हिंदी हैं हम!!

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chal hat be

Manjeet Singh Thakral, Jabalpur | Like 0
 

hindi mein chamakta hindustaan, hindi bhasha hai hamare desh ki shaan, hindi bhasha hai jode har mazhaab ko, har rajya ko, har insaan ko, kyunki hindi hai sabke dilon ki pehchaan

Shreya, Bhopal | Like 3
 

हिंदी हिन्दुस्तानियों की जान है,इसी से आज विश्व में हमारी पहचान है !

H.S.Yadav, Alwar | Like 0
 

hindi hai hum watan hai hindustan humara..

Tahir Khan, Singrauli | Like 2
 

हिंदी भारत की जान है.........

Jeetu, Delhi | Like 1
 

hindi hai hamari shaan, hindi se hamari pahachan

Rahul Sanghvi, Rewa | Like 1
 

SARE JAHA SE ACCHA HINDOSTHA HAMARA HINDI HA HUM VATAN HA HINDOSTA HAMARA ...... JAI HIND & HINDI

Rakesh Sharma, Mhahnsar Jhunjhunu | Like 1
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वीआईपी वचन
धर्मेंन्द्र, अभिनेता

मुझे हमेशा हिन्दी सुहाती है, यह हमारे संस्कारों की भाषा है। मैंने "चुपके-चुपके" में एक ऐसा किरदार निभाया था जो विशुद्ध हिन्दी में अपनी बात कहता है। अच्छी हिन्दी बोलने में फक्र होना चाहिए, आने वाली पीढ़ी से हिन्दी बिसर न जाए, इसकी भी फिक्र करना चाहिए।

धर्मेंन्द्र, अभिनेता
 
ख्याली, कॉमेडियन

यह बड़ी बात है कि हिन्दी की वजह से लोग आपस में जुड़ रहे हैं। हिन्दी एकदम आसान और दिल के करीब है। देश में किसी भी भाषा और बोली में बोलने वाला हिन्दी बोल और समझ लेता है।

ख्याली, कॉमेडियन
 
रजा मुराद, फिल्म अभिनेता

हिन्दी सिनेमा ने हिन्दी को बढावा देने में बहुत बड़ा योगदान दिया है। वो लोग जिन्होंने कभी हिन्दी नहीं सीखी वे भी हिन्दी फिल्में देखकर हिन्दी बोल और समझ लेते हैं। यहां तक की पाकिस्तान में भी अब उर्दू के साथ साथ हिन्दी समझी जाने लगी है।

रजा मुराद, फिल्म अभिनेता
 
मृणालिनी घुले

संस्कृत की एक लाड़ली बेटी है ये हिन्दी। बहनों को साथ लेकर चलती है ये हिन्दी। सुंदर है, मनोरम है, मीठी है, सरल है, ओजस्विनी है और अनूठी है ये हिन्दी।

मृणालिनी घुले
 
गरिमा माहेश्वरी

संस्कृत और हिन्दी देश के दो भाषा रूपी स्तंभ हैं जो देश की संस्कृति, परंपरा और सभ्यता को विश्व के मंच पर बखूबी प्रस्तुत करते हैं।

गरिमा माहेश्वरी
 
राजेश जोशी, ख्यात कवि

हिंदी हमारे देश में अधिसंख्य जनता द्वारा बोली जाने वाली भाषा है। एक तरह से यह विभिन्न भाषाई प्रांतों के बीच संवाद करते-करते एक संपर्क भाषा भी बन चुकी है। इसलिए इसे हमें एक राष्ट्र भाषा के रूप में स्वीकार कर लेना चाहिए।

राजेश जोशी, ख्यात कवि
 
अशोक मिश्र, फिल्म लेखक

हिंदी अजर-अमर है/उसका बहुत बड़ा घर है/अंग्रेजी को वह चटनी की तरह खाती है/खेतों में गाती है/नदियों में गुनगुनाती है/जब वह दलितों-शोषितों के नारों में उतरती है, तो अच्छे-अच्छों की पुंगी बजाती है/कुर्सियों को हिलात है/गरीबों को उनका हक दिलाती है।

अशोक मिश्र, फिल्म लेखक
 
जलीस शेरवानी, पूर्व अध्यक्ष फिल्म राइटर एसोसिएशन

केवल हिंदी विश्व की ऐसी एक मात्र भाषा है, जिसको लेकर कोई भ्रम नहीं है। यह जैसी बोली जाती है, वैसी लिखी जाती है। इसकी एक सुंदरता यह भी है कि यह एक बड़ी संपर्क की भाषा है।

जलीस शेरवानी, पूर्व अध्यक्ष फिल्म राइटर एसोसिएशन
 
भारतेंदु हरिश्चंद्र, हिंदी साहित्यकार

निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल। बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल।।

भारतेंदु हरिश्चंद्र, हिंदी साहित्यकार