आवरण कथा
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  • जीतनी ही होगी यह लड़ाई
    डायबिटीज़ को आम भाषा में कहते हैं, शक्कर की बीमारी। यानी ख़ून में शर्करा का स्तर सामान्य से अधिक होना। इसका मतलब है कि हमारे शरीर में रक्त नलिकाओं के माध्यम से ख़ून जहां-जहां पहुंचता है, हर उस हिस्से पर यह बीमारी असर डालती है। ख़ासतौर पर आंख, दिल, दिमाग़, पेट, पैर, त्वचा, मुंह, प्रजनन संस्थान, किडनी...। सीधे-सपाट शब्दों में कहें, तो इससे शरीर के हर अंग पर बुरा प्रभाव पड़ता है। डायबिटीज़, यानी मधुमेह पर लगाम न लगाई जाए, तो यह उतना ही ख़तरनाक भी है। हमारे पास इस रोग से जुड़े दो तथ्य हैं। एक बुरा और दूसरा अच्छा-...
    April 6, 06:07 PM
  • चीनी कम तो मिठास ज़्यादा
    शर्करा... हमारे खानपान में शक्कर जितनी कम हो, उतना ही अच्छा। न हो, तो और भी बढ़िया। घबराइए नहीं, चीनी की ग़ैरमौजूदगी में भी जीवन में मिठास क़ायम रहेगी और साथ ही आप ज़्यादा स्वस्थ व ऊर्जावान महसूस करेंगे। ऊर्जा चाहिए, शक्कर नहीं शरीर को ऊर्जा की ज़रूरत होती है, वह उसे ग्लूकोज़ से ही मिलती है। ग्लूकोज़ बनता है कार्बोहाइड्रेट्स से। ये दो प्रकार के होते हैं- जटिल और सरल। सारी दिक़्क़त सरल कार्बोज़ से है, जो खाते-पीते ही ख़ून में पहुंचना शुरू हो जाते हैं और ख़ून का शर्करा स्तर एकदम से बढ़ा देते हैं। यह शरीर के लिए...
    April 6, 06:03 PM
  • वास्तविक इलाज
    सुबह चाय का प्याला एक हाथ में उठाकर मैंने दूसरे हाथ से ताज़ा अख़बार अपनी ओर खींचा। क्या बात है, आज कुछ ज़्यादा ही भारी लग रहा है! ओ-हो, अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस है। कई उत्सव, आयोजनों की सूचना थी। कुछ प्रेरणास्पद कहानियां, कुछ नामचीन स्त्रियों के जीवन परिचय, साक्षात्कार वग़ैरह। ख़ैर, सबकुछ पढ़ने का वक़्त नहीं था, समय पर क्लिनिक जो पहुंचना था। जी हां, मैं शिशु रोग चिकित्सक हूं और शहर के बीच मेरा निजी क्लिनिक है। जीवन में बहुत दौड़-भाग, आपाधापी मुझे पसंद नहीं, लेकिन सामने घटित होने वाली हर घटना को बड़े...
    April 6, 05:59 PM
  • वसा ज़रुरी पर थोड़ी-सी
    वसा... शरीर के लिए ज़रूरी है और आड़े वक़्त में ऊर्जा का स्रोत भी। इससे स्वाद मिलता है, लेकिन खानपान में इसका अनियंत्रित सेवन स्वास्थ्य बिगाड़ता भी है। इसलिए उपभोग करें, पर थोड़ा-सा सम्भलकर। कौन-से काम करती है वसा? शरीर को ऊर्जा वसा से भी मिलती है। ये दो प्रकार की होती है- संतृप्त वसा (सैचुरेटेड) व असंतृप्त वसा (अनसैचुरेटेड)। संतृप्त वसा मुख्यत: घी, मक्खन, मलाई, नारियल तेल एवं वनस्पति से मिलती है। वनस्पति हानिकारक वसा है। इसका इस्तेमाल बिस्किट, पिज़्ज़ा जैसी बाज़ार की चीज़ों में होता है। यह शरीर में...
