सिटी BLOGGERS
By: Navneet Gurjar
कहीं-कहीं, थोड़ी-घणी अब धूप दिखाई देती है। लंबी बारिशी मुश्किलों के बाद टुकड़ा-टुकड़ा ही सही, धूप अच्छी लगती है। अच्छा लगता है शहर के एक कोने में पालथी मारे बैठा वो टीला।...By: Navneet Gurjar
जैसे नानीबाई के मायरे में जिन-जिन लोगों ने कपड़े-लत्तों के लिए ताने मारे थे, कृष्ण ने उन सबके सिरों पर गठरियां-पोटलियां दे मारी थीं। वैसे ही लंबे सूखे के बाद बादलों ने बीते...