रसरंग
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  • वैज्ञानिक काम पर अवैज्ञानिक नजरिया क्यों ?
    देश भर के काॅलेज और यूनिवर्सिटी स्तर पर अनुसंधान एवं प्रयोग के लिए जीव-जंतुओं की चीरफाड़ पररोक लगा दी गई है। इसके पीछे तर्क यह है किरिसर्च के नाम पर जीव-जंतुओं के साथक्रूरतम व्यवहार किया जाता है। मारे यहां स्कूलों में इंटरकाॅलेज और काॅलेजों में अंडरग्रेजुएट लेवल पर जीव-जंतुओं की चीरफाड़ पर पहले से ही रोक लगा दी थी, लेकिन पोस्ट ग्रेजुएशन में डिसेक्शन वैकल्पिक था। अगस्त 2014 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने निर्देश जारी कर सभी विश्वविद्यालयों में डिसेक्शन पूर्णत: प्रतिबंधित कर दिया...
    May 24, 01:00 AM
  • test
    May 23, 09:32 AM
  • हमारी लड़कियों को खेलने दो
    अपनी लगन और कौशल के दम पर खेलों में अव्वल आती लड़कियां अपने लोगों के बीच लगातार पटखनी खा रही हैं। केरल के साई छात्रावास जैसे घटनाक्रम उन्हें हतोत्साहित कर रहे हैं... खेल के मैदान की पारंपरिक छवि मर्दानगी की रही है और भारतीय समाज पर हावी पितृसत्ता ने इसे दरकने नहीं दिया है| लडकियां या तो मेडल स्टैंड पर मिलेंगी अन्यथा सजी-धजी मेडल का थाल पकड़े समारोह की शोभा बढ़ाती हुई नज़र आएंगी। केरल के साई छात्रावास में राष्ट्रीय स्तर की जल-क्रीड़ा की चार 15-16 वर्षीय महिला खिलाडियों की आत्महत्या की कोशिश को...
    May 17, 12:00 AM
  • बातों में बीत गए बारह महीने
    क्या चुनाव से एेन पहले नारे और नारों के साथ जनता की गूंज ने पहले बारह महीनों में देश को एक ऐसे मुहाने पर ला खड़ा किया, जहां नारों में सुर मिलाती जनता को लगने लगा कि सत्ता उसे धोखा दे रही है... आपको नौकरी मिली? नहीं मिली। किसानों को खून-पसीने की कमाई मिली? नहीं मिली। जवानों की कटती गर्दन का जवाब सरकार ने कभी दिया? नहीं दिया। महंगाई से निजात मिली? नहीं मिली। बिना घूस के काम होता है? नहीं होता है। घोटालों की सरकार को बदलना है? बदलना है। स्विस बैंक से कालाधन लाएंगे? हां लाएंगे। आपने उन्हें साठ साल दिए,...
    May 10, 09:15 AM
  • ​एक सवाल 100 चुप्पी
    सरकार ने साफ कर दिया है कि वह लोकसभा में किन्नरों के लिए प्रभावी बिल लाएगी। समलैंगिकों को अपनी आत्मगरिमा के साथ जीवन जीने का मौका मिले तो भला कोई क्यों किसी को धोखे में रखकर उससे शादी करेगा... वैसे तो समलैंगिकता का मसला और इसपर होने वाली बहस बहुत पुरानी है, लेकिन हाल में हुई प्रिया वेदी की आत्महत्या की घटना ने इस बहस को फिर से एक बार नए सिरे से सतह पर ला दिया है। िदल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में कार्यरत डॉक्टर प्रिया वेदी की आत्महत्या की कहानी पढ़कर यकीनन हम सबको सदमा लगा...
    May 3, 09:18 AM
  • डूबती नैया के नए खेवनहार...
