• गांधी जयंती पर विशेष : बापू के शाल बिना जिएं कैसे?

    गांधी जयंती पर विशेष : बापू के शाल बिना जिएं कैसे?
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    चार दिन हो गए, पर शाल का पता नहीं लगा। सेवकजी ने रेलवे स्टेशन पर पूछताछ की पर कोई खोज नहीं मिली। पुलिस में रिपोर्ट करने की बात मन में उठी, पर सेवकजी ने सोचा... Expand
    चार दिन हो गए, पर शाल का पता नहीं लगा। सेवकजी ने रेलवे स्टेशन पर पूछताछ की पर कोई खोज नहीं मिली। पुलिस में रिपोर्ट करने की बात मन में उठी, पर सेवकजी ने सोचा कि गांधीजी का दिया हुआ पवित्र शाल था, उसे पुलिस के मामले में फंसाने से उसकी पवित्रता नष्ट होगी। आखिर पूज्य गांधीजी का शाल था। सेवकजी दरवाजे पर बैठे थे। सड़क पर कितने ही परिचित निकल गए पर सेवकजी ने किसी को नहीं बुलाया। और दिन होता तो वे परिचित को देखते ही वहीं बैठे-बैठे ‘जय हिंद’ उछालकर रोकते। फिर अंदर बुलाकर कहते, ‘मैं आपको अपने जीवन की सबसे मूल्यवान वस्तु बतलाता हूं।’ वे अलमारी से एक हल्के नीले रंग का शाल निकालते और भाव विभोर हो कहते, ‘यह शाल मुझे पूज्य गांधीजी ने दिया था। मेरे विवाह में वे स्वयं आशीर्वाद देेने आए थे। हम दोनों से बोले, तू मेरा बेटा नहीं है, यह मेरी बेटी नहीं है। खिलखिलाकर हंस पड़े बापू और यह शाल हम दोनों को उड़ा दिया। आज वे नहीं हैं...’ वे भाव तल्लीन हो जाते। पिछले कितने ही वर्षों से हर सभा में वे गांधीजी का शाल ओढ़कर पहुंच जाते। मंच पर बैठते और अंतिम वक्ता के बाद खड़े होकर कहते, ‘मुझे भी दो शब्द कहना है।’ माइक पकड़कर बोलने लगते, ‘मैंने जो कुछ भी सीखा है गांधीजी के चरणों में बैठकर। मेरे विवाह में वे...’ और फिर शाल का किस्सा। सभा होती तो लोग जानते थे कि सेवक जी अवश्य आएंगे और शाल के बारे में बताकर बैठ जाएंगे। वही शाल खो गया। अब कैसे किसी सभा में जाएं। एक विचार सहसा उनके मन में आया। वे कपड़ों की दुकान पर गए और हल्के नीले रंग का एक शाल खरीद लिया। मन में शंका उठी - क्या यह मिथ्याचार नहीं है? समाधान कर लिया - वस्तु सत्य नहीं है, भावना सत्य है। अब समस्या उठी कि इसका नयापन कैसे मिटे? सेवकजी ने उसे गीलाकर सुखाया, उससे फर्श साफ किया, दो-तीन दिन उसे ओढ़कर सोते रहे। उसकी चमक कुछ कम हो गई। अब मन कुछ हल्का हो गया। शाम को सभा थी। सेवकजी ने अलमारी से शाल निकालकर ओढ़ा। फिर प्रश्न उठा - यह मिथ्याचार है। जवाब दूसरे कोने से उठा - वस्तु सत्य नहीं है, भावना सत्य है। सेवकजी मंच पर बैठ गए। धुकधुकी लगी - कहीं कोई भेद जान ले? अंतिम वक्ता के बाद वे खड़े हुए। बोले, ‘मुझे भी दो शब्द कहना है।’ उन्होंने माइक पकड़ा। दिल धड़क रहा था, हाथ कांप रहे थे। बोलना शुरू किया, ‘मैंने जो कुछ सीखा है गांधी जी से... मेरे विवाह के अवसर पर यह शाल उन्होंने मुझे दिया था। बापू स्वयं..’ पहली पंक्ति में बैठा एक आदमी खड़ा होकर बोला, ‘क्यों झूठ बोलते हैं सेवकजी? यह शाल तो नया है और मिल का है। भला गांधीजी मिल का शाल देते?’ सभा में हंसी उठी, कोलाहल हुआ, सेवकजी के पांव डगमगाए और वे वहीं बैठ गए। (हरिशंकरपरसाई के व्यंग्य ‘गांधी जी का शाल’ का संपादित अंश)    चौथा बंदर    बार कुछ पत्रकार और फोटोग्राफर गांधी जी के आश्रम में पहुंचे। वहां उन्होंने देखा कि गांधी जी के तीन बंदर हैं। एक आंख बंद किए है, दूसरा कान बंद किए है, तीसरा मुंह बंद किए है। एक बुराई नहीं देखता, दूसरा बुराई नहीं सुनता और तीसरा बुराई नहीं बोलता। पत्रकारों को स्टोरी मिली, फोटोग्राफरों ने तस्वीरें लीं और आश्रम से चले गए।   उनके जाने के बाद गांधी जी का चौथा बंदर आश्रम में आया। वह पास के गांव में भाषण देने गया था। वह बुराई देखता था, बुराई सुनता था, बुराई बोलता था। उसे जब पता चला कि आश्रम में पत्रकार आए थे, फोटोग्राफर आए थे, तो वह बड़ा दु:खी हुआ और धड़धड़ाता हुआ गांधी जी के पास पहुंचा।   ‘सुना बापू, यहां पत्रकार और फोटोग्राफर आए थे। बड़ी तस्वीरें ली गईं। आपने मुझे खबर भी की। यह तो मेरे साथ बड़ा अन्याय किया है बापू।’   गांधी जी ने चरखा चलाते हुआ कहा, ‘जरा देश को आजाद होने दे बेटे! फिर तेरी ही खबरें छपेंगी, तेरी ही फोटो छपेगी। इन तीनों बंदरों के जीवन में तो यह अवसर एक बार ही आया है। तेरे जीवन में तो यह रोज-रोज आएगा।’   शरदजोशी, व्यंग्यकार Collapse
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  • Reader's Joke : सपना देखा कि उसकी पत्नी उसे जूतों से मार रही है

    Reader's Joke : सपना देखा कि उसकी पत्नी उसे जूतों से मार रही है
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    एक आदमी ने रात में एक सपना देखा कि उसकी पत्नी उसे जूतों से मार रही है। दूसरे दिन उसने अपना बैंक अकाउंट बंद कर दिया। क्योकि बैंक पर लिखा था, ‘हम आपके... Expand
    एक आदमी ने रात में एक सपना देखा कि उसकी पत्नी उसे जूतों से मार रही है। दूसरे दिन उसने अपना बैंक अकाउंट बंद कर दिया। क्योकि बैंक पर लिखा था, ‘हम आपके सपनों को हकीकत में बदल देंगे!’   ***   एक आदमी ने 350 सीसी की बुलेट खरीदी। लेकिन जब वो अपनी गर्लफ्रेंड के साथ बाइक पर होता था तो उसे शोर के कारण कुछ सुनाई नहीं देता था। उसने अपनी बुलेट बेच कर 100 सीसी की बाइक खरीदी। फिर उस आदमी की उसी लड़की से शादी हो गई। और आज उसके पास 500 सीसी की बाइक है।   ***   सांस रोक कर तुझे छूने की कवायद और हल्का सा छू कर ख़ुशी-खुशी लौट आना... जैसे सारा जहां जीत लिया...। यह रोमांटिक नहीं है... कबड्‌डी की परिभाषा है। फिर से पढ़िए समझ आएगी।   चंद्रेश सिंदल   ***   सोनूरात को टॉर्च और रस्सी लेकर जा रहा था। आशू - कहां जा रहे हो भाई? सोनू - आत्महत्या करने। आशू - टॉर्च रस्सी का क्या काम? सोनू - कहीं सांप, बिच्छू ने काट लिया तो?    योगमयप्रधान, महासमुंद  Collapse
