

बदलाव जब ज़माने के लिए लाना हो, तो शुरुआत छोटे-से मन के अपने आंगन से करनी होती है। मधुरिमा का यह विशेषांक बेहतरी की...
कच्ची उम में अपने आपको हर तरह से परिपक्व मान लेने की भूल युवा आबादी करने लगी है।
सच का आईना इन्हें कौन दिखाए और...
साल का तीसरा महीना पश्चिम बंगाल के साथ ही देश की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर लेकर आया। ३४ साल तक निर्विवाद रूप से...
सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन यह सच है। कनाडा के वैंकूवर नाम के शहर में एक ऐसी पार्टी होती है, जहां आने वाला हर...
रिश्तों के महल कितने मजबूत होंगे, ये निर्भर है उनकी नींव पर। और नींव के पैमाने यदि गलत हों, तो इनकी मजबूती का सवाल ही नहीं उठता।
शादियों के इस मौसम में ऐसी ही कई बातें आपने भी सुनी होंगी। हालांकि सभी माता-पिता अपने बच्चों के लिए योग्य जीवनसाथी और खुशहाल भविष्य की कामना करते हैं। लेकिन अक्सर इस निश्छल मनोरथ में, भौतिक प्रतिस्पर्धा का छल शामिल हो ही जाता है। हमें लगता है कि बेटे या...
शादी एक ऐसा रिश्ता है, जिसके बारे में निर्णय काफी सोच-समझ कर किया जाता है। कुंडली मिलाई जाती है, घर देखे जाते हैं, परिवार के इतिहास के बारे में पता किया जाता है वगैरह-वगैरह। इनमें सबसे ज़रूरी होता है- कुंडली मिलान। लेकिन इतना काफी नहीं। विश्वास और अनुराग पर टिकी विवाह की नींव में यदि दरार पति-पत्नी की किसी रुग्णता के कारण आ जाए, तो.. इससे बेहतर है कि कुछ ज़रूरी जांचें पहले ही करा ली जाएं।...
एक फोन का, एक आवाज़ का इंतज़ार कर रहे थे दोनों बुज़ुर्ग। पर दूरियां तारों से कहां नप पाती हैं? ‘ट्रिन-ट्रिन-ट्रिन’, टेलीफोन की घंटी दो बार बज चुकी थी। रामजी लाल ने बाथरूम से ही जोर से आवाज़ लगाई, ‘अरे, बहरी हो क्या, फोन की घंटी बज रही है, उठाती क्यों नहीं।’ तब तक फोन की घंटी बंद हो चुकी थी। रामजी लाल बड़बड़ाते हुए बाथरूम से निकले और पत्नी से मुखातिब होकर बोले, ‘अरे, फोन क्यों नही...
पिछले हफ्ते की बात है। अचानक ट्रैफिक लाइट्स की मियाद पर नकार गई। लाल रही तकरीबन 74 सेंकड तक और हरी हुई, तो महका 14 सेकंड के लिए।
क्या मतलब होगा इसका? इसीलिए तो इतने सारे लोग जमा हो जाते हैं ट्रैफिक सिग्नल पर। लाल तो देर तक बनी रहती है। सब लोग रुके रहते हैं। बेसब्र, बेचैन। पार जाने को बेताब। लाल की उल्टी गिनती पूरी हो भी नहीं पाती और ये उड़ चलते हैं। आखिर कोई कब तक रुका रहे।
जीवन में अवसर...
26 -27 साल पहले जब हमने नगर की एक गली में मकान खरीदा था, तब सामने एक नीम का छोटा पौधा पेड़ बनने की तैयारी कर रहा था और मकान के सामने कच्ची सड़क थी। चारों ओर खेत थे। खेतों में समय-समय पर गेहूं, चने, मक्का, सोयाबीन की फसलें बोई जाती थीं। खेतों की बालियां, ज्वार के, भुट्टे-चने के साग व कच्चा-पक्का होली का स्वाद बढ़ाते थे। ठंडी हवा का आनंद ही निराला था। कच्ची सड़क के किनारे नीम की बढ़ती शाखाओं के...
एक दिन प्रचंडतम सूर्य ने अपनी पत्नी संज्ञा से कहा, ‘तू सदैव मुझे देखकर आंखें ढंक लेती है। क्या तुझे मेरा तेजस्वी रूप रुचिकर नहीं लगता?’ पतिव्रता संज्ञा ने अपने कोमल मुख पर आकाश में उड़ते मेघ का घूंघट कर लिया। सूर्य के प्रचंड तेज के सामने वो अपने नेत्र न खोल सकी। सूर्य देव अपनी पत्नी की इस विमुखता से और भी उग्र हो गए। संज्ञा भयत्रस्त हो गई। भगवान सूर्य की अनुपस्थिति में वह एक दिन...
यह तस्वीर हमारे बच्चों की जिंदगी का सच बयान कर रही है!
जाने-अनजाने में खुद ही हमने अपने बच्चों की दुनिया में रावण सहेज दिया है, जिसके साये में हमारे बच्चे महफूज नहीं हो सकते। इस रावण के दसों शीश संकटसूचक हैं। एक-एक पर गौर कीजिए।
शिष्टाचार का अभाव
बड़ों के प्रति आदर और व्यवहार में सौम्यता की सीख हम बच्चों को नहीं दे रहे हैं। यहां तक कि उन्हें नमस्ते, शुक्रिया या सॉरी जैसे साधारण...