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अहा ज़िंदगी

हम अक्सर समय की किल्लत का रोना रोते रहते हैं। शादी, पार्टी और विशेष उत्सव पर न पहुंच पाने की मजबूरी ‘समय की कमी’ के...

उषा के पीछे एक अनंत अतीत है उषा के सूक्तों में काल की अनंतता का और ह्रास का प्रारंभिक निराशावाद पाया जाता है।...

मन:स्थिति

मिकोला और सार्गेइका स्कूल की छुट्टी के बाद घर लौट रहे थे। स्कूल में टीचर ने सार्गेइका से जो प्रश्न पूछे थे, उनका...

कबीर का पलटवार

कबीर गंगा के घाट पर थे। उन्होंने एक ब्रम्हांड को किनारे पर हाथ से अपने शरीर पर पानी डालकर स्नान करते देखा तो अपना...
 

सिनेमा को नए रंग दे रही स्त्रियां

‘सिनेमा महिलाओं के बस की बात नहीं है..’ साल 1913 में भारत में मोशन पिक्चर्स की शुरुआत के साथ इस धारणा ने भी पैठ बना ली...

औरत के हक में आयोग

महिलाओं के जो हित संविधान में वर्णित हैं, उनकी रक्षा करने और उनकी खातिर कानूनी सुरक्षा उपाय लागू कराने के लिए...
 

और खबरें

 
 
 

  • April 5, 03:36
     
    नकाब से ढका चेहरा और उसमें से झिलमिलाती दो आंखें। गौर से देखने पर आप पाएंगे कि दुनिया को देखती उन आंखों में खुद की जमीन और आसमान तलाशने की ख्वाहिशें भरी हुई हैं। बदलते समय के साथ ख्वाहिशों के आसमान में कई मौसमों ने करवट ली। इन बदले हुए मौसमों ने नए रंग, नई खुशबुओं और नई हवाओं के तोहफे उन्हें दिए हैं। कुछ समय पहले तक वे क्या हैं और क्या चाहती हैं? जैसे सवालों पर खामोश रहने वाले होंठों...
     

  • March 12, 05:26
     
    बड़े-बुजुर्गो को आपने कहते सुना होगा कि प्रेम विवाह अधिकतर मामलों में विफल ही रहते हैं। पहली नज़र में उनकी यह बात सही भी दिखती है, लेकिन इस निष्कर्ष में एक यह खामी है कि ज्यादातर लोग प्रेम को समझने में गड़बड़ी करते हैं। बिना समझ के किए प्रेम के कारण ही बाद में रिश्तों में दिक्कतें आती हैं। अक्सर होता यह है कि या तो स्त्री पुरुष के बीच एक नैसर्गिक आकर्षण को ही प्रेम समझ लिया जाता है या...
     

  • March 12, 05:19
     
    एक स्त्री ने मरते समय पति से कहा, ‘मैं तुम्हें बहुत होशियार करती हूं और तुम्हें छोड़कर जाना नहीं चाहती। मेरे जाने के बाद तुम दूसरी शादी मत करना। अगर तुमने ऐसा किया, तो मैं भूत बनकर आऊंगी और तुम्हें परेशान करूंगी।’ युवा स्त्री चल बसी। उसके पति ने तीन महीने तक उसकी अंतिम इच्छा का सम्मान रखा। चौथे महीने उसकी मुलाकात एक युवती से हुई । जल्दी ही दोनों की सगाई हो गई। सगाई की रात ही भूत...
     

  • March 11, 05:04
     
    आज दौड़ती ज़िन्दगी में पीछे छूट जाने का डर हमारी रफ्तार को बढ़ा देता है। कभी-कभी यह रफ्तार इतनी तेज हो जाती है कि हमें अपने या अपनों के बारे में सोचने का वक्त ही नहीं मिलता। दौड़ते वक्त के साथ कदम मिलाकर चलने के लिए हमने जिस जीवन शैली के रंग में खुद को ढाल लिया है, उसने हमें कई तरह के रोग दिए हैं। जो हमारी गति को धीमा कर देते हैं। कुछ रोग जिनसे जीवन को ज्यादा खतरा होता है, उनकी चिंता तो...
     

