Nov 7th, 2009, 10:57 pm [IST]  
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नारायण सांई पठानकोट में

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पठानकोट. संत श्री श्री नारायण पिछले 4 से 5 दिनों से होशियारपुर,जालंधर,अमृतसर,एवं गुरूदासपुर के श्रद्धालुओं से मिलते हुए आज सुबह करीब 8.30 बजे पठानकोट पहुंचे। मौके पर आसाराम जी बापू के हजारों संत मौजूद थे। नारायण जी पिछले कई दिनों उत्तर भारत की यात्रा पर हैं। अलग-अलग जगहों पर रूककर वो लोगों से बातें कर रहे हैं। साथ ही उन से उनकी समस्याओं की भी जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। सूत्रों का...

 
 
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ताकि सुखमय हो दांपत्य

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हिंदू संस्कृति में सोलह संस्कार हैं जिसमें विवाह संस्कार मुख्य है। विवाह का सौभाग्य सभी को प्राप्त नहीं होता है। दांपत्य सुख के अभाव के कई कारण हो सकते हैं। इनमें से हम मुख्य ज्योतिष कारणों का ही वर्णन कर रहे हैं। < स्त्री या पुरुष की जन्म कुंडली में सप्तम भाव और सप्तमेष का पापी ग्रहों जैसे- राहु, मंगल, शनि और केतु से युक्त। < सप्तमेष का ६वें, ८वें या १२वें भाव में बैठना। < पुरुष की...
 
 
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आगे भी सफलता देगा चंद्र अभियान

चंद्रयान २ अभियान से भी हमें अपने इस उपग्रह से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां पाने में सफलता मिलेगी। चंद्रमा से जुड़े अभियानों में हमें हमारी अच्छी दशाएं उम्मीद से ज्यादा सफलताएं दिलाएंगी। वर्तमान में 11 सितंबर, 2009 से भारत सूर्य की दशा के शुभ प्रभाव में चल रहा है। देश ११ सितंबर २क्१५ तक ६ वर्षो के लिए सूर्य की महादशा के सुख प्राप्त करेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य आत्मा, अहम्,...
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देवों की दीपावली

कार्तिक पूर्णिमा का नाम आते ही हमें भगवान कार्तिकेय का स्मरण होने लगता है। कार्तिकेय भगवान तांत्रिकों और शत्रु संहारक मंत्रों का प्रयोग करने वाले साधकों के परम आराध्य हैं। पूरे कार्तिक मास में भगवान कार्तिकेय की आराधना करके धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष जैसे पुरुषार्थो की प्राप्ति होती है। कार्तिक पूर्णिमा को देवों की दीपावली के रूप में मनाया जाता है। घर के बाहर दीया जलाकर...
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जानिए कैसे रहेंगे आपके ये सात दिन...

क्या रहेगा आपके लिए शुभ और क्या हो सकता है अशुभ, जानिए कैसे रहेंगे आपके (1 से 7 नवंबर) ये सात दिन... 1 नवंबर रविवार
कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी मध्य रात्रि 2 बजे तक, रेवती नक्षत्र सायं 7:34 बजे तक, राहुकाल सायं 4:30 से 6 बजे तक, चंद्रमा मीन राशि में।
वृष, कर्क, कन्या, वृश्चिक, मकर, मीन के लिए शुभ। 2 नवंबर सोमवार
कार्तिक पूर्णिमा मध्य रात्रि 12:46 बजे तक, अश्विनी नक्षत्र सायं 7:13 बजे तक, राहुकाल प्रात: 7:30...
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भगवती तुलसी

तुलसी से जुड़ी एक कथा बहुत प्रचलित है। श्रीमद देवि भागवत पुराण में इनके अवतरण की दिव्य लीला कथा भी बनाई गई है। एक बार शिव ने अपने तेज को समुद्र में फैंक दिया था। उससे एक महातेजस्वी बालक ने जन्म लिया। यह बालक आगे चलकर जालंधर के नाम से पराक्रमी दैत्य राजा बना। इसकी राजधानी का नाम जालंधर नगरी था। दैत्यराज कालनेमी की कन्या वृंदा का विवाह जालंधर से हुआ। जालंधर महाराक्षस था। अपनी सत्ता...
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गौमाता

