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  • प्रकृति के करीब आया फैशन
    फैशन की दुनिया में नित नए एक्सपेरीमेंट होते हैं। इन एक्सपेरीमेंट्स के जरिए प्रकृति को संरक्षित करने की पहल इंटरनेशनल और भारतीय डिजाइनर्स कर रहे हैं। न्यू यॉर्क, लंदन, पेरिस और मिलान के स्प्रिंग/ समर फैशन वीक के साथ ही इंडियन फैशन वीक में भी ईको-फैशन ने अपनी जगह बना ली है। रैम्प से रिएलिटी को जोड़ते हुए फैशन ब्रांड्स और डिजाइनर्स ईको-फैशन की राह पर चल रहे हैं। ह्रश्वलास्टिक और वेस्ट मटेरियल को रीसाइकिल करके फैब्रिक तैयार करना इस दिशा में उठाया नायाब कदम है। इसके अलावा वाटरलेस फैब्रिक,...
    April 20, 04:00 AM
  • सभा में बज उठा चुनावी संगीत...
    माहौल चाहे किसी उत्सव का हो या फिर चुनाव का बिना संगीत सभा, भला पूरा कैसे हो सकता है? इस सभा में राग लगाने पहुंचे गायक और कवियों ने अमूमन सभी रागों को चुनावी रंग में ढालकर तान छेड़ी, वहीं बीच में मौका पाकर शायर महोदय ने भी दिल के अरमान नज़्मों से बयां किए। चुनाव महाभारत है। भाइयों को लड़ाता है। अहम् को मारता है। चुनाव बारिश है। कीचड़ उछालता है और उसी कीचड़ में कमल भी खिलाता है। चुनाव नज़्म है- मिसरा-काफिया मिलाता है। दिल भी तोड़ता है। चुनाव संगीत है। शास्त्रीय हो, सुगम हो तो भीतर तक जाता है और हल्का...
    April 20, 04:00 AM
  • विश्व बाल साहित्य और भारत
    22 अप्रैल विश्व पुस्तक दिवस बाल साहित्य के स्वरूप को समझने की महत्वपूर्ण कसौटी है- बच्चों की समाज में स्थिति। परिवार, स्कूल और समाज किस रूप में बच्चों के साथ जुड़ता है। हमारे यहां बचपन व किशोरावस्था क अवधारणा ही नैतिकताओं व उपदेशों तक सीमितहै। परीक्षा और ज्यादा नंबर पाने की मजबूरी ना हो तो बराबरी, संवाद, तर्क और विज्ञान का कोई स्थान ही नहीं है। अभी भी स्कूलों में साहित्य की कक्षाएं नैतिक शिक्षा के पर्याय के रूप देखी जा सकती हैं। शिक्षा का अधिकार कानून बच्चों के अधिकार की बात करता है, लेकिन...
    April 20, 04:00 AM
  • बहार एक दिन में नहीं आती...
    महान वैज्ञानिक थामस एडिसन, विद्यालय में महज तीन महीने ही नियमित रूप से पढ़ पाए, वो ऊंचा सुनते थे और बच्चों के बीच उनकी हरकतें मूर्खता भरी लगती थीं। वो अपने अध्यापकों का कहा नहीं सुन पाते थे, एक दिन वह अपनी शिक्षिका के एक नोट के साथ लौटे जो उनकी मां के लिए था - आपका बेटा बेवकूफ है, इसे स्कूल से निकाल दीजिए। मां ने तय किया अपने बेटे को वह खुद पढ़ाएगी। आज हम जिस एडिसन को जानते हैं, उसके नाम हजार से भी ज्यादा वस्तुओं के पेटेंट दर्ज हैं। मूर्खो-सी हरकत करने वाला यह बालक कितना दृढ़ था, यह इस बात से पता चलता...
    April 20, 04:00 AM
  • खुशवंत सिंह जिसे इंसान ना मिल सका...
    खुशवंत सिंह को मौत ने 99 पर आउट कर दिया। पंजाब का वो बेटा जिसने बंटवारे के ख़ंजर से अपने शहरों, क़स्बों को कटते हुए देखा था और सिर्फ 7 साल बाद ट्रेन टू पाकिस्तान लिखी। आजादी को वो जिस नजर से देखते थे उसके बारे में उनके नॉवेल का एक आम किरदार कड़वा सच बोलता है- आजादी पढ़े-लिखे लोगों के लिए है जिन्होंने इसके लिए लड़ाई लड़ी। हम अंग्रेजों के ग़ुलाम थे। अब हम पढ़े-लिखे हिंदुस्तानियों के ग़ुलाम होंगे या पढ़े-लिखे पाकिस्तानियों के ग़ुलाम होंगे। ख़ुशवंतजी को अपनी जन्मभूमि से बेइंतहा मुहब्बत थी। इसके बावजूद वो...
    April 20, 04:00 AM
  • बाबुल मेरा नैहर छूटा जाए...
    पिछले बार बात जद्दन बाई की बात अधूरी छूट गई तो फजऱ् यह बनता है कि आज बिना किसी लाग लपेट के सीधे मुद्दे पर आ जाएं। और मुद्दे की बात यह है कि बम्बई आने से पहले जद्दन बाई की जि़ंदगी भारी उथल-पुथल से भरी थी। पहली बार कलकत्ते पहुंचने के बाद संगीत शिक्षा ली और वहीं पर मां दिलीपा और पिता मियां जान ने बाकायदा कोठा खोल लिया। उस दौर के कलकत्ते में बड़ी-बड़ी नामी तवायफ़ों के कोठे थे और मुल्कभर से कद्रदान उनका गाना सुनने और मुजरा देखने पहुंचते थे। ऐसे माहौल में भी जद्दन ने अपने हुनर से जल्द ही नाम कमा लिया और...
