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21 Aap Mlas

  • Q&A: क्यों जा सकती है AAP के 21 MLAs की मेंबरशिप, क्या है ऑफिस ऑफ प्रॉफिट?
    Last Updated: June 17 2016, 14:02 PM

    नई दिल्ली. आम आदमी पार्टी के 21 विधायकों के ऑफिस ऑफ प्रॉफिट से जुड़े विवाद पर दिल्ली सरकार उलझ गई है। प्रेसिडेंट प्रणब मुखर्जी ने विधायकों को पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी बनाने पर मुहर लगाता बिल लौटा दिया है। इसके बाद उनकी असेंबली मेंबरशिप भी खतरे में आ गई है। अरविंद केजरीवाल इस संवैधानिक मुद्दे को मोदी की सरकार की साजिश बता रहे हैं। dainikbhaskar.com आपको कॉन्स्टिट्यूशन एक्सपर्ट सुभाष कश्यप के जरिए यहां बता रहा है कि आखिर यह विवाद क्याें उठा और इसमें आगे क्या होने के आसार हैं... क्या है मामला? - पिछले साल 70 सीटों वाली दिल्ली असेंबली के चुनाव में आम आदमी पार्टी 67 एमएलए के साथ जीत कर आई थी। - 13 मार्च 2015 को अरविंद केजरीवाल सरकार ने अपने 21 विधायकों को पार्लियामेंट सेक्रेटरी अप्वाइंट किया। - इस अप्वाइंटमेंट को दिल्ली के एक एडवोकेट प्रशांत पटेल ने चुनौती दी। - उन्होंने पिछले साल 19 जून को पिटीशन फाइल की जिसमें इसे ऑफिस ऑफ प्रॉफिट (लाभ के पद) का मामला बताया। - पटेल ने इन 21 MLAs की मेंबरशिप कैंसिल करने के लिए पिटीशन फाइल की। कब बिल लाई थी सरकार? - प्रशांत की पिटीशन प्रेसिडेंट तक पहुंचने के बाद दिल्ली सरकार 23 जून, 2015 को दिल्ली असेंबली में ऑफिस ऑफ प्रॉफिट एक्ट में अमेंडमेंट से जुड़ा बिल लाई और बिना बहस के उसे पास करा लिया। - बिल पास करा कर 24 जून 2015 को इसे लेफ्टिनेंट जनरल नजीब जंग के पास भेज दिया गया। - बिल को कानून मंत्री कपिल मिश्रा ने बिना बहस के पास कर दिया। ऐसा करने के पीछे तर्क दिया कि सरकार के कामकाज को बेहतर ढंग से चलाने के लिए ऐसा किया जा रहा है। यहां फंसा पेंच? - एलजी ने इस अमेंडमेंट बिल को प्रेसिडेंट के पास भेज दिया। प्रेसिडेंट ने इलेक्शन कमीशन से राय मांगी। - इलेक्शन कमीशन ने पिटीशन लगाने वाले एडवोकेट से अपना जवाब रखने को कहा। - जवाब में प्रशांत पटेल ने सौ पेज का जवाब दिया और बताया कि मेरे पिटीशन फाइल किए जाने के बाद असंवैधानिक तरीके से बिल लाया गया। - इलेक्शन कमीशन एडवोकेट के जवाब से सेटिस्फाइ हुआ। इसके बाद प्रेसीडेंट ने बिल लौटा दिया। ऑफिस ऑफ प्रॉफिट क्या होता है? - कॉन्स्टिट्यूशन के आर्टिकल 102 (1) (ए) के तहत सांसद या विधायक ऐसे किसी और पद पर नहीं हो सकता, जहां अलग से सैलरी, अलाउंस या बाकी फायदे मिलते हों। - इसके अलावा आर्टिकल 191 (1)(ए) और पब्लिक रिप्रेजेंटेटिव एक्ट के सेक्शन 9 (ए) के तहत भी ऑफिस ऑफ प्रॉफिट में सांसदों-विधायकों को अन्य पद लेने से रोकने का प्रोविजन है। - संविधान की गरिमा के तहत लाभ के पद; पर बैठा कोई व्यक्ति उसी वक्त विधायिका का हिस्सा नहीं हो सकता। 