भारतीय संस्कृति में प्रत्येक जीव को सम्मान दिया जाता है। पुराणों में ऐसी असंख्य किवदंतियां विद्यमान हैं, जहां पशु-पक्षियों का वर्णन देवता स्वरूप में किया गया है। गरुड़ देवता भगवान विष्णु के वाहन हैं, तो नाग शिव के गले का हार हैं। मां दुर्गा शेर पर सवार हैं, तो कार्तिकेय के साथ मयूर है। इसी प्रकार इन शास्त्रों में गाय के महत्व को सवरेपरि माना गया है। गाय को माता कहा गया है। जिस...
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नामे नारायण नाही भेद

महाराष्ट्र के साथ पंजाब के संबंध बहुत पुराने हैं। गुरु गोबिंद सिंह जी का विचरण स्थान मुख्य तौर पर पंजाब रहा, लेकिन अंतिम समय वह महाराष्ट्र में नंदेड़ में रहे। इससे उलट, उनसे कई सदियों पहले भगत नामदेव जी महाराष्ट्र में पैदा हुए, जो अंतिम समय पंजाब में रहे। इसी लिए उनकी बाणी की साध भाषा में पंजाबी के साथ-साथ मराठी शब्दावली की भरमार है।



प्रो. पूरन सिंह ने पंजाब को गुरुओं के नाम पर...

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कुंडलियों के अनुरूप अल्प दोषों के उपाय

न कार्तिक समो मासो न कृतेन समं युगम्। इस माह में किए समस्त मांगलिक कार्य अक्षय फल प्रदान करते हैं। यही कारण है कि दान, पुण्य एवं ब्रामुहूतीर्य स्नान इस मास में धर्मनिष्ठ लोग बहुत श्रद्धा से करते हैं। यह मास अत्यंत पवित्र और दोषरहित होता है। इस माह में गुरु-शुक्रास्त दोष, ग्रहण दोष, लग्न दोष, अयन दोष तिथि नक्षत्रादि दोष, गोचर आदि दोष प्रभावहीन हो जाते है। इस माह में विवाहादि शुभ...
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शुभ विवाह योग

अक्षय तृतीया, आषढ़ शुक्ल नवमी, देव प्रबोधिनी एकादशी, चैत्र शुक्ल नवमी (राम नवमी) आदि ऐसे मुहूर्त हैं, जिनमें तारा अर्थात शुक्र और गुरु के उदय तथा अस्त पर विचार करना जरूरी नहीं होता। वैदिक परंपरा के अनुसार पति-पत्नी का संबंध प्रेममय, स्थायी एवं संतति सुख से पूर्ण हो, इसीलिए यह संस्कार शुभ माह, दिनों एवं मुहूर्त में ही करने का विधान है। विवाह संस्कार के लिए वैशाख, ज्येष्ठ, आषढ,...
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कैसा रहेगा आपका ये सात दिन

पं. जयगोविंद शास्त्री के अनुसार जानिए कैसा रहेगा आपका ये सात दिन (25 से 31 अक्टूबर).... 25 अक्टूबर रविवार
कार्तिक शुक्ल सप्तमी सायं 5 तक, उत्तराषाढ़ा नक्षत्र दिन-रात, राहु काल सायं 4:30 से 6 तक, चंद्रमा धनु राशि में, दोपहर 12:27 बाद मकर में।
मेष, मिथुन, सिंह, तुला, धनु, कुंभ के लिए शुभ। 26 अक्टूबर सोमवार
अष्टमी सायं 7:34 तक, उत्तराषाढ़ा नक्षत्र सुबह 8:48 तक, फिर श्रवण नक्षत्र, राहु काल सुबह 7:30 से 9 तक,...
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लक्ष्मीजी की अंगूठी

एक निर्धन व्यक्ति था। वह नित्य भगवान विष्णु और लक्ष्मी की पूजा करता। एक बार दीपावली के दिन भगवती लक्ष्मी की श्रद्धा-भक्ति से पूजा-अर्चना की। कहते हैं उसकी आराधना से लक्ष्मी प्रसन्न हुईं। वह उसके सामने प्रकट हुईं और उसे एक अंगूठी भेंट देकर अदृश्य हो गईं। अंगूठी सामान्य नहीं थी। उसे पहनकर जैसे ही अगले दिन उसने धन पाने की कामना की, उसके सामने धन का ढेर लग गया। वह ख़ुशी के मारे झूम उठा।...
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भैया जैसा नहीं कोई दूज

