सिटी BLOGGERS

 
वे सपने देख रहे हैं या सपने छीन रहे हैं?

By: Navneet Gurjar

साहित्य में सपनों की बात होती है। होनी भी चाहिए। लेकिन अब साहित्य और सपनों के बीच भी नक्सली आने लगे हैं। कैसे? यह महाश्वेतादेवी ने बताया। शीर्ष साहित्यकार हैं। वे ही सही...
 
तर्कों के आइने में पौराणिक पात्र

By: Navneet Gurjar

पौराणिक पात्रों के दिलचस्प तार्किक रूप समय-समय पर सामने आए हैं। ब्रह्म पुराण के गौतम-अहिल्या वृतांत में वर्णन है कि एक बार जब गौतम तीर्थ दर्शन को गए तो इंद्र उन्हीं का...
 
मरहम बन जाती है माटी

By: avinash rawat

एक हजार लीटर छाछ, दो सौ लीटर सरसों का तेल, सौ किलो गेरु, 20 लीटर नीबू का रस, 10 किलो हल्दी सब का सब डाल दिया जाता है मिट्टी में और माटी बन जाती है मरहम। पिछले दिनों मप्र केसरी...
 
ऐसा मंदिर जहां प्रवेश के लिए 108 बार लिखना पड़ता है रामनाम

By: avinash rawat

पिछले दिनों बंगाली चौराहे से बायपास की ओर जाते समय वैभवनगर में एक मंदिर दिखा गया। मैंने सोचा अब तक इस मंदिर में नहीं गया तो क्यों न एक बार चलकर इसे भी देख लिया जाए। अपने एक...
 
एक विशुद्ध ऑर्गेनिक विचार

By: Mukesh Mathur

मैं थोड़ा ज्यादा पैसा देने को तैयार हूं। बस, खाने-पीने का सामान शुद्ध मिलना चाहिए। ऐसा जो परिवार की सेहत न बिगाड़े। सिंथेटिक घी-दूध, फल-सब्जियों में पकाने-चमकाने वाले रंग...
 
विज्ञापन

बड़ी खबरें

 

रोचक खबरें

 

बॉलीवुड

 

जीवन मंत्र

 
 

क्रिकेट

 

बिज़नेस

 

जोक्स

 

पसंदीदा खबरें

 
 

फोटो फीचर