• संता का किस्सा: जैसे ही मैंने मुड़ा, वहां एक बहुत बड़ा शेर था ...

    संता का किस्सा: जैसे ही मैंने मुड़ा, वहां एक बहुत बड़ा शेर था ...
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    संता एक बार अफ्रीकन सफारी घूमकर इंडिया आया और अपने देसी दोस्त बंता से मिलने गया और उसे किस्सा सुनाने लगा- . "मैं जंगल में था तभी मैंने झाड़ी के पीछे से एक... Expand
    संता एक बार अफ्रीकन सफारी घूमकर इंडिया आया और अपने देसी दोस्त बंता से मिलने गया और उसे किस्सा सुनाने लगा- . "मैं जंगल में था तभी मैंने झाड़ी के पीछे से एक आवाज़ सुनी।" जैसे ही मैंने मुड़के देखा, वहां एक बहुत बड़ा शेर था।  वो अपने नाख़ून सहला रहा था और मुझे देख के मुस्कुरा रहा था।  अचानक एक भयानक दहाड़ मार कर वो मुझ पर झपटा।  मैंने पूरी ताक़त से दौड़ना शुरू कर दिया।  शेर ज्यादा पीछे नहीं था। वो मेरी गर्दन दबोचने ही वाला था कि वो अचानक फिसला और मैं थोड़ा आगे निकल गया।" . "शेर फिर मेरे पीछे लग गया। वो फिर मेरे पास आने ही वाला था कि अचानक वो फिर फिसला और मैं फिर आगे निकल गया।  तभी मुझे कुछ दूर पर एक घर दिखा।  मैंने उस घर की तरफ दौड़ना शुरू कर दिया।  शेर अब भी मेरे पीछे था। वो फिर मेरे एकदम पास आ गया।  वह मुझे पकड़ने ही वाला था की वो तीसरी बार फिसला।" . "अपनी बची खुची ताक़त बटोर कर मैं घर के अन्दर भागा और शेर के मुंह पर दरवाज़ा बंद कर दिया।" . बंता : "वाह यार, मान गया तुझे। तू तो बहुत बहादुर है। मैं तेरी जगह होता, तो मेरी तो पोटी ही निकल जाती " . . . . . . . संता : पागल, शेर फिसल किस चीज़ पर रहा था ???" Collapse
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  • Whatsapp Time Pass: फेसबुकी फिल्म डायरेक्टर्स की फिल्में...

    Whatsapp Time Pass: फेसबुकी फिल्म डायरेक्टर्स की फिल्में...
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    फेसबुक का क्रेज आजकल यूथ के दिलो-दिमाग पर छाया हुआ है और दिन में 10 बार उनके मुंह से आप फेसबुक का उच्चारण कम से कम सुन सकते हैं, ऐसा कहा जाए तो गलत नहीं... Expand
    फेसबुक का क्रेज आजकल यूथ के दिलो-दिमाग पर छाया हुआ है और दिन में 10 बार उनके मुंह से आप फेसबुक का उच्चारण कम से कम सुन सकते हैं, ऐसा कहा जाए तो गलत नहीं होगा। इसी क्रेज को देखते हुए इसी दुनिया के लोगों ने इमेजिन किया कि यदि फेसबुक वाले फिल्म बनाएं तो फिर फिल्मों के नाम क्या होंगे।    तो डालिए नजर इन नामों पर... जब वी CHAT नमस्ते फेसबुक मैंने POKE क्यों किया मेरे ब्रदर की प्रोफाइल हम LIKE कर चुके सनम हम आपके हैं म्युचल फ्रेंड्स कभी रिलेशनशिप कभी सिंगल तूने UNLIKE क्यों किया फेसबुक के सनम फेसबुक का दीवाना फेसबुक मेरी जान Collapse
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  • Funny Flash Back: मछली जल की रानी है, जीवन उसका पानी है।

