Navneet Gurjar
Designation :- पत्रकार व ब्लॉगर
Expertise :- पेशे से पत्रकार लेकिन जितना खूबसूरत लिखते हैं, उससे कहीं सुन्दर तबला बजाते हैं, संवेदनाओं को शब्दों में पिरोना उनकी खासियत है
साहित्य में सपनों की बात होती है। होनी भी चाहिए। लेकिन अब साहित्य और सपनों के बीच भी नक्सली आने लगे हैं। कैसे? यह महाश्वेतादेवी ने बताया। शीर्ष साहित्यकार हैं। वे ही सही...
पौराणिक पात्रों के दिलचस्प तार्किक रूप समय-समय पर सामने आए हैं।
ब्रह्म पुराण के गौतम-अहिल्या वृतांत में वर्णन है कि एक बार जब गौतम तीर्थ दर्शन को गए तो इंद्र उन्हीं का...
कहीं-कहीं, थोड़ी-घणी अब धूप दिखाई देती है। लंबी बारिशी मुश्किलों के बाद टुकड़ा-टुकड़ा ही सही, धूप अच्छी लगती है। अच्छा लगता है शहर के एक कोने में पालथी मारे बैठा वो टीला।...
पीढिय़ों के आंगन को चूल्हे में डालो। रसोई की मिठास, आस-पड़ोस के रिश्तों को टोकरी में रखो और बच्चों को कमर से बांधकर चढ़ो किसी ऊंचे पुल या मीनार पर। गांव-कस्बों में बाढ़ आई...
जैसे नानीबाई के मायरे में जिन-जिन लोगों ने कपड़े-लत्तों के लिए ताने मारे थे, कृष्ण ने उन सबके सिरों पर गठरियां-पोटलियां दे मारी थीं। वैसे ही लंबे सूखे के बाद बादलों ने बीते...
गोरखनाथ और कान कटे योगियों की, भारत भर में कई कहानियां हैं। आज गोरखपुर में जो गोरखनाथ मंदिर है वहां पहले घनी झाडिय़ां थीं। कथा यूं है कि एक नेपाली सुंदरी ने गोरखनाथ को भोजन...
मैं आम आदमी हूं। आप सरकार। मध्यप्रदेश सरकार। आपके पास सत्ता है। शासन-प्रशासन है। रौब है। विलासिता भी। .. मेरे पास सिर्फ जिंदगी है। वह भी एकाकी-सी। जिसे सांस-सांस जीना चाहता...