    April 6, 05:56 PM
  • स्वाद के साथ मिले स्वास्थ्य
    खनिज-विटामिन्स... के बिना सेहतमंद जिंदगी की कल्पना भी नहीं की जा सकती। अच्छी बात है कि फल, सब्ज़ी, दूध जैसी जो चीज़ें हमारे खानपान का ज़ायका बढ़ाती हैं, वही इन दो तरह के अहम पोषक तत्वों की नेमत भी देती हैं। तो स्वाद पाइए और स्वस्थ भी रहिए। इनकी कमी से आती है कमज़ोरी कैल्शियम- दांतों व हडि्डयों को मज़बूती देता है और पेिशयों की सक्रियता बढ़ाता है। कमी से कमज़ोर दांत, शरीर या जोड़ों में दर्द, खिंचाव होता है, इसलिए दूध, दही, पनीर, रागी, हरी पत्तेदार सब्जि़यां, अनाज, खड़ी व अंकुरित दालों का सेवन करें।...
    April 6, 05:47 PM
  • अतिथि तुम कब आअोगे...
    भारत में हाथ से बर्तन छूटने का मतलब घर में किसी मेहमान के आने का इशारा, और ऐसा होते ही त्योरियां चढ़ जाती हैं, घर का बजट बिगड़ने का डर सताने लगता है। क्या ऐसी भावना सभी मेहमानों के प्रति होती है या कुछ के आने से ख़ुशी भी मिलती है? मेहमान हमेशा अव्यवस्था ही बढ़ाए ऐसा ज़रूरी नहीं है। पहले कभी अतिथि को भगवान माना जाता था। पर आजकल की आर्थिक परिस्थितियों और ऊपर से समय की कमी के चलते अतिथि को परेशानी की तरह लिया जाने लगा है। पुर्तगाली कहावत है, यात्रा हमेशा ख़ुशी देती है, चाहे मेहमानों के आने से या उनके...
    April 1, 05:56 PM
  • बरसात रुकने का नाम नहीं ले रही थी। बादल यूं गरज रहे थे, मानो पूरा ब्रह्मांड हिला देंगे। हर गर्जन दिल दहला रही थी। मैं चंडीगढ़ से चार घंटे की दूरी पर फगवाड़ा महाविद्यालय में लैक्चरर की पोस्ट के लिए इंटरव्यू में अपनी बारी का इंतज़ार कर रही थी। लोग आ-जा रहे थे। शाम के चार बज गए। अंत में मैं और सत्तो ही रह गए, जिससे मात्र दो घंटे पहले ही पहचान हुई थी। अनजाने शहर में मुझे वही सहारा दिखाई दे रही थी, क्योंकि उसके पिताजी भी साथ थे। मौसम की भयावहता देख मैं ख़ुद ही बोल पड़ी, अंकल, मुझे बस स्टैंड तक छोड़ देना। हम कार...
    April 1, 05:54 PM
  • आज कर जमा और कल कमा
    नौकरी से सेवानिवृत्त होने के बाद व्यक्ति के जीवन में ऐसा समय आता है, जब आय के स्रोत कम या ख़त्म हो जाते हैं और रोज़गार की उसकी क्षमताएं भी चुक जाती हैं। ऐसे में शारीरिक कमज़ोरी, बीमारियां व घर के ख़र्च मुश्किल और बढ़ाते हैं। हालांकि कुछ सहारा पीएफ दे सकता है, लेकिन आज से 20-30 साल बाद यदि सिर्फ़ 5-7 हजार मासिक पेंशन मिलती भी है, तो बढ़ती महंगाई के इस समय में इससे गुज़ारा करना मुश्किल हो जाएगा। इसलिए कम उम्र से ही स्मार्ट प्लानिंग कर भविष्य के लिए सुरक्षित हो जाना बेहतर है। व्यक्ति को अपनी आय का कम से कम 20-25...
