मधुरिमा
Home >> Madhurima
  • शिक्षक का कर्तव्य
    बात क़रीब छह वर्ष पुरानी है। तब मैं मध्यप्रदेश की आलोट तहसील के जीवनगढ़ गांव में पढ़ाती थी। उस समय सातवीं कक्षा में जितेन्द्र नाम का बालक भी था। वह पढ़ने में कमज़ोर व संकोची स्वभाव का था। उस वर्ष परीक्षा में वह जैसे-तैसे अन्य विषयों में तो उत्तीर्ण हो गया, किंतु मेरे विषय सामाजिक विज्ञान में चार अंकों से चूक गया। परिणाम पाकर अन्य बच्चों के चेहरे खिल उठे, किंतु वह मुंह लटकाए बैठा रहा। बहुत देर बाद कुछ हिम्मत जुटाकर मेरे पास आया और बोला- मैडम, चार नम्बर बढ़ा दीजिए, मैं पास हो जाऊंगा। यह परिणाम पिताजी...
    February 10, 12:09 AM
  • बदलाव अच्छे हैं
    घर का अच्छा और सुंदर इंटीरियर किसको नहीं पसंद! लेकिन अक्सर बड़े ख़र्च के बारे में सोचकर हम रुक जाते हैं। हालांकि यह ज़रूरी नहीं कि ढेर सारा पैसा ख़र्च कर ही घर को अलग और नया दिखाया जा सके। इसके लिए छोटे बदलाव भी काफ़ी हैं, जो कम ख़र्च पर आसानी से हो सकते हैं। जानिए ऐसे ही कुछ तरीक़े... बिन मेल भी मिलेंगे आमतौर पर एक तरह की डिज़ायन के सामानों को लोग वरीयता देते हैं। इसलिए चादर, तकिए के गिलाफ़, सोफ़े के कवर या कुशंस, गद्दे के खोल जैसी चीज़ों को एक ही डिज़ायन या पैैटर्न में ख़रीद लेते हैं। अगर आपने भी अब तक घर...
    February 10, 12:08 AM
  • गिरा अनयन नयन बिनु बानू...
    न्यूज़ीलैंड की बात निकलते ही एक अद्भुत भूभाग की अविस्मरणीय छवियां मस्तिष्क में कौंधने लगती हैं। टापुओं का देश! प्रशांत महासागर में अलसाते हुए दो बड़े भूभागों नाॅर्थ व साउथ आइलैंड के साथ ही अनगिन छोटे-छोटे टापुओं से मिलकर बना है यह मनमोहक देश। हरीतिमा, ज्वालामुखी और हिमप्रपात इसे अनोखे नैसर्गिक सौंदर्य का धनी बनाते हैं। वजह शायद यह भी है कि न्यूज़ीलैंड विश्व के उन स्थानों में है, जहां मानव की बसाहट बहुत बाद में हुई। यानी न कोई पेड़ों को काटने वाला, न ज़मीनों को खोदने वाला, न पानी में गंदगी फेंकने...
    February 10, 12:07 AM
  • पूरे घर पर हो नज़र...
    घर की साज-सज्जा और सफ़ाई तो ज़रूरी है, साथ ही यह भी ज़रूरी है कि अनावश्यक और ख़राब चीज़ों को हटाया जाए। ...ताकि सुंदरता बनी रहे मसकारा या अन्य सौंदर्य उत्पाद चार-छह माह में बदल देने चाहिए। ब्रश के माध्यम से त्वचा के कणों और सूक्ष्म जीवों के सम्पर्क में आने से ये ख़राब होते हैं। ऐसे ही दूषित लिप ग्लॉस या लिपस्टिक फटे होंठों पर फिराने से संक्रमण की आशंका रहती है। इसी तरह, कॉन्टेक्ट लैंस के केस को भी दो-तीन माह में बदलती रहें। सनस्क्रीन की मियाद पूरी होने का भी ध्यान रखें। रसोई तो है ही आपकी बीपीए युक्त...
