अहा ज़िंदगी

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Aha! Zindagi

  • वे जीवनदायनी सुवास थे
    निरुक्तकार मुनि यास्क ने लिखा ही है, अपना और सबका सत्य जानना है तो लोक के पास जाओ। अनुपम एक ऐसे ही सत्य की तलाश में जीवन भर चलते रहे। उनकी निगाह में यह सत्य और कुछ नहीं, वह लोक-विवेक और लोकप्रज्ञा थी, जिससे संवाद कर धरती और उसके निवासियों की लड़खड़ाती सांस को फिर से सहेजा और स्वस्थ किया जा सकता था। इस अर्थ में वे भी एक भौतिक-द्रष्टा थे, मार्क्स की तरह। हमारी अपनी पश्चिम-प्रेरित और पोषित आधुनिक सभ्यता के बारे में सोचता हूं तो रामायण-महाभारत के कथानक याद आते हैं। रामायण में अगर रावण की सोने की लंका है...
    February 21, 12:00 AM
  • उन्हें पता है, क्या करना है और क्या बिल्कुल नहीं करना...
    साइकिल से घर से निकलते तो थे अमिताभ बच्चन की फ़िल्में देखने, लेकिन जब थिएटर पहुंचते और थिएटर भरा देखते, तो वे दुखी नहीं होते, बल्कि ख़ुश हो जाते। ख़ुशी ऐसी कि जैसे वे ही इस फ़िल्म के प्रॉड्यूसर हों। फ़िल्म हाउसफुल जो जा रही है। मन में सोचते, वाह! क्या बात है!! अपना क्या है। कभी भी फ़िल्म देख लेंगे। अपने अमिताभ बच्चन की फ़िल्म को तो हाउसफुल ही जाना चाहिए। बाक़ी उत्तर भारतीयों से अलग नहीं था अमिताभ से इनका प्रेम। ख़ासतौर से जब आप उत्तरप्रदेश से हैं, तो अमिताभ तो आपके अपने हो जाते हैं। इनका भी अमिताभ को लेकर कुछ...
    January 22, 12:00 AM
  • हम अपने तरीके बदलते हैं तेवर नहीं
    अजय देवगन के करियर पर नज़र डालें तो कल तक एक्शन स्टार की इमेज रखने वाले अजय ने हर विधा की फ़िल्में की हैं। रेनकोट, अपहरण, गंगाजल, ख़ाकी, वन्स अपॉन अ टाइम इन मुम्बई, गोलमाल सीरीज़, अतिथि तुम कब जाओगे, सिंघम जैसी एक्शन, कॉमेडी, सोशल ड्रामा और थ्रिलर फ़िल्में सच में, ऐसी विविधता समकालीन स्टारों में किसी और के पास नहीं हैं। आइए इस शख़्सियत को करीब से जानें... अजय देवगन देश भर के चहेते कलाकारों में से एक हैं। उन्होंने हर जॉनर की फ़िल्मों में अपनी बेहतरीन अदाकारी का प्रदर्शन कर सिने प्रेमियों का मन मोह लिया...
    December 21, 12:00 AM
  • गीत ही मेरे शब्द हैं!
    नोबेल समिति ने 2016 का साहित्य का नोबेल पुरस्कार गायक, संगीतकार, गीतकार, चित्रकार बॉब डिलन को प्रदान किया गया है। यह पहली बार किसी गायक-गीतकार को दिया गया है। 55 साल से उनके जादुई गीत उदासी, ख़ुशी, निराशा, प्रतिरोध की सृष्टि करते आ रहे हैं। नोबेल समिति पर अमेरिका विरोधी होने का आरोप था (1993 में टोनी मॉरीसन को मिला था), समिति के इस निर्णय ने उनके इस कलंक को दूर कर दिया है। साहित्य की कुलीन दुनिया के बाहर जाकर नोबेल समिति ने गीत को काव्य और उपन्यास जैसा कलात्मक महत्व देते हुए एक गीतकार-संगीतकार को...
    November 21, 11:05 AM
  • गिरता हूं, उठता हूं, गलतियां करता हूं, सीखता हूं
    टीवी का सबसे प्रसिद्ध चेहरा कपिल शर्मा ने कामयाबी को बड़े परदे पर भी दोहराया है। उनकी पहली फ़िल्म किस किस को प्यार करूं का सफल होना उनके बढ़ते स्टारडम के क़द को ही बयां करता है। जब यशराज बैनर ने फ़िल्म च्बैंक चोरज् से कपिल को हटाया था, तो यही लगा था कि अब कपिल छोटे परदे तक ही सीमित रह जाएंगे, लेकिन कपिल ने सभी को ग़लत साबित कर दिया। लाफ़्टर चैलेंज जीतने के बाद कपिल की कॉमेडी की गाड़ी निकल पड़ी थी। छोटे मियां के होस्ट बने फिर हंस बलिएज का भी हिस्सा थे। कुल मिलाकर हंसते-हंसाते पहचान बनाने में जुटे थे, लेकिन...
    October 21, 01:24 PM

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