आवरण कथा
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  • क्रिकेट धर्म है
    आपने इससे क्या सीखा है? भारत में यह पूछना बेमानी है कि आपके लिए क्रिकेट की क्या अहमियत है। जो खिलाड़ी नहीं है, वह दर्शक और स्वघोषित विशेषज्ञ तो है ही। आपने क्रिकेट खेला, देखा, मैचों का विश्लेषण किया... क्या क्रिकेट से कुछ सीखा भी? भारत में भले ही कोई क्रिकेट खेले, न खेले, पर देख ज़रूर लेता है। देश में यूं तो महिलाएं क्रिकेट में कम ही रुचि रखती हैं, परंतु भारत और पाकिस्तान के मुकाबलों का रोमांच ऐसा होता है कि वे भी टीवी के सामने बैठ ही जाती हैं। लोग सच ही कहते हैं कि भारत में क्रिकेट भी एक धर्म है।...
    February 25, 12:00 AM
  • सर्वेश्वर शिव
    शिव सबके प्रिय हैं और सब शिव के प्रिय हैं। दसों दिशाओं में वे एक समान पूजनीय हैं। वे महादेव हैं। जानिए, इस अद्भुत आकर्षण का रहस्य। आदि शंकराचार्य रचित निर्वाण षट्कम कहता है- शिवोऽहम्। अर्थात मैं स्वयं शिव हूं। मैं भी शिव की बात स्वयं से शुरू करता हूं। मुझे लगता है कि मैं भगवान शिव की तरफ़ आकर्षित हुआ, क्योंकि मैं भी उनकी तरह विद्रोही और ओढ़ी गई अभिजातता का विरोधी हूं। शिव की सहजता मुझे आकर्षित करती है। लेकिन, राजा-महाराजा, चक्रवर्ती सम्राट भी शिव के अनन्य भक्त रहे हैं। एक तरफ़, निर्धन, दीन-हीन,...
    February 18, 12:00 AM
  • अपेक्षा प्रेम की उपेक्षा
    हमने प्यार या विवाह किया। एक व्यक्ति के इर्दगिर्द अपने सपनों का संसार बुन लिया। उस शख़्स से दुनियाभर की उम्मीदें भी जोड़ लीं। और फिर दिक़्क़त शुरू हो गई! प्यार और विवाह सबसे ज़्यादा किस कारण से दरकते हैं? प्रेम दिवस के ठीक पहले यह सवाल बड़ा अजीब लगेगा, लेकिन शायद इसी में प्यार और रिश्ते को पुख़्ता बनाने का रहस्य भी छुपा है। जवाब आसान है : उम्मीदें पूरी न होने के कारण। लेकिन फिर यहां सवाल उठता है कि सारी उम्मीदें तो शायद अन्य रिश्तों से भी पूरी नहीं होतीं। परंतु, उम्मीदें पूरी न होने का कारण...
    February 11, 12:00 AM
  • सुहाना सफर
    नवजीवन में नए हमसफर के साथ पहला सफर सुरक्षित होगा,तब ही सुखद भी हो पाएगा। इस मामले में मेरे अनुभवशायद आपके लिए भी मददगार हों। जीवन के नए सफर की शुरुआत थी। सफर नया था, पर हमसफ़र पुराना। वही, सात जन्मों का साथी! हा-हा-हा। हम अपने हनीमून के लिए जा रहे थे और स्वाभाविक है कि हम दोनों ही जा रहे थे। प्रेम, लगाव, रोमांच, उत्साह, उत्सुकता जैसी भावनाएं मन में उमड़-घुमड़ रही थीं। तैयारी पूरी थी, पर साथ ही धुकधुकी भी लगी थी। अकेले (मतलब दुकेले) यात्रा, अनजान स्थान, एकदम अपरिचित लोग। बचपन से अब तक सुनीं तमाम...
    February 4, 12:00 AM
  • भला करने से क्या मिलता है?