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  • Yes, It's Silly : पता नहीं कैसे सच्चा प्यार मिल जाता है

    Yes, It's Silly : पता नहीं कैसे सच्चा प्यार मिल जाता है
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    लोगों को पता नहीं कैसे सच्चा प्यार मिल जाता है। हमें तो सुबह पलंग के नीचे उतारी हुई चप्पल भी नहीं मिलती।   ***   जिस दिन देश में शराब बेचने पर पूर्ण... Expand
    लोगों को पता नहीं कैसे सच्चा प्यार मिल जाता है। हमें तो सुबह पलंग के नीचे उतारी हुई चप्पल भी नहीं मिलती।   ***   जिस दिन देश में शराब बेचने पर पूर्ण प्रतिबंध हो जाएगा उसी दिन से बारात में जमीन पर लेटकर नागिन डांस करने की पुरातन प्रथा और बहुमूल्य कला भी विलुप्त हो जाएगी।   ***   कौन कहता है कि सिर्फ मोहब्बत में ही दर्द होता है, कमबख्त दरवाजे में ऊंगली जाए तो भी जान निकल जाती है।   ***   हम सिर्फ यह सोचकर एग्जाम में अपनी आंसर शीट खाली छोड़ देते हैं कि कल को टीचर्स कहीं यह कहें कि देखो आजकल के बच्चे बड़ों को जवाब देते हैं। Collapse
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  • From The Web: कस्टमर का दर्द

    From The Web: कस्टमर का दर्द
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    छगन ने मोबाइल कस्टमर केयर पर फोन किया। लड़की ने फोन उठाया। लड़की: कस्टमर केयर में आपका स्वागत है। मैं आपकी क्या सहायता कर सकती हूं? छगन: क्याआप शादी करना... Expand
    छगन ने मोबाइल कस्टमर केयर पर फोन किया। लड़की ने फोन उठाया। लड़की: कस्टमर केयर में आपका स्वागत है। मैं आपकी क्या सहायता कर सकती हूं? छगन: क्याआप शादी करना चाहती हैं मुझसे? लड़की: जीआपने गलत नंबर लगाया है सर। छगन: नहीं मैंने सही नंबर लगाया है। आप शादी करेंगी? लड़की: जीन हीं, मैं शादी में इंटरेस्टेड नहीं हूं। छगन: सुन तो लीजिए एक बार। लड़की: नॉट इंटरेस्टेड। छगन: लव मैरिज करेंगी तो हनीमून स्विट्जरलैंड में और अरेंज मैरिज करेंगी तो पैरिस। लड़की: जी मैं आपसे शादी करना ही नहीं चाहती तो आप ऑफर क्यों दे रहे हैं? छगन: कोर्ट मैरिज सिर्फ 10 हजार में हो जाएगी। लड़की: आपको समझ नहीं आता कि मुझे शादी नहीं करनी है। फिर भी ऑफर दिए जा रहे हैं। छगन: अब पता चला मैडम हमारा दर्द जब आप हमें बिना इंटरेस्ट के ऑफर पर ऑफर दिए जाती हैं।  Collapse
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  • EXTRA SHOT: बंदा अमेरिका के लिए ही बना है बंधु...!

    EXTRA SHOT: बंदा अमेरिका के लिए ही बना है बंधु...!
