अहा ज़िंदगी
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  • जिस फिल्म में गिरती हूं वह हिट होती है
    वे सिर्फ सुपरस्टार नहीं हैं, बल्कि जि़ंदगी अपने टर्म पर जीने वाली एक आम गृहिणी भी हैं। जीवन को लेकर उनके अपने नियम हैं। फिल्मी दुनिया में जहां कामयाबी के चलते लोग विवाह की बात करने से भी कतराते हैं वहीं, उन्होंने अपने करियर के पीक पर शादी कर ली, फिर बच्चे। लेकिन आज भी वे अपने परिवार, घर, बच्चे और करियर में बहुत ही खूबसूरती से सामंजस्य बना लेती हैं। वे कई अभिनेत्रियों के लिए आइडियल हैं। उनकी सच्चाई उनकी खिलखिलाती मुस्कुराहट में सुनी जा सकती है, क्योंकि वे अब भी दिल खोलकर एक छोटे बच्चे की तरह हंसती...
    January 21, 01:14 PM
  • मैं इसी दुनिया की तलाश में था
    हाथ में बंदूक लेकर, गर्दन में मफलर बांधे हुए एक छोटी कद-काठी का सांवला-सा लड़का जब स्क्रीन पर गोलियों की बरसात करता है, तो पूरा हॉल तालियों से गूंज उठता है। दर्शकों के दिलों पर उसने इस कदर राज कर लिया है कि अब जब भी वह परदे पर आता है, लोग उनके किरदारों के नाम लेकर सीटियां बजा रहे होते हैं। उसके परदे पर आते ही, हंसी-ठिठोली के साथ-साथ तालियों की गूंज बढ़ती जाती है। वह कलाकार जब परदे पर शानदार, ज़बर्दस्त, जि़ंदाबाद के नारे लगाता है, तो हॉल में बैठी पब्लिक उसके साथ लय मिलाती है। शायद ही इस कलाकार ने खुद कभी...
    December 21, 12:58 PM
  • बहू हो तो अंगूरी जैसी
    शिल्पा शिंदे जितनी खूबसूरत अदाकारा हैं, उतनी ही सुलझी हुई इंसान भी। भाभी, आम्रपाली, संजीवनी, कभी आए ना जुदाई, बेचारा बिग बी जैसे कई हिट धारावाहिकों में तरह-तरह के सफलतापूर्वक किरदार निभाने वाली शिल्पा शिंदे ने अपनी मेहनत के बलबूते छोटे परदे पर अपनी एक अलहदा पहचान बनाई है। इन दिनों एंड टी.वी. पर प्रसारित होने वाले धारावाहिक भाभीजी घर पर हैं को लेकर वे खासी सुर्खियों में हैं। खासकर इस शो में उनका अंगूरी भाभी का किरदार दर्शकों को काफी पसंद आ रहा है। वैसे देखा जाए तो शो में सीधी-सादी सी दिखने वाली...
    November 21, 12:00 AM
  • आंचलिक चित्रकला का अलौकिक स्मृतिलोक
    पेमा फत्या को पिछले पच्चीस वर्षों से देखते रहने का अवसर मिलता रहा है। उन्होंने उस वक्त झाबुआ से लेकर भोपाल तक की कठिन यात्रा की है, जब उस जनजातीय अंचल से मध्यप्रदेश की राजधानी तक आवागमन के साधन उतनी सरलता के साथ मौज़ूद न थे। मध्य प्रदेश के झाबुआ में भाभरा वो स्थान है जहां के चंद्रशेखर आजाद थे। वे मूंछों पर ताव देने वाले बहादुर योद्धा और देशभक्त थे, जिन्होंने अंग्रेजो का मुकाबला जि़ंदादिली से किया और शेर की तरह स्वयं ही मृत्यु का वरण किया। उसी भाभरा के पेमा फत्या हैं। पेमा फत्या जनजातीय...
    November 21, 12:00 AM
  • उसके सपने ने रच दिया एक शहर
    देश के प्रथम आधुनिक और सुनियोजित शहर चंडीगढ़ के निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले मुख्य वास्तुकार ली कार्बूजिए (1887-1965) की इस वर्ष पचासवीं पुण्यतिथि मनाई जा रही है। इसके तहत शहर का पर्यटन विभाग, नगर नियोजन और चंडीगढ़ कॉलेज ऑफ आर्किटेक्चर विशेष कार्यक्रमों का आयोजन जुलाई माह से ही करता आ रहा है तथा इसमें प्रमुख समाचार पत्र दैनिक भास्कर की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। इसी दौरान ली कार्बूजिए की ओर से डिज़ाइन किए गए इमारतों को यूनेस्को से हेरिटेज का दर्जा दिलाने का नए सिरे से प्रयास भी किया जाएगा।...
    November 21, 12:00 AM
  • मैं आम आदमी की तरह हूं...अमोल पालेकर
    1970 के दशक में उनकी गिनती एक सुपरस्टार के तौर पर थी। यूं तो उन्हें अधिक मीडिया हाइप नहीं मिली, लेकिन उनकी फिल्मों की सफलता ही उनकी कहानी कहती है। समानांतर सिनेमा में उनका कद एक बड़े कलाकार के रूप में रहा। वे समानांतर सिनेमा मूवमेंट का अहम हिस्सा थे। उनके अभिनय की खास विशेषता यह थी कि उन्होंने अपने आप को परदे पर हमेशा साधारण नायक के रूप में पेश किया, जबकि 70 के दशक में नायक की पर्सनेलिटी लार्जर दैन लाइफ वाली थी, लेकिन यह नायक सुपरमैन नहीं, बल्कि आम आदमी था, जो ऑफिस जाता है, ट्रेन में चलता है। हम बात कर...
    October 21, 12:00 AM