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  • Do You Know: गोपीचंद की बैडमिंटन अकादमी में क्या और कैसे होता है?
    देश को साइना, सिंधु और श्रीकांत जैसे चमकते सितारे देने वाली पुलेला गोपीचंद की बैडमिंटन अकादमी में क्या और कैसे होता है? यह जानने के लिए भास्कर ने वहां एक दिन गुजारा। पढ़िए अकादमी की दिनभर की गतिविधियों का आंखों देखा हाल... 4 बजे सुबह पुलेला गोपीचंद अकादमी में एक शख्स प्रवेश करता है। वह है पूर्व आॅल इंग्लैंड बैडमिंटन चैंपियन 2001 और भारतीय राष्ट्रीय बैडमिंटन कोच 42 वर्षीय पुलेला गोपीचंद... दराबाद में पुलेला दो अकादमी चलाते हैं। एक उनकी निजी है और दूसरी वह स्पोर्ट अथॉरिटी आॅफ इंडिया के साथ मिलकर...
    August 28, 10:12 AM
  • कहानी: जैथा
    आज तो जैसे उसके लिए दिन ही खराब था। आज प्रातःकाल जल्दी उठकर जब वह सरदार के घर आने लगा था तब उसकी मां ने उसे, गोदी वाली लड़की थमा दी थी। गोदी वाली लड़की जो कि न तो मरती है और न ही जीती है... जैथे ने अपने पेट पर हाथ लगाकर देखा, तो गरम-गरम लग रहा था, मुंह से सांस लेकर उसने अपने हाथ को भाप दी, सांस में सेका आ रहा था। उसकी कनपटियों में थोड़ा-थोड़ा दर्द शुरू हो गया था। भैंसों के टोले को लंबे खाले (चौड़े नाले) में छोड़कर वह कीकर की सघन छाया में आ बैठा। आज उसका जी कर रहा था कि इससे अच्छा है, वह मर ही जाए। उसे कभी लगता जैसे मन...
    August 28, 10:12 AM
  • Cover Story: क्या कर रहे हैं हमारे मंत्रियों के बच्चे...?
    अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की बेटी साशा की एक तस्वीर पिछले दिनों में चर्चा में रही। तस्वीर में साशा कुछ लोगों को कॉफी देते देखी गयीं। इसके बाद हमने यह जानने का प्रयास किया कि हमारे देश के केंद्रीय मंत्रियों के बच्चे क्या करते हैं, उन्होंने पढ़ाई क्या की है। 13 मंत्रियों के बच्चों की प्रोफाइल के बारे में पढ़िए अजय प्रकाश की रिपोर्ट... अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की 15 वर्षीय बेटी साशा ओबामा को इंटर्नशिप के दौरान कास्ट-क्रू को काॅफी पिलाने, टाइपिंग करने और भीड़ रोकने का काम मिला। उन्हें यह काम...
    August 23, 11:06 AM
  • कहानी: शांति हंसी थी
    जानकीदास, मुजरिम, तुम पर जुर्म लगाया जाता है कि तुमने तारीख 14 दिसम्बर को शाम के आठ बजे हालीवुड पार्क के दरवाज़े पर दंगा किया; और कि तुम्हारी रोज़ी का कोई ज़रिया नहीं है। बोलो, तुम्हें जवाब में कुछ कहना है? जवाब के बदले जानकीदास को टुकुर-टुकुर अपनी ओर देखता पाकर न जाने क्यों मजिस्ट्रेट-पसीज उठे। उन्होंने कहा, जो कुछ तुम्हें जवाब में कहना हो, सोच लो। मैं तुम्हें पांच मिनट की मोहलत देता हूं। पांच मिनट! जानकीदास के वज्राहत मन को, मानो कोड़े की चोट-सा, मानो बिच्छू के डंक-सा यह एक फ़िकरा काटने लगा, बताने...