    देश की सबसे बड़ी वामपंथी पार्टी माकपा ने अपना नया नेता चुन लिया है, लेकिन नीति वही पुरानी है... युवाओं की बदौलत नए भारत निर्माण का खाका पेश करने वाली इस पार्टी के नेतृत्व में गिनती के काले बाल नहीं हैं। ऐसे में सवाल है कि क्रांति के सब्जबाग से संसदीय राजनीति के जोड़तोड़ के महारथियों में शामिल माकपा क्या आने वाले वर्षों में लोगों को वह दे पाएगी जिसका वादा वह 1964 से कर रही है... भारतीय जनता पार्टी और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) में काफी समानताएं हैं हालांकि दोनों एक-दूसरे को फूटी आंख नहीं...
    April 26, 12:00 AM
  • खेल का 'बाजार'
    लीगों की रेलमपेल की मुख्य वजह खेल प्रेम नहीं बल्कि भारत की सवा अरब आबादी की विशाल मंडी है। इस मंडी में माल बेचने के लिए क्रिकेट, हॉकी, फुटबॉल और कबड्डी तो बस बहाना है, निशाना तो विज्ञापनों को दिया जाने वाला वह भारी बजट है जो पिछले पांच बरसों में दोगुना हो चुका है। खुली अर्थव्यवस्था के दौर में जिस तरह शिक्षा और चिकित्सा के पेशों का व्यवसायीकरण हुआ है उसी भांति खेल भी अब मनोरंजन नहीं, कमाई का जरिया बनते जा रहे हैं। भारत के खेल व्यापार में तेजी से इजाफा हो रहा है। सन 2008 में खेल व्यापार 1139 करोड़ रुपये...
    April 19, 09:46 AM
  • पैराशूट पहलवान
    अधूरे मन से कोई लड़ाई कभी नहीं जीती जा सकती फिर राजनीति तो एक मुल्क के महानिर्माण का महाआयोजन है। सवाल है कि कभी उदित और कभी अस्त होने की राजनीतिक शैली को अपनी खास रणनीति मान चुके राहुल गांधी आत्ममंथन की प्रक्रिया में जहर निकाले बिना क्या कांग्रेस को नया जीवन देकर जनता के बीच विश्वास कायम कर पाएंगे? राहुल बाबा, आप कितनी ऊंचाई तक जाना चाहते हैं? पश्चिमी अंदाज में नहीं यहां भारतीय संदर्भ वाले बाबा से सवाल है। राहुल गांधी जो बाबाओं की तरह कम बोलते हैं। जब बोलते हैं, तो अपने अंदाज में शांत या...
    April 12, 12:00 AM
  • सलाम साइना !
    क्रिकेट के एकाधिकार के बीच साइना नेहवाल की जीत हाशिए पर पड़े खेलों के लिए संजीवनी की तरह है। हॉकी, टेनिस, एथलेटिक्स, मुक्केबाजी और कबड्डी जैसे कई और खेल हैं जिनके खिलाड़ियों में विश्वस्तरीय संभावनाएं होने के बावजूद सरकार और बाजार की निगाह में शायद कोई महत्व नहीं है। जाहिर तौर पर साइना का कीर्तिमान इस एकाधिकार के चलन के खिलाफ एक नई उम्मीद जगाता है। इस देश में जहां सरकारें लगातार गरीबी, भूख, गंदगी, बीमारियों, पिछड़ेपन और बेटी बचाओ जैसी सामाजिक-आर्थिक समस्याओं से जूझ रही हो तब एक मध्यमवर्गीय...
    April 5, 12:00 AM
  • घाटे के सौदे से चाहिए अन्नदाता को मुक्ति
    सरकार कहती है जमीन लेकर रहेंगे, विपक्षी कहते हैं किसान जमीन नहीं देना चाहते जबकि सामाजिक संगठनों की चिंता पर्यावरण और खाद्य सुरक्षा को लेकर है। पर किसान इनके सरोकारों के स्वार्थ को खूब समझता है। वह अधिग्रहण और विकास के बीच लाभ में अपनी भरपूर भागीदारी चाहता है, उसे भी गांवों की असुविधाओं से मुक्ति चाहिए इसलिए गांवों में बची किसानों की आखिरी जमात भी अब चौराहों से शहरों की ओर बढ़ने को आतुर है। अधिग्रहण को तैयार किसान! घटती आमदनी के चलते किसान निराश हैं। मोदी सरकार को इस मुद्दे का हल किसानों...