    Funny Flash Back: मछली जल की रानी है, जीवन उसका पानी है।
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    आइए एक बार फिर से बचपन की मजेदार दुनिया में आपको ले जाने की कोशिश करते हैं.....   बचपन की ये लाइन्स .जिन्हें हम दिल से गाते गुनगुनाते थे ..और खेल खेलते थे ..!!... Expand
    आइए एक बार फिर से बचपन की मजेदार दुनिया में आपको ले जाने की कोशिश करते हैं.....   बचपन की ये लाइन्स .जिन्हें हम दिल से गाते गुनगुनाते थे ..और खेल खेलते थे ..!! तो याद ताज़ा कर लीजिए ...!!   मछली जल की रानी है, जीवन उसका पानी है। हाथ लगाओ डर जाएगी, बाहर निकालो मर जाएगी। ************ पोशम्पा भाई पोशम्पा, डाकुओं ने क्या किया ! सौ रुपए की घड़ी चुराई। अब तो जेल मे जाना पड़ेगा, जेल की रोटी खानी पड़ेगी, जेल का पानी पीना पड़ेगा। थै थैयाप्पा थुशमदारी बाबा खुश। ************ आलू-कचालू बेटा कहाँ गये थे, बन्दर की झोपड़ी में सो रहे थे। बन्दर ने लात मारी रो रहे थे, मम्मी ने पैसे दिये हंस रहे थे। ************** आज सोमवार है, चूहे को बुखार है। चूहा गया डाक्टर के पास, डाक्टर ने लगाई सुई, चूहा बोला उईईईईई। ************ झूठ बोलना पाप है, नदी किनारे सांप है। काली माई आएगी, तुमको उठा ले जाएगी। ************ चन्दा मामा दूर के, पुए पकाएं भूर के। आप खाएं थाली में, मुन्ने को दे प्याली में। ************ तितली उड़ी, बस मे चढ़ी। सीट ना मिली, तो रोने लगी। ड्राइवर बोला, आजा मेरे पास, तितली बोली ''हट बदमाश''। ****************** मोटू सेठ,पलंग पर लेट, गाड़ी आई,फट गया पेट।।   कुछ याद आया .....? Collapse
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  • From the web: जब चिंटू अपनी पत्नी को पिज्जा कॉर्नर ले गया...

    From the web: जब चिंटू अपनी पत्नी को पिज्जा कॉर्नर ले गया...
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    चिंटू : अरे सुना है तू अपनी गर्भवती पत्नी को पिज्जा कॉर्नर ले गया था। क्यों?  गोलू- हां, वहां फ्री डिलेवरी होती है न।  *** पंजाब रोडवेज की बस के पीछे लिखा... Expand
    चिंटू : अरे सुना है तू अपनी गर्भवती पत्नी को पिज्जा कॉर्नर ले गया था। क्यों?  गोलू- हां, वहां फ्री डिलेवरी होती है न।  *** पंजाब रोडवेज की बस के पीछे लिखा हुआ था -  जे वाहेगुरु दा हुकम होया ,तां मंजिल तक पहुचां देवांगे...  जे अंख लग गई, ते वाहे गुरु नाल ही मिला देवांगे!  *** चिंटू (अपने दोस्त से) : यारकल मेरे एक दोस्त ने मेरे फोन से मेरी गर्लफ्रेंड का नंबर ले लिया।  दोस्त: फिरक्या हुआ?  चिंटू: फिर क्या, कल से अपनी बहन को ही प्यार भरे मैसेज किए जा रहा है।  *** एक आदमी पहली बार ससुराल गया, उसकी सास ने उसे सात दिन तक सुबह-शाम पालक की भाजी खिलाई। आठवें दिन सास ने पूछा, "बेटा, क्या खाओगे?’ आदमी ने जवाब दिया, "मम्मी जी, खेत दिखा दो, खुद ही चर आऊंगा!’    Collapse
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  • Extra Shot: और एक होता है लव देहात...

