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  • सैंड आर्ट का पहला भारतीय 'सुदर्शन'
    (डेनमार्क में आयोजित इंटरनेशनल सैंड स्कल्प्चर चैंपियनशिप 2012 में सुदर्शन के इस स्कल्पचर ने जीती। इसमें जलपरी इंसानों से समुद्र को बचाने का आग्रह करती दिख रही है। ) सैंड आर्टिस्ट सुदर्शन पटनायक के हृदय की विशालता में समुद्र-सी व्यापकता है। समुद्री लहरों के बीच पले-बढ़े और स्कूली शिक्षा से वंचित रहे सुदर्शन ने स्वाध्याय, इच्छाशक्ति और जुनून के तीन सूत्रों को अपनाकर खुद का संधान और रचना की। उनका कोई गुरु नहीं है। समाज, राजनीति, पर्यावरण और आतंकवाद जैसे जरूरी और ज्वलंत मसलों पर बनाई जाने वाली...
    August 17, 04:00 AM
  • दृढ़ निश्चय और शालीनता की मूर्ति
    सुधा मूर्ति और एनआर नारायण मूर्ति भारतीय बिजनेस वर्ल्ड में खास मुकाम रखते हैं। इंफोसिस के जरिए नारायण मूर्ति ने भारत के कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर वर्ल्ड में अपनी अमिट छाप बनाई है। वे और उनकी पत्नी समाजहित के लिए भी कई उल्लेखनीय कार्य करते रहते हैं। इसके साथ-साथ दोनों की लेखन में भी गहरी रुचि है। सुधा मूर्ति इसमें नारायण से आगे हैं। अगस्त माह में एक दिन आगे-पीछे इनका जन्मदिन है। इसी मौके पर इनके जीवन की संघर्ष भरी किंतु रोमांचक यात्रा पर गौर करते हैं। * नागवार रामाराव नारायण मूर्ति जन्म: 20 अगस्त...
    August 17, 04:00 AM
  • प्राण अब अमर हैं...
    शुरुआती दौर में प्राण को कम बाधाएं नहीं आईं। उन्होंने बताया मेरे परिवारवाले चाहते थे कि मैं ग्रेजुएट होकर कोई नौकरी कर हूं, कार्टूनिंग भी किसी का पेशा हो सकता है, यह बात लोगों को समझाना मुश्किल था। मेरे बड़े भाई कंवरनाथ आर्टिस्ट थे, तो मैं उनसे बडा प्रभावित था। मेरी ड्राईंग अच्छी थी, तो कॉलेज के दिनों में हमारे प्रिंसिपल साहब आर्ट एक्ज़िबिशन का काम, चार्ट बनाने और नक्शे बनाने का सारा काम मुझे सौंप देते थे, जिसके लिये मुझे थोड़े पैसे भी मिल जाते थे जिससे पढ़ाई का और किताबों का खर्च निकल जाता था।...
    August 17, 04:00 AM
  • 64 के मोदी 67 का लोकतंत्र
    संघर्ष, संयम और समानता के राजनीतिक संस्कारों में पले-बढ़े नरेन्द्र मोदी आज़ादी की 68 वीं सालगिरह पर पहली दफा देश को संबोधित करेंगे। ऐसे में उनकी नेतृत्वकारी क्षमता के समक्ष असल चुनौती यह है कि क्या वे जटिलताओं और समस्याओं से घिरे 21वीं सदी के भारत के निर्माता बन सकेंगे, नई आशाएं जगा सकेंगे... आजादी के बाद जन्मे नेताओं में नरेंद्र दामोदर दास मोदी भारत के पहले प्रधानमंत्री होंगे जो 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराएंगे। जाहिर तौर पर उनके लिए यह ऐतिहासिक दिन होगा। नरेन्द्र मोदी के...
    August 10, 04:00 AM
  • गुलाम भारत की खास जगहें
    गुलाम भारत को आजाद भारत में तब्दील करने में कुछ जगहों ने खासी भूमिका निभाई है। आज भी इन जगहों का अपना महत्व है और ये पर्यटन स्थल के रूप में अधिक पसंद की जाती हैं। हर जगह से हमारे पराधीन भारत की कोई न कोई याद जुड़ी हुई है, जो इसे खास बनाती है। इितहास के पन्ने पलटते हुए इन जगहों के महत्व के बारे में बता रहे हैं मोहम्मद शाहिद। 1. लाल किला, दिल्ली स्वतंत्रता प्राप्ति के संघर्ष में भी इसका अहम योगदान रहा हर 15 अगस्त की अल-सुबह जहां एक ओर सूर्य उदय हो रहा होता है, वहीं दूसरी ओर मुगलकालीन लाल किले के शिखर पर...
    August 10, 04:00 AM
  • जहरीले भोजन से आजादी का संकल्प
    एक सेब का रोज सेवन डॉक्टर से रखता है दूर, यह कहावत अब समयातीत लगती है। हरी सब्जियां, फल और मोटे अनाज शरीर में मौजूद विष का नाश करते हैं, मेटाबॉलिज्म को संतुलित रखते हैं, जैसे तथ्य भी सही नहीं जान पड़ते। हम जाने-अनजाने रोज साइपरमेथ्रिन, हेपटैचलर, क्वीनालफास, क्लोरोडेन, डिचलोर्वस जैसे प्रतिबंधित और जानलेवा पेस्टीसाइड्स थालियों में परोस और खा रहे हैं, जिसके कारण कैंसर, किडनी, तंत्रिकातंत्र और अंतड़ियों के रोग होते हैं। भिंडी, फूल गोभी, पत्ता गोभी हो या केला, संतरा, सेब या फिर गेहूं और चावल, कोई भी...
