सिटी BLOGGERS
By: अनुज खरे
सूरमा भोपाली फिर बुधवारा की गली के मोड़ पर मिल गए। उसी खास गली के मोड़ पर जहां वे फिल्मों में जाने से पहले ‘रहते थे’, मजमा जमाते थे। हालांकि अब हाल बदरंग है, लेकिन उनकी...By: सुनील मिश्र
प्रेम गुप्ता शहर के वरिष्ठ रंगकर्मी हैं। बच्चों का रंगकर्म करते हुए उनको तीन दशक से भी ज्यादा समय हुआ। आज वो समय है जब प्राय: रंगकर्मी बच्चों के साथ नाटक करते हैं,...By: रमाकांत गुंदेचा
गुरुकुल,ध्रुपद संस्थान की स्थापना के पीछे एक लम्बी पृष्ठभूमि रही है। हम लोगों ने जिसध्रुपद केन्द्र में सीखा था, वह तत्कालीन संस्कृति सचिव तथा उस समय के सर्वाधिक सक्रिय...By: गीत चतुर्वेदी
क़रीब डेढ़ साल पहले-शाम फ़ोन बजता है. उस तरफ़ एक कांपती हुई, लेकिन ओजस्वी बुज़ुर्ग आवाज़ है. उलाहने का आरोह है. 'तुम्हें आने की फ़ुरसत नहीं मिलती?' 'दादा, क़सम से. बहुत उलझा...By: सुनील मिश्र
भोपाल शहर को इन दिनों देखो तो वह नजारों में खुलता और विस्तृत होता दिखाई देता है। शहर की सड़कें खूब चौड़ी कर दी गई हैं। एक सड़क के बगल में दूसरी वैसी ही सड़क बना दी गई है और...