हास्य फिल्मों का गर्म बाजार
गोविंदा ने मणिरत्नम को विस्मित किया!
मणिरत्नम की फिल्म ‘रावण’ में हनुमान की भूमिका कर रहे गोविंदा ने प्रतिदिन समय पर और पूरी तैयारी से आकर मणिरत्नम को अचंभित कर दिया। गोविंदा की लेटलतीफी के किस्से मणिरत्नम ने सुन रखे थे और अनेक शंकाओं और सहयोगियों के विरोध के बावजूद उन्होंने गोविंदा को अनुबंधित किया। गोविंदा ने शूटिंग के पहले मणिरत्नम से अपनी भूमिका अच्छी तरह समझ ली थी और पूरी तैयारी के साथ सेट पर अपने अभिनय से...
पहाड़ियां और पानी
एक ही पखवाड़े में दो चर्चित फिल्मों (ऑल द बेस्ट, लंदन ड्रीम्स) में विपरीत भूमिकाओं में उत्तम अभिनय करने वाले अजय देवगन विलक्षण प्रतिभा के धनी हैं और दो बार अभिनय के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुके हैं। ‘ऑल द बेस्ट’ में उन्होंने हास्य भूमिका की है और ‘लंदन ड्रीम्स’ में ईष्र्या के अंगारों पर चलने वाले दुष्ट व्यक्ति की भूमिका है। अजय देवगन के स्टाफ में कोई प्रचारक नहीं है और...
बासी जन्मदिन पर शाहरुख का कल्पना संसार
आज शाहरुख खान अपने जन्मदिन पर भेजे गए गुलदस्तों से भेजने वालों के कार्डस निकालकर धन्यवाद के पत्र लिख रहे होंगे। बासी जन्मदिन बड़ी राहत का दिन होता है, क्योंकि विगत दिन की थकान दूर करनी होती है। यह दिन अपने शुभचिंतकों की विराट संख्या पर इतराने का दिन है।
समझदार सितारे ट्रक भरकर भेजे गए गुलदस्तों और आयात किए फूलों की डलियों को अनाथालयों और वृद्धाश्रमों में भेज देते हैं। आजकल...
संतोषी और शाह : अंदाज अपना-अपना
राजकुमार संतोषी और विपुल शाह के काम करने की शैली बिल्कुल जुदा है। ‘लंदन ड्रीम्स’ को पहले संतोषी बनाने वाले थे और उनका संस्करण शाह की प्रस्तुति से निश्चित ही अलग होता।रा जकुमार संतोषी की रणबीर कपूर और कैटरीना कैफ अभिनीत ‘अजब प्रेम की गजब कहानी’ इस शुक्रवार को प्रदर्शित होने जा रही है। ज्ञातव्य है कि कुछ वर्ष पूर्व राजकुमार संतोषी सलमान खान और अजय देवगन के साथ ‘लंदन...
यारी बिना बेसुरी ये जिंदगी
शाहरुख व मायावती का समय बोध
अनुभव सिन्हा की सुपरहीरो पटकथा पर शाहरुख खान ‘रा 1’ नामक फिल्म बनाने जा रहे हैं और वह अगले चार महीनों तक इसकी शूटिंग में व्यस्त रहेंगे। फरहा खान की पटकथा ‘हैप्पी न्यू ईयर’ में अभी बहुत काम बाकी है, अत: इसकी शूटिंग बाद में शुरू होगी। ज्ञातव्य है कि अनुभव सिन्हा ने म्यूजिक वीडियो बनाने के बाद टी-सीरीज के लिए एक फिल्म ‘तुम बिन’ बनाई थी।
बाद में उनकी ‘तथास्तु’ और...
इंडियन समर और वैचारिक अकाल
हॉलीवुड की फिल्म ‘इंडियन समर’ पंडित जवाहर लाल नेहरू और श्रीमती एडविना माउंटबेटन की प्रेम कथा पर आधारित एक काल्पनिक फिल्म है। भारत में इसकी शूटिंग पर रोक लगाए जाने के कारण फिल्म खारिज कर दी गई है।
प्रेम कहानी होने से नायक-नायिका के अंतरंग प्रेम दृश्यों के कारण ही प्रतिबंध लगाया गया है। इस मुद्दे के मूल में यह बात है कि हम अपने नेताओं, कवियों और अन्य कलाकारों को...