    February 10, 12:06 AM
  • एक दिन का काम छ: दिन का आराम...
    हम भारतीय तीनों समय का भोजन बनाते हैं। विदेशियों की तरह किसी एक समय को हम नहीं चुन सकते। लेकिन दौड़-भाग के बढ़ जाने के कारण हम भी अस्वस्थ जीवनशैली की ओर बढ़ चले हैं। बावजूद इसके कुछ उपाय अपनाकर हम अपने ताज़ा भोजन की परम्परा को जारी रख सकते हैं। इसके लिए शेफ़ वाली शैली अपनाएं, जो व्यवस्थित रसोई का दूसरा नाम है। बाज़ार से सब्ज़ियां लेकर आएं, उसी वक़्त उन्हें छांटकर अलग कर लें। पत्तेदार सब्ज़ियां धोकर, गहरी छलनी में रखें। पानी निथर जाने पर साफ़ किचन बैग्स में भरकर फ्रिज में रखें। फूलगोभी के बड़े टुकड़े काटकर...
    February 10, 12:05 AM
  • सेवई मूंग चाउमीन
    25 मिनट में दो लोगों के लिए पहले एक बड़े बर्तन में 50 ग्राम सेवई को दो कप पानी में डालकर 10 मिनट उबालें। इसके बाद पानी को निथारकर सेवई को अलग रख लीजिए। अब नॉनस्टिक पेन में एक बड़ा चम्मच तेल गर्म होने दें। इसमें एक बारीक कटे प्याज़ को दो मिनट तक भूनें। फिर एक कप अंकुरित मूंग दाल के साथ एक लम्बाई में बारीक कटी शिमला मिर्च, एक कप गाजर के टुकड़े, एक बारीक कटी पत्तागोभी डालें। इन्हें धीमी आंच पर 10 मिनट तक चलाते हुए पकाएं। अब इसमें उबली सेवई डालकर 2 मिनट चलाएं। फिर एक छोटा चम्मच सिरका व इतना ही सोया सॉस डालें और...
    February 10, 12:04 AM
  • हमें समझेंगे तब जानेंगे...
    युवा ख़र्चीले हैं, उन्हें दूसरों से कोई मतलब नहीं, बस अपने में रहना चाहते हैं। ऐसी बातें अक्सर ही घर के बड़े, युवाओं को लेकर कहते हैं। लेकिन एक युवा होने के नाते मैं बड़ों से पूछना चाहूंगा कि क्या आप इनके पीछे के कारण जानते हैं? जवाब शायद न मिले। यह ज़रूरी है कि अगर आप हम युवाओं को समझना चाहते हैं, तो हमारे ऐसे व्यवहार के पीछे के कारण भी जानें। यहां युवाओं के पक्ष को स्पष्ट करतीं ऐसी ही बातें बता रहे हैं, जो उन्हें समझने में आपकी मदद कर सकती हैं... सफलता ही प्रमाण है नई टेक्नोलॉजी से जुड़ना, लगातार अपडेट...
    February 10, 12:03 AM
  • जी मेरे लिए प्रे करना
    आज पिछला साल बहुत याद आ रहा है। तब कॉलेज का पहला साल था और हम सब वैलेंटाइंस डे को लेकर कई प्लांस बना रहे थे। हम सब मतलब हमारा बॉयज़ गैंग। स्कूल तक तो यह प्योरली ख़्याली था। और इन दिनों तो एक्ज़ाम ही हमारा वैलेंटाइन होता था। फिर पिछले साल लगा कि कॉलेज की फ्रीडम में अब बिंदास यह दिन मनाएंगे। सच कहूं, तो पूरी जनवरी के दिनों में मैंने जाने कितनी बार अपना बैग कॉलेज ग्राउंड में छोड़ दिया था कि कोई आलिया (भट्ट और कौन) जैसी लड़की आकर मुझे बैग देगी और जब मैं उसे खोलूंगा, तो उसमें एक कार्ड, चॉकलेट और डांसिंग कपल...
