मधुरिमा
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  • साझा सब है, सब होगा भी!
    22 अप्रैल, पृथ्वी दिवस इस धरा के सुख बांटे हैं हमने। और जो अब सोच रहे हों कि अपने हिस्से कम आया, तो मोल लगाने पर हासिल हो सकेगा, सो भूल होगी। सबकुछ सबका रहा है। जो अब भी न जागे, तो दुख भी साझे ही होंगे। बेमौसम बारिश और ओलों से हुई बर्बादी पर एक टीवी रिपोर्ट में कहा गया - किसान की इस मौसम की फ़सल बर्बाद हो गई। इस वाक्य में कुछ ग़लत या अटपटा नहीं है। हम आदी हैं, ऐसी बातें सुनने-कहने के। इसी से साबित हो जाता है कि हम अपनी धरा से, उसके दर्द से कितनी दूरी बना चुके हैं। ध्यान दीजिएगा जनाब, किसान महीने-भर किसी...
    April 22, 12:00 AM
  • उल्टी सोच का सैलाब
    फेसबुक एक ऐसी दुनिया है, जिसे मेलजोल बढ़ाने और लोगों को सामाजिक बनाने के लिए रचा गया था। लेकिन अपने फेसबुक अकाउंट में एक बार झांककर देखें कि आज कितने लोगों ने सकारात्मक पोस्ट डाली हैं या ख़ुद आपने कितनी सकारात्मक पोस्ट लाइक या शेयर की हैं? यहां तो नकारात्मकता और उल्टी सोच का सैलाब आया हुआ है। इस आभासी दुनिया को भी हम अपनी असली दुनिया जैसा ही बना रहे है। या नक़ली चेहरों से भरी यह आभासी दुनिया हमें असल ज़िंदगी में नकारात्मक बना रही है? शोध ने कियासोचने पर मजबूर सोशल वेबसाइट्स से लोगों के रवैये...
    April 15, 12:00 AM
  • सांसत में सांस
    अगर सुनें कि किसी को अस्थमा हो गया है, यानी दमे का रोग, तो अमूमन ऐसी प्रतिक्रिया होती है, मानो जान पर घात आ पड़ी हो! हां, यह मुश्किल हालात की ओर इशारा करता है, लेकिन इसे सम्भाला जा सकता है। दमा है क्या? इसे समझने के लिए फेफड़ों की बनावट को समझना होगा। हम पेड़ को उल्टा खड़ा करने की कल्पना करें, यानी जड़ें ऊपर की ओर। अब पेड़ के तने को सांस की वह मुख्य नली, यानी विंड पाइप मानें जो गले से उतरकर फेफड़ों तक जाती है। यह मोटे कार्टिलेज की बनी होती है, सो सिकुड़ती नहीं। इस तने से जुड़ी हैं पेड़ की छोटी-बड़ी शाखाएं। ये हैं...
    April 8, 12:00 AM
  • चिड़चिड़ेपन के फायदे
    हमेशा सुना है कि मीठी ज़बान से दिल जीते जाते हैं, मगर इसमें क्या कमाल! असली आज़माइश तो यह है कि तल्ख़ मिज़ाजी के बावजूद महबूब आपको चाहे। एक बदमिज़ाज आदमी को सात ख़ून माफ़ होते हैं, क्योंकि इस बेचारी (ख़ूबी) में बर्दाश्त का माद्दा बिल्कुल नहीं होता है। चिड़चिड़ेपन के फ़ायदों के बारे में तफ़्सील से जानिए। हमको बचपन से तालीम मिली थी कि ख़ुशमिज़ाजी औरत का सबसे बड़ा गुण है। लेकिन जनाब तजुर्बे और मुशाहिदे ने हमें कुछ और ही सबक़ सिखाया। और वह था चिड़चिड़ेपन का फ़ायदा, यानी वह सब जो हम इतने साल की ख़ुशमिज़ाजी से न हासिल कर...
    April 1, 12:00 AM
  • हर हाथ जल्लाद
    न कोई सुनवाई, न सुबूत, न गवाह, न सफ़ाई का मौक़ा। लात-घूंसे, पत्थर, डंडे से बर्बर पिटाई और मौत! क्या ऐसे समाज की कल्पना की थी हमने? अब तो कोई भी सुरक्षित नहीं लगता। दीमापुर में 5 मार्च को जो कुछ हुआ, उसकी तकलीफ़ अब भी पूरा हिंदुस्तान महसूस कर रहा है... पर क्या यह घटना सिर्फ़ अफ़सोस जताने या सिस्टम को कोसनेभर की है? बीच सड़क दस हज़ार की भीड़ का तालिबानी इंसाफ़ यह साबित करता है कि तमाम बातों के बावजूद हम अपने उस सिस्टम को रत्ती भर भी आगे नहीं खिसका पाए हैं, जिसे हर ऐसी वारदात के बाद बिल्कुल बदल देने की बात...
