है उससे पता चलता है कि लोगों को इस बात से कोई मतलब नहीं है कि उत्पादन करने वाले संस्थानों की हालत कितनी बुरी है।
गारमेंट उद्योग अभी भी पारंपरिक तरीके से काम कर रहा है जबकि इसे वैश्वीकरण से जोड़ दिया गया है। दुनियाभर के बड़े ब्रांड जैसे नाइकी आदि अपने उत्पादों का निर्माण इसी तरह...]]></description>
<link><![CDATA[http://business.bhaskar.com/article/skip-the-wrong-policies-of-multinational-companies-4266903-NOR.html]]></link>
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<pubDate>2013-05-18 01:08:00 IST</pubDate>
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<title><![CDATA[क्या है डेली मूविंग एवरेज ?]]></title>
<description><![CDATA[शेयर कारोबारियों के मूविंग एवरेज लिए यह काफी अहम है क्योंकि अगर यह टूटता है तो कारोबारियों को शेयरों के कारोबारी लक्ष्य में बदलाव करना होता है। पूंजी बाजार में सक्रिय एक पक्ष का मानना है कि शेयरों की कीमतों का एक ऐतिहासिक ट्रेंड होता है और इसके आधार पर कुछ हद तक आगे की प्राइस पैटर्न का अनुमान लगाया जा सकता है।
इस तरह का अनुमान टेक्निकल एनालिस्ट (पूंजी बाजार के तकनीकी विश्लेषक) लगाते हैं और शेयरों के कीमत को लेकर किसी फैसले पर पहुंचने के लिए डेली मूविंग एवरेज (डीएमए ) का इस्तेमाल किया जाता है। साधारण शब्दों में कहें तो मूविंग एवरेज एक निश्चित समय में शेयर या सूचकांक कीमत की एवरेज वैल्यू होती है।
उदाहरण के लिए 15 दिन का मूविंग एवरेज किसी शेयर या सूचकांक के पिछले एक पखवाड़े की औसत कीमत को कहेंगे। यहां पर हम साधारण मूविंग एवरेज की बात कर रहे हैं। लेकिन कई और मूविंग एवरेज भी होते हैं। इनमें क्यूम्यूलेटिव मूविंग एवरेज, वेटेड मूविंग एवरेज और एक्सोपोनेन्शियल मूविंग एवरेज शामिल हैं।
दरअसल शेयर बाजार के आंकड़ों का विश्लेषण किसी संदर्भ में ही किया जाता है।...]]></description>
<link><![CDATA[http://business.bhaskar.com/article/BIZ-daily-moving-average-is-4265971-NOR.html]]></link>
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<pubDate>2013-05-17 02:18:00 IST</pubDate>
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<title><![CDATA[तेजी से घट रहा यूरोपीय यूनियन का आकर्षण]]></title>
<description><![CDATA[रोपीय संघ में जब से कर्ज संकट की शुरुआत हुई है तब से वह लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। इसके कारण सारे महाद्वीप की ग्रोथ बहुत नीचे आ गई, बेरोजगारी बढ़ी और पूरे क्षेत्र में लोगों की आय में कमी हुई है। हालांकि कम अवधि की राहत भी बीच बीच में मिलती रही है। अब एक रिसर्च से सामने आया है कि यह संकट आर्थिक से ज्यादा राजनीतिक है।
प्यू रिसर्च ग्लोबल ने एक रिसर्च किया है जिसे ए क्राइसिस ऑफ कॉन्फिडेंस इन द यूरोपियन प्रोजेक्ट नाम से दुनिया के सामने लाया गया है। इस रिसर्च में साफ कहा गया है कि एक संस्था के रूप में सदस्य देशों का यूरोपियन यूनियन से विश्वास तेजी से कम हो रहा है। सर्वे में शामिल केवल 43 फीसदी लोगों ने यूरोपीय यूनियन में अपना विश्वास जताया है।
खास बात यह भी है कि यूरोपीय यूनियन के प्रति निष्ठा को लेकर ब्रिटेन पर हमेशा संदेह किया जाता रहा है। लेकिन इस रिसर्च से सामने आया है कि संघ में ब्रिटेन की आस्था बढ़ रही है। ब्रिटेन अब यूरोपीय संघ संधि में परिवर्तन की बात कर रहा है और 2017 में ब्रिटेन में एक जनमत संग्रह भी कराया जाएगा जिससे यह तय होगा कि ब्रिटेन यूरोपीय...]]></description>
<link><![CDATA[http://business.bhaskar.com/article/rapidly-decreasing-attractiveness-of-the-european-union-4265969-NOR.html]]></link>
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<pubDate>2013-05-17 02:16:00 IST</pubDate>
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