    February 10, 12:02 AM
  • बड़ी आसानी से बढ़ता हैदिमाग़...
    छात्र हो या घरेलू महिला, या फिर कोई बुज़ुर्ग- सबको दिमाग़ बढ़ाना है। लेकिन यह बढ़ता कैसे है? जवाब सीधा और सरल है, जिसे हम बचपन से सुनते आ रहे हैं- दिमाग़ इस्तेमाल करने से बढ़ता है। परंतु मुश्किल यह है कि हम यह नहीं जानते दिमाग़ का इस्तेमाल किस तरह करना है। अगर हम याद्दाश्त बढ़ाने के लिए ज़्यादा से ज़्यादा बातें याद रखने की कोशिश करेंगे, तो चक्कर में पड़ जाएंगे। गणित के बड़े-बड़े सवाल हल करने बैठेंगे, तो शायद जल्दी ही ऊब जाएंगे। किसी कठिन विषय पर सिर खपाएंगे, तो मुमकिन है कि कुछ पल्ले ही न पड़े। इसलिए फ़िलहाल यह सब मत...
    February 10, 12:01 AM
  • यहां के अंधेरे भी दिलचस्प हैं...
    हर शहर में होते हैं चंद पुराने, उजाड़ पड़े मकान। उजाड़- यह शब्द ही कितना पीड़ादायक है। उजड़े मकानों में दिन में जानवर घूमते हैं और रात में कहानियां। इन मकानों के दरवाज़े हमेशा खुले रहते हैं, फिर भी कोई नहीं जाता। किसी-किसी के आस-पास कोई पेड़ ख़ुद को जीवित रख ले, तो इन मकानों के सूनेपन को अपने पत्तों से भर देता है। दिन में इनकी चरमराहट कभी हवा के कारण होती है, कभी प्राणियों के। रात को ये आवाज़ें प्राणियों के दूर रहने का कारण बन जाती हैं।ऐसे किसी मकान को कभी बहुत ध्यान से, पूरा वक़्त लगाकर देखिएगा। हवेली या...
    February 10, 12:00 AM
  • वाना
    वाना के बिना जीवन की कल्पना करना कठिन था। वाना, उसके परिवार को एक धागे में पिरोने वाला नाम! वाना, समूचे परिवार की धुरी!लेकिन वह वाना की असलियतसे कोसों दूर था। चारों तरफ़ उतुंग बर्फ़ की चोटियों से घिरे अटांग में कुल मिलाकर ग्यारह घर थे। किन्नौर से आगे, आसमां के कुछ और नज़दीक था, वह गांव। शुरू में आठ घरों से बसा था। तब इसका नाम रहा होगा, अष्टांग। अब घर फैलते हुए ग्यारह हो गए और नाम घिसता हुआ अटांग हो गया। उनका दो कमरों का कच्चा मकान था। एक काका, दो भव्वा, बड़े भव्वा को सभी आदर से दाजू कहते थे। दो भतीजे,...
    February 9, 01:21 PM
  • माया को कुछ नहीं आता...
    भैया ने माया की तारीफ़ की,तो उसे अच्छा नहीं लगा।लेकिन भाभी उसके काम में कमियां निकालतीं, तो उसे अच्छा लगता।इस उल्टे-पुल्टे के पीछे क्या थी वजह...? मेरे हाथ से गिरकर यह नन्हा गमला फिर टूट गया भाभी...। मिट्टी और पौधे को समेटती माया ने भाभी को देखकर नादान बन बच्चों जैसा मुंह बना लिया। पास ही हरी घास में उसकी पांच माह की बिटिया खेल रही थी। माया ने भाभी को पौधा सौंपकर हाथ साफ़ किए और बिटिया को गोदी में लेकर वहीं बैठ गई। भाभी ने सधे हुए हाथों से नए गमले में पौधा लगाया और गमला तोड़ दिया माया ने... क़रीब-क़रीब...