    March 25, 12:00 AM
  • खुशी की एक मकाम यह भी
    काम करने को लेकर अलग-अलग सोच हैं हमारे समाज में। जी हां, अब भी हैं।एक का पक्ष सुन लीजिए, शायद कुछ तस्वीर साफ़ हो! बहुत बार मुझसे ये सवाल पूछे गए हैं- तुम्हें नौकरी करने की क्या ज़रूरत है? पति नौकरी कर तो रहे हैं, कोई कमी रह जाती है क्या? कोई इल्ज़ाम लगाने वाले लहज़े में कहता है- ख़ूब हाथ खुला होगा तुम्हारा, तभी तो एक की कमाई कम पड़ती है। लेकिन ज़्यादातर की राय यही होती है- घर में रहना पसंद नहीं है, इसलिए काम करती हैं आज की औरतें। घर से िनकल जाएं, तो बस आज़ाद। फिर क्या फ़िक़्र घर की, रिश्तों की! बस, अपने कमाओ, और उड़ाओ।...
    March 18, 12:00 AM
  • बड़े बढ़ाएं तो छोटू संवरे
    बड़ों के अनुभवों की छांव नन्ही कोपलों को न सिर्फ़ ज़िंदगी की कड़ी घूप से बचाती है, बल्कि स्नेहसिक्त विकास देती है। बुजुर्गों से दूरी, बच्चों के हित में कहां...? बुजुर्ग अक्सर कहते सुने जाते हैं कि मूल से ज़्यादा प्यारा सूद होता है। सूद (ब्याज) से यहां आशय नाती-पोतों से है। शायद ही कोई व्यक्ति हो, जो अपने बच्चों के बच्चों के साथ ज़्यादा से ज़्यादा समय न बिताना चाहता हो। कई वृद्धों की तो सारी ख़ुशियां पोते-पोतियों के इर्द-गिर्द होती हैं और वे जीते भी उन्हीं के लिए हैं। एक छत के नीचे तीन पीढ़ियों का साथ...
    March 11, 12:00 AM
  • इक डाल के पात सब
    अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का अवसर है। कम होना, कम मानने पर निर्भर है। कम समझा जाना पहले ख़ुद के दिमाग़ में उपजता है और फिर दूसरे की सोच में शामिल होता है। क़ुदरत में ऐसा फ़र्क़ कहीं नहीं है। अब हमारे बीच, यहां भी न हो! कोई पात यह मानेगा कि वो कम हरा है, वो भी महज़ इसलिए कि दूसरी डाल का एक अन्य पत्ता ऐसा मानता है? पेड़ का इससे कोई ताल्लुक़ नहीं। यह पत्तों की निजी राय है। पेड़ के लिए दोनों समान हैं। समान हैं भी। आज क़ुदरत के अपने हिस्से पर इक समदृष्टि डालकर भी देखते हैं। आइए, एक बच्ची से मिलते हैं। रानी...
    March 4, 12:00 AM
  • क्रिकेट धर्म है
    आपने इससे क्या सीखा है? भारत में यह पूछना बेमानी है कि आपके लिए क्रिकेट की क्या अहमियत है। जो खिलाड़ी नहीं है, वह दर्शक और स्वघोषित विशेषज्ञ तो है ही। आपने क्रिकेट खेला, देखा, मैचों का विश्लेषण किया... क्या क्रिकेट से कुछ सीखा भी? भारत में भले ही कोई क्रिकेट खेले, न खेले, पर देख ज़रूर लेता है। देश में यूं तो महिलाएं क्रिकेट में कम ही रुचि रखती हैं, परंतु भारत और पाकिस्तान के मुकाबलों का रोमांच ऐसा होता है कि वे भी टीवी के सामने बैठ ही जाती हैं। लोग सच ही कहते हैं कि भारत में क्रिकेट भी एक धर्म है।...
    February 25, 12:00 AM
  • सर्वेश्वर शिव
    शिव सबके प्रिय हैं और सब शिव के प्रिय हैं। दसों दिशाओं में वे एक समान पूजनीय हैं। वे महादेव हैं। जानिए, इस अद्भुत आकर्षण का रहस्य। आदि शंकराचार्य रचित निर्वाण षट्कम कहता है- शिवोऽहम्। अर्थात मैं स्वयं शिव हूं। मैं भी शिव की बात स्वयं से शुरू करता हूं। मुझे लगता है कि मैं भगवान शिव की तरफ़ आकर्षित हुआ, क्योंकि मैं भी उनकी तरह विद्रोही और ओढ़ी गई अभिजातता का विरोधी हूं। शिव की सहजता मुझे आकर्षित करती है। लेकिन, राजा-महाराजा, चक्रवर्ती सम्राट भी शिव के अनन्य भक्त रहे हैं। एक तरफ़, निर्धन, दीन-हीन,...