    March 29, 12:00 AM
  • बिन जल, जंगल कैसा जीवन
    दिवस विशेष 21 मार्च : विश्व वानकी दिवस 22 मार्च : विश्व जल दिवस कल विश्व वानिकी दिवस और आज विश्व जल दिवस के दिन सिर्फ वृक्ष और पानी के संरक्षण की चिंता करने से कतई बात नहीं बनेगी। पूरे वर्षभर और अनेक वर्षों तक रोज, दिन-रात हमें सजग होकर जंगलों और पानी के स्रोतों की रक्षा करनी होगी और गांठ बांधनी होगी कि वन है तो हम हैं, जल है तो हम हैं, वरना कुछ नहीं है। करीब दशक भर पहले बुंदेलखंड क्षेत्र में मैं एक चुनाव के सिलसिले में भारी गर्मी में एक गांव से दूसरे गांव भटक रहा था। दूर-दूर तक चिलचिलाती धूप,...
    March 22, 09:28 AM
  • जिसका विकास उसका बजट
    बजट का सामाजिक पक्ष राष्ट्रीय आय अनुमान से काफी कम हुई और राजकोषीय घाटे को कम करने के लिए ये जरूरी था कि खर्च को कम किया जाए। कुछ खर्चों को कम करने का अख़्तियार वित्तमंत्री के वश में भी नहीं होता, मसलन ब्याज भुगतान या रक्षा बजट। जो कम किया जा सकता है, वो सामाजिक क्षेत्र पर होने वाला व्यय ही है। वित्तमंत्री द्वारा हर वर्ष बजट पेश करना सरकार और मीडिया के लिए एक वार्षिकोत्सव जैसा होता है। बजट के आंकड़ों और घोषणाओं के साथ-साथ सेंसेक्स का उतार-चढ़ाव नाटकीय ढंग से दिखाया जाता है। सरकार और सरकार के...
    March 15, 12:00 AM
  • हाउस वाइफ की मेहनत का नहीं कोई मोल
    अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बाज़ार बन चुके भारत में अब तक घरेलू ज़िम्मेदारियां निभाने के लिए किए गए श्रम को कोई सामाजिक-आर्थिक मान्यता नहीं मिली है... देश में 16 करोड़ महिलाओं का मुख्य काम घर की जिम्मेदारियां निभाना है। इसे समाज में भावनात्मक काम के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, इसलिए कभी ये श्रमिक हड़ताल नहीं करते। आप कल्पना कीजिए यदि इनकी हड़ताल हो तो क्या होगा? घर में खाना न बनेगा, सफाई न होगी, बच्चों की देखभाल न हो पाएगी, कपड़े नहीं धुलेंगे, मेहमान-नवाजी नहीं हो...
    March 8, 12:00 AM
  • स्वाइन फ्लू, छोटा रोग बड़ा बाजार
    हमारे देश में इंफ्लुएंजा वैक्सीन और उसके टेस्ट का आज तक बाजार नहीं बन पाया है जबकि अमेरिका, ब्रिटेन की जनता इस वैक्सीन का बहुत प्रयोग करती है। ऑस्ट्रेलिया अपनी जनता को यह वैक्सीन मुफ्त में लगाता है। अंदाजा लगाइए कि अगर 500 रुपए के इस वैक्सीन को लेकर 125 करोड़ की जनसंख्या वाले देश में नीति बन जाती है तो कितना बड़ा बाजार खड़ा हो जाएगा। हरियाणा के बल्लभगढ़ में हम फ्लू के रिसर्च प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे। उसी दौरान मेरी बेटी इंफ्लुएंजा फ्लू से बीमार हो गई। टीम के डॉक्टर साथियों ने राय दी कि हमलोग सबका...