    April 1, 05:51 PM
  • बना रहे सम्मान और साथ
    जहां तीन पीढ़ियां एक छत के नीचे रहती हैं, उन परिवारों को आश्चर्य से देखा जाता है। लेकिन चहल-पहल से भरे संयुक्त परिवार में यदि प्रबंधन ठीक न हो, तो झगड़े होना भी लाज़िमी है। इससे बचने के लिए प्रबंधन के कुछ सुझाव आपकी मदद कर सकते हैं... नियम करें स्थापित घर की सीमित चीज़ें अमूमन झगड़े का कारण बनती हैं। इनके लिए ऐसे नियम बनाएं जिनसे परिवार के सदस्यों को शिकायत न हो। जैसे- उम्र और ज़रूरत के अनुसार कमरों का चयन करें। बच्चों के लिए पढ़ाई और मनोरंजन से सम्बंधित चीज़ों के इस्तेमाल की समय-सीमा बनाएं, जैसे...
    April 1, 05:49 PM
  • कचौरियां हैं कुछ हटकर...
    मौसम कोई भी हो, कचौरियाें का स्वाद सालभर जु़बान पर रहता ही है, ख़ासकर बाज़ार की मूंगदाल कचौरी और घर की बनी आलू कचौरी। हो सकता है, आप इस एकरसता से थोड़ा ऊब गए हों, तो कुछ ऐसी कचौरियां बनाएंं, जो पुराने स्वाद के साथ नया अहसास भी कराएं। इन्हें बनाना आसान है। सो यहां कहीं-कहीं केवल विधि का ब्योरा है। सामग्री आप आवश्यकतानुसार ले सकते हैं। बथुआ कचौरी सिर्फ़ नाम नहीं, स्वाद में भी है सबसे अलग। ऐसे बनाएं- आधा कप आटा और एक कप मैदा मिलाकर नमक डालें। एक चम्मच तेल/घी का मोयन देकर ढीला गूंध लें और ढंककर रख दें।...
    April 1, 05:46 PM
  • क्रॉप जैकेट के अलग अंदाज
    जींस व सामान्य सलवार सूट के साथ आपने कई बार क्रॉप टॉप्स पहने होंगे। यह आमतौर पर वेस्टर्न स्टाइल देता है। लेकिन आप चाहें तो इसे अन्य प्रयोगों के साथ अपनाकर ख़ुद की ड्रेसिंग को इंडो-वेस्टर्न व भारतीय रूप भी दे सकती हैं। तो इस बार शादी के समारोहों व कॉलेज पार्टी में करें कुछ प्रयोग। ये आपको किसी भी पार्टी का शो स्टॉपर बना सकते हैं। साड़ी के साथ ट्रेडिशनल-मॉडर्न टच शायद किसी ने कहा हो कि क्रॉप टॉप साड़ी के साथ नहीं जमेगा, लेकिन अगर आपको मैं हूं ना फिल्म में सुष्मिता और अमृता का लुक याद हो, तो...
    April 1, 05:43 PM
  • कभी-कभी ज़िंदगी रात में कुएं में झांकने जैसा आभास देती है। लगता है अंधेरा भरा है गहरे तक। सूना है, वीरान है। इस क़दर नाराज़ कि झांकने वाले का साया भी हड़प ले। फर्क़ केवल वक़्त का है। सुबह की रोशनी में वही कुआं, पानी की चमक से भरा होगा। सारे अक़्स उभर आएंगे, पानी की आवाज़ें गूंजने लगेंगी। हाथ में रखा लम्हा कुएं के पानी से छलकते कलसे की तरह ऊपर आता है। आनंद की ठंडक से भरा। हर रोज़ सुबह भी यही याद दिलाने के लिए आती है। रात नई शुरुआत की तैयारी का नाम है। अंधेरा जब सब छुपा ले, तो रोशनी की प्रतीक्षा का आनंद लो।...