भारतीय संस्कृति में त्योहारों का विशेष महत्व है। त्योहार हमारी धार्मिक व सामाजिक पहचान हैं। भैया दूज का पावन त्योहार भाई-बहन के परस्पर प्रेम तथा स्नेह का प्रतीक है। इसका प्रचलन आदि काल माना जाता है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि को दीपावली के बाद भैया दूज पूरे देश में मनाई जाती है। इस दिन बहने अपने भाई को तिलक करके उसके उज्जवल भविष्य व लंबी उम्र की कामना करती हंै। इस...
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जब ठगे गए गणेश जी

गणेश जी विघ्न विनाशक व शीघ्र प्रसन्न होने वाले देवता हैं। अगर कोई सच्चे मन से गणोश जी की वंदना करता है, तो गौरी नंदन तुरंत प्रसन्न होकर उसे आशीर्वाद प्रदान करते हैं। वैसे भी गणेश जी जिस स्थान पर निवास करते हैं, उनकी दोनों पत्नियां ऋद्धि तथा सिद्धि भी उनके साथ रहती हैं उनके दोनों पुत्र शुभ व लाभ का आगमन भी गणेश जी के साथ ही होता है। कभी-कभी तो भक्त भगवान को असमंजस में डाल देते हैं।...
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नमस्कार : भारतीय संस्कृति और सभ्यता का परिचायक

स्वामी विदेहयोगी कहते हैं कि नमस्कार का धार्मिक व आध्यात्मिक महत्व भी है। नमस्कार कहीं क्रिया में होता है तो कहीं किसी को सम्मान देने में प्रयोग होता है। नमन अर्थात अहम को त्याग कर दूसरों को सम्मान देना। जब अहम की भावना नहीं होगी, तो वहां परोपकार की भावना विकसित होगी। दूसरों का भला सोचना और करना ही धर्म है। जब अहम का त्याग करेंगे तो मानसिक रूप से संतुष्टि भी मिलेगी.. नमस्कार मात्र...
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वैभव ऐश्वर्य की प्रतीक है लक्ष्मी

अमावस्या का गहन अंधकार लक्ष्मी के स्वरूप और प्रकृति से मेल नहीं खाता। लक्ष्मी सौंदर्य, वैभव, ऐश्वर्य, पुष्टि और प्रकाश का प्रतीक है। इसलिए उनकी उपासना के लिए माघ शुक्ल पंचमी अर्थात श्री पंचमी या आश्विन पूर्णिमा ही उपयुक्त तिथि हैं। जब प्रकृति शिशिर के o£थ व आलस्य से निवृत होकर वनस्पति और किसलयों का प्ररोहण करती है या जब आश्विन का पूर्ण इन्दु पृथ्वी और अमृत वर्षा करता तो कृतज्ञ...
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विजयादशमी अवगुणों पर पाएं विजय

भास्कर विशेष. अनेक मनोविकारों पर विजय प्राप्ति के लिए दशहरा शुभ दिन है। इसी वजह से कई क्षेत्रों में विजयादशमी को अबूझ मुहूर्त भी मान लिया गया है। उन्नति की कामना करने वालों को इस दिन इच्छित कार्य का प्रारंभ करना चाहिए। इस समय प्रारंभ किया गया कार्य सिद्धि को देने वाला होता है। विजयादशमी आत्मबल की प्राप्ति का पर्व है और जिसमें आत्मबल होता है वह अवश्य ही विजयी होता है। आत्मबल के...
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ईद मुबारक !

दुनिया भर में आज ईद की धूम है। रमजान के मुक़द्दस महीने के बाद जब ईद-उल-फित्र आती है तो पूरी दुनिया में जैसे एक रौशनी लेकर आती है.देश में सबसे पहले कल भोपाल में चाँद दिखा और उसके बाद अन्य शहरों में इसकी घोषणा हुई. भास्कर.कॉम आपके लिए लाया है बांग्लादेश,पाकिस्तान और भारत में ईद की नमाज़ के नजारे -





बांग्लादेश





पाकिस्तान





भारत



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कन्या पूजन की महत्ता

विशेष. पंडित सुशील तिवारी व पंडित रामराज के मुताबिक नवरात्रों में प्रतिदिन दस वर्ष तक की कन्या की पूजा करनी चाहिए। क्योंकि शास्त्रों में दो वर्ष की कन्या को कौमारी, तीन वर्ष की त्रिमूर्ति, चार वर्ष की कल्याणी, पांच की रोहिणी, छह वर्ष की कालिका, सात वर्ष तक की चंडिका, आठ वर्ष तक की शाम्भवी और नौ वर्ष की कन्या दुर्गा व दस वर्ष की सुभद्रा कही गई हैं। नौ कन्याओं की प्रतिदिन पूजा करें...
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ज्ञान-भक्ति का संगम