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    एग्रीकल्चर से डरकर देश फिलहाल अमेरिकन कल्चर की तरफ बढ़ रहा है। अमेरिकी हो जाने की लहर है और यहां अपुन तो मूलतः अमेरिका के लिए ही बने हैं। यह दिव्य ज्ञान... Expand
    एग्रीकल्चर से डरकर देश फिलहाल अमेरिकन कल्चर की तरफ बढ़ रहा है। अमेरिकी हो जाने की लहर है और यहां अपुन तो मूलतः अमेरिका के लिए ही बने हैं। यह दिव्य ज्ञान हमें बहुत जल्दी ही हो गया था। जब हम पैदा हुए तो लोगों ने कहा- बिल्कुल अमेरीकन टाइप दिखता है। वो तो बाद में हम दिनभर धूप में आवारागिर्दी के चलते आफ्रीकियों के ज्यादा नजदीक हो गए। हमारे घर के बड़े बुजुर्ग बताते थे कि हमारे रोने के `एक्सेंट` तक अमेरीकियों की तरह थे। कुछ बुजुर्गों ने तो हमारी तहजीब के बारे में दबी जुबान से बताया था कि नाक अक्सर पेपर नैपकिन अर्थात पड़ोसियों के ताजे अखबार से ही पोंछता था। वैसे हम बचपन से ही `इंडीविजुआलिटी` के इतने बड़े हिमायती थे कि अपने मकान मालिक की तीनों बेटियों से अलग-अलग दोस्ती रखते थे।  वो तो तीनों ने जब इकट्ठे मिलकर हमें कूटा तभी यूनिटी की ताकत समझ में आई। यहां तक की हमारा सेल्फ रिस्पेक्ट भी अमेरिकी झंडे की बनी हुई उस चड्ढ़ी की ही तरह था, जो हिट था, फिट था लेकिन कभी दिखता नहीं था। हर अमेरिकी की तरह हमें भी हथियारों से प्यार और पढ़ाई से नफरत थी। हथियार हम अपने सारे मास्टरों पर चलाना चाहते थे। लेकिन `कट्टे` का मतलब  तब हमें बीड़ी का कट्टा समझ में आता था। सिर धुनते थे कि महज बीड़ी सुलगाकर किसी को कैसे राख किया जा सकता है। बाद में गुलजार साहब ने और ही मतलब समझा दिया कि `जिगर की आग` से भी बीड़ी सुलगाने का कार्य सम्पन्न किया जा सकता है। इन्हीं हथियारों के ट्रायल के चक्कर में ज्यादा ही धुंआ खींच लेने से काली खांसी होते-होते बची। हालांकि हमने इस काली खांसी वाले हथियार से भी मास्साबों में टीबी फैलाने की कोशिश की। लेकिन हमारी किस्मत से उनका जिगरा मजबूत निकल आया, जबकि हमारे बैक्टीरिया काफी `वीक` पाए गए। अमेरिकियों जैसे हर मामले में हम भी `सू` करने के आदी थे। मास्साब जब हमें संटियां लगाते थे तो हम क्लास में खड़े-खड़े ही सू...सू... कर देते थे। नतीजा गीली क्लास पढ़ने लायक नहीं रह जाती थी।अमेरिका की तरह हम भी दुनियाभर के फटे में फंसाने के लिए हरदम टांग तैयार रखते थे। बाहर गुंजाइश न मिले तो हम खुद का ही पायजामा फाड़कर फंसा लेते थे। ना अमेरिका की आदत गई ना ही कई पायजामों की `शहादत` हमारी भी आदत छुटा पाई। यूं तो अमेरीकियों की तरह हम भी लाइफ के प्रति बेहद फोकस्ड थे। हमारे फोकस में अमेरिका का एच-1 वीजा और एपल का आईफोन था। आगे की लिस्ट में गर्लफ्रेंड से पहले मोबाइल का चार्जर और कानों  में लगाया जाने वाला ईयर प्लग था। इसके आगे दारू की बोतल, सात हजार बार पहनी जा चुकी जींस थी। आईपैड की संभावना बनने पर गर्लफ्रेंड को सूची में कुछ और नीचे खिसकाया जा सकता था। हालांकि इस लिस्ट में दी गई किसी भी वस्तु की खरीद के समय हमें परिवार की बड़ी शिद्दत से याद आती थी। अमेरीकियों की तरह हम भी फैमिली की जरूरत इतनी ही मानते थे कि बच्चा पैदा कर दे, एक धांसू नाम रख दे और कुछ बड़ा करके छोड़ दे। भले ही बाद में बाप और बेटा फैमली वैल्यूज और रिलेशन की समस्या पर पूरी दुनिया में घूमकर जवाब तलाशें। लेकिन हमें अमेरिकन बनाना है, बन के रहना है,    फिलहाल जीवन का यही उद्देश्य चल रहा है बंधु..!   अनुज खरे लेखक युवा व्यंग्यकार हैं...   Collapse
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