आशुतोष गोवारीकर की जी जान
पीवीआर के सहयोग से आशुतोष गोवारीकर अभिषेक बच्चन और असिन अभिनीत ‘खेलें हम जी जान से’ नामक फिल्म की शूटिंग नवंबर से गोवा में शुरू करने जा रहे हैं। इस फिल्म के बाद संभवत: वह महात्मा बुद्ध के जीवन पर आधारित भव्य कथा फिल्म में जुट जाएंगे। ज्ञातव्य है कि आशुतोष ने बाल कलाकार के रूप में भी काम किया है और वयस्क होने के बाद पहली भूमिका सलीम खान द्वारा लिखित और महेश भट्ट निर्देशित...
अमत्र्य सेन, सिनेमा और अकाल
अधिकतम के व्यवसाय में न्यूनतम सफलता
बहीखाते के पूजन के उत्सव के अवसर पर मनोरंजन का बहीखाता कहता है कि दिवाली 08 से इस दिवाली तक 240 फिल्में प्रदर्शित हुईं, जिनमें हिंदी भाषा में मात्र 132 फिल्में हैं, शेष मराठी, अंग्रेजी की हैं और 101 फिल्में डब की गई हैं। दक्षिण की चार भाषाओं का खाता अलग है।
इन 132 फिल्मों में ‘गजनी’, ‘रब ने बना दी जोड़ी’, ‘न्यूयॉर्क’, ‘वेक अप सिड’, ‘लव आज कल’ और ‘वांटेड’ सफल...
लंदन ड्रीम्स और मोजार्ट ड्रीम
संजय लीला भंसाली की सफलतम फिल्म ‘हम दिल दे चुके सनम’ के बाद सलमान खान और अजय देवगन अब विपुल शाह की ‘लंदन ड्रीम्स’ में साथ आ रहे हैं। संजय की ‘हम दिल दे चुके सनम’ कई कारणों से यादगार फिल्म है। इसकी शूटिंग के दरमियान खान-देवगन मित्रता पनपी और खान-ऐश्वर्या प्रेम कहानी का भी जन्म हुआ। इसके एक दृश्य में संगीत घराने की कन्या को वरने आए अजय से गाने को कहा जाता है और वह...
रोग केंद्रित फिल्में और दर्शक
अंग्रेजी अखबार ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ में मीनाक्षी सिन्हा लिखती हैं कि आजकल फिल्मकार पारंपरिक बीमारी टीबी या कैंसर के बदले उन बीमारियों से पात्रों को ग्रसित बताते हैं, जो बहुत कम लोगों को होती हैं। अमिताभ बच्चन अभिनीत आगामी फिल्म ‘पा’ (पिता के लिए संक्षिप्त संबोधन) में उन्हें प्रोजेरिया का रोग है, अत: उनकी उम्र औसत से पांच गुना तेजी से बढ़ती है। अमेरिकी फिल्म...
दिल का मामला, परिवार का मामला
मौलिक प्रचार और टॉयलेट में विचार
उत्सव नदी के किनारे की कहानी
सिनेमाई संयोग और यथार्थ का सच
सिनेमा में प्रस्तुत सच, सामाजिक हालात, समय, संयोग, स्थान और तर्क यथार्थ जीवन में स्थापित मानदंड से अलग होते हैं। इस माध्यम की अपनी सीमाएं और स्वतंत्रता भी हैं। दशकों की कथा ढाई घंटे में दिखाई जाती है। पात्र देश-विदेश की दूर-दराज जगहों पर जाते हैं और दूरियां सिनेमाई क्षणों में सिमट जाती हैं।
सिनेमा में प्रस्तुत तर्कहीनता के पीछे एक तर्क है। सिनेमा में धार्मिक...
युधिष्ठिर से जोकर तक जुआरी दास्तां
उजास के इस महान उत्सव दीपावली में एक कालिख है- जुआ खेलने की रस्म। राम के विजयी होकर अयोध्या लौटने पर जनता ने घरों में दीये जलाए थे, परंतु लक्ष्मी पूजन शायद बाद में शामिल हुआ। भारत एकमात्र देश है, जिसमें लक्ष्मी पूजन का उत्सव है। हमारी आध्यात्मिकता थोड़ी सी संदिग्ध हो जाती है।
जुए का उल्लेख राम के युग के सैकड़ों वर्ष बाद घटित महाभारत में है। धर्मराज युधिष्ठिर का दो...
प्रेम कथा में शेयर बाजार का घाटा
सितारे की लोकप्रिय छवि उसके कलाकार को सीमाबद्ध कर देती है। संजीव कुमार ऐसे अभिनेता थे, जिन्होंने कभी किसी भी छवि को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। कभी-कभी सितारे हमें आश्चर्यचकित कर देते हैं, मसलन नए निर्देशक प्रेम सोनी की फिल्म ‘मैं और मिसेज खन्ना’ में सलमान खान, करीना कपूर और सोहेल खान ने छवियों की जंजीरें तोड़ी हैं। ‘वांटेड’ में सलमान ने अपने तेवर और एक्शन से...
