May 11, 08:38
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भास्कर संवाददाता-!-अंबाह/पोरसा/कैलारस आज के युग में सत्कर्म करने वाला परोपकारी सदाचारी व्यक्ति कई प्रकार के रोगों से दुखी है। वहीं दुष्कर्म करने वाला व्यक्ति पुत्र, धन, स्त्री, पद आदि ऐश्वर्य से संपन्न व सुखी है। तब विचारक, विद्वान भी असमंजस में पड़ जाते हैं और सोचने लगते हैं कि ईश्वर कोई नहीं है और ना ही ईश्वरीय विधान है, क्योंकि यदि संसार का संचालक कोई जीती जागती चैतन्य शक्ति होता...