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  • सवालों के अक्स
    तुम्हारा जवाब मेरे मामले में हमेशा उल्टा ही होता है। मुझे पता था, तुम ये कभी नहीं कर पाओगी। तुम अपनी मां के सामने मेरा पक्ष कभी नहीं लेते। ये कोई फ़ैसले की घड़ी नहीं होती, केवल सामान्य घटनाओं पर राय देने का मौक़ा होता है, लेकिन कहने वाला उसे ऐसे व्यक्त करता है, मानो पत्थर पर लकीर खींच रहा हो। इन शब्दों में छुपा होता है बिन मांगा निर्णय, नकारात्मक राय और एक अनंत निराशा कि कभी कुछ बदलने वाला भी नहीं। इसमें अहंकार की ध्वनि भी है। ज़ाहिर है, सुनने वाले को बुरा भी लगता है और वह कच्चे मन का बच्च या युवा है, तो...
    11:17 AM
  • क्या गलत हुआ?
    सुधा क़रीब सत्तर वर्ष की हो चुकी है। सब कुछ ठीक था। पति बहत्तर वर्ष के थे और सुधा से अधिक चुस्त-दुरुस्त थे। उन्हें कोई कमी नहीं थी। बढ़िया नाश्ता, पौष्टिक लंच, शाम को चाय-कॉफ़ी, रात को स्वादिष्ट भोजन, सब कुछ मिल जाता था। मगर वृद्धाश्रम का जीवन तो कोई जीवन नहीं यह ख़्याल सुधा के मन में हमेशा आया करता। मकर संक्रांति की पूरे शहर में धूम मची थी। सुधा अपनी पुरानी यादों से बिल्कुल भी अछूती नहीं थी। उसे ख़ूब याद था कैसे उसका पूरा परिवार तिल, गुड़, मूंगफली, घी आदि से केवल लड्डू ही नहीं और भी कई-कई प्रयोग करता...
    12:10 AM
  • शिष्टाचार को लिफ्ट करा दें!
    लि़फ्ट व एस्कलेटर्स में लोग किस तरह व्यवहार करते हैं इस पर हाल ही में एक सर्वेक्षण हुआ। ये आंकड़े उन बातों को दर्शाते हैं,जिनसे लोगों को बेहद नाराज़गी है। एक नज़र डालिए इन आंकड़ों पर- ये आंकड़े साफ़ दर्शाते हैं कि सार्वजनिक स्थानों पर आदतन या जानबूझ कर ग़लत व्यवहार करने वालों को लोग सख़्त नापसंद करते हैं। लि़फ्ट और एस्कलेटर्स भी बाक़ी सेवाओं की तरह आपकी सुविधा के लिए लगाए गए हैं। इन पर हर व्यक्ति का बराबर हक़ है। इसलिए ऐसे स्थानों पर कुछ अहम बातों का ध्यान रखें.. बार-बार बटन दबाकर लि़फ्ट-लि़फ्ट...
    12:06 AM
  • अगड़म + बगड़म = बिगड़म
    यह समीकरण आधुनिक जीवनशैली की कड़वी सच्चई है। अनजाने दर्द, अनचीन्हे रोग और हॉर्मोन की अनियमितताओं की जड़ अगड़म-बगड़म भोजन ही है। एक फिल्म सुपर साइज़ मी में व्यक्ति फास्ट फूड के भयावह नतीजों को चुनौती देते हुए लगातार एक महीने तक इसी तरह का खाना खाकर दिखाना चाहता है। उसका दावा है कि इससे कोई नुक़सान नहीं होता। क्या वाक़ई ऐसा ही था? एक महीने बाद वह उच्च रक्तचाप, बेहद ज्यादा कोलेस्ट्रॉल और सिरोसिस की सीमा तक बीमार लीवर का मालिक बन चुका था। उसका वज़न 12 किलो बढ़ चुका था और वह डिप्रेस्ड, मूडी और आलसी भी हो...
    April 9, 11:49 AM
  • रंग हमारी रगों में हैं...
    हम रंगीन देश के निवासी हैं। तभी तो बेरंग दुनिया से आए लोग दांतों तले उंगली दबाए रहते हैं। एक युवा विदेशी ने पिछले महीनों हमारे देश की सैर की। अपने अनुभवों में उसने रंगों-भरे देश की बात तो की ही, जैसलमेर के मरु उत्सव का ख़ासतौर पर ज़िक्र किया। उसे सबसे यादा हैरानी हुई, पुरुषों द्वारा एक लम्बे कपड़े को परिधान की तरह बांध लेने के कौशल पर। वह शायद धोती की बात कर रहा था। इसके साथ ही वो हैरान था पुरुषों के कुंडल, कंठहार और पैरों में मोटे कड़ों जैसे आभूषण धारण करने के बावजूद, उनके छलकते पौरुष को देखकर।...
    April 9, 11:41 AM
  • हर शख्स बस एक को पढ़ा ले, तो निरक्षरता का अंधेरा मिटते देर नहीं लगेगी। चेन्नई में यह सोच विस्तार ले रही है, जहां ढेरों महिलाएं अपनी घरेलू कामगार को अक्षर ज्ञान देनेमें जुटी हैं। लग रहा था कि सारे काम निबट चुके हैं। माहौल साफ़-सुथरा और व्यवस्थित नजर आ रहा था। कपड़े टंगे हुए थे और धुले बर्तनों का ढेर सूखने के लिए रखा हुआ था। सबकुछ किसी आम भारतीय घर की तरह था, लेकिन तब तक मैं कुछ पलों बाद आने वाले अचम्भे के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थी। घर के अंदर, किसी कोने से आवाजों आ रही थीं। कोई अंग्रेजी के हिज्जे...
