सिटी BLOGGERS
By: रवींद्र पांडेय.
सोना शर्म से गड़ा जा रहा है। जिस तेजी से उसके भाव गिर रहे हैं, कुछ ही दिनों में बेचारे की भारी दुर्गति होनेवाली है। भिंडी-बैंगन के बराबर भी तो पूछ नहीं रही। गली-मुहल्लों में...By: अंजू सिंह।
राजधानी में बढ़ती आपराधिक घटनाओं से उद्योग-व्यवसाय जगत सकते में है। डरे-सहमे व्यवसायी-उद्यमी अपने रहनुमाओं से सिर्फ एक ही सवाल पूछ रहे हैं, आखिर कब तक हम यों ही चुपचाप...By: संजय सिंह।
संयुक्त बिहार के समय से अलग राज्य बनने के 12 साल बाद तक राजधानी में कई बदलाव हुए। विकास तो हुए, लेकिन समस्याएं भी बढ़ती गईं। वजह साफ है, अनप्लांड डेवलपमेंट। राजधानी के विकास...By: विनय भरत
मैं गुमला में पैदा हुआ. यहीं नेहरु बाल विकास विद्यालय ( जो पालकोट रोड में था और अब बंद हो चुका है, जिसके संस्थापक मेरे पिताजी ही थे) में मेरी प्रारम्भिक शिक्षा-दीक्षा हुई. 4...By: सैयद शहरोज़ कमर.
नन्ही सी श्रेया के नन्हे से सपने ने भी दम तोड़ दिया। दादी सरोज को लोगों ने सफेद कपड़ों से न जाने क्यों लपेट दिया है। उन्हें तो पहली सितम्बर को आ रहे उसके बर्थ डे के लिए अच्छा...