भोपाल। 'मां ममता का मानसरोवर, हिमगिरि-सा विश्वास है, मां श्रद्धा की आदि शक्ति-सी, कावा है कैलाश है, मां धरती की हरी दूब-सी, मां केशर की क्यारी है,पूरी सृष्टि निछावर जिस पर, मां की छवि ही न्यारी है, मां धरती के धैर्य सरीखी, मां ममता की खान है, मां की उपमा केवल है, मां सचमुच भगवान है..।

कवि जगदीश व्योम की इन पंक्तियों में 'मां' को वर्णित करने की कोशिश की गई है। हालांकि मां की महत्ता शब्दों से बयां नहीं की जा सकती लेकिन इनके जरिए मां को सम्मान जरूर दिया जा सकता है। मदर्स डे (१२ मई) पर मां को सम्मान देने के लिए सिटी भास्कर आपको उन मांओं से रूबरू करा रहा है जिन्होंने न केवल अपने बच्चों को सही तरीके से जीना सिखाया बल्कि उनकी सफलता में उनसे ज्यादा योगदान मांओं का रहा। किसी ने अपने बेटे को सफलता दिलाने के लिए दिन-रात एक कर दिए तो किसी ने अपनी बेटी को उसके मुकाम तक पहुंचाने के लिए धूप-छांव, सर्द-गरम किसी की भी परवाह नहीं की।

सोर्स ऑफ एनर्जी हैं मेरी मम्मा

 

'मम्मा मेरी फस्र्ट टीचर हैं। 6वीं क्लास तक वही मुझे पढ़ाया करती थीं और इसी दौरान उन्होंने मुझमें तार्किक शक्ति पैदा की। चाहे कोई एक्जाम हो या, जिंदगी का कोई भी महत्वपूर्ण क्षण, वह हमेशा से ही मेरे लिए सोर्स ऑफ एनर्जी रहीं। सिविल सर्विसेस जैसे एक्जाम की तैयारी के दौरान लाइफ में कई 'अप' और 'डाउन' देखने पड़ते हैं और ऐसे में स्टूडेंट को मॉरल सपोर्ट की बहुत जरूरत होती है।

आईआईटी और यूपीएससी-दोनों ही एक्जाम में पहले प्रयास में मेरा चयन नहीं हुआ था। उस समय मैं थोड़ा परेशान था, लेकिन मां ने मुझे समझाया और कहा कि एक बार अगर कोई डिसीजन ले लिया है, तो दोबारा सोचने की जरूरत नहीं है।


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