रसरंग
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  • नशे के खिलाफ जंग में आप शामिल हैं?
    पूरे देश में बढ़ती नशे की लत नौजवानों को महामारी की तरह अपनी चपेट में ले रही है। अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आम जनता और नशा मुक्ति के क्षेत्र में काम करने वाले एनजीओ से पूछा है कि कैसे नशे के इस बढ़ते दानव को रोकें? पंजाब का धुरी शहर। एक जमाने में यह पूरे सूबे या कहें कि उत्तर भारत में अपनी चावल मिलों के कारण मशहूर था। चावल कारोबारी खूब कमा खा रहे थे। उनके पास काम करने वाले भी मौज में थे। पर बीते कुछ सालों से इस शहर की तस्वीर बदल गई है। अब यह शहर नशेड़ियों का हो गया है। धुरी उस पंजाब का शहर है,...
    November 17, 11:08 AM
  • उपहास और अपमान की लंबी यात्रा
    अपनी पहचान के लिए छटपटाती इस कौम को हाल के दिनों में कई राहतें नसीब हुई हैं जो उनकी दुनिया बदल सकती हैं। शायद उन परिवारों को भी ढांढस बंधा सकती हैं, जिनको लगता है कि उनका असामान्य बच्चा भी इस देश का सामान्य नागरिक है और उसे अपने ही घर में वैसे ही जीने का अधिकार है जैसे बाकी सदस्य को। शिखंडी, तुम इतने दिनों तक कहां रहे? उत्साहरहित स्वर में द्रुपद ने पूछा। उनका यह पुत्र सदा एक समस्या बना था। द्रुपद को खिजलाहट थी कि इस समय वे अत्यधिक उलझनों में पड़े हुए हैं, यह उन्हें और बढ़ाने के लिए आ पहुंचा है।...
    November 9, 04:26 AM
  • ये है आमिर खान का बदहाल गांव: जहां न स्कूल है न बिजली, देखें तस्वीरें
    (हरदोई जिले के अख्तियारपुर गांव में आमिर खान का जर्जर घर) सत्यमेव जयते के जरिए आमिर खान समाज में बदलाव को मुमकिन कर दिखा रहे हैं। लेकिन क्या वे अपनी जड़ों की खबर रखते हैं? इसी सवाल के साथ शाह आलम पहुंचे आमिर के पैतृक गांव अख़्तियारपुर। उम्मीद से उलट यहां अव्यवस्था और बदहाली दिखी, जिसकी सुध आमिर ने भी नहीं ली। फिर भी लोगों को उम्मीद है कि एक दिन इस गांव का कायापलट होगा। उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले से 40 किलोमीटर दूर शाहबाद कस्बे में बसा है अख़्तियारपुर गांव। एक तरफ तो सुपरस्टार आमिर खान जनता की...
    November 2, 10:50 AM
  • कटी जुल्फें भी करोड़ों की...
    एक जमाना था जब कटे हुए बाल को ठिकाने लगाने में लोगों को परेशानी होती थी, लेकिन अब यह बड़ा व्यवसाय बन गया है। तिरुमला मंदिर को श्रद्धालुओं के बालों से हर साल अरबों रुपए की आमदनी होती है। साल भर पहले प्रसिद्ध अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स में शिकागो शहर की एक खबर छपी थी, िजसका शीर्षक था-सैलून में घुसे चोर ने बाल चुराया, खजाना को छुआ तक नहीं। सीसी फुटेज-तस्वीर के हवाले से अखबार ने लिखा कि अगर चोर चाहता तो आराम से खजाना चुराकर चंपत हो सकता था, लेकिन उसने खजाने की ओर देखा तक नहीं। दरअसल, अमेरिका में...
    October 27, 10:05 AM
  • महापर्व के महासंकल्प
    आज से चार दिन बाद जब दीप जलेंगे तो घर के दरो-दीवार उजाले से जगमग हो उठेंगे। क्या गांव-क्या शहर, क्या गलियां- क्या चौपाल सब में एक नएपन की सुगंध होगी और नए संकल्पों की महक भी। आइए, इस दीपोत्सव समस्याओं को खत्म करने की पहल करें। संकल्प के साथ एक दीप जलाएं और उन मसलों को साझा करें, जिनसे समाज और जीवन सही मायनों में दीप्तमान नहीं हो पा रहा है। संकल्प सर्वसुलभ स्तरीय शिक्षा का अमेरिकी दार्शनिक जॉन डेवे ने कहा था, शिक्षा जीवन की तैयारी नहीं, बल्कि शिक्षा ही जीवन है। यानी हम शिक्षा से दूर रहकर जीवन से...
    October 19, 03:14 AM
  • फुटबॉल वर्ल्ड कप में इंडिया का गोल
    हम कभी फुटबॉल के मैदान में तीसमारखां नहीं रहे, लेकिन इस खेल को लेकर आज भी सभी पीढ़ियों में क्रेज़ बरक़रार है। क्रिकेट के बाद फुटबॉल देश का दूसरा सबसे लोकप्रिय खेल है और 12 अगस्त से शुरू होने जा रहा इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) हमारे लिए एक ऐसा मौका है, जहां से हम एक बेहतरीन शुरुआत कर सकते हैं और फीफा रैंकिंग में 150वें स्थान से अपनी स्थिति सुधार सकते हैं। किसी भी खेल की लोकप्रियता का सीधा नाता इस बात से है कि उसे किस वर्ग के लोग स्वीकार कर रहे हैं। याद कीजिए अपने बचपन के दिन। अपने गली, मोहल्ले का वो मैच जो ईंट...