21 विधायकों का क्या होगा? - दिल्ली सरकार ने ऑफिस ऑफ प्रॉफिट मामले में जो अमेंडमेंट बिल पास किया था, उसमें कहा गया था कि 21 एमएलए को पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी अप्वाइंट किए जाने पर इसे लाभ के पद (ऑफिस ऑफ प्रॉफिट) का मामला न माना जाए। - विधायकों की मेंबरशिप इसलिए रद्द हो सकती है, क्योंकि दिल्ली विधानसभा नेशनल कैपिटल रीजन एक्ट के तहत काम करती है। - संविधान के साथ NCR एक्ट में यह प्रावधान है कि अगर कोई विधायक ऑफिस ऑफ प्रॉफिट लेता है तो उसकी मेंबरशिप कैंसिल हो जाती है। - संविधान के आर्टिकल 192 में भी इस बारे में साफ कहा गया है। इसके मुताबिक पार्लियामेंट या असेंबली का कोई भी मेंबर अगर लाभ के किसी भी पद पर होता है उसकी सदस्यता जा सकती है। फिर चाहे यह लाभ का पद केंद्र सरकार का हो या राज्य सरकार का। - Delhi MLA(Removal of Disqualification) Act, 1997 के मुताबिक, पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी को भी इस लिस्ट से बाहर नहीं रखा गया है। - मंत्रियों के पद भी ऑफिस ऑफ प्रॉफिट के पद हैं, लेकिन उन्हें कानून के तहत लाभ के पद से बाहर रखा गया है। आप MLA ने क्या सुविधाएं ली थीं? - पिछले महीने इलेक्शन कमीशन ने भी आम आदमी पार्टी के विधायकों को नोटिस जारी कर पूछा था कि आपकी मेंबरशिप क्यों ना कैंसल की जाए? - जवाब में विधायकों ने कहा कि वे पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी होने के नाते दिल्ली सरकार से सैलरी, अलाउंस या ऐसी कोई दूसरी सुविधा नहीं ले रहे जो ऑफिस ऑफ प्रॉफिट के दायरे में आए। - विपक्ष कह रहा है कि इन 21 पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी को स्टाफ, कार, सरकारी ऑफिस, फोन, एसी, इंटरनेट और बाकी फैसिलिटीज दी गई हैं। - इलेक्शन कमीशन ने जांच के दौरान पाया कि पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी बनाए गए विधायकों को विधानसभा में ही रूम अलॉट किए गए हैं। कुछ ने तो इन रूम को अपना ऑफिशियल एड्रेस भी बताया था। क्या बच पाएगी MLA की मेंबरशिप ? - सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक अगर किसी सांसद या विधायक ने अॉफिस ऑफ प्रॉफिट लिया है तो उसे मेंबरशिप गंवानी होगी। चाहे उसने सैलरी या अलाउंस लिया हो या नहीं। - चुनाव आयोग ही इस मामले पर आखिरी फैसला लेगा। अगर चुनाव आयोग फैसला लेता है और इन एमएलए की मेंबरशिप खत्म होती है तो इन सीटों पर बाइ इलेक्शन कराया जाएगा। यही एक रास्ता बचता है। कहां चूक गई केजरीवाल सरकार? - केजरीवाल सरकार की सबसे बड़ी गलती यह है कि उसने पहले अपने 21 विधायकों को पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी बनाया और उसके बाद कानून में बदलाव की प्रक्रिया शुरू की। - आप सरकार ने इस मामले में कॉन्सटीट्यूशन राइट्स का वॉयलेशन किया है। - कानूनी प्रावधानों को जानते हुए आप सरकार अमेंडमेंट बिल लाई और उसे बिना बहस के पास करा कर एलजी को भेज दिया। गेंद अब किसके पाले में है? - अब राष्ट्रपति ने बिल लौटा दिया है। इसके बाद इलेक्शन कमीशन के पास इन MLA की मेंबरशिप कैंसिल करने का आखिरी अधिकार है। - अब आम आदमी पार्टी के पास अदालत जाने का रास्ता बचा है। हालांकि, अगर किसी मामले में चुनाव आयोग और राष्ट्रपति एकमत हों तो अदालत में उन फैसलों का रद्द होना मुश्किल है। - इस मामले में गेंद अब चुनाव आयोग के पाले में है। राष्ट्रपति ने इस मामले में उससे सलाह मांगी है। पहले भी