    कृतघ्नता? धोखा? अफसोस? पीड़ा? नुकसान? अपमान? यदि भलाई का कोई काम करने से पहले आपको ये डर सताते हैं, तो इसे पढ़ना आपके लिए अनिवार्य है। बाबा भारती और डाकू खड़गसिंह की कहानी लगभग सब को याद होगी। डाकू, अपाहिज का स्वांग धरकर बाबा का घोड़ा ले उड़ता है, तब बाबा कहते हैं कि किसी को यह बात मत बताना, वरना लोग वास्तविक ज़रूरतमंदों पर भी अविश्वास करेंगे और उनकी सहायता नहीं करेंगे। यह सच है। धोखे या लूट की ऐसी घटनाओं के बारे में जानकर लोग वंचितों और ज़रूरतमंदों की सहायता करने से क़तराते हैं। लेकिन एक बड़ा सच और...
    January 28, 12:00 AM
  • शूरवीर सर्वदा
    जीवन में सफलता और देश में व्यवस्था के लिए हरआम नागरिक का सैनिक बनना ज़रूरी है। लेकिन इसके पहले ज़रूरी है सैनिक होने का मतलब जानना। मनोज बेहद साधारण पृष्ठभूमि से थे। कहिए ग़रीब। तब बच्चे ही थे, लेकिन चार बच्चों में सबसे बड़े थे और घर की माली हालत से वाकिफ़ भी। नए कपड़े के लिए तब तक नहीं कहते थे, जब तक कि पुराने कपड़े फटकर तार-तार न हो जाएं और मरम्मत के लायक़ ही न रहें। उनकी लिखावट बहुत सुंदर थी। वे जानबूझकर छोटे-छोटे अक्षर लिखते थे, ताकि कॉपियां जल्दी न भरें। मनोज को हम अब परमवीर चक्र विजेता शहीद...
    January 21, 12:00 AM
  • किरण-किरण सेहत
    सूर्य स्वास्थ्य का प्रतीक है। अंजुरी में किरणें भरकर हम पर सेहत की बारिश करता है। इसका आस्वादन हर दिन जरूरी है। भारत में मकर संक्रांति, पोंगल, माघी उत्तरायण जैसे कितने नामों से विभूषित यह त्योहार सूर्यदेव की आराधना का ही एक हिस्सा है। यूनान व रोम जैसी अन्य प्राचीन सभ्यताओं में भी सूर्य और उसकी रश्मियों को भगवान अपोलो और उनके रथ के स्वरूप में सोचा गया। अपोलो मतलब ऊष्मा, प्रकाश तथा स्वास्थ्य व उपचार के देवता। यानी जब से मानव में समझ का विकास हुआ, तब से ही उसे यह भी स्पष्ट आभास हो गया कि सूर्य इस...
    January 15, 12:06 PM
  • कामयाब उड़ान के लिए
    झूलाघर या डे केयर सेंटर को बच्चे के समयकाटने की जगह मत समझिए। यह बच्चे के सम्पूर्ण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। आपकी कल्पना से भी अधिक महत्वपूर्ण। क्या आप कामकाजी दम्पती हैं? क्या आप एकल परिवार में रहते हैं, जहां आपके बच्चे के लिए न बुज़ुर्ग रिश्तेदार हैं, न समवय साथी? क्या आपको लगता है कि आपका बच्चा इतना नटखट है कि उसे लम्बे समय के लिए सम्भाल पाना दादा-दादी (या नाना-नानी) के बस की बात नहीं है? या सेहत सम्बंधी कारणों से घर के बुज़ुर्ग यह जि़म्मेदारी उठा पाने में असमर्थ हैं?...
    January 7, 12:00 AM
  • हम प्रेरित तो होते हैं...
    प्रेरणा की धारा सदैव बहती रही है। दुनिया का यह सबसे उजला पहलू है। क़द्र करने की बात है, बस... जीवन सरणी, यानी जीवन की राह, जिस पर हम रोज़ बेख़्याली से चलते रहते हैं। कोई प्रेरक प्रसंग फॉरवर्ड करता है, तो उसे पढ़ते हैं, प्रशंसा में सिर हिलाते हैं और आगे किसी और को भेज देते हैं। कुछ प्रसंग चर्चा का हिस्सा भी बनते हैं, लेकिन जीवन का हिस्सा...? यह उस प्रसंग के संदेश पर भी निर्भर करता है कि उसे अपनाया जाना या याद भी रखा जाना सरल है या नहीं। हम अक्सर ही कह देते हैं, पढ़ने-सुनने में तो अच्छा है, लेकिन ऐसा किया नहीं...