अध्यात्म क्षेत्र की दो प्रमुख धाराएं हैं- ज्ञान और भक्ति। दोनों की अपनी महत्ता व उपयोगिता है। ज्ञान को यदि मनुष्य का मस्तिष्क कहा जाए तो भक्ति को हृदय कहा जा सकता है। मानवीय काया में स्थित हृदय एवं मस्तिष्क में से जब कोई एक अंग कार्य करना बंद कर देता है तो जीवन की सारी कार्यप्रणाली अस्त-व्यस्त हो जाती है। इसी तरह जब भक्ति या ज्ञान में से किसी एक को अधिक महत्व दिया जाने लगता है तो...
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ग्रह चर्चा

जीवन का संपूर्ण सुख-दुख, जय-पराजय आदि विषय नवग्रहों पर आधारित है। ये ग्रह २७ नक्षत्र एवं १२ राशियों पर लगातार भ्रमण करते रहते हैं, जिससे ऋ तुएं, वषर्, मास और दिन-रात बनते हैं। ये अपनी-अपनी गति के अनुसार कर्मो का फल भी प्रदान करते है। प्रत्येक ग्रह एक विशेष विभाग का अध्यक्ष है। हमारे कर्मानुसार ये ग्रह अपनी दशा में अपना अच्छा या बुरा फल देते हैं। इन्हीं ग्रहों में शनि को संतुलन एवं...
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शनि दृष्टि

इस बुधवार 9 सितंबर को अर्धरात्रि १२ बजे के बाद शनि का कन्या राशि के उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र के दूसरे चरण में प्रवेश होगा। सभी ग्रहों में शनि को न्यायाधीश माना गया है। यह मनुष्य को कर्मो के अनुसार अच्छा या बुरा फल देते हंै। शनि चाहें तो मनुष्य को रंक से राजा तक बना सकते हंै। गोचर में जब शनि जन्मराशि पर उससे अगली राशि पर या बारहवीं राशि पर हो तो शनि की साढ़े साती होती है। शनि के कन्या...
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श्रीगणेश से आजतक की गणति प्रतिमाएं

भास्‍कर डॉट कॉम के एक सुधी पाठक ने भारत में गणपति स्‍थापना की शुरुआती फोटो से लेकर वर्तमान तक के फोटो भेजे हैं। इनकी खासियत है कि ये हर दौर की उथल-पुथल का आईना दिखती हैं।



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हर दौर का आईना थीं गणपति प्रतिमाएं

भास्‍कर डॉट कॉम के एक सुधी पाठक ने भारत में गणपति स्‍थापना की शुरुआती फोटो से लेकर वर्तमान तक के फोटो भेजे हैं। इनकी खासियत है कि ये हर दौर की उथल-पुथल का आईना दिखती हैं।


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परमात्मा का चित्र नहीं बनता चंचल चित्त में

चित्त चंचल है, इसे रोकना मुश्किल है। समझदार लोग चित्त को ऐसा सरल बना लेते हैं जैसे धनुष-बाण बनाने वाला बाण को सीधा बनाता है। बाण जितना सीधा होगा, लक्ष्य पर उतनी ही तीव्रता और सही ढंग से पहुंचेगा। चित्त की चंचलता पूरे जीवन में हलचल मचाती रहती है। चंचल चित्त अनेक परिणाम देता है। उनमें से एक है स्वप्न। स्वप्न हमें बताते हैं कि हमारे जीवन में कहां कमी हो गई है। जो चीजें अपर्याप्त हो गईं,...
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गणेश उत्सव

गणेशजी की पूजा अगर विधिवत की जाए, तो इनकी पतिव्रता पत्नियां रिद्धि-सिद्धि भी प्रसन्न होकर घर-परिवार में सुख शांति और संतान को निर्मल विद्या-बुद्धि देती हैं। गणेश जी ही ऐसे देवता हैं, जिनकी पूजा पत्तियों से भी करके आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है। भगवान गणेश अपने भक्तों द्वारा कितने नामों से पुकारे जाते हैं, यह तो अगणनीय हैं। लेकिन उन सभी का सारांश यही है कि कलियुग में मां चंडी और...