    August 21, 11:44 AM
  • कहानी: मुत्तांड़ी
    कन्दस्वामी चेट्टियार बड़े जमींदार थे। वह बड़े समझदार व होशियार थे। वह पारंपरिक रूप से धनवान थे ही फिर अपने प्रयत्नों व किफायती स्वभाव के कारण सभी जमींदारों में उनका स्थान प्रथम हो गया। अतः लोग उन्हें राजा कन्दस्वामी चेट्टियार कहकर पुकारने लगे। उनका एक ही पुत्र था, जिसका नाम शंकर था। अपने देश में पढ़ाई पूरी कर विदेश से पढ़ कर आया। वहां से आईसीएस की परीक्षा दे सफल हो नौकरी में आया। कन्दस्वामी चेट्टियार के घर एक खाना बनाने वाले रसोइये का नाम मुत्तांड़ी था। वह बहुत ही योग्य व अच्छा था। वह परिवार के हर...
    August 7, 12:00 AM
  • ...तो बवाल हुआ ही क्यों? आपसी दांव में पटखनी खा गया देश
    नाडा से ​क्लीनचिट के बाद नरसिंह यादव ओलिंपिक तो जाएंगे पर सवाल है कि जब डोपिंग का मामला था ही नहीं, तो बवाल हुआ ही क्यों? वे कौन लोग थे जिन्होंने यह चक्रव्यूह रचा और व्यक्तिगत रंजिश के आगे देश की इज्जत को दांव पर लगा दिया। ​पढ़िए इस दांवपेंच पर अनिल बंसल की रिपोर्ट... नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी यानी नाडा से क्लीन चिट मिलने के बाद नरसिंह यादव के लिए ओलिंपिक में खेलने का रास्ता साफ हो गया है, लेकिन उससे पहले देश की एक हार जरूर हुई है। यह हार है एक कुश्ती की। जिन दो पहलवानों सुशील कुमार और नरसिंह यादव पर...
    August 7, 12:00 AM
  • Book 'अ फीस्ट ऑफ वल्चर्स', करेगी जेट एयरवेज को लेकर बड़ा खुलासा
    इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट जोसी जोसेफ की किताब अ फीस्ट ऑफ वल्चर्स में इस बात का खुलासा है कि किस तरह एनडीए से लेकर यूपीए सरकार ने जेट एयरवेज को फायदा पहुंचाया। यह किताब सोमवार को लॉन्च हो रही है। इसी किताब के एक्सक्लूजिव अंश हिंदी में सिर्फ भास्कर के पास हैं... इंटेलीजेंस ब्यूरो चीफ के.पी सिंह और उनके वरिष्ठ साथी संयुक्त संचालक अर्जुन घोष 2002 की गर्मियों के दिन में नॉर्थ ब्लॉक में बेसमेंट में वाहन का इंतजार कर रहे थे। वहीं संसद में दोनों सदनों के सदस्य एक पत्र को लेकर उग्र हो रहे थे। यह वही पत्र था...
    July 31, 12:00 AM
  • कहानी: तीन दरवाजों वाला घर
    कुछ कहता भी तो इस अंदाज में जैसे डायलॉग बोल रहा हो। म्यूजियम के रिकॉर्ड ऑफिस में काम करता था सुखांत, जहां उसे भोजपत्र पर लिखी पुरानी हस्तलिपियों की खोज में फुर्सत न मिलती। और न घर पर वक्त होता.. दरवाजे खुले थे। रास्ता सीधा-सपाट। सीमा ने अपने फैसले पर कई बार गौर किया, जब वह बहुत छोटी थी, उसने नानी से वह कहानी सुनी थी जिसमें एक राजकुमार एक परी को एक दैत्य की कैद से निकाल लाता है। आज फिर वही कहानी उसे गुदगुदा गई। बालों में कंघी करते हुए शीशे में अपना मुंह देखा। मन के किसी कोने से आवाज आई, अपने अक्स में...
