

सबसे पहले तो आपको ब्यूनस आयर्स के बारे में कुछ बता दें। यह साओ पोलो (याद है न ब्राज़ील का शहर) के बाद दक्षिणी अमेरिका...
रात को शिखा बिस्तर में जाकर लेटी तो उसकी नज़र दीवार से चिपकी एक छिपकली पर पड़ी, जो ट्यूबलाइट के करीब छोटे-छोटे...
एक अकेला दो का मेला,
तीन तिगाड़ा खेल बिगाड़ा।
चार चौकड़ा फैला आड़ा,
आंगन में घुस आया पाड़ा।
पांच पंच का बजा...
मोनू- नकली दांत सितारों जैसे क्यों होते हैं?
सोनू- इसलिए क्योंकि रात में बाहर आते हैं।
गायक-सर आपको नहीं लगता...
इस वर्ष ‘बहादुर बच्चों’ का पुरस्कार लेने वेरुला भी आई थी। सत्रह बच्चों के साथ उसे भी चुना गया था। गरीब मछुआरा कमरुख आठ साल की वेरुला को लेकर सुदरवन के पेरू गांव से दिल्ली आया था। उसे और वेरुला को इतना बड़ा शहर देखकर डर लग रहा था। इतनी बड़ी-बड़ी इमारतें, चौड़ी और लम्बी सड़कें, उनपर भागती कारें और सजे-संवरे लोगों को देखकर वे दोनों आश्चर्यचकित थे। वेरुला को महिलाओं के एक समाजसेवी...
प्रतियोगिता जब आखिरी चरण में होती है, तो अचानक ही दिल की धड़कनें तेज़ हो जाती हैं। न जाने कौन जीतेगा? या फिर अबकी बार तो मेरा नाम ही आने वाला है। इस तरह के न जाने कितनी बातें आप खुद से करने लगते हैं। खैर गलती आप सबकी भी नहीं है। प्रतियोगिता से कुछ लोगों का सीधा मतलब होता है, जीतना। अगर आप किसी प्रतियोगिता में द्वितीय या तृतीय भी आए तो भी कोई खास प्रसन्नता नहीं होती है।
पर सबसे अहम है...
हैप्पी न्यू ईयर
नए साल की शुरुआत हो चुकी है। और सारे धमाल भी खत्म हो चुका है। अब तो बस सामने हैं एक्ज़ाम्स!
अरे, डरने की कोई बात नहीं। अभी तो थोड़ा समय है और अगर आप बाल भास्कर में प्रकाशित हो रहे एक्ज़ाम्स की तैयारी वाले लेखों को गौर से पढ़ रहे होंगे, तब तो डरने की कोई बात रह भी नहीं जाएगी। इस बार हमने टीचर जी के कोने में बात की है खुद का टेस्ट लेने की। यह ऐसा एक्ज़ाम है, जिसमें टीचर भी आप...
इतनी कम उम्र में किसी कंपनी का सीईओ बनना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। अपने काम के प्रति जुनून और दिलचस्पी ने आठ साल के एक बच्च्े को एक कम्पनी का सीईओ बना दिया। आखिर ऐसा क्या हुआ कि वो बच्च इतनी सी उम्र में बन गया एक कंपनी का सीईओ! नन्हें खबरी से सुनें।
उसे बॉस की तरह जीना अच्छा लगता है। वह जानता है कि इसमें कितना मÊा आता है, जब आप किसी कम्पनी के बॉस हो। लंदन के स्टॉक न्यूइंगटन का रहने...
मेरा नाम पैनेराम है। हिमाचल प्रदेश में रहता हूं। हिमाचल बारह जिलों में बंटा हुआ है। हर जिले की अपनी संस्कृति, रहन-सहन और खानपान है। मैं हिमाचल प्रदेश के एक छोटे से गांव में अपने माता-पिता और बहनों ‘कश्मीरो’ और ‘व्यासा’ के साथ रहता हूं।
हमारे घरों की छतंे स्लेट और लकड़ी से बनाई जाती है। छतें ढलवां होती हंै और फर्श कच्चे, जिन पर गोबर और मिट्टी को मिला कर लिपाई की जाती है। अब अधिकतर...
एक शिकारी था। वह प्रतिदिन शिकार करने जंगल जाया करता था। एक दिन उसे कोई शिकार नहीं मिला। वह थक-हार कर पेड़ के नीचे बैठ गया। तभी उसकी नÊार पेड़ पर बैठी चिड़िया पर गई। शिकारी ने तुरंत जाल फेंक कर चिड़िया को पकड़ लिया। चिड़िया के बहुत कहने पर भी शिकारी ने चिड़िया को नहीं छोड़ा। कुछ देर शांत रहने के बाद वो बोली, ‘अगर तुम मुझे छोड़ दोगे तो मैं तुम्हें तीन बातें बताऊंगी, जिनको मानने से...
१. चार अक्षर का मेरा नाम,
टिमटिम तारे बनाना काम,
शादी, उत्सव या त्योहार,
सब जलाएं बार-बार।
२. तीन पैर की चम्पा रानी,
शाम-सवेरे नहाय,
चावल-दाल को छोड़कर,
कच्ची रोटी खाय।
३. कान बड़े हैं काया छोटी,
कोमल - कोमल बाल,
चौकस इतना पकड़ सके ना,
बड़ी तेÊा है चाल।
४. सरपट लगा हरा झंडा,
कितना मीठा और रसीला।
५. सफेद तन हरी पूंछ,
न बुझे तो नानी से पूछ ।
६. पत्थर पर पत्थर,
पत्थर पर पैसा,
बिन पानी घर...
दुनिया की सबसे छोटे कद की महिला होने का खिताब ज्योति आमगे ने हासिल किया है। ये ख़बर तो आप सबको भी मालूम है। लेकिन ज्योति के व्यक्तित्व के और भी रोचक पहलू हैं, जिनको उनसे मुलाकात के दौरान शरबानी बैनर्जी ने जाना। तो फिर चलिए, हम भी ज्योति को करीब से जानें।
गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्डस में दूसरी बार अपना नाम दर्ज कराने वाली ज्योति आमगे के घर पहुंचने से पहले तक मन में एक अजीब सा कौतुहल...
कहानी कुमराली गांव में जय सिंह नाम के एक जमींदार रहते थे, जिनके पांच बेटे और एक बेटी थी। इकलौती बेटी होने के कारण उसे सबसे ज़्यादा दुलार भी मिला। जमींदार की बेटी ज्योति, अपने पिता के इस दुलार की वज़ह से हठी और गुस्सैल स्वभाव की हो गई। इसके अलावा वो आलसी भी थी।
एक दिन जमींदार की पत्नी ने उससे कहा, ‘बेटी तो पराया धन होती है, तुम इसे इतना सिर न चढ़ाओ। विवाह के बाद कैसे निभाएगी?’
‘मैं...