  • March 11, 04:52
     
    जीवन भर हम करते रहते हैं, खुशियों की तलाश। इस तलाश में हमें कभी भूलना नहीं चाहिए कि जीवन की सभी खुशियों का बस एक आधार है, वह है स्वस्थ शरीर। अगर शरीर स्वस्थ न हो तो चिंता का प्रसन्न रहना मुश्किल है। मगर जिस युग में हम जी रहे हैं, उस युग में पूर्ण स्वस्थ रहना भी एक बड़ी चुनौती है। कई ऐसे रोग हैं, जिनसे हर किसी का सामना कभी न कभी होता ही है। ऐसा ही एक रोग है — मधुमेह, जिसे लोग डायबिटीज के नाम...
     

  • March 11, 04:34
     
    स्केचपेन, बालपेन की खाली रीफिल, एक गुब्बारा और साधारण से औजार लें। अब इसे बनाने के लिए डिब्बी के ढक्कन के मध्य भाग को एक धारदार चाकू से काटें। ध्यान रहे छेद का व्यास लगभग 1.5 से.मी. हो। अब डिब्बी के पेंदे के बीच में छेद करें। एक नुकीली कैंची घुमाकर इस छेद को बड़ा करें। छेद इतना बड़ा हो कि स्केचपेन उसमें कसकर फिट हो जाए। अब डिवाइडर की नोक से डिब्बी के मुंह से करीब 1 से.मी. नीचे गोलाकार सतह...
     

  • March 9, 04:26
     
    ज्ञान के अर्जन का महत्वपूर्ण स्रोत रही हैं- किताबें, लेकिन नए जमाने में ज्ञान के प्रारंभिक अंग, यानी जानकारी का जरिया काफी बदल गया है। अब किताबों के साथ इंटरनेट पर भी सूचनाओं, समाचारों और तथ्यों की बाढ़ है। ऐसे ही कुछ ठिकानों पर आइए, डालते हैं नज़र : www.nationalgeographic.com आपको देश दुनिया के बारे में जानना है। प्रकृति, पर्यावरण, रहस्य, जीव जंतुओं, परंपराओं और देशों की जुड़ी जानकारियों को जानना...
     

  • March 9, 03:37
     
    भारत बौद्धिक संपदा के मामले में बहुत आगे था। हमारे ज्ञान के स्रोत वेद, पुराण, उपनिषदों में बिखरे हुए थे। आइए देखते हैं कि युग के प्रवाह के साथ ज्ञान के स्रोत की यात्रा किनकिन रास्तों से गुजरी। पाषाण युग : पत्थरों के औजारों का ज्ञान हुआ, आग जलाने का ज्ञान हुआ, मौसम के हिसाब से जीवन को ढालने का ज्ञान हुआ, जीवनयापन करने की आवश्यकताओं का ज्ञान होना शुरू हुआ। प्राचीन काल : ऋग्वेद की...
     

  • March 9, 03:26
     
    1.ज्ञान हम सबमें अंतर्निहित होता है, यह बाहर से नहीं आता, सबके अंदर है। इसीलिए हम अक्सर जब यह कहते हैं कि एक मनुष्य को ये जानना चाहिए, जितना भी ज्ञान विश्व में फैला है, वो सब हमारे मस्तिष्क के जरिए आया है, विशाल यूनिवर्स की असीमित लाइब्रेरी हमारे दिमाग में है। बाहरी विश्व हालात के हिसाब से केवल सुझाव देता है, जिससे आप अपना दिमाग पढ़ते हैं, लेकिन किसी भी अध्ययन का उद्देश्य हमेशा आपके...
     
 
 
 
 
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