Bhopal

विज्ञापन
तक के समाचार
सुबह के बादल
गुरूवार
360C/ 250C
सुबह के बादल
शुक्रवार
370C/ 270C
दोपहर के बादल
शनिवार
360C/ 270C

मेरे दोस्त! पिक्चर अभी बाकी है

 
Source: सुनील शेट्टी     Designation: लेखक बॉलीवुड के लोकप्रिय अभिनेता हैं।
 
 
 
| Email  Print Comment
 
 
 
 
http://unified.bhaskar.com/city_blogger_author_images/thumb_image/100064_thumb.jpg भोपाल में भले ही अपनी फिल्म-मेरे दोस्त! पिक्चर अभी बाकी है के प्रमोशन के सिलसिले में आना हुआ हो, लेकिन यहां आकर बहुत अच्छा लगा। भोपाल के बारे में काफी सुना है।

इस शहर को कला का गढ़ भी कहा जाता है, ऐसा भी कइयों से सुना और अखबारों/किताबों तथा मैग्जीनों में पढ़ा। इसमें कोई दो राय नहीं; कि भोपाल में कला को फलने-फूलने का भरपूर मौका दिया जाता है।

यहां के लोग कलाप्रेमी हैं। उन्हें कला और कलाकार दोनों की अहमियत का सही आकलन करना आता है।

मैं करीब 12-13 साल पहले भी यहां आया था। तब यहां के एक लड़के ने मेरा आटोग्राफ लिया था। यह गवरू जवान यहां के होटल जहांनुमा की जिम में इंस्ट्रक्टर था। आज यह लड़का वर्ल्ड फेमस मॉडल है। आपको मालूम चल गया होगा कि मैं किसका जिक्र कर रहा हूं। शाहवर अली, जो मेरी इस फिल्म में मेरे को-आर्टिस्ट हैं।

यह एग्जाम्पल मैंने यूं ही नहीं दिया। मैंने यह कहने का प्रयास किया है कि भोपाल में कला को समझने वाले भी बहुत हैं और कलाकारों की भी कोई कमी नहीं हैं। यहां के पानी और माटी में ही कुछ ऐसी तासीर है कि हर कला क्षेत्र में यहां के लोग धाक जमा रहे हैं।


यदि फिल्म इंडस्ट्री की ही बात करें, तो चाहे डायरेक्शन हो, प्रोडक्शन वर्क हो, राइटिंग या एक्टिंग; सभी में भोपाल के लोगों को देखा जा सकता है। पिछले कुछेक सालों में यहां फिल्मी गतिविधियां भी तेजी से बढ़ी हैं। यह इस बात का प्रतीक है कि; हम जैसे मुंबइया लोगों को भोपाल काफी पसंद आ रहा है। यहां लोकेशंस काफी हैं। खूबसूरती बहुत है और शूटिंग के दौरान लोगों का सहयोग भी अच्छा मिलता है।


भोपाल में वो सबकुछ है, जो एक फिल्म मेकिंग के लिए जरूरी है। मुझे जब बताया गया कि; इस फिल्म के प्रमोशन के लिए भोपाल भी चलना है, तो अंदर से बेहद खुशी हुई थी। मैं क्या? साथी कलाकार राकेश बेदी और उदिता गोस्वामी को भी यह शहर अच्छा लगता है। वे कई बार यहां आ चुके हैं।


अपनी इस फिल्म के प्रमोशन के सिलसिले में भोपाल में कई जगह गया, सबने मु­ो खूब आकर्षित किया। सच कहूं, तो भोपाल के बारे में बताने को इतना कुछ है कि; लिखते-लिखते; बोलते-बोलते थक जाऊंगा, लेकिन शब्द खत्म नहीं होंगे। इसलिए सिर्फ इतना कहूंगा, भोपाल आकर बहुत अच्छा लगा, बार-बार यहां आना चाहूंगा, बहुत कुछ देखने को अभी बाकी है। कुछेक शब्दों में कहूं तो-मेरे दोस्त! पिक्चर अभी बाकी है।
 

आपके विचार
 
 
कोड:
10 + 4

 
विज्ञापन

बड़ी खबरें

 

रोचक खबरें

 

बॉलीवुड

 

जीवन मंत्र

 
 

क्रिकेट

 

बिज़नेस

 

जोक्स

 

पसंदीदा खबरें

 
 

फोटो फीचर