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  • बाबुल मेरा नैहर छूटा जाए...
    पिछले बार बात जद्दन बाई की बात अधूरी छूट गई तो फजऱ् यह बनता है कि आज बिना किसी लाग लपेट के सीधे मुद्दे पर आ जाएं। और मुद्दे की बात यह है कि बम्बई आने से पहले जद्दन बाई की जि़ंदगी भारी उथल-पुथल से भरी थी। पहली बार कलकत्ते पहुंचने के बाद संगीत शिक्षा ली और वहीं पर मां दिलीपा और पिता मियां जान ने बाकायदा कोठा खोल लिया। उस दौर के कलकत्ते में बड़ी-बड़ी नामी तवायफ़ों के कोठे थे और मुल्कभर से कद्रदान उनका गाना सुनने और मुजरा देखने पहुंचते थे। ऐसे माहौल में भी जद्दन ने अपने हुनर से जल्द ही नाम कमा लिया और...
    April 13, 04:36 AM
  • ख्यात नायकों की गुमनाम राजनीतिक विरासत
    राजनीति में वंशवाद की पुरानी परंपरा रही है। देश की राजनीति में अपना वर्चस्व रखने वाले कुछ दमदार राजनीतिज्ञों के खानदान का नाम उनके चिराग रोशन कर रहे हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी हैं, जिन्हें आज तक कुछ खास पहचान नहीं मिली। कारण चाहे जो भी हों, लेकिन हकीकत में इन लोगों ने अपने बूते कोई ऐसा काम नहीं किया जो इन्हें राजनीति के इतिहास में याद किया जाएगा.. परिवारवाद के कारण भारतीय लोकतंत्र हमेशा सांसत में रहा है। आरक्षण की राजनीति के बाद उभरे नेतृत्व हों या आजादी के बाद से समस्याओं पर जमे रहने वाले, सभी ने...
    April 13, 04:26 AM
  • हिंदी सिनेमा के दो चेहरे
    सिनेमा में उत्कृष्ट योगदान और प्रभावशाली भूमिकाएं निभाने वाले दो कलाकारों कमल हासन और विद्या बालन कपूर को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने हाल ही में नागरिक सम्मान पद्म भूषण और पद्मश्री से नवाजा है। इन दोनों सितारों से होते हैं रूबरू। विद्या बालन कपूर जन्म : 1 जनवरी, 1978, पूथमकुरुसी, केरल पेशा : फिल्म अभिनेत्री अवॉर्ड : पद्म श्री (2014), कलाईमामनी उपलब्धि : हिंदी सिनेमा में हीरोइन की परंपरागत इमेज को बदला। इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न की ब्रांड एंबेसेडर कुछेक फिल्मों को छोड़ दें तो हिंदी...
    April 13, 04:18 AM
  • ताकी हर कोई पढ़ सके..
    कहते हैं किताबें इंसान की सबसे अच्छी दोस्त होती हैं। ऐसे में इस दोस्ती को औरों से साझा करने की अनूठी कोशिश कर रहे हैं एक शख्स। प्रेमपाल शर्मा, रेल मंत्रालय में कार्यकारी निदेशक पद पर दिल्ली में तैनात एक प्रशासनिक अधिकारी हैं। उत्तर प्रदेश के जिला बुलंदशहर के दीघी गांव के एक किसान परिवार में जन्मे प्रेमपाल शर्मा। बचपन में दादा की सुख सागर और घर का हकीम जैसी पुस्तकों से शुरू हुआ पुस्तक प्रेम, उन्हें साहित्य की ओर ले गया। विज्ञान की पढ़ाई, खेती-बाड़ी और साहित्यिक पुस्तकों में सामंजस्य बिठाते...
    April 13, 04:12 AM
  • ये दीवार टूटती क्यों नहीं...
    कोई चुनाव को बदला बताता है। कोई करगिल को घायल करता है। कोई बोटी-बोटी, कोई टुकड़े करने पर तुला है। ऐसे में चार महीने तक खांसी का लबादा ओढ़कर आम आदमी बने घूम रहे केजरीवाल क्यों पीछे रहते? नावी मौसम अब अपने चरम पर है। ख्वाब टांगों पर चल रहे हैं। उमंगे फूट रही हैं जैसे पानी में रखे मूंग के दाने चटखते हैं। यह किस्मत खोल देने वाला भी है। क्रूर सौदाई भी। मन को झकझोरता भी है। घृणा से भी भरता है। इस बीच कुछ अच्छा भी है। नेताओं के भाषण, कार्यकर्ताओं की गुहार और खुद को सबसे अच्छा बताने की पार्टियों की अपीलों...
    April 13, 04:00 AM
  • 2004 की सोनिया 2014 के मोदी...
    याद कीजिए 2004 को, यही माहौल था। एक सोनिया गांधी थीं। और कोई नहीं। उनका समर्थन था और विरोध था। भाजपा का इंडियाशाइनिंग अंधेरे में डूब गया। कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। अब मोदी हैं और कोई नहीं। तब की भाजपा की तरह इस बार कांग्रेस नेइंडिया शाइनिंग चला रखा है। नाम बदलकर। होगा क्या? राजनीति में हम आदर्श को पसंद करते हैं लेकिन उसे चुनते कम ही हैं। भ्रष्टों की भीड़ के बीच जब एक अटल बिहारी बाजपेयी पार्टी कार्यकर्ताओं से मिली लाखों रुपए भरी थैली पार्टी कार्यालय को दे देते हैं और उनके पास अगले स्टेशन...
    April 7, 10:13 AM
  • अच्छे में बुरा और बुरे में अच्छा छुपा है..
