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<title>bhaskar</title>
<description>Find all News, Hindi News, India News, News in Hindi, News Headlines, Breaking News, Daily News, Hindi News Paper, Local News in Bhaskar.com. Find India news in hindi in Dainik Bhaskar, No.1 hindi news paper &amp; largest hindi daily.</description>
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<pubDate></pubDate>
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<title><![CDATA[नौ साल का  लेखा-जोखा]]></title>
<description><![CDATA[स्वाभाविक &nbsp;है कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार ने सत्ता में नौ वर्ष पूरे होने पर अपना जो रिपोर्ट कार्ड पेश किया, उसमें सिर्फ उपलब्धियों का उल्लेख है। यह भी लाजिमी है कि मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने सरकार के खिलाफ जो चार्जशीट पेश की, उसमें महज उसकी नाकामियों का जिक्र है। जबकि हमेशा की तरह इस संदर्भ में भी सच्चाई कहीं बीच में है। यूपीए के माथे पर कई सफलताओं का सेहरा है, तो कई मामलों में सरकार के कामकाज से उसके समर्थक भी मायूस हैं। 2004 में तत्कालीन एनडीए सरकार के खिलाफ, लेकिन खंडित जनादेश की खास राजनीतिक परिस्थिति में यूपीए बना था।
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उसे इस बात का श्रेय है कि वह राष्ट्रीय विमर्श को एक बार फिर रोजी-रोटी, सामाजिक सद्भाव और प्रशासनिक पारदर्शिता एवं जवाबदेही जैसे आम आदमी की जिंदगी से जुड़े बुनियादी मुद्दों की तरफ ले गया। यूपीए-1 के दौर में विकास की अधिकार आधारित अवधारणा के तहत बनाए गए कई कानूनों ने संसाधनों के न्यायपूर्ण वितरण का खाका तैयार किया। उन कानूनों पर अमल में निस्संदेह खामियां हैं, लेकिन इसके लिए पूरी तरह केन्द्र सरकार को...]]></description>
<link><![CDATA[http://www.bhaskar.com/article/ABH-data-of-nine-years-4272833-NOR.html]]></link>
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<pubDate>2013-05-24 08:10:00 IST</pubDate>
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<title><![CDATA[चेतावनी पर गौर करें]]></title>
<description><![CDATA[जब &nbsp; से क्रेडिट रेटिंग एजेंसी- स्टैंडर्ड एंड पुअर्स (एसएंडपी)ने एक बार फिर भारतीय अर्थव्यवस्था में अविश्वास जताया, भारत सरकार ने उसका जोरदार प्रतिवाद किया है। पहले अधिकारियों और फिर वित्त मंत्री ने खुद कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था के सुधरे संकेतकों पर गौर करने में एसएंडपी नाकाम रही। एसएंडपी ने चेतावनी दी है कि अगर साल भर में हालात नहीं सुधरे तो वह भारत के दर्जे को घटाकर जंक ग्रेड में डाल देगी। अभी भारत का दर्जा बीबीबी माइनस है, जिसे न्यूनतम निवेश योग्य माना जाता है।
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इसके नीचे जंक ग्रेड होता है, जिसका मतलब है कि क्रेडिट एजेंसी संबंधित देश को सुरक्षित निवेश योग्य नहीं मानती। यह रेटिंग किसी देश की कर्ज चुकाने की क्षमता को जाहिर करती है। इसे विकास दर की संभावनाओं, सुधारों पर अमल, राजकोषीय जरूरतों और संबंधित देश की मुद्रा की शक्ति को आधार बनाते हुए तय किया जाता है।
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हाल में भारत में थोक एवं खुदरा दोनों मुद्रास्फीति दरों में गिरावट आई है, सरकार राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने में एक हद तक सफल रही है, आर्थिक सुधार संबंधी महत्वपूर्ण विधेयक तो...]]></description>
<link><![CDATA[http://www.bhaskar.com/article/ABH-pay-attention-of-warning-4271826-NOR.html]]></link>
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<pubDate>2013-05-23 08:07:00 IST</pubDate>
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<title><![CDATA[सार्थक और फलदायी यात्रा]]></title>
<description><![CDATA[चीन&nbsp; के प्रधानमंत्री ली केकियांग की भारत यात्रा इस लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाएगी कि इससे दोनों देशों के आपसी संबंधों के बारे में समझ अधिक यथार्थवादी और सकारात्मक हुई है। भारत-चीन के रिश्तों में जटिलताएं हैं, लेकिन वे आपसी लाभ के क्षेत्रों में दोतरफा सहयोग बढ़ाने की राह में बाधक नहीं हैं। ली ने जोर देकर कहा कि भारत और चीन का सहयोग न सिर्फ दोनों देशों, बल्कि एशिया और पूरे विश्व के फायदे में है।