    February 9, 01:20 PM
  • अंतत: सुरक्षित
    बचपन से कोई सुरक्षित नहीं मानता था, इसलिए हमेशा घर का कोई न कोई साथ रहता ही था। लेकिन बेटे ने आख़िरकार पूर्ण सुरक्षाकी व्यवस्था कर ही दी... रात के ढाई बज रहे थे। सड़क किनारे खम्भे की बार-बार चालू-बंद होती धुंधली-सी रोशनी में एक बुज़ुर्ग आकृति बेंच पर बैठी नज़र आ रही थी। बुढ़िया माई के हाथ में छड़ी थी, जो शायद उनकी झुकती कमर का एकमात्र सहारा थी। गोद में बच्चे की तरह एक पुराना सूटकेस हज़ारों यादें लिए पड़ा था। तभी एक हवाई जहाज़ की आवाज़ ने रात के सन्नाटे को चीर दिया। माई ने आसमान की तरफ़ देखा, फिर अपने ठीक सामने...
    February 9, 01:19 PM
  • माचिस क्यों, लाइटर क्यों नहीं
    एक दिन मैं किचन में खाना बना रही थी। तभी मेरे दस वर्षीय बेटे को पता नहीं क्या सूझी कि एकदम से अाकर बोला, मां, हमारे यहां गैस जलाने का लाइटर क्यों नहीं है, आप माचिस से गैस क्यों जलाती हैं? सच भी था, मैं हमेशा माचिस से ही गैस चूल्हा जलाती थी। पर असल बात यह थी कि मैं लगभग हर कम्पनी का लाइटर ख़रीद चुकी थी, लेकिन वह कुछ दिनों में ख़राब हो जाता था। इस बारे में जब परिचितों से पूछती तो वे कहते, पता नहीं, हमारा तो दस साल में एक बार भी ख़राब नहीं हुआ। मुझे समझ में न आता कि ऐसा मेरे साथ ही क्यों होता है। इसलिए तंग आकर...
    February 9, 01:18 PM
  • प्रकृति ही मां सरस्वती है
    इसलिए वसंत पंचमी को प्रकृति पूजन का अवसर कह लें या सरस्वती आराधना का पर्व, बात एक ही है। वसंत मूल रूप से प्रकृति का पर्व है। इस प्रकृति के विविध रूप हैं। कहीं वह स्वर्णिम आभा लिए सरसों तथा गेहूं की बालियों के रूप में लहलहाती है, तो कहीं रंग-बिरंगी मनमोहक तितलियों के भेष में मंडराती है। कहीं प्रकृति बौर से लदे आम्र वृक्षों से सजी धरती बन जाती है, तो कहीं नीले आकाश में विस्तारित हो जाती है। प्रकृति के अनगिनत रूप हैं और हर रूप बेजोड़। हरीतिमा से आच्छादित पर्वत शृंखलाएं हों या कलकल करतीं नदियां-...
    February 9, 06:31 AM
  • प्रण की तितली उड़ गई!
    पहली जनवरी को बड़े जोश से जो प्रण लिए जाते हैं, अमूमन छह दिन या बहुत हुआ तो लड़खड़ाते एक महीने में काफ़ूर हो जाते हैं। प्रण ग़लत नहीं, इरादा भी नेक है, तो चूक कहां होती है? सोचा था ज़्यादा,कम की क्षमता थी... नए साल के जोश में ज़्यादा सोच-विचार ही नहीं किया। बस, प्रण लेने थे, सो एक साथ कई ले लिए। रोज़ व्यायाम करेंगे, जल्दी उठेंगे, किताब पढ़ेंगे, डायरी लिखेंगे इत्यादि। ऐसा लगा, जैसे एक ही दिन में ख़ुद को पूरा बदल डालेंगे। पर शुरुआत से ही अन्य कार्यों के चलते दिक़्कत आने लगी और एक-एक कर प्रण छूटते चले गए। मन भी टूट गया।...
