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करियर मंत्रा
 
 
 
 

  • April 16, 10:38
     
    जिन्हें काम करने की जिम्मेदारी दी गई है, अगर वे विफल हो जाएं तो आपको क्या करना चाहिए? सिस्टम को कुसूरवार ठहराना चाहिए, मीडिया में इंटरव्यू के जरिए गैर-जिम्मेदार लोगों को दोष देना चाहिए या आगे होकर काम की जिम्मेदारी खुद उठानी चाहिए। ये दो छोटी कहानियां कोलकाता और...
     

  • April 15, 10:46
     
    पुराने जमाने में जब बच्चे ठीक से नहीं पढ़ते थे, तो उनके माता-पिता कहते- अगर तुम पढ़ोगे लिखोगे नहीं तो जानवर चराने लायक भी नहीं रहोगे। शायद यह उनकी दूरदृष्टि रही होगी। वे जानते थे कि जानवरों को चराने के काम के लिए भी उतना ज्ञान होना चाहिए, जितना किसी मल्टी नेशनल...
     

  • April 11, 10:30
     
    कीमती वस्तुएं जमा करना और कीमती वस्तुओं से पैसे बनाना, ये दोनों बिल्कुल अलग-अलग हैं। सोने को गिरवी रखने वाली कई कंपनियां अपने विज्ञापनों के जरिए हमें ये प्रलोभन देती हैं कि हम बैंक के लॉकर में रखे अपने सोने को बाहर निकालें और उससे पैसे बनाएं। दूसरी ओर जीवन बीमा निगम...
     

  • April 10, 11:24
     
    दो दिन पहले जब रांची पुलिस ने फायरिंग प्रैक्टिस का आयोजन किया तो आधे से ज्यादा शीर्ष पुलिस अधिकारी लक्ष्य पर निशाना साधने में नाकामयाब रहे। झारखंड के कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, जिनमें भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी भी शामिल थे, सही निशाना नहीं लगा पाए। ये हालत उस वक्त है...
     

  • April 8, 09:21
     
    युवाओं का आकलन केवल शैक्षिक मापदंडों पर ही न करें। हो सकता है कि वे पढ़ाई में अच्छे न हों, लेकिन दूसरे क्षेत्रों में ऐसे काम कर सकते हैं जिससे खुद उनका और परिवार का नाम रोशन हो।  18 से 21 वर्ष की उम्र के बीच आमतौर पर दो ही चीजें अच्छी हो सकती हैं और यदि नहीं...
     

  • April 7, 09:14
     
    हम अपने जीवन के न रहने के बाद अगर अपनी आंखें दान करने का संकल्प लें तो इससे दो अंधेरे जीवन को रोशनी मिलती है। यह संवाद थे, दैनिक भास्कर और पटेल गु्रप आफ इंस्टीट्यूशन्स द्वारा नुक्कड़ नाटक दस्तक-ये खामोशी कब तक का प्रदर्शन नेहरू नगर व कमला नगर मार्केट में पटेल कॉलेज के...
     

  • April 6, 10:09
     
    फंडा यह है कि...  बिजनेस के असाधारण आइडिया भी यदि बाजार की जरूरतों को पूरा करते हों तो इसके अच्छे परिणाम मिलेंगे और बिजनेस भी तेजी से आगे बढ़ेगा। आइडिया कितना भी छोटा क्यों न हो, यदि वह उपभोक्ताओं की उम्मीदों पर खरा उतरता है तो इसके आपको अच्छे नतीजे जरूर मिलेंगे। ...
     

  • April 4, 09:16
     
    अपनी जिंदगी के 30 साल उसने कूड़ा बीनते हुए बिताए थे। बचपन से ही वह अपनी झोपड़ी के आसपास कूड़ा बीनने में अपनी मां की मदद करती थी। इसके बदले उसे मां से प्रशंसा भी मिलती थी। चूंकि वह इसी माहौल में पली-बढ़ी थी, तो उसे लगता था कि उसका जन्म इसीलिए हुआ है और यही उसके जीने का...
     

  • April 3, 09:33
     
    बृंदा के माता-पिता धरमपेठ, नागपुर में रहते हैं। बृंदा और जगदीशन की शादी 25 साल पहले हुई थी, लेकिन नागपुर की गर्मी के चलते वे शादी के बाद कभी गर्मी के मौसम में वहां नहीं गए। उनका बचपन नागपुर में ही बीता था और वे वहां की गर्मी और बिजली की कटौती से अच्छी तरह वाकिफ थीं, लेकिन...
     

  • April 2, 10:05
     
    मौजूदा दौर में स्कूल से घर जाने के रास्ते में बस में छात्रों के शारीरिक शोषण की खबरें आम होती जा रही हैं। मुंबई जैसे शहरों में तो ऐसे मामले रोजाना बढ़ रहे हैं। इससे निपटने के लिए पहले बसों में महिला कर्मचारियों को तैनात किया गया, लेकिन समस्या का समाधान होने के बजाय ये...
     

  • April 1, 12:18
     
    जे. जॉनसन अब 57 वर्ष के हो चुके हैं। वे हर दिन सुबह 1०.३० बजे चेन्नई के नंगमपक्कम इलाके में कॉलेज रोड पर स्थित चर्च के पास आकर बैठ जाते हैं। उनके हाथों में एल्यूमिनियम का एक डिब्बा होता है, जो पुराने जमाने के नाइयों के पास होता था या फिर छोटे स्कूली बच्चों के पास। ...
     

  • February 28, 12:03
     
    कहानी 1 : यह वीभत्स किस्सा पायाली नामक एक छोटे-से गांव का है, जो मप्र में जबलपुर से 150 किलोमीटर दूर मंडला जिले के नैनपुर तहसील का हिस्सा है। वर्ष 2012 में 26-27 दिसंबर की रात को 32 वर्षीय राजकुमार अपनी भतीजी को बहला-फुसलाकर सुनसान इलाके में ले गया। फिर उसके साथ दुष्कर्म कर उसकी...
     

  • February 25, 12:22
     
    यदि आप किसी की मदद करना चाहते हैं तो उसे एक दिन खाने के लिए मछली देने की बजाय मछली पकडऩे वाला जाल दीजिए। पेट की भूख शांत करने में लोगों की मदद करना बुरा नहीं है, लेकिन इससे बेहतर है कि वे खुद ऐसा करें और आप इसमें उनकी मदद करें। परोपकार ऐसा करें जिसका असर लंबे समय तक बना...
     

  • February 23, 10:13
     
    संता वहते कृष्णा माई- यह मराठी भाषा का एक पुराना भक्ति गीत है जिसे गायक-संगीतकार सुधीर फड़के की सुमधुर आवाज ने अमर बना दिया है। इस गीत में स्थिरता और शांति की प्रतीक कृष्णा नदी की वंदना की गई है। यह इंसान को सुख और दुख को एकसमान भाव से स्वीकार करने के साथ शांति...
     

  • February 21, 11:32
     
    अपना काम कुछ ऐसा होने की कल्पना कीजिए: आप कुछ घूंट अंदर लेते हैं, उसे मुंह के अंदर थोड़ी देर तक घुमाते हैं और फिर बेसिन में थूक देते हैं। इसके बाद इस पेय की गुणवत्ता के बारे में बताना शुरू कर देते हैं। लोग आपकी बातों को ध्यान से सुनते हैं, उसके नोट बनाते हैं और आपकी बातों...
     
 
 
 
 
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