    August 10, 04:00 AM
  • कैसे रखते हैं तूफान के नाम
    जिस तरह नाम से व्यक्ति की पहचान होती है, उसी तरह सुनामी, कटरीना, सैंडी जैसे तूफान अपने नामों से जाने जाते हैं। लेकिन तूफानों के नाम रखे कैसे जाते हैं, इसकी प्रक्रिया बड़ी रोचक है। आम लोगों को तूफान के बारे में लिखित या ब्राॅडकास्टिंग के जरिए जानकारी देने के लिए जरूरी था तूफान का नाम होना। बस इसी तरह शुरू हुई तूफानों के नामकरण की प्रक्रिया। अध्ययन बताते हैं कि 1950 तक तूफानों को उनके सन् के हिसाब से जाना जाता था, जैसे 1946 ए, 1946 बी। लेकिन 1950 के बाद तूफानों का फीमेल नाम रखा जाने लगा और 1979 से पुरुषों (मेल) के...
    August 4, 12:49 PM
  • हार ना मानने के आदी ओबामा
    अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में बराक ओबामा अपने दूसरे कार्यकाल में सफलतापूर्वक काम कर रहे हैं। नस्लभेदी संस्कृति और कालों को गुलाम बनाकर रखने वाली सोच वाले अमेरिका में अश्वेत व्यक्ति का देश के सर्वोच्च पद पर पहुंचना नि:संदेह एक महान व्यक्तित्व और कभी हार न मानने वाली सोच की मिसाल है। एक संघषर्शील जीवन के इस सफर में ओबामा का जीवन हमें भी काफी कुछ सीखने के लिए प्रेरित करता है। परिवार को प्राथमिकता: ओबामा अपनी पत्नी मिशेल और दोनों बेटियों मालिया और साशा के साथ नियमित रूप से चर्च जाते हैं।...
    August 4, 12:47 PM
  • सुनिश्चित हो सुरक्षित बचपन
    हम भारतीय लोग बहुत देर में रिएक्ट करते हैं। स्थितियां अतिवादी हो जाने के बाद, असहनीय हो जाने पर, लगभग आखिरी सीमा पर। बिल्कुल निरुपाय और आक्रोशित। बेंगलुरु के विबग्योर हाई स्कूल में पहली कक्षा की लड़की के साथ हुआ दुष्कर्म और उसके बाद हुई ऐतिहासिक प्रतिक्रिया इसका ताजा उदाहरण है। लंबे समय से स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के साथ शिक्षकों, प्रशासन और रिश्तेदारों द्वारा अपराध प्रकाश में आ रहे हैं, लेकिन समाज और सरकार हरकत में तब आई, जब एक मेट्रो शहर के प्रतिष्ठा प्राप्त स्कूल के शिक्षक ने मासूम...
    August 3, 04:00 AM
  • असावधानी का रोग है हेपेटाइटिस
    दुनिया भर में हेपेटाइिटस बी के मरीजों संख्या 35 करोड़ से भी अधिक है, जबकि भारत में इस बीमारी से चार करोड़ लोग पीड़ित हैं। महज़ लापरवाही के कारण होने वाली इस बीमारी से होने वाली मौतों का आंकड़ा कम किया जा सकता है, यदि हम सावधानी बरतें। मैं 2004 दिल्ली के बवाना के एक अस्पताल में कार्यरत था। एक दुकान पर बाल कटवाने गया। नाई ने बिना ब्लेड बदले ही उस्तरा उठाया और मेरे टोकने पर यह कहते हुए ब्लेड बदला कि इसका एक रुपया अलग से लगेगा। 2008 में उत्तराखंड के गौरीकुंड में कार्यरत था, वहां भी यही स्थिति थी। गौरीकुंड जैसी...
    July 27, 04:00 AM
  • कथा, कलम और जीवन के रचनाकार हैं प्रेमचंद
    हिंदी साहित्य के सबसे लोकप्रिय और प्रासंगिक साहित्यकार हैं प्रेमचंद, जिनकी कालजयी रचनाओं को आज भी उसी शिद्दत से पढ़ा और उनका संदर्भ लिया जाता है। उर्दू, फारसी, हिन्दी के इस विद्वान के पसंदीदा शायर इक़बाल थे, जिनकी रचनाओं में वह देश की आवाज़ सुनते थे। यही आवाज़ उनके उपन्यासों, कहानियों आिद में झलकती है। * अंजनी कुमार मेरा जीवन सपाट-समतल मैदान है, जिसमें कहीं-कहीं गड्ढे तो हैं, पर टीलों, पर्वतों, घने जंगलों, गहरी घाटियों और खंडहरों का स्थान नहीं है। जो सज्जन पहाड़ों की सैर के शौकीन हैं उन्हें तो...
    July 27, 04:00 AM
  • जो बादल नहीं बरसेंगे!
    लगभग एक महीने की देरी के बाद अब देश के कुछ हिस्सों में बादलों ने बरसना शुरू किया है। बारिश न होने पर हमारे जेहन में फटी जमीनें, सूखी फसलें और आसमान ताकता हताश किसान आता है, लेकिन अब शहरी जीवन भी खराब मानसून से व्यापक स्तर प्रभावित हो रहा है। अल नीनो के प्रभाव के कारण मानसून में एक महीने की देरी हो चुकी है और 30 फीसदी संभावना जताई जा रही है कि यह वर्ष भी सूखाग्रस्त हो। इसके कारण सब्जियों, फसलों व फलों की बुआई-कटाई और मंडियों के आवक पर दुष्प्रभाव पड़ना अभी से शुरू हो गया है। महंगी हाेती सब्जियां और फल...
    July 20, 04:00 AM
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