संसदीय सचिव बनाए जाते रहे हैं तो ये बिल क्यों अटका? - क्योंकि ये अप्वाइंटमेंट्स संविधान को एक तरफ रखकर हुए हैं। - दो तरह के राज्य हैं एक वे जहां पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी को ऑफिस ऑफ प्रॉफिट के दायरे से बाहर रखा गया है तो दूसरे वे राज्य हैं, जहां के कानून के तहत ये पद प्राॅफिट के दायरे में आते हैं। - दिल्ली में इन्हें लाभ के पद के दायरे में रखा गया है। दिल्ली में सिर्फ सीएम एक संसदीय सचिव रख सकता है, इससे ज्यादा नहीं। क्या देश में और कहीं हुए हैं ऐसे मामले? - मई, 2012 में पश्चिम बंगाल में टीएमसी-कांग्रेस सरकार ने भी पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी के अप्वाइंटमेंट को लेकर बिल पास किया था। - इसके बाद ममता बनर्जी ने 20 से ज्यादा विधायकों को पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी अप्वाइंट किया। - इन सेक्रेटरी को मिनिस्टर का दर्जा मिला था। लेकिन पिछले साल जून में कलकत्ता हाईकोर्ट ने सरकार के बिल को असंवैधानिक ठहरा दिया। इनपुट : मनोज शर्मा।

  • केजरीवाल के 21 MLAs की परेशानी बना है ये शख्‍स, जानें क्‍या है वजह‍
    Last Updated: June 17 2016, 08:30 AM

    लखनऊ. अरविंद केजरीवाल के 21 विधायकों की मेंबरशिप जिस शख्स की वजह से खतरे में है, वो हैं एडवोकेट प्रशांत पटेल। ये अपनी वकालत से आमिर खान, कन्हैया कुमार जैसे लोगों को भी परेशान कर चुके हैं। पटेल नरेंद्र मोदी से इंस्पायर हैं और केजरीवाल ने इस मामले में मोदी पर दिल्ली की हार न पचा पाने का आरोप लगाया है। dainikbhaskar.com आपको यूपी के फतेहपुर के रहने वाले इसी शख्स के बारे में बता रहा है। मैं बीजेपी के लिए काम नहीं करता हूं... - वकील प्रशांत पटेल ने बताया कि मार्च 2015 में आप जिन विधायकों को मंत्री नहीं बना पाई, उन्हें पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी बनाकर अप्वाॅइंट कर दिया। - यह पद लाभ के थे, जिस पर 21 विधायक अप्वाॅइंट थे। इस पर मैं मामले को पहले कोर्ट में ले गया, फिर राष्ट्रपति का दरवाजा खटखटाया। - प्रशांत बताते हैं कि जब इस तरह के मामले सामने आते हैं तो फैमिली डर जाती है। लेकिन इसके बावजूद सपोर्ट करती है। - 2014 में लोकसभा चुनाव के दौरान मैं मोदी से इंस्पायर हुआ। लेकिन बीजेपी की ओर झुकाव होने के बाद भी उसके लिए काम नहीं करता हूं। - कुछ लोग मामले को दूसरा रुख देने के लिए कहते हैं कि मैं बीजेपी से जुड़ा हूं। मिडिल क्लास फैमिली से हैं प्रशांत - प्रशांत ने बताया कि वह यूपी के फतेहपुर के जहानाबाद कस्बे के रहने वाले हैं। - वह मिडिल क्लास फैमिली से हैं और पिता खेमराज उमराव पेशे से टीचर रहे हैं। - भाई-बहनों में सबसे बड़े प्रशांत के छोटे भाई प्रभात बीटीसी करने के बाद जॉब का इंतजार कर रहे हैं। - एक बहन कानपुर मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस कर रही है। आईएएस बनना चाहते थे - प्रशांत ने बताया कि उन्होंने इंटर तक फतेहपुर में ही पढ़ाई की। शुरुआती शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर में तो ग्रेजुएशन इलाहाबाद से किया। - नोएडा से एमबीए करने के बाद लॉ किया और फिर दिल्ली में