अबके बिछड़े तो शायद कभी ख्वाबों में मिलें
जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें.. खरज के शांत सुरों की माला में पिरोए हुए उनके शब्द दिल को छू लेते हैं। उनके गायन में समुद्र...
हमारा शहर इस बरस कुछ और बदल गया , बड़ी इमारतों के साथ भीड़ भरी सड़कों पर गुजरता हूं तो मेरे बचपन के शहर को याद करता हूं जैसे कुछ खो सा गया हो.मेरा अपना शहर ए इंदौर।
मेरा शहर...