    April 9, 11:41 AM
  • आपका मत अनिवार्य है...
    महिला हो या पुरुष, आम चुनावों के जरिए चुनी जाने वाली सरकार हर व्यक्ति के जीवन को प्रभावित करेगी। फिर हम इन चुनावों से अछूते या अलग क्यों रहें! आइए, सोच-समझकर मत दें और लोकतंत्र के इस अद्भुत महोत्सव में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें.. ये आम चुनाव नौ चरणों में हो रहे हैं। चरण का अर्थ क़दम भी है। यह आपका क़दम है। सिर्फ़ आपके क़दम बढ़ाने या न बढ़ाने पर निर्भर करता है कि ये चुनाव हमारे देश को प्रगति, ख़ुशहाली और मजबूती की ओर ले जाएंगे या अंधकार और हताशा के गर्त में। इसलिए घर से बाहर क़दम बढ़ाइए, वोट देने के लिए...
    April 2, 11:49 AM
  • सवाल अच्छे हैं....
    समय है साक्षात्कार का..! इंटरनेट पर पूरी खोजबीन करके, कम्पनी के बारे में पता करके, उत्तम कपड़ों का चयन करके आज आप पूरी तरह तैयार हुए हैं। कमरे में जोशीले अंदाज़ के साथ प्रवेश करते ही, उनके हर सवाल का आत्मविश्वास के साथ जवाब दिया आपने। साक्षात्कारकर्ता की तरफ़ से अब सवालों की झड़ी हुई ख़त्म। वे आपसे कहते हैं, हम जो कुछ जानना चाहते थे, हमने पूछ लिया। अब आपके मन में कोई सवाल हो, तो आप पूछ सकते हैं। उनकी इस बात पर आपकी क्या प्रतिक्रिया होगी.. आप का जवाब शायद कुछ ऐसा ही होता होगा। साक्षात्कार आपको देना है,...
    April 2, 11:45 AM
  • सम्मान
    आज सुबह से ही कुछ अजीब-सा मौसम था। शाम होते-होते तूफ़ान शुरू हो गया था। राजेश अब तक घर नहीं आए थे, सो मैं हर दो मिनट में चिंतित होकर खिड़की से बाहर देखने चली जाती। इतने में घंटी बजी, मैं दौड़कर दरवाज़ा खोलने गई, तो देखा राजेश थे। रसोई में जाकर चाय-नाश्ता तैयार किया और उनके साथ आकर बैठ गई। हम चाय की चुस्कियां ले रहे थे कि अचानक ज़ोरदार गरज के साथ बारिश होने लगी और पल भर में बिजली भी गुल हो गई। खिड़की पर जाकर देखा तो दूर-दूर तक रोशनी नज़र नहीं आ रही थी। मैं और राजेश इस घर में तीन साल पहले रहने आए थे। तब से अब तक...
    April 2, 11:36 AM
  • मौसम की अदला-बदली में
    आयुर्वेद के अनुसार, शारीरिक शुद्धि के लिए यह मौसम उत्तम है। साथ ही इन दिनों कफ जन्य रोगों की शिकायतें भी बढ़ जाती हैं और सर्दी-जुक़ाम, खांसी, गला ख़राब होना और श्वास सम्बंधी रोग अधिक परेशान करने लगते हैं। इसलिए सेहत का विशेष ख़्याल रखने की हिदायत दी जाती है। ऋतु परिवर्तन के समय हमारे शरीर की रोगप्रतिरोधक शक्ति कम हो जाती है। दूसरी ओर सर्दी के मौसम में हमारे शरीर की पाचक अग्नि प्रबल होती है, सो गरिष्ठ भोजन का सेवन अधिक होता है। ऐसा भोजन पूर्ण रूप से न पच पाने के कारण एक विषैला तत्व (टॉक्सिन)आम पैदा...
    March 26, 11:49 AM
  • ज़िंदादिल ज़ोहरा
    जो हरा सहगल का नाम लेते ही आंखों के सामने 101 बरस की ख़ुशमिजाज महिला का चेहरा उभर आता है, जो नृत्य और अदाकारी के हुनर के लिए दुनियाभर में मशहूर है। जैसा कि शीर्षक है, यह आत्मकथा जोहरा को वाक़ई क़रीब से जानने-समझने का जरिया है। मशहूर लोगों के बारे में आम राय होती है कि प्रसिद्धि ने उनकी हर मुश्किल दूर कर दी होगी। हालांकि नवाबी ख़ानदान से ताल्लुक़ रखने वाली जोहरा की ज़िन्दगी बिल्कुल रोलर-कोस्टर यात्रा जैसी रोमांचकारी और उतार-चढ़ाव से भरी हुई है। उन्होंने जर्मनी से डांस सिखाने का डिप्लोमा किया, फिर उदय...
    March 26, 11:46 AM
  • इस जुमले को नकारात्मक नहीं, सकारात्मक मानें। ये प्रतिक्रिया है, जो दूसरों को याद दिला देती है कि कैसा व्यवहार क़ुबूल नहीं किया जाएगा। हर क्रिया की एक प्रतिक्रिया होती है, स्कूल में पढ़ा था। लेकिन ये बात हमें व्यवहार के मामले में याद रहती है? यहां किसी को अपशब्द कहने पर मिलने वाली प्रतिक्रिया की बात नहीं की जा रही है। यहां तो उन अन्यायों पर ख़ामोश रह जाने का ज़िक्र है, जो इंसान को धीरे-धीरे अपने ही हक़ की तरफ़ लापरवाह बना देते हैं। इसका सबसे दुखद पक्ष यह है कि ऐसा फिर ज़िंदगी के हर पहलू में होता है।...
    March 26, 11:29 AM
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