Hindi Rocks
 
 
 
युवा भारत के सपनों से जुड़ी है हिंदी...अब दुनिया में 62 करोड़ से भी ज्यादा लोग इसे बोलते हैं...हम अब भी थम जाते हैं...ऐ मेरे वतन के लोगो...गीत की तान पर, हमारे कानों में अब भी गूंजते हैं राकेश शर्मा के शब्द...जो उन्होंने अन्तरिक्ष यान से कहे थे...सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोशस्तांय हमारा...ये हिन्दी है...हमारी शान...हमारे दिलों की भाषा...हिन्दी दिवस पर.dainikbhaskar.com की विशेष पेशकश...पढ़िए...मेरे दिल की जुबान है हिन्दी...
आपका मत
 
 
हिंदी और अंग्रेजी के बीच होड़ पर आप क्या सोचते हैं?
हिंदी अपनी, अंग्रेजी पराई है।
हिंदी का बोलबाला है।
अंग्रेजी का बोलबाला है।
दोनों का बराबर महत्व है।
हिंदी दिल तो अंग्रेजी दिमाग में बसती है।
    

Results | Previous Results
 
 
यदि आप यह सोचते हैं कि केवल अंग्रेजी बोलने से ही आपको सम्मान मिलेगा तो आप शायद गलत हैं। दैनिक भास्कर डॉट कॉम के देश के १७ शहरों में कराए गए सर्वे में ६५ फीसदी लोगों ने यह विचार व्यक्त किए। हिंदी दिवस पर कराए गए इस सर्वे ने आम हिंदुस्तानी के मन में बरसों से बैठी इस मान्यता को ध्वस्त कर दिया है कि केवल फर्राटेदार अंग्रेजी बोलना ही कहीं भी आपको सम्मान दिलाने की गारंटी बन सकता है। हालांकि, सर्वे में चौंकाने वाली यह बात भी निकल कर आई है कि सत्तर फीसदी लोग विभिन्न सरकारी और निजी कामों के दौरान भरे जाने वाले फॉर्म में हिंदी का विकल्प होने के बावजूद अंग्रेजी का इस्तेमाल करते हैं। दिल्ली, मुंबई लखनऊ के अलावा मप्र, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा में हुए इस सर्वे में २१७क् से अधिक लोगों ने भागीदारी की।
दिल से
 
 
हिन्दी की जय हो
* हिन्दी बढ़ रही हैं और बढ़ती रहेगी, हिन्दी हैं हम वतन है हिंदुस्ता हमारा, हिन्दी की जय हो। विवेक कुमार, बिहार
हिन्दी मेरी पहचान है
हिन्दी मेरी पहचान है, मेरा अभिमान है, अपनी भाषा की प्रगति के लिए हमें हर संभव प्रयास करना चाहिए। गगन गुर्जर, रायसेन, मप्र
दिल की बात अपनी भाषा में कहें
हिन्दी मेरे दिल के बेहद करीब है और दिल की बात कहने के लिए इससे बेहतर भाषा और क्या हो सकती है।
हिन्दी हमारे दिलों को जोड़ती है
हिन्दी हमारे दिलों को जोड़ती है और संचार की सबसे बेहतर संप्रेषण के लिए इसका ज्ञान लाभदायक है। प्रेमराम, सागर, मप्र
बढ़ी शान से बढ़ रही है हिन्दी
हिन्दी अन्य दूसरी भाषाओं के जानकार लोगों की जुबान पर भी अपना रंग दिखा रही है और बढ़ी शान से बढ़ रही है, देश के विकास में भाषा का भी उतना ही स्थान होता है जितना किसी और बात का। विकास कुमार, जबलपुर
हिन्दी की बात ही निराली है
हिन्दी की बात ही निराली है और इसमें हिन्दी की बोली का देसी टोन मिल जाता है तो उस बात का अंदाज ही जुदा हो जाता है। रजत अभिनव, पटना
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पुरानी है बाज़ार से भाषा की यारी
भाषा संबंधी विमर्शों के दौरान अक्सर अंग्रेजी के बढ़ते प्रभाव से प्रदूषित होती हिन्दी के स्वरूप पर फिक्र जताई जाती है। ऐसी फिक्र करनेवाले यह भूल जाते हैं कि बीते बारह सौ साल में कोई वक्त ऐसा नहीं रहा जब इस देश की भाषाओं पर किन्हीं विदेशी भाषाओं का प्रभाव न पड़ा हो। पहले अरबी, फिर फ़ारसी इस मुल्क में सत्ता की भाषा रही मगर हिन्दी तब भी लोक में रची बसी रही। शुद्धतावादियों को अरबी-फारसी का बढ़ता प्रभाव रास नहीं आया मगर लोक मानस अपने स्तर पर इन भाषाओं से अपनी भाषा बोली को अलग संस्कार देता रहा।...
 


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