    April 1, 05:42 PM
  • समझें दिल के इशारे...
    सीने में दर्द या थोड़ी-सी मेहनत में हांफना- वैसे तो ये आम परेशानियां हैं, लेकिन अगर ये थोड़ा चलने पर, फिर बैठे-बैठे व आराम की स्थिति में भी महसूस हों, तो चेतना ज़रूरी है। यह धमनियों में रुकावट (आर्टरीज़ ब्लॉकेज) की वजह से हो सकता है। इस पर ध्यान न दिया जाए, तो यह हृदयाघात जैसी जानलेवा आशंका को बढ़ाता है। ऐसे में ज़रूरत है सिर्फ़ समय पर इसके लक्षण पहचानने की, ताकि उपयुक्त इलाज के साथ जीवनशैली के कुछ बदलाव कर हृदय रोग से बचा जा सके। धमनियों में रक्त क्यों रुका? अधिक कोलेस्ट्रॉल, फैट आिद की वजह से धमनियों की...
    April 1, 05:37 PM
  • घर में मिलेंगे प्रबंधन के पाठ
    मेडिकल, इंजीनियरिंग जैसे विषय युवाओं के हमेशा पसंदीदा रहे हैं, लेकिन अब प्रबंधन (मैनेजमेंट) विषय भी लोगों को ख़ासा आकर्षित कर रहा है। यह एक ओर ऊंची सैलरी दिलाने में सहायक है, वहीं स्वयं का व्यवसाय स्थापित करने में भी मददगार है। इसीलिए हर कोई प्रभावी प्रबंधन के गुर जानना चाहता है। लेकिन अगर आप मानते हैं कि प्रबंधन सिर्फ़ महाविद्यालयों में पढ़कर सीखा जा सकता है, तो आप ग़लत हैं, क्योंकि इसके लिए किसी औपचारिक पढ़ाई-लिखाई की ज़रूरत बिल्कुल नहीं। पैनी निगाह डाली जाए, तो आसपास के परिवेश और परिवार में ही...
    March 16, 06:49 AM
  • अंकों में मत आंकिए अ़क़्ल
    जीवन में सफलता मिलती है, अक़्ल से। इसमें कड़ी मेहनत और लगन का भी योगदान होता है, लेकिन परीक्षा के प्राप्तांकों से इसका कोई ख़ास वास्ता नहीं होता।ज़ाहिर है, अंकों के नाम पर अंधी दौड़ में शामिल होने में कोई अक़्लमंदी नहीं। अरब देशों में ऊंटों की एक ख़ास दौड़ मशहूर है। इसके लिए छोटे बच्चों को ऊंट की पीठ पर बांध दिया जाता है। इस चक्कर में बच्चे भय से कांपते हैं, रोते हैं, लहूलुहान भी हो जाते हैं। जीतने वाले बच्चे को फिर से अगली दौड़ के लिए तैयार कर दिया जाता है। एक तरह से देखें, तो यह दौड़ हमारी शिक्षा प्रणाली...
    March 16, 06:49 AM
  • नीयत
    किसान रामलाल के दो बेटों में परस्पर अच्छा प्रेम था। पिता की अचानक मृत्यु हो गई। एक दिन बड़ा भाई मोहनलाल खेत से गन्ना तोड़ लाया। उसने उस गन्ने के दो भाग किए। बड़ा भाग अपने पुत्र को दिया और छोटा भाग छोटे भाई के पुत्र को दिया। छोटा भाई किशनलाल खड़ा-खड़ा यह सब देख रहा था। उसने कुछ सोचकर कहा, भैया, अब हमें जायदाद का बंटवारा कर लेना चाहिए। क्यों? बड़ा भाई बोला। अब आपकी नीयत में फ़र्क़ आ गया है। इससे पहले कि बात आगे बढ़ जाए, हमें बंटवारा कर ही लेना चाहिए, इसी में सबका भला है। छोटे ने कहा। बड़े भाई को अपना व्यवहार...