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ली ने प्रधानमंत्री बनने के बाद अपने सार्वजनिक बयानों में भारत के प्रति जो आदर और सद्भाव दिखाया है, उससे अतीत एवं हाल की कड़वाहटों से आगे निकलने का रास्ता खुला है। सबसे खास बात यह है कि इस यात्रा के दौरान दोनों पक्षों ने बेलाग ढंग से अपनी बात कही। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आरंभ में ही ये साफ कर दिया कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शांति के बिना अन्य क्षेत्रों में रिश्ते आगे नहीं बढ़ सकते।
&nbsp;
उन्होंने ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन की बांध परियोजनाओं और व्यापार घाटे संबंधी भारत की चिंताओं को भी स्पष्ट शब्दों में चीनी प्रधानमंत्री के सामने रखा। ली ने भारत की...]]></description>
<link><![CDATA[http://www.bhaskar.com/article/ABH-good-journey-4270825-NOR.html]]></link>
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<pubDate>2013-05-22 08:20:00 IST</pubDate>
</item>
<item>
<title><![CDATA[नई गर्मजोशी  की उम्मीद]]></title>
<description><![CDATA[यह &nbsp;स्वागतयोग्य है कि भारत-अमेरिका संबंधों में गर्मजोशी बहाल करने के प्रयास नए सिरे से शुरू किए गए हैं। वॉशिंगटन में दोनों देशों के गृह मंत्रियों की चार दिन की आंतरिक सुरक्षा वार्ता शुरू हुई है, तो सितंबर में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ वॉशिंगटन में शिखर बैठक का कार्यक्रम बना है। गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे अमेरिकी गृह मंत्री जेनेट नेपोलिटेनो के साथ लश्कर-ए-तैयबा और अलकायदा जैसे आतंकवादी गुटों से पैदा हो रहे खतरों, आपराधिक कार्यो के लिए गैर-कानूनी स्रोतों से धन की आपूर्ति तथा अंतरराष्ट्रीय अपराधों के खिलाफ आपसी सहयोग की संभावनाओं पर विस्तार से बातचीत करेंगे।
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इस दौरान दोनों देशों के बीच मौजूद आतंकवाद विरोधी कार्यदल एवं आतंकवाद विरोधी सहयोग पहल जैसे तंत्रों को और कारगर बनाने के उपायों पर चर्चा होगी। इस वार्ता के बाद नजरें सिंह-ओबामा की संभावित शिखर बैठक पर टिकेंगी। ओबामा के कार्यकाल में यह सिर्फ दूसरा मौका होगा, जब प्रधानमंत्री की उनसे अमेरिका में द्विपक्षीय वार्ता होगी। पहली बार राष्ट्रपति...]]></description>
<link><![CDATA[http://www.bhaskar.com/article/ABH-new-hope-4269788-NOR.html]]></link>
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<pubDate>2013-05-21 08:37:00 IST</pubDate>
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<title><![CDATA[खाद्य सुरक्षा का अवरुद्ध रास्ता]]></title>
<description><![CDATA[यह &nbsp;शिकायत निराधार नहीं है कि जब पर्याप्त समय था, तब यूपीए सरकार ने प्रस्तावित खाद्य सुरक्षा कानून को लेकर आवश्यक इच्छाशक्ति या फुर्ती नहीं दिखाई, बल्कि आरोप तो यह भी है कि इसे जानबूझकर लटकाकर रखा गया ताकि अगले आम चुनाव से ठीक पहले यह कानून बनाकर इसके जरिये मतदाताओं को लुभाया जाए। अब जबकि पंद्रहवीं लोकसभा अपने आखिरी वर्ष में है, विपक्ष सत्ताधारी गठबंधन को चुनावी बढ़त का मुद्दा आसानी से उसके हाथ में देने को तैयार नहीं है। वह संसद की कार्यवाही न चलने देने पर आमादा है। नतीजतन, बजट सत्र की तय अवधि में यह और उतना ही महत्वपूर्ण नया भूमि अधिग्रहण विधेयक पास नहीं हो पाया।
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अब केन्द्र सरकार इन विधेयकों को वैधानिक रूप देने के लिए कई संभावित रास्तों पर माथापच्ची कर रही है। एक तरीका अध्यादेश है, तो दूसरा संबंधित प्रावधानों को कार्यकारी निर्णय के तहत लागू करना है। तीसरा रास्ता है संसद का विशेष सत्र बुलाना। स्वस्थ संसदीय परंपरा के नजरिये से देखें तो पहले दोनों तरीकों को उचित नहीं माना जा सकता। विधायी विषयों में अध्यादेश या कार्यकारी निर्णय सिर्फ...]]></description>
<link><![CDATA[http://www.bhaskar.com/article/ABH-food-protection-4268414-NOR.html]]></link>