    परियां भेस बदलकर घूमने निकली थीं। उन्होंने बुजुर्ग महिलाओं का रूप धर लिया था। घूमते घमते रात हो गई, तो वे सामने दिख रहे एक आलीशान मकान के दरवाजो पर पहुंच गईं। वह एक अमीर का घर था। वृद्धाओं के वेश में परियों ने उससे रात के लिए आश्रय मांगा। वह जमाना समाज में अतिथि देवा भव: की भावना वाला था। इसलिए अमीर चाहकर भी मना न कर सका। लेकिन उसने उन्हें घर के किसी कमरे में ठहराने की बजाय तहख़ाने में ठहरा दिया। परियों ने वहां किसी तरह रात काटी। सुबह एक परी की नजर तहख़ाने की टूटती दीवाल पर पड़ी, तो उसने जादू से उसकी...
    April 6, 04:03 AM
  • वर्ल्ड हेल्थ डे 7 अप्रैल: आदतें बनाती हैं या बिगाड़ती हैं सेहत...
    अच्छी सेहत कौन नहीं चाहता.. लेकिन कई बार लाख जतन के बावजूद हमारी सेहत बिगड़ती जाती है। इसका मूल कारण असल में हमारी ही आदतों में छिपा हुआ है। इन आदतों पर ध्यान देकर हर व्यक्ति अपनी सेहत अच्छी बना सकता है। बॉडी पॉश्चर * शरीर सही पॉश्चर में नहीं है तो इससे स्पाइन परअसर पड़ता है, जिससे पीठ व गर्दन में दर्द होता है।आगे की तरफ झुककर खड़े होने की आदत फेफड़ोंकी कार्यक्षमता 30 प्रतिशत तक प्रभावित करती है। दिन भर बैठे रहना * एक शोध कहता है कि जो महिलाएं दिन में छह घंटे सेअधिक समय तक बैठी रहती हैं, उनकी मौत 15...
    April 6, 04:00 AM
  • क्या बात हुई जब मोदी पहुंचे आडवानी के घर...
    सब कुछ वैसे ही चलता है जैसे चलता था जब तुम थे रात भी वैसे ही सर मूंदे आती है दिन वैसे ही आंखें मलते जागता है काश तुम्हारे जाने पर, कुछ फर्क पड़ता! प्यास न लगती पानी की, या नाखून बढ़ना बंद हो जाते बाल हवा में न उड़ते या धुआं निकलता सांसों से सब कुछ वैसा ही क्यों है? फर्क पड़ा है तो सिर्फ इतना! रात गुजारने के लिए एक नींद की गोली रोज निगलनी पड़ती है। गुलजार की इस नज्म का रट्टा लगाते नरेंद्र मोदी जा रहे थे लालकृष्ण आडवाणी के घर। आखिर मंजिल आ गई। आडवाणी का घर। मोदी पहले की तरह दरवाजे से भीतर जाने लगे। काका ने...
    March 30, 04:23 AM
  • पूरी दुनिया को जोड़ें एक नेटवर्क से...
    वर्ल्ड वाइड वेब यानी डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू ने इसी महीने की 12 तारीख को 25 साल पूरे किए हैं। लोगों को इंटरनेट से जोड़ने और इस अनोखी दुनिया का आदी बनाने वाले हैं टिम बर्नर्स ली। पूरी दुनिया को एक नेटवर्क में बांधने वाले शख्स से होते हैं रूबरू.. आठ जून, 1955। इंग्लैंड का लंदन शहर। यहां रहने वाले मैरी ली वुड्स और कॉनवे बर्नर्स-ली के घर में टिम का जन्म हुआ। टिम अपने माता-पिता की चार संतानों में से एक थे। उनकी मां और पिता दोनों गणितज्ञ थे, जिन्होंने पहले व्यवसायिक कम्ह्रश्वयूटर फेरैंटी मार्क वन में काम...
    March 30, 04:18 AM
  • किसका विश्वास करें?
    मेरे डॉक्टरों ने कहा था कि मैं कभी नहीं चल पाऊंगी। मेरी मां को विश्वास था कि मैं जरूर चलूंगी। मैंने अपनी मां पर विश्वास किया। आओ आज तुम्हें एक छोटी सी लड़की के बारे में बताऊं जो टेनेसी के एक गरीब परिवार में पैदा हुई थी। वह 22 बच्चों में से 20वीं थी, समय से पहले पैदा हो गई थी और बहुत कमजोर थी। उसका बचना मुश्किल लग रहा था। जब वह चार साल की हुई तो उसे डबल निमोनिया और स्कारलेट फीवर हो गया जिसकी वजह से उसकी एक टांग को लकवा मार गया और वह टांग बेजान हो गई। उसको सहारे के लिए लोहे के ब्रेस पहनने पड़ते थे। लेकिन वह...
    March 30, 04:16 AM
  • पचास रुपए में बोलने वाला कुत्ता खरीदोगे..
    एक आदमी ने नया-नया कुत्ता ख़रीदा था, लेकिन चार-छह दिनों बाद ही वह कुत्ता लेकर अपने पड़ोसी के पास पहुंच गया और उससे उसे ख़रीदने के लिए चिरौरी करने लगा। उसने कहा, यह बोलने वाला कुत्ता है। पड़ोसी को बिल्कुल भी विश्वास नहीं हुआ। वह आदमी बोला, और आप इसे सिर्फ़ पचास रुपए में ख़रीद सकते हैं। अब तो पड़ोसी को पक्का यक़ीन हो गया कि वह उससे मजाक़ कर रहा है। उसने कहा, मजाक़ करने के लिए क्या मैं ही मिला था? दुनिया में कोई भी कुत्ता भौंकने के अलावा और कुछ नहीं बोल सकता। पड़ोसी का इतना कहना था कि कुत्ते ने आंखों में आंसू...
    March 30, 04:05 AM
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