    July 31, 12:00 AM
  • स्थायी कमीशन पर  5 महिला अफसरों की राय, एक दशक की लड़ाई
    एक दशक की लड़ाई, 250 ने पाया हक, फिर भी महिलाओं के स्थायी कमीशन पर सरकार और सेना मौन। भास्कर के डिफेंस कॉरस्पोंडेंट डीडी वैष्णव ने ऐसी 5 महिला अफसरों से बात कर जानी स्थायी कमीशन पर उनकी राय, जो स्वयं यह लड़ाई लड़ रही हैं... पिछले सप्ताह एयरफोर्स की विंग कमांडर पूजा ठाकुर ने जैसे ही स्थायी कमीशन के लिए आर्म्ड फोर्स ट्रिब्यूनल में रिट दायर की तो एक बार फिर तीनों सेनाओं में महिलाओं को स्थायी कमीशन के मुद्दे पर बस छिड़ गई। सेनाओं में महिलाओं के प्रवेश को ढाई दशक पूरे हो चुके हैं, लेकिन स्थायी कमीशन की...
    July 24, 12:00 AM
  • कहानी: थैंक्यू आंटी'...
    पीछे से नाम की पुकार सुनकर एक ने दूसरे को टोका। लौटते बच्चों की खिलखिलाहट को वे एकटक निहारती रहीं। एक खिलखिलाहट पलटी-थैंक्यू आंटी... हफ्ते, महीने, साल... लगभग पैंतीस सालों से वे खड़ी थीं - खिड़की के आयताकार फ्रेम के दो हिस्सों में बंटे समुद्र के निस्सीम विस्तार के सामने - ऐसे, जैसे समुद्र का हिस्सा हों वे। हहराते-गहराते समुद्र की उफनती पछाड़ खाती फेनिल लहरों की गतिशीलता के बीच एकमात्र शांत, स्थिर और निश्चल वस्तु की तरह वे मानो कैलेंडर में जड़े एक खूबसूरत लैंडस्केप का अभिन्न हिस्सा बन गई थीं। आंटी,...
    July 24, 12:00 AM
  • कहानी: पैसा सबकुछ कर सकता है
    बार एक बहुत रईस शहजादे ने राजा के महल के ठीक सामने उससे भी शानदार एक महल बनवाने का निश्चय किया। महल जब बनकर पूरा हो गया तो उसने सामने की तरफ बड़े-बड़े अक्षरों में लिखवा दिया कि पैसा सबकुछ कर सकता है। राजा ने बाहर आकर जब इसे देखा तो फौरन शहजादे को बुला भेजा जो शहर में अभी नया ही था और अभी तक उसने दरबार में हाजिरी नहीं बजाई थी। मुबारक हो, राजा ने कहा। तुम्हारा महल तो सचमुच अजूबा है। उसके सामने मेरा गरीबखाना तो झोपड़ी जैसा लगता है। मुबारक! लेकिन यह लिखाना क्या तुम्हें ही सूझा था कि पैसा सब कुछ कर सकता...
    July 17, 12:09 PM
  • कॉमन सिविल कोड: बड़ी है दरकार, लेकिन आखिर मजबूर क्यों है सरकार?
    क्या सभी धर्मों के अपने-अपने पर्सनल लॉ... खत्म कर सबके लिए एक कॉमन सिविल कोड बनाने की सोच रही है सरकार। इस पर अजय प्रकाश की रिपोर्ट... पिछले पखवाड़े सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से फिर पूछा कि कॉमन सिविल कोड समान नागरिक संहिता का क्या हुआ? और हमेशा की तरह सरकार के पास कोई जवाब नहीं था। आश्चर्य यह है कि दो साल में सरकार इस मामले में एक कदम भी आगे नहीं बढ़ पाई है। इस मसले पर 65 साल से सरकार वहीं की वहीं खड़ी है, जहां 1955 में हिंदू पर्सनल लाॅ बनने के बाद खड़ी थी। अक्सर मुस्लिम पर्सनल लाॅ को लेकर होने वाली बहसों में...