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<pubDate>2013-05-20 00:46:00 IST</pubDate>
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<title><![CDATA[गहरे दलदल की एक झांकी]]></title>
<description><![CDATA[पहली बार हुआ है जब स्पॉट या मैच फिक्सिंग के आरोप में पुलिस ने अपनी जांच के आधार पर तीन क्रिकेटरों को पकड़ा। लेकिन उनकी गिरफ्तारी से बहुत कम लोगों को सदमा महसूस हुआ तो इसीलिए कि क्रिकेट, खासकर आईपीएल में भ्रष्टाचार धीरे-धीरे लगभग सर्व-स्वीकृत धारणा बन गई है।
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इंडियन प्रीमियर लीग से जुड़े कई स्पॉन्सरों और ब्रांड मैनेजरों का यह कहना और भी परेशान करने वाली बात है कि ऐसे विवादों से आईपीएल की दर्शक संख्या या उसे मिलने वाले विज्ञापनों पर कोई फर्क नहीं पड़ता। इसलिए कि आईपीएल का ग्लैमर बैंड, बाजा और तमाशा की वजह से है, जिसमें विवादों से गपशप के लिए अधिक मसाला मिलता है।
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जब आईपीएल का फॉर्मेट ही एक स्वस्थ खेल प्रतिस्पर्धा के बजाय ड्राइंग रूम में पिकनिक का माहौल पेश करने के टीवी आयोजन के रूप में गढ़ा गया है और उसके जरिये टीआरपी जुटाने के नुस्खे आजमाए गए हैं, तो खेल भावना की बलि चढ़ जाना बिल्कुल आश्चर्यजनक नहीं है। हकीकत यह है कि स्पॉट फिक्सिंग का ताजा मामला या पिछले साल एक टीवी चैनल के स्टिंग ऑपरेशन से हुए खुलासे आईपीएल के संचालन से जुड़े कहीं ज्यादा बड़े...]]></description>
<link><![CDATA[http://www.bhaskar.com/article/ABH-first-time-in-the-spot-4267113-NOR.html]]></link>
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<pubDate>2013-05-18 04:45:00 IST</pubDate>
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<title><![CDATA[ओलिंपिक के लिए खुला रास्ता]]></title>
<description><![CDATA[भारत &nbsp;सरकार सही मुकाम पर खड़ी है और अपनी बात समझाने की उसने कारगर रणनीति अपनाई- इसलिए अंतत: अंतरराष्ट्रीय ओलिंपिक कमेटी (आईओसी) को अपनी जिद छोड़नी पड़ी। दरअसल, आईओसी विवेक का परिचय देती तो वह आरंभ में ही देख सकती थी। भारत सरकार भारतीय ओलिंपिक संघ (आईओए) सहित देश के खेल संगठनों की स्वायत्तता का हनन नहीं कर रही है, बल्कि वह ओलिंपिक भावना को सही अर्थो में लागू करने की कोशिश कर रही है, जिस पर अमल आईओसी का भी उद्देश्य है।
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मगर आईओसी भारतीय खेल संगठनों पर कुंडली मारे निहित स्वार्थी तत्वों के बहकावे में आ गई। बीते दिसंबर में उसने भारत की सदस्यता निलंबित कर दी। चूंकि भारतीय एथलीटों का पूरा समर्थन सरकार द्वारा तैयार खेल संहिता के साथ था, इसलिए प्रस्तावित खेल विधेयक के प्रावधानों पर समझौता करने का कोई प्रश्न नहीं था। अच्छी बात है कि अब आईओसी ने भारतीय खेल प्रशासन के स्वरूप में आमूल बदलाव की जरूरत को समझा है। इससे भारत के एक बार फिर ओलिंपिक आंदोलन में शामिल होने का खाका तैयार हुआ है।
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आईओए को अपने संविधान में संशोधन कर उन नियमों को अपनाना होगा, जिसका...]]></description>
<link><![CDATA[http://www.bhaskar.com/article/ABH-olympic-4266327-NOR.html]]></link>
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<pubDate>2013-05-17 08:28:00 IST</pubDate>
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<title><![CDATA[कैंसर से संघर्ष का संकल्प]]></title>
<description><![CDATA[हॉलीवुड &nbsp;की मशहूर अभिनेत्री एंजेलिना जोली ने जो साहसी एहतियाती कदम उठाया है, वह क्यों महत्वपूर्ण है, इसे समझने के लिए हमें इन तथ्यों पर गौर करना चाहिए- विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक हर साल दुनिया में चार लाख 58 हजार महिलाएं स्तन कैंसर की वजह से मौत का शिकार होती हैं।
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दिल्ली में इलाज के लिए अस्पताल पहुंचने वाले कुल एक लाख मरीजों में 40 स्तन कैंसर की शिकार महिलाएं होती हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक भारत में 40-50 वर्ष की उम्र में महिलाएं इस रोग से पीड़ित होने लगती हैं, जो पश्चिमी देशों में इससे ग्रस्त होने की औसत उम्र से करीब एक दशक कम है। फिर आम धारणा के विपरीत स्तन कैंसर का संबंध आनुवंशिकी से भी है। एंजेलिना जोली 37 वर्ष की हैं।
