रुचि इन दिनों अपने लाइफ पार्टनर को लेकर कुछ परेशान सी है। दरअसल हंसमुख और खुशमिजाज रमेश ने अचानक चुपचुप रहना शुरू कर दिया है। ऑफिस से आने के बाद भी वह सीधे अपने कमरे में बंद हो जाता है न किसी बोलना न चालना।
रुचि के लाख पूछने पर वह बस इतना ही कहता है कि कुछ ऑफिस की प्रॉब्लम है। मित्रो, हम बचपन से सुनते आए हैं कि दुख बांटने से कम होता है। और सिर्फ सुना ही नहीं आपने महसूस भी किया होगा कि एक दोस्त का कंधा मिलने भर से कैसे बड़ी-बड़ी परेशानियां हल्की महसूस होने लगती हैं। लेकिन पुरुषों को अपनी प्रॉब्लम दूसरों से शेयर करना टाइम खराब करना लगता है।
हम आपको यह भी बता दें कि एक ओर जहां...
मानसून एक तकनीकी शब्द लगता है। बरसात अपनी-सी महसूस होती है। ऐसा हमारे देश में ही •यादा है। दुनिया के कितने ही देश...