    March 16, 06:39 AM
  • बारहवी लड़की
    बेटा ग्रामीण बैंक की एक शाखा में मैनेजर था। शहर की एक बढ़िया-सी कॉलोनी में बहुत सुंदर मकान था। सम्पत्ति भी काफ़ी थी। पिता चाहते थे कि बेटा जल्दी से विवाह कर ले, ताकि वे अपनी ज़िम्मेदारी पूरी करने के बाद आराम से ज़िंदगी जी सकें, पर बेटे को कोई लड़की पसंद ही नहीं आ रही थी। हर लड़की में वह कोई न कोई कमी निकाल ही देता। आज भी पिता-पुत्र दोनों एक लड़की देखने कहीं गए हुए थे। फोटो और बायोडाटा देखकर ही वह लड़की के घर जाने के लिए सहमत हुआ था। लड़की को देखने और उससे बातचीत करने के बाद उसने पिता के कान में कहा...
    March 16, 06:34 AM
  • बेटी निबंध में क्या लिखेगी?
    एक बार अपने बचपन को याद करें और फिर अपने बच्चे के जीवन से उसकी तुलना करें। सारी चिंताओं का हल मिल जाएगा। मेरी बेटी अलसुबह उठती है, तैयार होकर स्कूल भागती है। घर पहुंचते-पहुंचते तीन बज जाते हैं। खाना खाकर चार बजे की ट्यूशन के लिए दौड़ लगाती है। फिर दूसरी ट्यूशन। घर पहुंचने के बाद होमवर्क और असाइनमेंट। सोचती हूं कि क्या फ़ायदा, अगर हर महीने हज़ारों रुपए की फीस देने और इतनी सुविधाएं जुटाने के बावजूद बच्ची दोपहर की एक झपकी के लिए तरस जाए या बाहर जाकर एक घंटे खेल भी न पाए! मेरे पास बचपन की इतनी मीठी...
    March 16, 06:30 AM
  • क्या चीज़ है यह चीज़!
    चीज़ कहते ही भले ही किसी विदेशी खाद्य सामग्री का चित्र उभरे, पर सच तो यह है कि पनीर के रूप में यह हमारी रसोई और थाली का अहम हिस्सा है। चीज़ दो प्रकार की होती है- कॉटेज चीज़ और प्रॉसेस्ड चीज़। कॉटेज चीज़ यानी पनीर जो घर पर निर्मित, मुलायम और उच्च कैलोरी युक्त होता है। माना जाता है कि पुर्तगाली अपने साथ कॉटेज चीज़ की एक विशेष क़िस्म लाए थे, जिससे बाद में रसगुल्ले का छेना बना। प्रॉसेस्ड चीज़ प्रिज़र्व्ड होती है, इसलिए स्वाद में थोड़ी नमकीन और रंग में भी अलग होती है। इसका लम्बे समय तक इस्तेमाल किया जा सकता है।...
    March 16, 06:28 AM
  • कांके भेज दूं क्या?
    मैं रांची में रहती हूं। यह झारखंड की राजधानी है। मेरा शहर 175 वर्ग किलोमीटर में फैला है। 2011 की जनगणना के अनुसार यहां 11 लाख से ज़्यादा लोग रहते हैं।... बोर हो गए? मैं यहां मेरा शहर विषय पर निबंध लेखन नहीं कर रही हूं। अपना ग़ुस्सा जता रही हूं। 11 लाख में 11 के बाद पांच शून्य लगते हैं। इतने लोग जहां रहते हैं, उसे आप छोटा शहर कहते हैं! दुनिया के लगभग 140 देशों से ज़्यादा आबादी है यह। मेरे तो कान पक गए हैं छोटा शहर सुन-सुनकर। अगर इतनी बड़ी आबादी वाला शहर छोटा है, तो 10 हज़ारी क़स्बे को तो शायद गांव भी नहीं कह सकेंगे। कोई नया...
    March 16, 06:26 AM