    July 17, 12:00 AM
  • COVER STORY: मुन्ना ने 11 साल की मुन्नी से कैसे कर ली शादी
    झारखंड भाजपा अध्यक्ष के बेटे ने पहले एक लड़की से प्यार किया फिर यौन शोषण। शादी तय हुई दूसरी लड़की से और अब ब्याह रचाया तीसरी से। इस पूरी घटना पर... रांची से सतीश कुमार वर्मा की रिपोर्ट... 24 साल के मुन्ना ने 11 साल की मुन्नी से शादी कर ली। मुन्ना मरांडी भाजपा के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष और विधायक ताला मरांडी के बेटे हैं। मुन्नी रितु बास्की गरीब आदिवासी परिवार की सातवीं कक्षा में पढ़ने वाली बिटिया। इस बेमेल रिश्ते की कहानी बड़ी अजीब है। मुन्ना ने पहले एक युवती को फांसा, शादी का प्रलोभन देकर उसका यौन शोषण...
    July 11, 12:27 PM
  • कहानी: चोर
    रात के दस बजे थे। मैं अपनी क्लीनिक में अकेली बैठी थी और एक मेडिकल जनरल पढ़ रही थी कि दरवाज़ा खुला और एक आदमी एक बच्चा लेकर अंदर आया। मुझको अपनी नर्स पर गुस्सा आया कि यह दरवाज़ा खुला छोड़ गई। मेरे मरीज़ देखने का वक़्त बहुत देर पहले ही ख़त्म हो चुका था मैंने रुखाई से कहा, मरीज़ देखने का वक़्त ख़त्म हो चुका, कल सुबह लाना, वरना किसी दूसरे डाॅक्टर को दिखा दो। मर्द छोटे कद का तो था लेकिन बदन कसरती था और बच्चा जो गोद में था, उसकी सांस बुरी तरह से चल रही थी और साफ़ ज़ाहिर था कि निमोनिया हो गया है। बच्चा निढाल था और...
    July 11, 10:00 AM
  • Big Question: दाएं की जगह बाएं पैर का ऑपरेशन कैसे?
    हाल ही में दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल में एक मरीज का दाहिने पैर के स्थान पर बाएं पैर का आपरेशन कर स्क्रू लगा दिया। इस तरह के मामलों से लोग स्तब्ध हैं। देशभर में चिकित्सकीय लापरवाही के 3.5 लाख मामले उपभोक्ता फोरम कोर्ट में लंबित हैं। सरकार या मेडिकल काउंसिल के पास कोई ऐसा आंकड़ा नहीं है जिससे यह पता चले कि अबतक कितने अस्पतालों, डॉक्टरों या मेडिकल कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई हुई है... कोई झोला छाप डॉक्टर नहीं हैं न ही किसी फर्जी संस्थान से डिग्री ली है। ये इलाज भी किसी छोटी क्लीनिक में नहीं करते...
    July 3, 12:00 AM
  • चर्चा में:  सरकारी सख्ती के बावजूद कम हो रहे हैं टैक्स पेयर
    जब हर साल सीबीडीटी के पास लाखों ट्रांजेक्शन की जानकारी आ रही तो प्रधानमंत्री को यह क्यों कहना पड़ रहा है कि देश में करदाताओं की संख्या कम है। आखिर यह सरकार के लिए असंभव सवाल क्यों बना हुआ?... सल में सरकारी सख्ती और इनकम टैक्स चोरी को रोकने के लिए किये जा रहे तमाम उपायों के बावजूद इनकम टैक्स देने वाले लोगों की संख्या, टैक्स जीडीपी अनुपात और टैक्स ग्रोथ तीनों में गिरावट आई है। इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के बढ़ते उपयोग के बावजूद टैक्स को लेकर केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने पहली बार...