    December 31, 12:00 AM
  • छोटे और असरदार
    शॉर्ट फिल्मों को मिली पहचान साल 2014 की विशिष्ट उपलब्धि है। आधी रात को सुनसान राह पर एक गाड़ी में अनजान पुरुषों के बीच बैठी एकमात्र नवयुवती सुरक्षित रूप से घर पहुंचती है। 5 मिनट 37 सेकंड का यह वीडियो चौंकाता है और फिर पूछता है कि ऐसा वास्तव में नहीं हो सकता? आलिया भट्ट अभिनीत और विकास बहल द्वारा निर्देशित इस वीडियो को 17 अक्टूबर को यूट्यूब पर आने के बाद से 47 लाख 65 हज़ार बार देखा जा चुका है। यह है, छोटी फिल्मों का बड़ा असर! पिछले साल आए, कल्कि कोचलिन के वीडियो इट्स योर फॉल्ट से सम्भवत: देश का ध्यान...
    December 24, 12:00 AM
  • नजीर की नजर
    हर नज़रिए के केंद्र में होती है आपकी नज़र। इसका इस्तेमाल दूसरों के कंकड़ बीनने के बजाय, अपने तिनके चुनने के लिए करें। ह म दूसरों की ज़िंदगी में जितनी रुचि लेते हैं, अपनी दुनिया से उतने ही दूर होते जाते हैं। हर वक़्त दूसरों के लिए परेशान लोगों से अंग्रेज़ी में कहा जाता है - गेट अ लाइफ यानी अपने लिए भी जीना सीखो। इसके दो हिस्से हैं। पहला फ़िक़्र और दूसरा दख़ल। फ़िक़्र और परवाह, यानी पहले आप वाली मानसिकता को सामाजिक सोच घरेलू और पारिवारिक ज़िंदगी का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष मानती है। यानी घर-परिवार के सारे...
    December 17, 12:00 AM
  • कई आंखें खोजें लाल को
    गुमशुदा बच्चों की तलाश में सोशल नेटवर्किंग साइट्स ने खोजी आंखों को कई गुना बढ़ा दिया है। खोए बच्चों कोउनके परिवार से मिलाने में यह आधुनिक कोशिश कितनी कारगर हो सकती है, इस पर एक पड़ताल... दिल्ली की मासूम जाह्नवी तो आपको याद होगी। सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर जिसकी वायरल हुईं मुस्कुराती तस्वीरों ने कुछ रोज़ के लिए जैसे हर चेहरे की मुस्कान छीन ली थी। वजह यह थी कि इस तीन साल की मासूम को कोई इंडिया गेट से उठा ले गया था। लेकिन जब छह दिन बाद यही बच्ची नाटकीय तरीक़े से वापस लौट आई, तो एक नए ट्रेंड को लेकर देश...
    December 10, 12:00 AM
  • भगवान ने मुझे कुछ सोच- समझकर मोटा बनाया
    अपनी शारीरिक कमी को ख़ूबी में कैसे बदला जा सकता है, यह सीखें भारती से। भारत की इस सबसे लोकप्रिय मुटल्ली से आप सुख और सफलता के कई अहम सूत्र जान सकते हैं। हमारे देश में ज्य़ादा बोलने वाली लड़कियों को फूहड़ और बेअदब कहा जाता है। लेकिन भारती सिंह इसका अपवाद हैं। एक ऐसी मोटी लड़की, जिसे मोटे होने पर कोई अफ़सोस नहीं है, बल्कि यह मोटापा उसे आत्मविश्वास से भर देता है। भारती के इसी आत्मविश्वास ने देश और दुनिया की ऐसी लड़कियों को प्रेरित किया है, जो अपने ज्य़ादा वज़न को लेकर हीन भावना से ग्रस्त हैं। भारती मानती...
    December 3, 02:48 PM
  • बोर की बुहार
    पौ फटने वाले पलों में पूरा जगत सूरजमुखी हो जाता है। नव कल्पना, नवविचारों के स्वागत में सुनहरी आभा से दमकता। भोर का माहात्म्य ही ऐसा है। सुबह-सुबह प्रार्थना करने, ध्यान लगाने या ऊपरवाले को याद करने के संस्कार हर इंसान को मिलते हैं। कितने इसका सारी उमर पालन करते हैं, यह बात और है लेकिन जो ऐसा करते हैं, उनमें से कई केवल इसे एक रवायत या आदत के तौर पर देखते हैं। एक अंग्रेज़ी की लेखक ने एक कार्यक्रम में बताया कि वे सुबह उठकर पंद्रह से बीस मिनट तक ध्यान करती हैं और उसके बाद ही सुबह की चाय लेती हैं।...