    October 12, 04:00 AM
  • विकास की खुशबू
    अस्सी के दशक में जिस बीमारू अवधारणा को प्रतिपादित किया गया उसने आगे चलकर इतना जोर पकड़ा कि कोई भी राज्य अपने आप को बीमारू की श्रेणी में रखना नहीं चाहता था। बीमारू (BIMARU) में पहले बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान व उत्तर प्रदेश थे, बाद में ओडिशा भी जोड़ा गया। ये वे महाकाय व गरीब राज्य थे, जो सर्वाधिक जनसंख्या के दबाव में सामाजिक व आर्थिक उत्थान के सपने भी नहीं देख सकते थे। पिछले कई दिनों से विभिन्न प्रसार माध्यमों पर अक्सर एक खास बात पढ़ने-देखने और सुनने को मिल रही है। कोई राज्य पोलियो-मुक्त होने का...
    October 5, 03:00 AM
  • मोबाइल फोन की बढ़ती भूख
    भारत के 50 प्रतिशत से भी अधिक लोगों के पास शौचालय की सुविधा उपलब्ध नहीं है, लेकिन देश के 70 प्रतिशत से अधिक लोगों के हाथों तक मोबाइल फोन पहुंच चुके हैं और कमोबेश ऐसे ही हालात पूरे विश्व में हैं। सस्ते-सर्वसुलभ, नेटवर्क की उपलब्धता और सूचना, संचार एवं मनोरंजन की जकड़ ने आज मोबाइल फोन की संख्या और विश्व की कुल जनसंख्या को बराबरी पर ला खड़ा कर दिया है। चाईनीज एप्पल के नाम से प्रसिद्ध श्याओमी कंपनी के 40 हजार रेडमी वन एस मोबाइल फोन भारत में ऑनलाइन बिक्री के लिए जैसे ही वेबसाइट पर उपलब्ध होते हैं मात्र 4.2...
    October 5, 03:00 AM
  • विधवाओं को समर्पित एक शहर...
    वृंदावन में विधवाओं की बढ़ती भीड़ के मद्देनजर सांसद हेमामालिनी के बयान को लेकर चल रहे सही-गलत के खेल के बीच असल सवाल यह है कि औरतों की बेचारगी का टापू खड़ी करने वाली इस सामाजिक परंपरा की जरूरत क्या है? क्या हमारा समाज और सरकार एक ऐसा ढांचा खड़ा नहीं कर सकते, जिसमें विधवाएं, परित्यक्ताएं एक सक्षम और सहज जीवन जी सकें? बिहार के राजगीर से चार साल पहले वृंदावन आईं तारादेवी के चार बेटे हैं, लेकिन उनमें से किसी एक के पास भी अपनी मां के लिए एक चारपाई और दो जून की रोटी नहीं है। तारा देवी कहती हैं, तीन बेटों की...
    September 28, 06:06 AM
  • बाढ़ की घाटी पहाड़ सी जिंदगी
    कश्मीर...। आपदाओं के शब्दकोश में एक और नाम। और हां, त्रासदी से लहूलुहान कश्मीर की कहानी भी केदारनाथ जैसी ही है। डरावनी, आतंकित करने वाली, सदमों,-तकलीफों,-दुश्वारियों से भरी हुई। दोनों ही आपदाओं को पहचानने में हम नाकाम रहे हैं। मौसम ने तो संभलने की चेतावनी दी थी लेकिन हम अपनी ही धुन में मशगूल रहे। नतीजा- मौत के आंकड़े बढ़ते चले गए और हुंकारती लहरें पूरी घाटी में पसरती चली गईं। प्रकृति सुकून और शांति देती है, लेकिन अगर हम उसके आने-जाने के रास्ते में ताकत दिखाते हुए अतिक्रमण करने लगेंगे तो तबाही तय...
    September 21, 03:00 AM
  • कोर्ट से रैम्प तक: सेरेना
    हाल ही में यूएस ओपन जीतीं सेरेना विलियम्स शक्ति, साहस और फैशन की अद्भुत मिसाल हैं। अपने बेहतरीन खेल से 33 साल की उम्र में वे 30 से ज्यादा ग्रैंड स्लैम जीत चुकी हैं और विश्व की नंबर वन टेनिस प्लेयर हैं। एक बार वे अवसाद का शिकार भी हुईं लेकिन योद्धा की तरह लड़कर इससे बाहर आईं। आमतौर पर खिलाड़ियों को केवल उनके क्षेत्र तक ही सीमित माना जाता है। लेकिन इस धारणा को तोड़ा है सेेरेना विलियम्स ने, जो न सिर्फ एक खिलाड़ी हैं, बल्कि स्टेज, लेखन, फैशन डिजाइनिंग से लेकर अिभनय तक उन्होंने हर क्षेत्र में खुद को िनखारा...
    September 21, 03:00 AM
  • कब तक बोते रहेंगे खेतों में जहर
    खेती के व्यासायीकरण से उन तमाम लोगों के हाथ से खेती चली गई है, जो वर्षों से समाज को जहरमुक्त भोजन उपलब्ध करा रहे थे। वर्ष 2014 को संयुक्त राष्ट्र संघ ने पारिवारिक खेती का वर्ष या छोटे किसानों का वर्ष घोषित किया है। अगर रासायनिक पदार्थों से मुक्ति पानी है तो हमें पारिवारिक खेती व छोटी खेती को प्रोत्साहित करना ही होगा। सरकार ने फर्टिलाइजर बिल में संशोधन करने की इच्छा व्यक्त की है और संसद के शीतकालीन सत्र में पेस्टीसाइड्स मैनेजमेंट बिल 2008 पेश होने वाला है। यह विचार सफल होगा या नहीं यह कहना...
    September 15, 01:10 PM
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