सिटी BLOGGERS
By: राजेश जोशी
यह गलियों का शहर है और गप्पों का। न कहीं गलियां खत्म होती हैं, न कहीं गप्पें। एक गली में से दूसरी गली निकलती है और फिर वह किसी तीसरी गली में खुल जाती है। मतलब यह कि गलियों का...By: सतीश एलिया
दुनिया के हर शहर के दो चेहरे होते हैं, नया और पुराना। पुराने को अंग्रेजीदां लोग वाइड सिटी भी कहते हैं और हिंदी वाले इसी को अंग्रेजी में ही ओल्ड सिटी कहते हैं। बल्कि कई शहरों...By: नासिर फराज
मैं अकसर अपने दोस्तों से मिलने भोपाल आता रहता हूं। कभी-कभार जब कहीं मुशायरे के सिलसिले में यहां से गुजरना होता है, तब भी भोपाल में रुकना सुकून देता है। मुंबई मेरी...By: सैफ अली खान
भोपाल कितना बदल गया है, नहीं बदली तो गलियां, तालाब, लोगों का अपनापन, प्यार और सादगी। इसलिए यह शहर मेरे दिल के बेहद करीब है। मेरे स्कूल के बचपन की यादें, दोस्त सब यहां से जुड़ा...