वकालत शुरू की। इंटर तक मैंने यही सोचा था कि आईएएस बनूंगा। - इसीलिए ग्रेजुएशन इलाहाबाद से किया ताकि तैयारी भी कर सकूं। लेकिन बाद में मन बदल गया और एमबीए कर लिया। कार्पोरेट कल्चर समझ नहीं आया, इसलिए छोड़ दी नौकरी - प्रशांत ने बताया कि एमबीए करने के बाद गुड़गांव में कुछ दिनों तक ई-कॉमर्स कंपनी में भी जॉब की, लेकिन कार्पोरेट कल्चर समझ में नहीं आया। - बंध कर काम ठीक नहीं लगा, तब सोचा कि अपना काम शुरू किया जाए। - मैंने केवल एक बार सरकारी जॉब के लिए एयरफोर्स में अप्लाई किया था। रिटेन और इंटरव्यू भी निकाल लिया, लेकिन मेडिकल में छांट दिया गया था। - इसके बाद कभी किसी नौकरी के लिए कोशिश नहीं की। आमिर खान, कन्हैया कुमार को किया परेशान - जब आमिर खान की फिल्म पीके रिलीज हुई थी तो प्रशांत ने ही फिल्म पर हिंदुओं के इमोशंस के साथ मजाक करने का आरोप लगाकर कोर्ट में रिट दाखिल की थी। - इसके बाद जेएनयू मामले (कन्हैया कुमार को लेकर विवाद) में भी उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में रिट दाखिल की थी। - प्रशांत ने सेंसर बोर्ड की प्रेसिडेंट लीला सैम्सन के करप्शन के खिलाफ भी मोर्चा खोला था, जिसके बाद उन्हें पद से हटा दिया गया था। क्या कहती है फैमिली? - भाई प्रभात ने बताया कि प्रशांत शुरू से ही टीम लीडर थे। स्कूल में स्पीच देना, मामलों को गंभीरता से लेना और उस पर चर्चा करना इनका शौक था। - अब यही क्वालिटी उनके काम में दिख रही है। वह लगातार भ्रष्टाचार से जुड़े बड़े मामलों की पोल खोल रहे हैं। हमारे परिवार को उन पर गर्व है। क्यों खतरे में है आप के 21 MLA की मेंबरशिप? - पिछले साल 24 जून को दिल्ली सरकार 21 MLAs को पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी अप्वाॅइंट करने वाला बिल लाई थी। - इसमें कहा गया था कि इन विधायकों को पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी बनाए जाने पर इसे लाभ के पद (ऑफिस ऑफ प्रॉफिट) का मामला न माना जाए। - बीजेपी और कांग्रेस ने इस पर एतराज जताया था। दोनों पार्टियों ने कहा था कि केजरीवाल अपने एमएलए को फायदा देने के लिए ऐसा कर रहे हैं। इलेक्शन कमीशन ने भी सफाई मांगी थी। - बीते सोमवार को प्रेसिडेंट ने इस बिल को लौटा दिया। अब इन विधायकों की मेंबरशिप भी जा सकती है।

  • आप के 21 विधायकों का मामला, ट्विटर पर उड़ा मजाक ट्रेंड में रहा # udtamla
    Last Updated: June 14 2016, 20:52 PM

    नई दिल्ली. दिल्ली के सीएम अरविेंद केजरीवाल ने प्रेसिडेंट प्रणव मुखर्जी की तरफ से ऑफिस ऑफ प्रॉफिट बिल लौटाने के मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने एक के बाद एक ट्वीट कर कहा कि मोदी न तो काम करते हैं और न करने देते हैं। बता दें कि बिल खारिज होने से आप के 21 MLA की मेंबरशिप खतरे में हैं। लेकिन टि्वटर यूजर्स को मोदी पर लगाए केजरीवाल का यह आरोप पसंद नहीं आया। ट्रोलर्स ने हर बात पर मोदी को निशाने पर लेने पर उल्टे केजरीवाल का मजाक उड़ाया। ट्रेंड में रहा #udtamla.... - पिछले साल 24 जून को दिल्ली सरकार 21 MLAs को पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी अप्वाइंट करने पर मुहर लगाता बिल लाई थी। इसमें कहा गया था कि इन विधायकों को पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी अप्वाइंट किए जाने पर इसे लाभ के पद (ऑफिस ऑफ प्रॉफिट) का मामला न माना जाए। - बीजेपी और कांग्रेस ने इस पर एतराज जताया था। दोनों पार्टियों ने कहा था कि केजरीवाल अपने एमएलए को फायदा देने के लिए ऐसा कर रहे हैं। इलेक्शन कमीशन ने भी सफाई मांगी थी। - सोमवार को प्रेसिडेंट ने इस बिल को लौटा दिया।