बन रहे हैं खून के रिश्ते

 
Source: avinash rawat     Designation: खोजी पत्रकार व ब्लागर
 
 
 
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http://unified.bhaskar.com/city_blogger_author_images/thumb_image/100050_thumb.jpg बात जून महीने की है, अखबार में खबर के साथ मेरा नंबर देखकर एक लड़के ने फोन किया और मेरा ब्लड़ गु्रप जानना चाहा। मैं ठहरा पत्रकार, सो सवाल पूछना शुरू कर दिया क्यों, किसी को ब्लड़ की जरूरत है क्या? जवाब देते हुए उसने उसने बताया कि बस यूं ही निगेटिव गु्रप वाले लोगों को ढ़ूंढ़कर दोस्ती करना चाहता हूं। मेरी जिज्ञासा शांत करने के लिए उसने आगे बताया कि वह एमबीए का स्टूडेंट है। पिछले साल बायपास पर अपने दोस्तों के साथ घूमते हुए रास्ते में एक ट्रक की टक्कर से वह गंभीर रूप से घायल हो गया था। दोस्त उसे अस्पताल ले गए जहां डॉक्टर्स ने कहा कि खून ज्यादा बह गया है इसलिए ओ निगेटिव ब्लड ग्रुप की दो बोतल खून की आवश्यकता है। चार घंटे तक लगातार कोशिश करने के बाद मेरे गु्रप का खून मिल पाया। अब वह शहर में ओ निगेटिव ब्लड ग्रुप वाले लोगों को तलाशकर दोस्ती कर रहा है। अब इस तरह के तीन लोगों से दोस्ती बढ़ा ली। ये आपस में न सिर्फ अच्छे दोस्त हैं बल्कि इनमें पारिवारिकता भी बढ़ गई है। साल में दो तीन बार सब आपस में मिलकर पार्टी करते हैं और जरूरत पडऩे पर एक दूसरे को ब्लड़ डोनेट करने के लिए सदैव तैयार रहते हैं। इसी तरह का एक वाकया मेरे दोस्त योगेश तिवारी के साथ हुआ। कॉलेज स्टूडेंट के आपसी विवाद में बीच बचाव की कोशिश में किसी ने योगेश के सिर पर डंडा मारा जिससे उनका काफी खून बह गया। डॉक्टर्स ने उन्हें जल्दी ए निगेटिव ब्लड़ चढ़ाने को कहा लेकिन इस ग्रुप का कोई डोनर नहीं मिला। शहर के एक ब्लड बैंक में मुश्किल से सिर्फ एक बोतल खून ही एक्सचेंज करने पर मिल पाया। ठीक होने के बाद उसनेे भी ब्लड डोनर्स की एक लिस्ट बना ली और इसमें भी ए निगेटिव ग्रुप के लोगों से संपर्क में रहना शुरू कर दिया। अब योगेश के ग्रुप में 9 लोग ए निगेटिव ब्लड गु्रप वाले हैं। इनमें से कुछ लोग शहर से बाहर नौकरी करने चले गए लेकिन जरूरत पडऩे पर वे तत्काल अपने ग्रुप को लोगों को ब्लड़ डोनेट करने आ जाते हैं। इसी तरह न जाने शहर में कितने रेयर ब्लड ग्रुप वाले लोगों में अनोखे खून के रिश्ते बन रहे हैं। ए, बी, ओ एवं एबी निगेटिव ब्लड़ गु्रप वाले लोग आपातकाल में जरूरत को देखते हुए अपने समान ब्लड ग्रुप वाले से दोस्ती बढ़ा रहे हैं। ब्लड ग्रुप की जांच दो तरीकों से होती है पहली एबीओ ग्रुप जिसमें चार तरह के ब्लड ग्रुप होते हैं ए,बी, ओ एवं एबी । दूसरी जांच में आरएच गु्रप की जांच की जाती है जिसके आधार पर पॉजीटिव एवं निगेटिव ब्लड ग्रुप का निर्धारण किया जाता है। दोनों प्रणालियों से जांच करने पर संयुक्त रूप से ब्लड गु्रप की घोषणा की जाती है। उदाहरण के तौर पर ए पॉजीटिव का मतलब है ब्लड ग्रुप ए और आर एच पॉजीटिव एवं निगेटिव ब्लड ग्रुप का मतलब है ए ब्लड ग्रुप एवं आरएच निगेटिव। ए, बी, ओ एवं एबी निगेटिव ब्लड ग्रुप रेयर होते हैं। इनमें भी सबसे रेयर ग्रुप होता है ओ निगेटिव। इस ग्रुप वाले लोग बहुत कम होते हैं। पूर्व प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी का ब्लड ग्रुप ओ निगेटिव था, इसलिए वे जहां भी जाती थी स्पेशल तौर पर डॉक्टर्स व ओ निगेटिव ब्लड ग्रुप वाले डोनर्स को साथ रखा जाता था। शहर में इस ग्रुप के लोग बहुत रेयर हैं इसलिए उन्होंने आपातकाल की जरूरतों को ध्यान में रखकर आपसी संबंध स्थापित कर लिए हैं।
 
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