    February 18, 12:00 AM
  • अपेक्षा प्रेम की उपेक्षा
    हमने प्यार या विवाह किया। एक व्यक्ति के इर्दगिर्द अपने सपनों का संसार बुन लिया। उस शख़्स से दुनियाभर की उम्मीदें भी जोड़ लीं। और फिर दिक़्क़त शुरू हो गई! प्यार और विवाह सबसे ज़्यादा किस कारण से दरकते हैं? प्रेम दिवस के ठीक पहले यह सवाल बड़ा अजीब लगेगा, लेकिन शायद इसी में प्यार और रिश्ते को पुख़्ता बनाने का रहस्य भी छुपा है। जवाब आसान है : उम्मीदें पूरी न होने के कारण। लेकिन फिर यहां सवाल उठता है कि सारी उम्मीदें तो शायद अन्य रिश्तों से भी पूरी नहीं होतीं। परंतु, उम्मीदें पूरी न होने का कारण...
    February 11, 12:00 AM
  • सुहाना सफर
    नवजीवन में नए हमसफर के साथ पहला सफर सुरक्षित होगा,तब ही सुखद भी हो पाएगा। इस मामले में मेरे अनुभवशायद आपके लिए भी मददगार हों। जीवन के नए सफर की शुरुआत थी। सफर नया था, पर हमसफ़र पुराना। वही, सात जन्मों का साथी! हा-हा-हा। हम अपने हनीमून के लिए जा रहे थे और स्वाभाविक है कि हम दोनों ही जा रहे थे। प्रेम, लगाव, रोमांच, उत्साह, उत्सुकता जैसी भावनाएं मन में उमड़-घुमड़ रही थीं। तैयारी पूरी थी, पर साथ ही धुकधुकी भी लगी थी। अकेले (मतलब दुकेले) यात्रा, अनजान स्थान, एकदम अपरिचित लोग। बचपन से अब तक सुनीं तमाम...
    February 4, 12:00 AM
  • भला करने से क्या मिलता है?
    कृतघ्नता? धोखा? अफसोस? पीड़ा? नुकसान? अपमान? यदि भलाई का कोई काम करने से पहले आपको ये डर सताते हैं, तो इसे पढ़ना आपके लिए अनिवार्य है। बाबा भारती और डाकू खड़गसिंह की कहानी लगभग सब को याद होगी। डाकू, अपाहिज का स्वांग धरकर बाबा का घोड़ा ले उड़ता है, तब बाबा कहते हैं कि किसी को यह बात मत बताना, वरना लोग वास्तविक ज़रूरतमंदों पर भी अविश्वास करेंगे और उनकी सहायता नहीं करेंगे। यह सच है। धोखे या लूट की ऐसी घटनाओं के बारे में जानकर लोग वंचितों और ज़रूरतमंदों की सहायता करने से क़तराते हैं। लेकिन एक बड़ा सच और...
    January 28, 12:00 AM
  • शूरवीर सर्वदा
    जीवन में सफलता और देश में व्यवस्था के लिए हरआम नागरिक का सैनिक बनना ज़रूरी है। लेकिन इसके पहले ज़रूरी है सैनिक होने का मतलब जानना। मनोज बेहद साधारण पृष्ठभूमि से थे। कहिए ग़रीब। तब बच्चे ही थे, लेकिन चार बच्चों में सबसे बड़े थे और घर की माली हालत से वाकिफ़ भी। नए कपड़े के लिए तब तक नहीं कहते थे, जब तक कि पुराने कपड़े फटकर तार-तार न हो जाएं और मरम्मत के लायक़ ही न रहें। उनकी लिखावट बहुत सुंदर थी। वे जानबूझकर छोटे-छोटे अक्षर लिखते थे, ताकि कॉपियां जल्दी न भरें। मनोज को हम अब परमवीर चक्र विजेता शहीद...
    January 21, 12:00 AM
  • किरण-किरण सेहत
    सूर्य स्वास्थ्य का प्रतीक है। अंजुरी में किरणें भरकर हम पर सेहत की बारिश करता है। इसका आस्वादन हर दिन जरूरी है। भारत में मकर संक्रांति, पोंगल, माघी उत्तरायण जैसे कितने नामों से विभूषित यह त्योहार सूर्यदेव की आराधना का ही एक हिस्सा है। यूनान व रोम जैसी अन्य प्राचीन सभ्यताओं में भी सूर्य और उसकी रश्मियों को भगवान अपोलो और उनके रथ के स्वरूप में सोचा गया। अपोलो मतलब ऊष्मा, प्रकाश तथा स्वास्थ्य व उपचार के देवता। यानी जब से मानव में समझ का विकास हुआ, तब से ही उसे यह भी स्पष्ट आभास हो गया कि सूर्य इस...