अब इन विधायकों की सदस्यता भी जा सकती है। सोशल मीडिया में शेयर हुए कुछ रोचक ट्वीट ‏@DiliDM दुनिया भर #UdtaPunjab देखते रहे, बगल मैं 21 एमएलए #UdtaMLA हो गए, मुबारक हो दिल्ली! @YogendraYadav मोदी को तो आप घसीट रहे हो। अगर ये जायज़ था तो इलेक्शन कमिशन को मना लो। कानून को बेक डेंट से बदलने की कोशिश क्यों? ‏@jogsa एक मिनट में सब से ज्यादा मोदी मोदी जपने के लिए विश्व रिकॉर्ड स्थापित करने वाली #सबसे_तेज_Delhiसरकार ‏@I_am_Singh मैंने तो 21 विधायकों को सचिव बनाकर 4 लाख हर महीने सैलरी का ईंतजाम किया था जी पर मोदी ने उन गरीबों की रोजीरोटी छीन ली। ‏@SGhodgerikar गली गली मे शोर है अरविंद की आप चोर है ‏ @sharma_vml Corruption का समय, कांग्रेस-60 साल, लालू यादव-30 साल, ArvindKejriwal -2 साल तो award सबसे_तेज_Delhiसरकार को मिलता है। @achaudhary भागा भागी मे , रायता फैलाने मे, बच्चाे की कसम खाने मे, MLA काे उडानेमे, किसान काे सुसाइड के लिए उकसाने में सबसे तेज Delhi सरकार। ‏ ‏@achaudhary धरने धरने में, हल्ला करने में, u turn लेने में, विज्ञापन देने में, शायरी मारने में, मुद्दे उछालने में, MLA उड़ाने में, #सबसे_तेज_Delhiसरकार ‏@Deveshbhaii जब से सरकार चला रहा है ये फर्जीवाल इसने बस एक ही काम किया है मोदी को कैसे नीचा दिखाऊं पर मंशा आजतक पूरी नही हो पाई। ‏@Rameshs लालू को ईमानदारी की सर्टिफिकेट मिलने के बाद अब अबू-बकर-अल-बगदादी भी केजरीवाल से शांति का नोबेल पुरस्कार की माँग कर दी है। @PalashPimple AAP will be released after total of 21 cuts @AskRaushan Just 1 year >> 21 MLAs disqualified ,Strike rate >> 2100 @ArjRat Kejriwal was worried about few scene cuts in #UdtaPunjab, Now President rewarded him with 21Cuts in his govt @Stylebaaz Latest NASA reports says that only 2 things are visible from space 1. China Wall 2. AAP supporters fooled by Kejriwal @mrinalni kejri Kejri little star, Said no to lal batti car,Not a single work done so far..Dreams to become PM agli bar @AnandMestry #सबसे_तेज_Delhiसरकार in transferring all mistakes of them on others, wastage of public money by ego centrist anarchist CM @ArjRat Kejriwal was worried about few scene cuts in #UdtaPunjab Now President rewarded him with 21Cuts in his govt @awesomesamie now Delities feel shame that a joker represent his state. ‏@Akshat_garg Law since 2006, Delhi is to have 1parl secy.Kejriwal appointed 21 and tried to tamper with the law. Caught red handed आगे की स्लाइड में ट्विटर पर शेयर हुए केजरीवाल का मजाक उड़ाते कुछ ट्वीट और फोटोज

