अब दुआएं नहीं देते भिखारी

 
Source: avinash rawat     Designation: खोजी पत्रकार व ब्लागर
 
 
 
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http://unified.bhaskar.com/city_blogger_author_images/thumb_image/100050_thumb.jpg कुछ दिनों पहले डीएनए में एक खबर पढ़ी, जिससे पता चला कि इंदौर को भारत के आठ ऐसे शहरों में शामिल किया गया है, जिन्हें भिखारी मुक्त बनाया जाएगा। खबर पढ़ते ही एक अलग तरह की खुशी का अहसास अब तक हो रहा है। दरअसल इस खुशी के पीछे एक बहुत बढ़ी वजह है। बात कुछ दिनों पहले की ही है मैं विजयनगर स्थित शर्मा चौपाटी पर कुछ व्यंजनों का मजा गया था। वहां दोस्तों के साथ कुछ चटपटा खाकर वापस घर जाने के लिए अपनी बाइक पर आकर बैठा ही था कि एक भिखारिन नजदीक आ गयी बस फिर क्या था मैैं अपनी जान बचाने में लग गया और वह भीख लेने की भरसक कोशिश में। कुछ देर तक उसने भीख के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाए, लेकिन उसके बाद भी जब मैंने कुछ भी देने से मना किया ही था कि हालत देखने लायक हो गए। गोद में बच्चा लिए वह भिखारिन जो अब तक मुझे तरह-तरह की दुआंए दे रही थी। अचानक उसके सुर बदल गए और वह मुझे पता नहीं क्या-क्या उल्टा-सीधा बोलने लगी। करीब पांच मिनट में उसने मुझे कुंवारा रहने, नौकरी छूटने, दोस्तों से झगड़ा होने और इसी तरह की दस बीस बद्दुआएं दे डाली। हद तो तब हुई जब उसने मेरी गाड़ी स्टार्ट होते ही एक्सीडेंड होने की बद्दुआ दे डाली। तंग आकर मैंने उसे दस रुपए थमाए और आगे बढ़ गया। इसके कुछ दिनों बाद दफ्तर की एक साथी का जन्मदिन मनाने के लिए हम मैकडॉनल्स गए। वहां पिज्जा और केक खाने के बाद जैसे ही बाहर निकले की हमें चार भिखारिनों ने घेर लिया। इनमें से एक वह भी थी, जिसका मैं पहले ही सामना कर चुका था। हर एक ने भीख के लिए अपने ग्राहक को पकड़ा और उनके मना करने पर सैकड़ो बद्दुआएं देना शुरू कर दिया। मेरे साथ चार लड़कियां थीं जिसमें से एक को बाल झडऩे की, दूसरी को चेहरे पर मुंहासे निकलने की और बाकी दो को अपने साथियों से झगड़ा होने पर परिवार में विवाद होने की बद्दुआएं मिलने लगी। चूंकि मैं तो पहले ही गुजर चुका था सो मैंने साथियों को समझाने की बहुत कोशिश की अंतत: सभी को कुछ न कुछ अपने पर्स से निकालना ही पड़ा। इन दो घटनाओं के बाद मैंने शहर के कई ऐसे स्थानों पर जहां भिखारी पाए जाते हैं, नजर रखना शुरू किया। एक महीने में खजराना गणेश मंदिर, विजयननगर, छप्पन दुकान, अन्नपूर्णा मंदिर के भिखारियों का सर्वे किया, जिसमें यह बात निकलकर आयी कि अब भिखारियों ने अपना भीख मांगने का पुराना ट्रेंड बदल दिया है। दे अल्ला के नाम तुझको मौला रखे, भगवान के नाम पर दे दे बाबा, भगवान तुझको सदा खुश रखेगा, खुदा तेरी जोड़ी सलामत रखे, तेरी उम्र लंबी हो जैसी सैकड़ों दुआओं की जगह अब बोला जाता है कि पैसा नहीं देगा तो गंजा हो जाएगा, या तेरी नौकरी छूट जाएगी। सुंदर लड़कियों के पर्स से पैसा निकलवाने के लिए उनकी सुंदरता को ही निशाना बनाया जा रहा है। तेरा चेहरा मुंहासों से बिगड़ जाएगा, तेरे बाल गिर जांएगे, पैसा नहीं देगी तो बॉय फ्रेंड से झगड़ा हो जाएगा जैसी बद्दुआएं सुनते ही लड़कियां पर्स से सहसा ही भीख के पैसै निकाल देती हैं। इसके अलावा भिखारियों पर महंगाई का भी असर हुआ है पहले जहां खुल्ले पैसों से काम चल जाता था वहीं अब पेट्रोल और गैस की तरह इन्होंने भी अपना रेट एक दो रूपए से बढ़ाकर दस-बीस रूपए कर दिया है। किसी ने इनसे पीछा छुड़ाने के लिए चिल्लर थमाने की कोशिश की तो संभव है, उसे खुद की बेईज्जती सहना पड़ जाए।
 
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