    April 13, 04:36 AM
  • ख्यात नायकों की गुमनाम राजनीतिक विरासत
    राजनीति में वंशवाद की पुरानी परंपरा रही है। देश की राजनीति में अपना वर्चस्व रखने वाले कुछ दमदार राजनीतिज्ञों के खानदान का नाम उनके चिराग रोशन कर रहे हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी हैं, जिन्हें आज तक कुछ खास पहचान नहीं मिली। कारण चाहे जो भी हों, लेकिन हकीकत में इन लोगों ने अपने बूते कोई ऐसा काम नहीं किया जो इन्हें राजनीति के इतिहास में याद किया जाएगा.. परिवारवाद के कारण भारतीय लोकतंत्र हमेशा सांसत में रहा है। आरक्षण की राजनीति के बाद उभरे नेतृत्व हों या आजादी के बाद से समस्याओं पर जमे रहने वाले, सभी ने...
    April 13, 04:26 AM
  • हिंदी सिनेमा के दो चेहरे
    सिनेमा में उत्कृष्ट योगदान और प्रभावशाली भूमिकाएं निभाने वाले दो कलाकारों कमल हासन और विद्या बालन कपूर को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने हाल ही में नागरिक सम्मान पद्म भूषण और पद्मश्री से नवाजा है। इन दोनों सितारों से होते हैं रूबरू। विद्या बालन कपूर जन्म : 1 जनवरी, 1978, पूथमकुरुसी, केरल पेशा : फिल्म अभिनेत्री अवॉर्ड : पद्म श्री (2014), कलाईमामनी उपलब्धि : हिंदी सिनेमा में हीरोइन की परंपरागत इमेज को बदला। इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न की ब्रांड एंबेसेडर कुछेक फिल्मों को छोड़ दें तो हिंदी...
    April 13, 04:18 AM
  • ताकी हर कोई पढ़ सके..
    कहते हैं किताबें इंसान की सबसे अच्छी दोस्त होती हैं। ऐसे में इस दोस्ती को औरों से साझा करने की अनूठी कोशिश कर रहे हैं एक शख्स। प्रेमपाल शर्मा, रेल मंत्रालय में कार्यकारी निदेशक पद पर दिल्ली में तैनात एक प्रशासनिक अधिकारी हैं। उत्तर प्रदेश के जिला बुलंदशहर के दीघी गांव के एक किसान परिवार में जन्मे प्रेमपाल शर्मा। बचपन में दादा की सुख सागर और घर का हकीम जैसी पुस्तकों से शुरू हुआ पुस्तक प्रेम, उन्हें साहित्य की ओर ले गया। विज्ञान की पढ़ाई, खेती-बाड़ी और साहित्यिक पुस्तकों में सामंजस्य बिठाते...
    April 13, 04:12 AM
  • ये दीवार टूटती क्यों नहीं...
    कोई चुनाव को बदला बताता है। कोई करगिल को घायल करता है। कोई बोटी-बोटी, कोई टुकड़े करने पर तुला है। ऐसे में चार महीने तक खांसी का लबादा ओढ़कर आम आदमी बने घूम रहे केजरीवाल क्यों पीछे रहते? नावी मौसम अब अपने चरम पर है। ख्वाब टांगों पर चल रहे हैं। उमंगे फूट रही हैं जैसे पानी में रखे मूंग के दाने चटखते हैं। यह किस्मत खोल देने वाला भी है। क्रूर सौदाई भी। मन को झकझोरता भी है। घृणा से भी भरता है। इस बीच कुछ अच्छा भी है। नेताओं के भाषण, कार्यकर्ताओं की गुहार और खुद को सबसे अच्छा बताने की पार्टियों की अपीलों...
    April 13, 04:00 AM
  • 2004 की सोनिया 2014 के मोदी...
    याद कीजिए 2004 को, यही माहौल था। एक सोनिया गांधी थीं। और कोई नहीं। उनका समर्थन था और विरोध था। भाजपा का इंडियाशाइनिंग अंधेरे में डूब गया। कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। अब मोदी हैं और कोई नहीं। तब की भाजपा की तरह इस बार कांग्रेस नेइंडिया शाइनिंग चला रखा है। नाम बदलकर। होगा क्या? राजनीति में हम आदर्श को पसंद करते हैं लेकिन उसे चुनते कम ही हैं। भ्रष्टों की भीड़ के बीच जब एक अटल बिहारी बाजपेयी पार्टी कार्यकर्ताओं से मिली लाखों रुपए भरी थैली पार्टी कार्यालय को दे देते हैं और उनके पास अगले स्टेशन...
    April 7, 10:13 AM
  • अच्छे में बुरा और बुरे में अच्छा छुपा है..
    परियां भेस बदलकर घूमने निकली थीं। उन्होंने बुजुर्ग महिलाओं का रूप धर लिया था। घूमते घमते रात हो गई, तो वे सामने दिख रहे एक आलीशान मकान के दरवाजो पर पहुंच गईं। वह एक अमीर का घर था। वृद्धाओं के वेश में परियों ने उससे रात के लिए आश्रय मांगा। वह जमाना समाज में अतिथि देवा भव: की भावना वाला था। इसलिए अमीर चाहकर भी मना न कर सका। लेकिन उसने उन्हें घर के किसी कमरे में ठहराने की बजाय तहख़ाने में ठहरा दिया। परियों ने वहां किसी तरह रात काटी। सुबह एक परी की नजर तहख़ाने की टूटती दीवाल पर पड़ी, तो उसने जादू से उसकी...
    April 6, 04:03 AM
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