    March 1, 09:27 AM
  • ऑस्कर अवॉर्ड पर रंगभेद के छींटे
    87वें ऑस्कर अवॉर्ड पर विशेष आज लॉस एंजिल्स में जहां एक ओर ऑस्कर अवॉर्ड्स की धूम मचेगी, वहीं कुछ सवाल भी उठेंगे और समानता की दुहाई देने वाले अमेरिका के हॉलीवुड में रंगभेद की गहरी खाई भी साफ-साफ दिखेगी। ऑस्कर पुरस्कारों में अश्वेतों कीउम्दा अभिनय क्षमता और उनकी बेहतरीन फिल्मों को जिस तरह से हाशिए पर डाला जाता रहा है, उससे सवाल यह उठता है कि हॉलीवुड की यह रंगभेदी तस्वीर कभी बदलेगी भी या नहीं? कहने को अमेरिका ने ओबामा को अपने देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर दो बार चुन कर रंगभेद समाप्ति का ऐलान...
    February 22, 12:00 AM
  • हर बार लांघी जाती है लक्ष्मण रेखा
    एआईबी रोस्ट पर उठे विवादों के बाद फिर एक बार कहा जा रहा है कि अभिव्यक्ति के नाम पर कुछ भी कहा और सुना नहीं जा सकता। लेकिन हजारों लोगों ने गालियों और लैंगिक फब्तियों से भरे इस वीडियो को हास्य बताकर देखा, शेयर किया। अब यह वीडियो यू-ट्यूब से हटा लिया गया है। फिर भी सवाल है कि अभिव्यक्ति की लक्ष्मण रेखा क्या हो? क्राइम तो नहीं है एडल्ट कॉमेडी असीम त्रिवेदी वीडियो इंटरनेट पर अपलोड करने की शुरुआत ही चेतावनी के साथ होती है। फिर भी कोई पूरा वीडियो देखता चला जाता है तो ये माना जाना चाहिए कि आहत होने...
    February 15, 12:00 AM
  • प्रेम पर प्रतिष्ठा के पहरे
    वैलेंटाइन डे पर विशेष स्त्री के अन्दर प्रेम एक ऐसी शक्ति होती है जो शरीर में वरदान की तरह रहती है और बिछोह में भी अपना असर दिखाती रहती है। यह विशुद्ध प्यार के तंतुओं से निर्मित होती है तभी तो किसी भी हुक्मरान से भिड़ने का साहस रखती है। उसके पास आघात झेलने के लिए फूल से भी कोमल हृदय होता है मगर चाहतें फौलादी होती हैं। धुऋतु की हर आहट उसके मन में छिपे प्रेम को झकझोर जाती है और वह अपने उल्लसित प्यार को दबाने के लिए बाध्य रहती है क्योंकि उसके कानों में कड़े हुक्म की सांकले झंकारती रहती हैं- स्त्री,...
    February 8, 12:00 AM
  • रगों में बसा है हमारा कश्मीर
    कश्मीरी पंडितों के निर्वासन के 25 साल पर विशेष... अल्पसंख्यकों के अधिकारों की दुहाई देने वालों की आंखों में मोतियाबिंद उतर आता है जब मैं कहता हूं कि कश्मीरी पंडित भी कश्मीर में अल्पसंख्यक थे। 1990 में साढ़े तीन लाख कश्मीरी पंडितों को अपना वो वतन छोड़ना पड़ा जिस जमीन पर उनके पूर्वज हजारों सालों से रह रहे थे। सात सौ से ज्यादा पंडितों की हत्या कर दी गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक कोट इन दिनों बहुत चर्चा में है। सोशल मीिडया पर इस कोट की नज़दीक की तस्वीरें शेयर पर शेयर हो रही हैं। इस कोट...
    February 2, 11:47 AM
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