उत्सवप्रियता और सिनेमा
दुनिया के सभी देशों में महत्वपूर्ण धार्मिक उत्सव के समय फिल्मों का व्यवसाय जबरदस्त होता है। दीपावली, क्रिसमस और ईद पर भव्य फिल्मों के प्रदर्शन की योजना काफी पहले बनाई जाती है। हॉलीवुड में क्रिसमस और नए वर्ष के दिनों में औसत से दोगुना व्यवसाय होता है। भारत में दीपावली पर विगत अनेक वर्षो से शाहरुख खान अभिनीत फिल्में लगती रही हैं, परंतु इस वर्ष करण जौहर की फिल्म फरवरी तक ही...
नायक की आधार भूमि
सफल लेखिका अरुंधति राय का कहना है कि अमिताभ बच्चन ने अपनी शुरुआती फिल्मों में आम आदमी और उसके संघर्ष को परदे पर प्रस्तुत करके अपार लोकप्रियता अर्जित की। हालांकि बाद की फिल्मों में वह महलों में रहने वाला पात्र अभिनीत करने लगे, परंतु आज भी वह प्रारंभिक फिल्मों की जमा-पूंजी अर्थात गुडविल ही खा रहे हैं। गोयाकि उनकी आज की लोकप्रियता का आधार ‘जंजीर,’ ‘शोले,’ ‘त्रिशूल’...
अमिताभ के सामने यक्ष प्रश्न
अमिताभ बच्चन चालीस साल से अभिनय कर रहे हैं और इस दरमियान उन्होंने अनेक कीर्तिमान बनाए हैं। आज भी उनकी पारी जारी है। इतनी लंबी पारी खेलना आसान नहीं है। ‘कुली’ की शूटिंग के दौरान हुई दुर्घटना के बाद अस्पताल में एक क्षण ऐसा भी आया था कि उन्हें मृत मान लिया गया था, परंतु वह वापस आ गए। उसके बाद उन्हें मायस्थेनिया ग्रेविस नामक घातक रोग हुआ।
अपनी निर्माण कंपनी में...
सितारा टकसाल, आम आदमी चिल्लर
छियासी से नवासी के आयु समूह के दिलीप कुमार, देव आनंद, और प्राण सिकंद मुंबई में पाली हिल पर एक फर्लाग के क्षेत्र में रहते हैं। शाहरुख खान, आमिर और सलमान खान भी निकट ही बैंड स्टैंड पर एक फर्लाग के क्षेत्र में रहते हैं, परंतु इनके मन की दूरियां काफी बड़ी हैं। बुजुर्ग कलाकार यादों की डोर से बंधे हैं। यह खुशी की बात है कि दिलीप साहब की आती-जाती याददाश्त में खूब सुधार आया है, जैसा कि...
नए-पुराने संस्करणों का गोरखधंधा
केदार शर्मा ने आचार्य चतुरसेन शास्त्री के उपन्यास ‘चित्रलेखा’ पर श्वेत-श्याम सफल फिल्म बनाई और दो दशक बाद उसी पटकथा पर तत्कालीन सुपर सितारे अशोक कुमार और मीना कुमारी को लेकर रंगीन संस्करण बनाया, जो असफल हो गया। यह एक भ्रम है कि सफलता का फॉमरूला होता है और वह दोहराया जा सकता है। विज्ञान द्वारा सिद्ध फॉमरूला हमेशा दोहराया जा सकता है, इसीलिए उसे सिद्धांत कहते हैं।
यह कलियुग नहीं विज्ञापन युग है
वस्तुएं कारखानों में बनती हैं, परंतु ब्रांड दिमाग में तैयार किए जाते हैं - वॉल्टर लेंडोर के इस कथन का जिक्र विद्योत्तमा शर्मा ने अपने सारगर्भित लेख में किया है। बाजार और विज्ञापन की ताकतें आम आदमी की विचार प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं। सड़क पर होर्डिग्स लगे होते हैं, अखबारों में विज्ञापन प्रकाशित होते हैं और टेलीविजन पर विज्ञापन फिल्मों का निरंतर प्रसारण जारी रहता है...
अभिनय सीखा नहीं, सिखाया जाता है!
