अहा ज़िंदगी

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  • गीत ही मेरे शब्द हैं!
    नोबेल समिति ने 2016 का साहित्य का नोबेल पुरस्कार गायक, संगीतकार, गीतकार, चित्रकार बॉब डिलन को प्रदान किया गया है। यह पहली बार किसी गायक-गीतकार को दिया गया है। 55 साल से उनके जादुई गीत उदासी, ख़ुशी, निराशा, प्रतिरोध की सृष्टि करते आ रहे हैं। नोबेल समिति पर अमेरिका विरोधी होने का आरोप था (1993 में टोनी मॉरीसन को मिला था), समिति के इस निर्णय ने उनके इस कलंक को दूर कर दिया है। साहित्य की कुलीन दुनिया के बाहर जाकर नोबेल समिति ने गीत को काव्य और उपन्यास जैसा कलात्मक महत्व देते हुए एक गीतकार-संगीतकार को...
    November 21, 11:05 AM
  • गिरता हूं, उठता हूं, गलतियां करता हूं, सीखता हूं
    टीवी का सबसे प्रसिद्ध चेहरा कपिल शर्मा ने कामयाबी को बड़े परदे पर भी दोहराया है। उनकी पहली फ़िल्म किस किस को प्यार करूं का सफल होना उनके बढ़ते स्टारडम के क़द को ही बयां करता है। जब यशराज बैनर ने फ़िल्म च्बैंक चोरज् से कपिल को हटाया था, तो यही लगा था कि अब कपिल छोटे परदे तक ही सीमित रह जाएंगे, लेकिन कपिल ने सभी को ग़लत साबित कर दिया। लाफ़्टर चैलेंज जीतने के बाद कपिल की कॉमेडी की गाड़ी निकल पड़ी थी। छोटे मियां के होस्ट बने फिर हंस बलिएज का भी हिस्सा थे। कुल मिलाकर हंसते-हंसाते पहचान बनाने में जुटे थे, लेकिन...
    October 21, 01:24 PM
  • दिल से हूं एक आम लड़की
    फाइंडिंग फैनी, गोलियों की रासलीला राम-लीला, हैप्पी न्यू ईयर, पीकू, बाजीराव मस्तानी, तमाशा, जैसी फ़िल्मों में अपने अभिनय के लिए लगातार सराही जा रही दीपिका अपनी हर फ़िल्म में अभिनय के नए आयाम स्थापित कर रही हैं। यही वजह है कि बड़े बैनर और स्टार की फ़िल्में उन्हें लगातार ऑफ़र हो रही हैं। पद्मावती के अलावा शाहरुख़ की आनंद एल राय निर्देशित फ़िल्म हो या सलमान की फ़िल्म ट्यूबलाइट सभी में दीपिका पादुकोण ही पहली पसंद हैं। आज वह परदे पर समकालीन अभिनेत्रियों में आगे नज़र आ रही हैं। उज्जला और प्रकाश की बेटी...
    September 22, 12:35 PM
  • मौन हो गया कलाओं के अंतः संबंधों का रंगकाश
    कावलम नारायण पणिक्कर जन्म : 28 अप्रैल, 1928 निधन : 26 जून, 2016 कवि, नाटककार, रंगमंच निर्देशक, गीतकार कावलम नारायण पणिक्कर नहीं रहे। उन्होंने लगभग २५ से अधिक नाटकों का लेखन किया और संस्कृत को अाधुनिक रंगकर्म की भाषा बनाया। उनके अलावा किसी और आधुनिक रंगकर्मी ने संस्कृत में इतने अधिक नाटक नहीं खेले। उन्होंने अपने रंगकार्य से यह प्रमाणित कर दिया कि नाट्य शास्त्र मात्र शोध और पूजा का ग्रंथ भर नहीं है, बल्कि उसमें अनेक स्वरूप और रंगविधियां आज तक हमारी कई पारंपरिक और लोक शैलियों में सजीव-सक्रिय हैं।...
    August 21, 12:18 PM