    January 15, 12:06 PM
  • कामयाब उड़ान के लिए
    झूलाघर या डे केयर सेंटर को बच्चे के समयकाटने की जगह मत समझिए। यह बच्चे के सम्पूर्ण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। आपकी कल्पना से भी अधिक महत्वपूर्ण। क्या आप कामकाजी दम्पती हैं? क्या आप एकल परिवार में रहते हैं, जहां आपके बच्चे के लिए न बुज़ुर्ग रिश्तेदार हैं, न समवय साथी? क्या आपको लगता है कि आपका बच्चा इतना नटखट है कि उसे लम्बे समय के लिए सम्भाल पाना दादा-दादी (या नाना-नानी) के बस की बात नहीं है? या सेहत सम्बंधी कारणों से घर के बुज़ुर्ग यह जि़म्मेदारी उठा पाने में असमर्थ हैं?...
    January 7, 12:00 AM
  • हम प्रेरित तो होते हैं...
    प्रेरणा की धारा सदैव बहती रही है। दुनिया का यह सबसे उजला पहलू है। क़द्र करने की बात है, बस... जीवन सरणी, यानी जीवन की राह, जिस पर हम रोज़ बेख़्याली से चलते रहते हैं। कोई प्रेरक प्रसंग फॉरवर्ड करता है, तो उसे पढ़ते हैं, प्रशंसा में सिर हिलाते हैं और आगे किसी और को भेज देते हैं। कुछ प्रसंग चर्चा का हिस्सा भी बनते हैं, लेकिन जीवन का हिस्सा...? यह उस प्रसंग के संदेश पर भी निर्भर करता है कि उसे अपनाया जाना या याद भी रखा जाना सरल है या नहीं। हम अक्सर ही कह देते हैं, पढ़ने-सुनने में तो अच्छा है, लेकिन ऐसा किया नहीं...
    December 31, 12:00 AM
  • छोटे और असरदार
    शॉर्ट फिल्मों को मिली पहचान साल 2014 की विशिष्ट उपलब्धि है। आधी रात को सुनसान राह पर एक गाड़ी में अनजान पुरुषों के बीच बैठी एकमात्र नवयुवती सुरक्षित रूप से घर पहुंचती है। 5 मिनट 37 सेकंड का यह वीडियो चौंकाता है और फिर पूछता है कि ऐसा वास्तव में नहीं हो सकता? आलिया भट्ट अभिनीत और विकास बहल द्वारा निर्देशित इस वीडियो को 17 अक्टूबर को यूट्यूब पर आने के बाद से 47 लाख 65 हज़ार बार देखा जा चुका है। यह है, छोटी फिल्मों का बड़ा असर! पिछले साल आए, कल्कि कोचलिन के वीडियो इट्स योर फॉल्ट से सम्भवत: देश का ध्यान...
    December 24, 12:00 AM
  • नजीर की नजर
    हर नज़रिए के केंद्र में होती है आपकी नज़र। इसका इस्तेमाल दूसरों के कंकड़ बीनने के बजाय, अपने तिनके चुनने के लिए करें। ह म दूसरों की ज़िंदगी में जितनी रुचि लेते हैं, अपनी दुनिया से उतने ही दूर होते जाते हैं। हर वक़्त दूसरों के लिए परेशान लोगों से अंग्रेज़ी में कहा जाता है - गेट अ लाइफ यानी अपने लिए भी जीना सीखो। इसके दो हिस्से हैं। पहला फ़िक़्र और दूसरा दख़ल। फ़िक़्र और परवाह, यानी पहले आप वाली मानसिकता को सामाजिक सोच घरेलू और पारिवारिक ज़िंदगी का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष मानती है। यानी घर-परिवार के सारे...
    December 17, 12:00 AM
  • कई आंखें खोजें लाल को
    गुमशुदा बच्चों की तलाश में सोशल नेटवर्किंग साइट्स ने खोजी आंखों को कई गुना बढ़ा दिया है। खोए बच्चों कोउनके परिवार से मिलाने में यह आधुनिक कोशिश कितनी कारगर हो सकती है, इस पर एक पड़ताल... दिल्ली की मासूम जाह्नवी तो आपको याद होगी। सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर जिसकी वायरल हुईं मुस्कुराती तस्वीरों ने कुछ रोज़ के लिए जैसे हर चेहरे की मुस्कान छीन ली थी। वजह यह थी कि इस तीन साल की मासूम को कोई इंडिया गेट से उठा ले गया था। लेकिन जब छह दिन बाद यही बच्ची नाटकीय तरीक़े से वापस लौट आई, तो एक नए ट्रेंड को लेकर देश...
    December 10, 12:00 AM
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