अनुपम खेर को मुंबई आए पच्चीस वर्ष हो गए हैं। हाल ही में वह अमेरिकी फिल्मकार वुडी एलन की फिल्म में चरित्र भूमिका का निर्वाह करके लौटे हैं। लौटने के बाद वे खेखाड़ी नामक झोपड़-पट्टी भी गए, जहां अपने संघर्षकाल में उन्होंने पांच रुपए प्रतिमाह की दर से छोटे बच्चों को पढ़ाया था। खफीफ सी आय में अनुपम बमुश्किल दो वक्त दाल-चावल ही खा पाते थे और प्रतिदिन पैदल पृथ्वी थिएटर्स जुहू जाते...
स्मितेय प्रतीक की दुविधा
आमिर खान की फिल्म ‘जाने तू.. या जाने ना’ में प्रभावोत्पादक चरित्र भूमिका करने वाले नवोदित प्रतीक बब्बर का कहना है कि उनकी माता स्मिता पाटिल उनके पिता राज बब्बर से बेहतर कलाकार थीं। कलाकारों की तुलना उस समय की जाती है, जब वे समान भूमिकाएं करते हैं। मसलन देवदास के रूप में दिलीप कुमार और शाहरुख की तुलना की जा सकती है और इसमें शाहरुख निहायत ही कमतर साबित होते हैं। जैसे वे...
ये मुंबई है मेरी जान
महात्मा गांधी की जयंती दो अक्टूबर को बेचारे करण जौहर को राज ठाकरे से क्षमायाचना करनी पड़ी। अगर वह ऐसा नहीं करते तो उनकी फिल्म ‘वेक अप सिड’ का प्रदर्शन राज की सेना रोक देती, क्योंकि फिल्म में दो पात्र ग्यारह बार बंबई कहते हैं और राज की जिद है कि मुंबई कहा जाए। उस मुंबई में अनेक जगह महात्मा गांधी की प्रतिमाओं से वर्ष भर की धूल और परिंदों की गुस्ताखियों को धोकर साफ किया गया और...
वेक अप सिड : युवा मनोरंजन का शंखनाद
जब भी मनोरंजन परिदृश्य में घिसी-पिटी फिल्मों का दौर लंबे समय तक चलता है और जब आप निराश हो जाते हैं, तब कोई युवा फिल्मकार सिनेमा में ताजगी लेकर आता है और आपका विश्वास लौट आता है। अयान मुखर्जी ने अपनी पहली ही फिल्म ‘वेक अप सिड’ में लगभग वैसा ही स्वस्थ सार्थक मनोरंजन दिया है जैसे इम्तियाज अली ने ‘जब वी मेट’ में दिया था। रणबीर कपूर और कोंकणा सेन शर्मा ने इसमें सजीव अभिनय...
संगीत के स्वर्णयुग का सम्मान
मन्ना डे को जीवन में हर चीज देर से मिली है- पैसा, नाम और पुरस्कार। उम्र की संध्या में उन्हें उच्चतम दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से नवाजा गया है। अपनी जवानी में उन्हें अखाड़े जाकर दंड पेलने और कुश्ती लड़ने का शौक था और वे मिट्टीपकड़ पहलवान माने जाते थे, अर्थात आप उन्हें पटक सकते हैं, परंतु चित नहीं कर सकते। जीवन और गायन में भी मन्ना डे मिट्टीपकड़ पहलवान ही सिद्ध हुए।
अब रानी मुखर्जी क्या करेंगी?
दुनिया के महानतम बल्लेबाज सर डॉन ब्रेडमैन अपनी अंतिम पारी में शून्य पर आउट हुए। टेस्ट क्रिकेट में 99 का औसत प्राप्त करने वाला यह सर्वकालिक महान खिलाड़ी अंतिम पारी के शून्य को अपने मन से जल्दी मिटा नहीं पाया।
क्या रानी मुखर्जी भी अपने लंबे सफल कॅरियर की अंतिम पांच फिल्मों की असफलता को पचा पाएंगी? यह भी संभव है कि वह और फिल्में करें, परंतु कौन विश्वास से कह सकता है कि...
असफलता द्वारा रची गई समृद्धि
प्रदर्शन के सात दिन पूर्व मुंबई पुलिस ने वीडियो चोरों के गिरोह से ‘वॉट्स योर राशि’ का मास्टर प्रिंट जब्त किया। एक लेबोरेटरी का उच्चधिकारी भी कथित तौर पर इसमें शामिल माना गया है। सुना है कि ‘वॉट्स योर राशि’ की पूंजी निवेशक कंपनी यूटीवी उस लेबोरेटरी पर सौ करोड़ का दावा ठोंकने वाली है। ज्ञातव्य है कि यह लेबोरेटरी एक अत्यंत धनाढ्य कारपोरेट संस्था का हिस्सा है।









