इंदौर .कहा जाता है कि अपराधी कितना ही शातिर क्यों न हो, मौके पर सबूत छोड़ ही देता है। पुलिस का काम इन सबूतों की पहचान कर अपराधी तक पहुंचना होता है, लेकिन इंदौर के खाकी वाले इस मामले में पीछे हैं। अन्य सबूत जुटाना तो दूर फिंगर प्रिंट को ही तवज्जो नहीं दी जाती। चोरी की वारदात (जिसमें अपराधी के फिंगर प्रिंट मौके पर मिलने की संभावना सबसे ज्यादा होती है) की जांच के लिए पुलिस के पास उन्नत सॉफ्टवेयर भी हैं लेकिन फिंगर प्रिंट लेने के लिए जिले में एक ही एक्सपर्ट है। थाने वालों के पास फिंगर प्रिंट तलाशने के लिए किट है, परंतु उसे हासिल करने की ट्रेनिंग ही नहीं दी गई।
नेशनल क्राइम...