  • खतरे में AAP के 21 MLAs की मेंबरशिप, BJP बोली-सिर्फ मोदी-मोदी करते हैं केजरी
    Last Updated: June 14 2016, 20:43 PM

    नई दिल्ली. आम आदमी पार्टी (आप) के 21 MLAs को पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी बनाए जाने के मामले में विवाद बढ़ता जा रहा है। अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया है कि नरेंद्र मोदी दिल्ली में अपनी हार नहीं पचा पा रहे हैं। इसलिए वे AAP विधायकों की सदस्यता रद्द करवाना चाह रहे हैं। जबकि दिल्ली ही नहीं हरियाणा, गोवा, राजस्थान, पंजाब और गुजरात में भी पार्लियामेंट्री सेक्रटरी हैं। इस बीच, मंगलवार को हेल्थ इश्यू का हवाला देते हुए ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर ने इस्तीफा दे दिया। बीजेपी ने आरोप लगाया कि करप्शन के कारण उन्होंने इस्तीफा दिया है। क्यों खतरे में आप के 21 MLA की मेंबरशिप... - पिछले साल 24 जून को दिल्ली सरकार 21 MLAs को पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी अप्वाइंट करने पर मुहर लगाता बिल लाई थी। इसमें कहा गया था कि इन विधायकों को पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी अप्वाइंट किए जाने पर इसे लाभ के पद (ऑफिस ऑफ प्रॉफिट) का मामला न माना जाए। - बीजेपी और कांग्रेस ने इस पर एतराज जताया था। दोनों पार्टियों ने कहा था कि केजरीवाल अपने एमएलए को फायदा देने के लिए ऐसा कर रहे हैं। इलेक्शन कमीशन ने भी सफाई मांगी थी। - सोमवार को प्रेसिडेंट ने इस बिल को लौटा दिया।अब इन विधायकों की सदस्यता भी जा सकती है। गोपाल राय के बदले कौन संभालेगा काम? - दिल्ली कैबिनेट में बड़ा बदलाव हुआ है। हेल्थ मिनिस्टर सत्येंद्र जैन को ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री का एडिशनल चार्ज दिया गया है। - शुक्रवार को सीएम केजरीवाल से उनके निवास पर मुलाकात के दौरान गोपाल राय ने यह अपील की और उनको ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट की जिम्मेदारी से मुक्त किया जाए। (<a href='http://www.bhaskar.com/news-ht/c-271-173747-re0072-NOR.html'>यहां पढ़ें पूरी खबर</a>) बीजेपी बोली- मोदी-मोदी जपते रहते हैं केजरीवाल, काम कब करते हैं? - केजरीवाल के आरोपों का जवाब देने के लिए बीजेपी के संबित पात्रा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। - पात्रा ने केजरीवाल पर आरोप लगाते हुए कहा, आप रूल तोड़ते भी हैं। जब पकड़े जाते हैं तो आप मोदी जी पर आरोप लगाने लगते हैं। - उन्होंने कहा, आखिर अरविंद केजरीवाल काम कब करते हैं। सुबह उठते हैं, नाम लेते हैं- मोदीजी, मोदीजी, मोदीजी, मोदीजी। शाम होती है तो मोदीजी, मोदीजी, मोदीजी। - इनके सारे मंत्री भी सुबह से शाम तक सोशल मीडिया पर और प्रेस कॉन्फ्रेंस करके सिर्फ एक नाम लेते है- मोदीजी, मोदीजी मोदीजी। - शायद इसीलिए केजरीवाल जी को 21 संसदीय सचिवों की जरूरत पड़ गई। इस तरह से रोज पीएम पर अनर्गल आरोप लगाकर काम नहीं चलेगा। - इस तरह के आरोप लगाकर केजरीवाल ने राष्ट्रपति का अपमान किया है। सबसे पहले किसने की थी शिकायत - राष्ट्रपति के यहां पिटीशन लगाने वाले प्रशांत पटेल ने