    Extra Shot: और एक होता है लव देहात...
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    आजकल वाले का तो पता नहीं, लेकिन पुराने जमाने में कस्बे-देहात में किए जाने वाले लव सच में किसी जेहाद से कम नहीं थे। भले ही दोनों की जाति एक हो, जेहाद तब भी... Expand
    आजकल वाले का तो पता नहीं, लेकिन पुराने जमाने में कस्बे-देहात में किए जाने वाले लव सच में किसी जेहाद से कम नहीं थे। भले ही दोनों की जाति एक हो, जेहाद तब भी था। तब इश्क के सिलसिले का सेट-सा पैटर्न था। शुरुआत में चार-छह टन कागज लगते थे। छह सौ ग्राम शब्दों के लिए तीन से चार किलो हिम्मत लगती थी। हिम्मत की मात्रा ज्यादा इसलिए रखी गई है कि सुताई का कॉन्सेप्ट ‘टू-वे’ था। यानी उधर से बच भी गए तो घर में पता चल जाने पर पराया माल मानकर मस्त धुलाई की जाती थी। इश्क को पूरी तरह झाड़ देने पर पर्याप्त जोर रहता था। पूरे शहर में फैले जासूसों के माध्यम से दोनों पक्षों में से किसी ना किसी को पता चल ही जाता था कि ‘लाडो’ या ‘बबलू’ किन मास्साब के यहां ट्यूशन पढ़ रहे हैं। ट्यूशन का समय और कोडवर्ड्स क्या हैं। घटनास्थल की दूरी कितनी है। आज का ‘चैप्टर’ क्या है? कमीने दोस्तों और बहकाने वाली सहेलियों की संख्या कितनी है। इस कारण संबंधित प्रेम पिपासु को कमांडो किस्म का चौकन्नापन और जुझारू व्यक्तित्व लगता था। कमांडो किस्म की फुर्ती इसलिए, क्योंकि कई बार किसी भी पक्ष का योद्धा 20 मिनट के शॉर्ट नोटिस पर ही घटनास्थल पर उपस्थित हो जाता था। ऐसी भीषण घड़ी में तत्काल निर्णय और उससे भी सपाटे से अमल ही बचाव का एकमात्र जरिया होता था। रंगे हाथों पकड़े जाने पर फिर सारी ट्यूशनें घर में ही लगाई जाती थीं। निकटतम दोस्त अधिकतम दूरी तय करके हर उपलब्ध कान को इस दु:खद घटना की सूचना पहुंचाता था।  इश्क का ‘द एंड’ हो जाता था। लड़की के घर से बाहर जाने की स्थिति में भाई-मां की गार्ड साथ चलती थी। ‘क्या कर डाला..!’ अर्थात लव लेटर टाइप की गतिविधियों के बारे में भारी पूछताछ चलती थी। इस गोपनीय जांच का उजागर नतीजा हमेशा यही निकलता था कि ‘अपनी छोकरी तो गऊ है, सहेलियों ने बिगाड़ दिया।’ किसी भी सरकारी जांच कमीशन से तेज रिजल्ट लाने वाले इस कमीशन की जांच रिपोर्ट के बारे में छोकरी को छोड़कर हर आदमी को पर्याप्त डिटेल से अवगत कराया जाता था। ‘लड़की जात है’ कि अपील के साथ जांच के परिणामों की गोपनीयता बरकरार रखने का निवेदन किया जाता था। यही अपील और उम्मीद वो भी आगे वाले से लगाता था, जिसका निष्कर्ष पूरे शहर को जानकारी के रूप में सामने आता था। प्रेम में गिफ्ट देने में भी कई खतरे छुपे होते थे। कई बार जिस स्टोर से वो गिफ्ट खरीदा गया है, वहां का मालिक ही पिताजी का दोस्त या भाई साहब का क्लासमेट निकल आता था। जो उस खुदरा वस्तु के खरीदार की पहचान उजागर करने का महान कार्य संपन्न करता था। बता भी जाता था कि परसों फलां के साथ साइकिल पर बैठी दिखी थी, हमने तो बस्ते से पहचान लिया था, संभाल लो..! आड़े वक्त पर जिस सहेली के मत्थे इस गिफ्ट की जिम्मेदारी मढ़ी जाती थी, वो घरवालों की हिटलिस्ट में आकर तत्काल ही ब्लैकलिस्ट हो जाती थी।  इस जेहाद का अंतिम परिणाम लड़की की शादी के रूप में सामने आता था, जिसके क्लाइमेक्स में उसके दहेज का सोफासेट बस में चढ़ाते समय बदला लेने की कसमें खाई जाती थीं, जो बाद में खुद भी शादी को प्राप्त हो जाने के कारण दिल में ही रह जाती थीं..!  अनुज खरे Collapse
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