    February 3, 12:16 AM
  • हर हाल बेगाने, पराएपन की पीड़ा से बिंधे दिलों की कहानियों का संग्रह है। मृदुला गर्ग जैसी मंझी हुई कथाकार की क़लम से सरजी ये कहानियां विदेश में बसे भारतीयों के मन का आईना हैं। परदेस में जो कुछ सहा जाता है, मन कैसे मसोसा-मरोड़ा जाता है, यह तो संग्रह के शीर्षक से ही ज़ाहिर हो जाता है, लेकिन कहानियों का शिल्प कुछ ऐसा है कि परायापन केवल परदेसियों की ओर से ही नहीं, अपनों के हाथों भी मिलता और उसी तीखेपन से चुभता महसूस होता है। अमूमन कहानियां एक पात्र का सिरा पकड़कर चलती हैं और अपनी बात रखती जाती हैं। यहां...
    February 3, 12:09 AM
  • अरे! कैमरा अच्छा, फोटो खराब
    महंगा डिज़िटल कैमरा ख़रीदा लिया। फिर भी फोटो कभी धुंधले हो जाते हैं, तो कभी अंधेरा छा जाता है। फोटो उतनी अच्छी नहीं आती, जितनी आनी चाहिए थी। ऐसी समस्याएं अक्सर नए फोटोग्राफर्स को आती हैं। अगर आपको भी ऐसी परेशानियां पेश आ रही हैं, तो ज़रा ग़ौर करें- अरे! हाथ कब हिले समस्या- नए फोटोग्राफर जिस समस्या से सबसे ज़्यादा दो चार होते हैं, वह है फोटो के धुंधलेपन की। यह तकनीकी कारणों से लेकर कैमरा हैंडलिंग के कारण हो सकती है। क्या करें- इससे बचने के लिए कैमरे की शटर स्पीड कम न रखें। यह 1/100 से ज़्यादा ही हो। इसके...
    February 3, 12:07 AM
  • वेज से आगे वेगान
    यूं तो खानपान को लेकर अब तक हम लोगों को सिर्फ़ मांसाहारी और शाकाहारी में ही बांटते आए हैं। लेकिन शाकाहार के भीतर भी एक नया चलन देखने में आ रहा है, जिसमें लोग मांसाहार को तो त्याग ही देते हैं, जीव-जंतुओं से मिलने वाले खाद्य पदार्थों से भी परहेज करते हैं। यानी अनाज, फल, सब्ज़ियां और कंद-मूल ही लेते हैं। पश्चिमी देशों के इस चलन को वेगानिज़्म कहा जाता है और इसके तहत आने वाले फूड व लोगों को वेगान कहते हैं। यह जीवनशैली अपनाने वाले लोग हमारे देश में भी तेज़ी से बढ़ते जा रहे हैं। चलिए, जानते हैं वेगान से जुड़ी कुछ...
    February 3, 12:05 AM
  • अनजान था अजनबी नहीं
    ये अनुभव मेरी सहेली के हैं, पर मुझे लगता है कि हर महिला इस अहसास को समझ सकती है। आगे की बातें सहेली के शब्दों में... फ़ेसबुक पर कई बार उसकी फ्रेंड रिक्वेस्ट आई। आख़िरकर एक दिन हैलो-हाय हो ही गई। फिर लम्बा अरसा बीता, नेट पर सक्रिय नहीं रही। एक दिन मन हुआ तो फ़ेसबुक खोला। न जाने कितने मैसेज़ थे उसके- प्लीज़ टॉक टू मी। सोचा, चलो इस विदेशी मित्र से चैटिंग की जाए, वहां की संस्कृति के बारे में पता चलेगा। बातें शुरू हुईं। फिर रोज़ ही गुड मॉर्निंग, गुड नाइट, ब्रेकफास्ट लिया, लंच हुआ, डिनर लिया, क्या कर रही हो, कैसी...
    February 3, 12:04 AM