    November 26, 12:00 AM
  • दुल्हनों ! मेरी कहानी सुनो
    जान पहचान, दोस्ती, पसंदगी, प्यार के साथ एक- दूसरे की पसंद-नापसंद, कामकाज और परिवार के बारे में जानना काफी नहीं है। असली जानकारियां शादी के बाद होती है! हमारी शादी को पूरे बारह महीने हो गए हैं। मैं जान-बूझकर एक साल नहीं कह रही हूं। यह पूरा अरसा ख़ुशियों से भरा रहा, लेकिन सच कहूं, तो मैं यह नहीं कह सकती कि पता ही नहीं चला, एक साल कैसे गुज़र गया! दिन उड़े नहीं, बल्कि बाक़ायदा चलते हुए गए। जाना। हालांकि अब मुझे यह सोचकर हंसी आती है कि शादी के पहले मैं सोचती थी मुझे कुछ जानने की ज़रूरत ही नहीं है! और...
    November 20, 11:59 AM
  • The Legnedary Heroes
    We know that you are super-fascinated with the super-heroes. You idolize and connect well with them. Hence, we got you a compilation of their stories. Have a super read! WOLVERINE Marvel Comics He was approached with a chance to change the world, by Professor Charles Xavier. After joining Professors X-Men, Wolverine has been using his mutant powers, to heal, peak physical condition, and razor sharp bone claws to fight for the peaceful coexistence of humans. SUPER MAN DC Comics The most recognized superhero in pop culture, Superman has been elevated to mythic folk-hero status. Rocketed to Earth from the dying planet Krypton, he was found by a farming couple who named the boy Clark Kent. Discovering his enormous powers, they instilled in him strong moral valuesand inspired him to become a (super) hero. Captain America Marvel Comics ego of Steve Rogers, a frail young man who gave USA a patriotic boost during the World War II. He is a super soldier who derives his strength from a serum and carries an indestructible shield. He is armed with an indestructible, boomerang-like shield that can be used as a weapon, and for defence purpose too. SPIDERMAN Marvel Comics The bite of a spider granted Peter Parker incredible powers. When a burglar killed his...
    November 14, 12:00 AM
  • दूत है बच्चे
    बाल दिवस बच्चों से जुड़ी पारिवारिक जिम्मेदारी का अहसास कराने भी आता है, क्योंकि आपके नाम का ही नहीं, आपकी परवरिश का भी प्रतिनिधित्व करते हैं बच्चे। बा ल दिवस आ रहा है। बच्चों का दिन। उत्सव होंगे। बच्चों को ख़ास होने का अहसास कराया जाएगा। लेकिन इस दिन की एक और भूमिका भी है- अभिभावकों, परिजनों और स्कूल को यह याद दिलाने की कि बच्चे आपके प्रतिनिधि हैं। परिवार के लिए तो यह हर तरह से लागू होने वाला सच है। बच्चे का व्यवहार, उसकी आदतें, उसकी ज़बान घर के माहौल के, परवरिश के सारे राज़ खोल देती है। जिस लम्हे...
    November 12, 12:00 AM
  • सुखद बदलाव
    (फोटो प्रतीकात्मक) विवाह के पश्चात स्त्री और पुरुष, दोनों का जीवन बदलता है। बावजूद इसके हमारे समाज में सारी सीखें दुल्हन के लिए ही होती हैं। दूल्हे को शायद ही कुछ बताया या मानसिक रूप से तैयार किया जाता है। कुछ दशक पहले भले ही इससे कोई दिक़्क़त न होती हो, क्योंकि तब वधू को ही नए घर-परिवार और रिश्तों के अनुसार अनिवार्य रूप से ढलना पड़ता था और संयुक्त परिवार में लड़के का जीवन कमोबेश पूर्ववत ही रहता था, किंतु अब ज़माना बदल गया है। परिवार का स्वरूप और रिश्तों के समीकरण भी बदले हैं। परवरिश, महिलाओं की...
    November 5, 12:05 AM
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