
हिंदू धर्म शास्त्रों में भगवान विष्णु को सृष्टि का पालनकर्ता बताया गया है। सृष्टि के कल्याण के लिए भगवान विष्णु ने अनेक अवतार लिए। धर्म शास्त्रों के ही अनुसार उन अवतारों का जन्मोत्सव मनाए जाने की परंपरा हिंदू धर्म में है। द्वापर युग में भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण अवतार लिया था। प्रतिवर्ष भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव श्रृद्धा व विश्वास के साथ संपूर्ण भारत वर्ष में जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है। इस बार यह पर्व 22 अगस्त, सोमवार को है।इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के निमित्त व्रत व विशेष पूजन......और पढ़ें
रंग-हुड़दंग
माखन खाकर क्या संदेश देते हैं श्रीकृष्ण?
भगवान श्रीकृष्ण को माखन चोर भी कहा जाता है। यह भी श्रीकृष्ण की लीला ही थी। किंतु माखन खाने के लिए चोरी जैसा काम करने पर भी भगवान को माता से लेकर गोकुलवासियों का स्नेह और प्यार मिला। इसलिए यह...और पढ़ें
जानें क्या है श्रीकृष्ण की रासलीला का रहस्य
भगवान श्रीकृष्ण लीला पुरुषोत्त्तम कहलाते हैं क्योंकि उन्होंने अपनी जीवन में कई लीलाएं की। श्रीकृष्ण की लीलाओं में कोई लीला मोहित करती है तो कोई अचंभित करती है। लेकिन हर लीला जीवन से जुड़े...और पढ़ें
श्रीकृष्ण ने कैसे बचाएं परीक्षित के प्राण?
महाभारत के युद्ध के बाद जब अश्वत्थामा ने सोए हुए द्रोपदी के पुत्रों का वध किया था तब उसका प्रतिशोध लेने के लिए अर्जुन व श्रीकृष्ण अश्वत्थामा के पीछे गए। घबराकर अश्वत्थामा ने अर्जुन पर.......और पढ़ें
जब श्रीकृष्ण ने चूर किया इंद्र का घमंड
भगवान श्रीकृष्ण ने गोकुलवासियों को गोवर्धन पर्वत की पूजा करने तथा इंद्र की पूजा न करने का कहकर इंद्र का घमण्ड तोड़ा था। चूंकि ग्रामवासियों द्वारा पूजित होने पर ही इंद्र वहां वर्षा करते थे.......और पढ़ें22 अगस्त, सोमवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के निमित्त व्रत रखा जाता है व विशेष पूजन किया जाता है। धर्म शास्त्रों के अनुसार इस दिन जो प्राणी व्रत रखता है उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है और वह मोह-माया के जाल के मुक्त हो जाता है। यदि यह व्रत किसी विशेष कामना के लिए किया जाए तो वह कामना भी शीघ्र ही पूरी हो जाती है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की पूजन व व्रत की विधि इस प्रकार है- व्रत व पूजन विधि जन्माष्टमी (22 अगस्त, सोमवार) के दिन सुबह जल्दी उठें और नित्य कर्म से निवृत्त होकर स्नान करें व साफ वस्त्र धारण करें। इसके......और पढ़ें

त्यौहार कैलेंडर
होलिका दहन
फाल्गुन शुक्ल 14, मघा ८/४२ रात तकरंग पंचमी
चैत्र कृष्ण 4/5, स्वाती १/५९ दिन तकचैत्र नवरात्रारंभ
चैत्र शुक्ल 1, उ.भा. ११/३५ दिन तकगुड़ी पड़वा
चैत्र शुक्ल 1, उ.भा. ११/३५ दिन तकश्रीराम नवमी
चैत्र शुक्ल 9, पुष्य ४/५७ रात अंत तकहनुमान जयंती
चैत्र शुक्ल 15, हस्त १/२५ रात तकवैशाखी
वैशाख कृष्ण 7, पू.षा. ३/१५ दिन तक
