
आश्विन मास के कृष्णपक्ष के पंद्रह दिन पितृपक्ष के नाम से नाम से जाने जाते हैं। इन पंद्रह दिनों में लोग अपने पितरों को जल देते हैं तथा उनकी मृत्युतिथि पर श्राद्ध करते हैं। पितरों का ऋण श्राद्ध द्वारा चुकाया जाता है। इस बार श्राद्ध पक्ष का प्रारंभ 12 सितंबर, सोमवार से हो रहा है तथा समापन 27 सितंबर, मंगलवार को होगा।पितृपक्ष श्राद्धों के लिए निश्चित पंद्रह तिथियों का एक समूह है। वर्ष के किसी भी मास तथा तिथि में स्वर्गवासी हुए पितरों के लिए पितृपक्ष की उसी तिथि को श्राद्ध किया जाता है। पूर्णिमा पर देहांत होने से भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा......और पढ़ें
रंग-हुड़दंग
संजा पर्व से सीखें लाइफ मैनेजमेंट के सूत्र
हमारा देश भारत रीति-रिवाजों व परंपराओं का देश है। यहां प्रत्येक त्योहार के साथ कई परंपराएं व रीति-रिवाज देखने को मिलते हैं। इन परंपराओं व रीति-रिवाजों के पीछे कहीं न कहीं जीवन प्रबंधन से...और पढ़ें
जब ब्राह्मणों में राजा दशरथ को देखा सीता ने
इन दिनों श्राद्ध पक्ष चल रहा है। श्राद्ध पक्ष में ब्राह्मणों को बुलाकर उन्हें भोजन कराने की परंपरा है। ऐसी मान्यता है कि ब्राह्मणों द्वारा किया हुआ भोजन हमारे पितरों को प्राप्त होता है।...और पढ़ेंआश्विन कृष्ण पक्ष में जिस दिन पूर्वजों की श्राद्ध तिथि आए उस दिन पितरों की संतुष्टि के लिए श्राद्ध विधि-विधान से करना चाहिए। किंतु अगर आप किसी कारणवश शास्त्रोक्त विधानों से न कर पाएं तो यहां बताई श्राद्ध की सरल विधि को अपनाएं -- सुबह उठकर स्नान कर देव स्थान व पितृ स्थान को गाय के गोबर से लीपकर व गंगाजल से पवित्र करें।- घर आंगन में रंगोली बनाएं।- महिलाएं शुद्ध होकर पितरों के लिए भोजन बनाएं।- श्राद्ध का अधिकारी श्रेष्ठ ब्राह्मण (या कुल के अधिकारी जैसे दामाद, भतीजा आदि) को न्यौता देकर बुलाएं।- ब्राह्मण से पितरों की पूजा एवं तर्पण आदि......और पढ़ें

त्यौहार कैलेंडर
होलिका दहन
फाल्गुन शुक्ल 14, मघा ८/४२ रात तकरंग पंचमी
चैत्र कृष्ण 4/5, स्वाती १/५९ दिन तकचैत्र नवरात्रारंभ
चैत्र शुक्ल 1, उ.भा. ११/३५ दिन तकगुड़ी पड़वा
चैत्र शुक्ल 1, उ.भा. ११/३५ दिन तकश्रीराम नवमी
चैत्र शुक्ल 9, पुष्य ४/५७ रात अंत तकहनुमान जयंती
चैत्र शुक्ल 15, हस्त १/२५ रात तकवैशाखी
वैशाख कृष्ण 7, पू.षा. ३/१५ दिन तक