    July 3, 12:00 AM
  • कहानी: व्यथा का सरगम
    सुरेश्वर रेलवे के एक ऑफिस में क्लर्क है। रेलों की घड़घड़ाहट और फाइलों की थकान को अपनी बीन के स्वरों में बांधकर उसने उन्हें नया ही रूप दे दिया है। दिन-भर की दौड़-धूप के बाद रात को यही उसकी शांति का निर्झर है... ...हां, सचमुच वीनस...उर्वशी...तक्षशिला की सुन्दरी...सरो के पेड़ की-सी सुघड़ लम्बाई, स्वस्थ यौवन से भरपूर छरहरा शरीर, सीमांत के कागजी बादाम जैसी ही आंखें, चंदन-सा गौर, सुसंस्कृत मुखमंडल, लम्बी-सी वेणी। मगर सबके ऊपर अंगराग के स्थान पर उदासी का एक गहरा लेप जो चेहरे के भाव को आमूल बदल देता है... गहरी। काली।...
    June 19, 10:34 AM
  • पाकिस्तान डायरी: जोगी का शहर में ठिकाना क्या है
    यह गज़ल आप लोगों ने कभी न कभी सुनी ज़रूर होगी। इस शायर का असली नाम शेर मोहम्मद खान था। ब्रिटिश इंडिया के शहर जालंधर में 15 जून 1927 को पैदा हुए। बंटवारे के बाद पाकिस्तान आ गए। यहां उन्होंने शायरी की और इब्न-ए-इंशा के नाम से मशहूर हुए और शोहरत भी ऐसी कि उनका असली नाम किसी को याद तक नहीं रहा। उन्होने कॉलम लिखे, सफरनामे लिखे। उनकी हास्य की समझ गज़ब की थी। औरंगज़ेब के बारे में उन्होंने लिखा कि हज़रत बादशाह सलामत इतने परहेज़गार थे कि टोपियां सीकर अपनी दो वक्त की रोटियां खाया करते थे और नमाज़ी ऐसे कि जि़ंदगी...
    June 19, 10:16 AM
  • पाकिस्तान डायरी: रमजान और गर्मी की शिद्दत
    बरसों बाद ऐसा हुआ है कि पाकिस्तान भर में रमज़ान एक ही दिन शुरु हुए हैं, वर्ना हर बार ऐसा होता है कि कई इलाकों में रमज़ान एक दिन पहले ही शुरु हो जाते थे और फिर ईद भी एक दिन या दो दिन पहले ही मन जाती थी। यूं महसूस होता था जैसे पाकिस्तान कई टुकडों में बंटा हुआ मुल्क है, जिसके हर हिस्से में चांद किसी मौलवी या किसी मुफ्ती की मर्जी से उगता है और डूबता है। इस बात से क्या पढ़े लिखे और क्या देहाती सभी लोग बहुत नाराज़ होते थे कि यह आखिर क्या मामला है। हमारे मौलवी अगर रमज़ान और ईद के चांद के मामले में एकमत नहीं हो...
    June 12, 04:33 PM
  • कहानी: यह स्वतंत्रता
    पाठक को यहां पर सांस लेना कठिन हो गया। वह रात को प्रतिदिन अपने नगर के स्वप्न देखा करताऔर वहां जाने की इच्छा करता रहता। उसको वह स्थान याद आता जहां वह पतंग उड़ाता था और जहां वह जब कभी चाहता जाकर स्नान करता था... पाठक चक्रवर्ती अपने मुहल्ले के लड़कों का नेता था। सब उसकी आज्ञा मानते थे। यदि कोई उसके विरुध्द जाता तो उस पर आफत आ जाती, सब मुहल्ले के लड़के उसको मारते थे। आखिरकार बेचारे को विवश होकर पाठक से क्षमा मांगनी पड़ती। एक बार पाठक ने एक नया खेल सोचा। नदी के किनारे एक लकड़ी का बड़ा लट्ठा पड़ा था, जिसकी...
    June 12, 04:28 PM