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हरितालिका तीज

आज हरितालिका तीज का व्रत है। हरितालिका व्रत धर्मपरायण सुहागिन भारतीय नारियों एवं कुंवारी कन्याओं का विशेष त्यौहार है। सुहागिन स्त्रियां अपने पति की दीर्घायु, स्वास्थ्य एवं जीवन के हर क्षेत्र में सफलता, सुख-समृद्धि एवं ऐश्वर्य तथा सौभाग्य की कामना के लिए यह व्रत रखती हैं। कुंवारी कन्याएं मनोवांछित वर की प्राप्ति के लिए हरितालिका तीज का व्रत श्रद्धा व भावपूर्ण संकल्प लेकर करती...
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गणेश के मायने

मेरे लिए गणेश का मतलब है- उम्मीद। जब आप भगवान गणोश की प्रतिमा को लाकर स्थापित करते हैं तो साथ में यह उम्मीद भी लाते हैं कि वे आपकी हर तरह से मदद करेंगे और आपकी समस्याएं सुलझाएंगे। जब आप उम्मीद खो देते हैं तो आप अजीब-अजीब काम करने लगते हैं कि क्योंकि तब आपके पास कोई विकल्प नहीं होता। लेकिन जब आपके पास उम्मीद होती है तो आप अपने बेहतर कल के लिए लड़ते हैं। श्रीगणोश को जल में विसर्जित...

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माता-पिता की सेवा

देखा जाए तो संतान के लिए उसके माता-पिता ही सर्वप्रथम देवता हैं। माता अपनी संतान को जन्म देने से पूर्व नौ माह तक अपने गर्भ में रखकर, तरह-तरह के कष्ट सहकर उसे जन्म देती है। इसी कारण संतान के लिए पिता से भी बढ़कर माता का स्थान माना गया है। ‘मनुस्मृति’ में लिखा है कि उपाध्याओं से दस गुना श्रेष्ठ आचार्य, आचार्य से सौ गुना श्रेष्ठ पिता और पिता से सहस्त्र गुना श्रेष्ठ माता गौरव से युक्त होती...
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कुसंग से बचें

जीवन में कुसंगति जहर की तरह है। जिसका संग बिगड़ गया, उसका धीरे-धीरे सब कुछ बिगड़ जाता है। कुसंग आपके अंतर में घुस गया तो दिल बिगाड़ता है। दिल बिगड़ता है तो दिमाग बिगड़ता है। दिमाग बिगड़ता है तो वर्तमान बिगड़ता है और वर्तमान बिगड़ता है तो भविष्य भी बिगड़ जाया करता है। जीवन उल्टा है। अपने वर्तमान को सुधारो तो भविष्य अपने आप सुधर जाया करता है। कुसंगति से बचो। यदि जीवन में कुसंग का...
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मांग में सिंदूर क्यों सजाती हैं विवाहिता?

मांग में सिंदूर सजाना सुहागिन स्त्रियों का प्रतीक माना जाता है। यह जहां मंगलदायक माना जाता है, वहीं इससे उनके रूप-सौंदर्य में भी निखार आ जाता है। मांग में सिंदूर सजाना एक वैवाहिक संस्कार भी है। शरीर-रचना विज्ञान के अनुसार सौभाग्यवती स्त्रियां मांग में जिस स्थान पर सिंदूर सजाती हैं, वह स्थान ब्रrारंध्र और अहिम नामक मर्मस्थल के ठीक ऊपर है। स्त्रियों का यह मर्मस्थल अत्यंत कोमल...
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मंगलकर्ता श्रीगणेश

सभी मांगलिक कार्य करने से पहले सर्वप्रथम गणेश पूजन करना आवश्यक माना जाता है। गणेश जी विधनहर्ता हैं। वह समस्त बाधाओं का शमन करने वाले हैं और कृपा के सागर हैं.. गणपति जी समूचे ब्रह्मांड में वंदनीय हैं। अंत: जगवंदन हैं। वह कृपा के सागर हैं। भगवान गणेश सत, रज, और तम तीनों गुणों के ईश हैं। गुणों का ईश ही प्रणव स्वरूप ‘ú’ है। अत: प्रणव स्वरूप ओंकार ही भगवान की मूर्ति हैं, जो वेदमंत्रों के...
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