बताया, मैंने राष्ट्रपति के पास मार्च 2015 में पिटीशन लगाई कि केजरीवाल की पार्टी के 21 विधायक संसदीय सचिव बनाए गए हैं। ये सभी लाभ के पद पर हैं। इसलिए इनकी सदस्यता रद्द की जाए। - मेरे पिटीशन फाइल करने के बाद 20 जून को इन्होंने कहा कि इस मामले में ये नया बिल लाएंगे। - 23 जून को नया बिल ले आते हैं और 24 जून को एलजी के पास भेज देते हैं। - इस याचिका पर एलजी ने साइन नहीं किए और राष्ट्रपति के पास भेज दिया। इसके बाद राष्ट्रपति ने इलेक्शन कमीशन से राय मांगी। - इलेक्शन कमीशन ने मुझसे अपनी बात रखने को कहा। मैंने सौ पेज का जवाब दिया। इसमें मैंने बताया कि मेरे पिटीशन डालने के बाद असंवैधानिक तरीके से बिल लाए गए। - ये सभी लाभ के पद पर हैं। इसलिए इनकी सदस्यता रद्द की जाए। इलेक्शन कमीशन मेरे जवाब से संतुष्ट हुआ। इसके बाद राष्ट्रपति ने बिल लौटा दिया। केजरीवाल ने किया पलटवार, बोले- मोदी लोकतंत्र का सम्मान नहीं करते - केजरीवाल ने इस फैसले पर कड़ा एतराज जताया है। - उन्होंने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, दिल्ली में हो रहे अच्छे कामों से मोदी जी घबरा रहे हैं। - एक MLA बेचारा रोज़ अपना पेट्रोल ख़र्च करके अस्पतालों के चक्कर लगाता था। बताओ क्या गलत करता था? मोदी जी ने उसको घर बिठा दिया। - एक MLA को बिजली पर लगा रखा था, एक को पानी पर, एक को अस्पतालों पर, एक को स्कूल पर। मोदी जी कहते हैं - ना काम करूंगा, ना करने दूंगा। - किसी MLA को एक पैसा नहीं दिया, कोई गाड़ी, बंगला, कुछ नहीं दिया। सब MLA फ़्री में काम कर रहे थे। मोदी जी कहते हैं- सब घर बैठो, कोई काम नहीं करेगा। - मोदी जी लोकतंत्र का सम्मान नहीं करते। डरते हैं तो सिर्फ आम आदमी पार्टी से। इनकी मेंबरशिप खतरे में प्रवीण कुमार, शरद कुमार, आदर्श शास्त्री, मदन लाल, शिव चरण गोयल, संजीव झा, सरिता सिंह, नरेश यादव, जरनैल सिंह, राजेश गुप्ता, राजेश ऋषि, अनिल कुमार वाजपेयी, सोमदत्त, अवतार सिंह कालका, विजेंद्र गर्ग विजय, जरनैल सिंह (राजौरी गार्डन), कैलाश गहलोत, अलका लांबा, मनोज कुमार, नितिन त्यागी और सुखवीर सिंह के नाम शामिल हैं। EC ने क्या कहा था? - EC (इलेक्शन कमीशन) ने MLA से पूछा था कि आपकी मेंबरशिप क्यों ना कैंसल की जाए? - EC ने आप विधायकों से 11 अप्रैल तक नोटिस का जवाब मांगा था। - इसके बाद आप विधायकों ने 6 हफ्ते का टाइम और मांगा था। - आप एमएलए ने अपने जवाब में कहा था कि वे पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी होने के नाते दिल्ली सरकार से कोई सैलरी, अलाउंस या ऐसी कोई दूसरी सुविधा नहीं ले रहे जो लाभ के पद के दायरे में आए। - बता दें कि ऐसे ही मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने भी केजरीवाल सरकार को नोटिस भेज कर जवाब मांगा था। कब बिल लाई थी सरकार? - बिल को कानून मंत्री कपिल मिश्रा ने बिना बहस के पास कर दिया था। - ऐसा करने के पीछे पार्टी का तर्क दिया था कि वह सरकार के कामकाज को बेहतर ढंग से चलाने के लिए ऐसा कर रही है। - जून 2015 में दिल्ली असेंबली से पास हुए इस बिल को केंद्र सरकार से भी मंजूरी नहीं मिली है।

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