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उनकी मां की मृत्यु स्तन कैंसर से हुई थी। इसलिए उन्होंने एहतियातन अपना परीक्षण कराया। उनमें बीआरसीए-1 जीन पाया गया, जिसके कारण स्तन और गर्भाशय कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। डॉक्टरों ने बताया कि एंजेलिना को यह रोग होने का खतरा 87 फीसदी है। तो पूर्व-सावधानी बरतते हुए सर्जरी के जरिये जोली ने अपने दोनों स्तन हटवा लिए। इसके बाद...]]></description>
<link><![CDATA[http://www.bhaskar.com/article/ABH-struggle-against-cancer-4265336-NOR.html]]></link>
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<pubDate>2013-05-16 09:10:00 IST</pubDate>
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<title><![CDATA[इंसाफ कीजिए, दिखावा नहीं]]></title>
<description><![CDATA[भारतीय &nbsp;न्याय व्यवस्था इस सिद्धांत पर आधारित है कि भले ही कई दोषी छूट जाएं, लेकिन किसी निदरेष को सजा नहीं होनी चाहिए। इसलिए यह खुद हमारी संवैधानिक व्यवस्था की साख के लिए जरूरी है कि अगर कहीं कोई बेगुनाह- किन्हीं हालात में किसी मामले में फंस गया हो, तो उसके साथ यथाशीघ्र न्याय की उचित व्यवस्था की जाए।
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हाल में मुस्लिम समुदाय में इस शिकायत के संकेत मिले हैं कि आतंकवाद के मामलों में बहुत-से निदरेष मुस्लिम नौजवानों को गिरफ्तार किया गया है। इसलिए अगर कोई सरकार इस शिकायत को दूर करने की पहल करती है, तो उसका स्वागत किया जाएगा। लेकिन यह देखने की बात होगी कि क्या वो पहल वास्तविक और ईमानदार है, या उसके जरिये सियासी फायदा उठाने की कोशिश हो रही है?
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यह सवाल हाल में उत्तर प्रदेश की घटनाओं के सिलसिले में उठा है। बीते हफ्ते बाराबंकी की एक अदालत ने राज्य सरकार की 2007 के गोरखपुर बम विस्फोट कांड में गिरफ्तार दो आरोपियों के खिलाफ मामले वापस लेने की याचिका खारिज कर दी। कुछ समय पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को 2006 के वाराणसी बम कांड में गिरफ्तार दो...]]></description>
<link><![CDATA[http://www.bhaskar.com/article/ABH-do-justice-4264302-NOR.html]]></link>
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<pubDate>2013-05-15 09:02:00 IST</pubDate>
</item>
<item>
<title><![CDATA[पाकिस्तान का परिपक्व जनादेश]]></title>
<description><![CDATA[पाकिस्तान के चुनाव में जिस बड़ी संख्या में वोटर मतदान केन्द्रों तक पहुंचे, वह सचमुच उल्लेखनीय है। इसे दहशतगर्दी के खिलाफ अवाम के खामोश बयान के रूप में देखा जा सकता है।
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2008 के चुनाव में सिर्फ 44 प्रतिशत वोट पड़े थे। पाकिस्तान के चुनाव आयोग के अनुमान के मुताबिक इस बार यह संख्या 60 प्रतिशत तक पहुंच गई। इसके बावजूद कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान ने उम्मीदवारों और आम लोगों को खौफजदा करने के लिए प्रचार के दौरान बड़े पैमाने पर खून-खराबा किया। उस हाल में भी चुनाव में भारी जन-भागीदारी देश में लोकतंत्र का जनाधार मजबूत होने का संकेत है।
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नतीजतन पाकिस्तान के इतिहास में यह पहली बार संभव हुआ है, जब एक से दूसरी असैनिक सरकार के हाथ में सत्ता का शांतिपूर्ण हस्तांतरण होगा। चुनाव में नवाज शरीफ की पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) का सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरना बताता है कि मतदाताओं ने उपलब्ध विकल्पों के बीच उस पार्टी को चुना जिसका लंबा राजनीतिक दांव है और जिसके पास शासन करने का अनुभव है। नवाज शरीफ ने पिछले पांच साल सब्र एवं परिपक्वता का परिचय दिया। 1990 के दशक के...]]></description>
<link><![CDATA[http://www.bhaskar.com/article/ABH-pakistan-election-2013-4263317-NOR.html]]></link>
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<pubDate>2013-05-14 10:36:00 IST</pubDate>
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