अहा ज़िंदगी
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  • सही को सही बोलने में है विश्वास
    हाल ही में संपन्न हुए क्रिकेट वर्ल्ड कप में सिर्फ एक मिनट के लिए कैमरा घूमता है और भारतीय टीम की हार का कलंक सीधे तौर पर एक महिला पर लग जाता है। लोग मान बैठते हैं कि भारतीय टीम खिलाडि़यों के बुरे प्रदर्शन की वजह से नहीं, बल्कि एक महिला के वहां मौजूद होने की वजह से हारी है। सोशल वेबसाइटों पर अनुष्का-विराट की जोड़ी का खूब मजाक बनाया जाता है। अनुष्का के लिए यह पहला मौका नहीं था, जब उन्हें इस तरह से दोषी ठहराया जा रहा है। इससे पहले भी वे जब किसी क्रिकेट मैच में शामिल हुई हैं और यदि उसमें टीम ने बुरा...
    May 21, 02:16 PM
  • फिल्मी दुनिया का आम आदमी
    जी हां, शीर्षक चौंकाता है न... फिल्मी दुनिया और आम आदमी! दोनों का ही एक-दूसरे से तालमेल नहीं। फिल्मी दुनिया में तो केवल रुपहले परदे पर ही आम आदमी को देखा गया है। वरना, वास्तविकता में तो यह दुनिया ग्लैमर की चकाचौंध से भरी है। आमतौर पर यह अवधारणा है कि फिल्मी दुनिया के वे चेहरे आम हो जाते हैं, जिन्हें सफलता नहीं मिलती, जो लोकप्रिय नहीं हैं। इस दुनिया में लोकप्रिय होकर आम बने रहना मुश्किल है, लेकिन एक शख्स हैं, जो लोकप्रिय हैं, कामयाब हैं और आम भी। उन्होंने हिंदी सिनेमा के कई दशकों को अपनी अदाकारी से...
    April 22, 12:00 AM
  • संस्कृति :  दूसरी माता है गाय, जानिए
    ज्यादा पहले नहीं, आज से पचास-साठ साल पहले तक हर संस्कृति में, हर समाज में अकाल पड़ना आम बात थी। हमारी संस्कृति में गावों में माना जाता था कि अगर आपके घर में गाय है, तो अकाल के दौरान भी आपके बच्चे जीवित रहेंगे। जब मां बच्चे को स्तनपान नहीं करा पाती थी और दूसरा भोजन भी नहीं मिलता था, तो गाय के दूध से ही बच्चे का पेट भरता था। अगर घर में गाय नहीं है तो आपके बच्चे मर जाएंगे। जाहिर है, ऐसे में गाय मां जैसी हो गई। हर कोई अपने जीवन में किसी-न-किसी समय भोजन और पोषण के लिए गाय के दूध पर निर्भर रहा है। इसलिए गाय का...
    April 21, 01:11 PM
  • मुझे मेरी मेहनत ने गढ़ा है
    यह बात इंडस्ट्री के बहुत कम लोग जानते हैं कि कैट उन अभिनेत्रियों में से एक हैं, जो अपने काम से पूरी तरह संतुष्ट नहीं होतीं। वह हमेशा चाहती हैं कि वह अपना बेस्ट दे सकें। लोगों को यह गलतफहमी है कि वह ग्लैमरस गर्ल हैं, जबकि वास्तविक जि़ंदगी में वह बहुत सरल हैं। वे जमीन से जुड़ी हुई हैं,उनका जीवन संघर्षों से बना है। उन्हें सफलता परोसी नहीं गई, उन्होंने अपना स्थान खुद बनाया है। अगर हम 20 घंटे काम करने के लिए भी कहते हैं, तो वे तैयार रहती हैं। आपको शायद आश्चर्य हो कि वे स्क्रिप्ट देवनागरी में पढ़ती हैं,...
    March 21, 12:27 PM
  • किताबें हमेशा जिंदा रहेंगी, शक्ल भले बदल जाए
    (फाइल फोटो- गुलजार) उन्होंने चांद-तारों पर कई नगमे लिखे हैं, लेकिन खुद को रेशमी शायर नहीं मानते। उनके जेहन में आज भी जिंदा हैं वे दंगे-फसाद, जिन्होंने लाखों का जीवन तबाह कर दिया। उनका कहना है कि नज्मों से खरोचें नहीं भरती हैं। वे जब शायरी करते हैं, तो उनकी कोशिश दूसरों के आंसू बहाने की नहीं, उन्हें थामने की होती है। उनकी ख्वाहिश है कि उन्हें किसी तमगे से न नवाजा जाए... बस, लोग उन्हें महसूस करें और वे लोगों को... बात हो रही है गुलज़ार साहब की। उन गुलज़ार साहब की जो एक तिलिस्म हैं। जो कभी बच्चों के साथ...
    February 27, 01:59 PM
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