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आराधना (हिंदी फ़िल्म)

आराधना के पेरेंट्स के सपोर्ट में जैन कम्युनिटी, 68 दिन उपवास के बाद हुई थी मौत

आराधना के पेरेंट्स के सपोर्ट में जैन कम्युनिटी, 68 दिन उपवास के बाद हुई थी मौत

Last Updated: October 11 2016, 12:14 PM

हैदराबाद. 68 दिन उपवास के बाद जान गंवाने वाली बच्ची आराधना के माता-पिता के साथ जैन समुदाय खड़ा हो गया है। इनके खिलाफ गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज हुआ था। जैन समुदाय के धर्मगुरुओं ने सामाजिक और बाल अधिकार कार्यकर्ताओं को धार्मिक मामलों से दूर रहने कहा है। जैन गुरु मांगीलाल भंडारी ने कहा, धर्म का पालन हमारा मौलिक अधिकार है। किसी को भी इसमें दखल देने का अधिकार नहीं। आराधना के माता-पिता के खिलाफ केस दर्ज करना हमारे धार्मिक मामलों में दखल है। क्या है मामला... - न्यूज एजेंसी के मुताबिक, मामला 2 अक्टूबर का है। एनजीओ बलाला हक्कुला संगम के प्रेसिडेंट अच्युत राव ने इस मामले में 7 अक्टूबर को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आराधना के पेरेंट्स पर कार्रवाई करने की मांग की थी। - राव के मुताबिक, आराधना सिकंदराबाद के सेंट फ्रांसिस स्कूल में 8th क्लास में पढ़ती थी। - राव ये भी बताते हैं, चेन्नई के एक संत ने आराधना के पेरेंट्स लक्ष्मीचंद समदड़िया और मनीषा को सलाह दी थी कि अगर उनकी बेटी 4 महीने उपवास कर ले तो उनके बिजनेस में फायदा होगा। - लंबा उपवास तोड़ने के बाद आराधना बेहोश होकर नीचे गिर गई थी और कोमा में चली गई। उसे तुरंत नजदीकी हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। फैमिली ने क्या कहा था? - मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, फैमिली का दावा है कि आराधना ने 68 दिन फास्ट किया था। - उसके उपवास खोलने के दो दिन बाद उसे हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया, जहां दिल का दौरा पड़ने से उसकी मौत हो गई। - आराधना की अंतिम यात्रा में करीब 600 लोग शामिल हुए और उसे बाल तपस्वी बताया। - परिवार के करीबी लोगों ने बताया कि इससे पहले भी आराधना 41 दिन का उपवास कर चुकी थी। - कम्युनिटी की मेंबर लता जैन ने बताया, उपवास के जरिए लोग अपने शरीर को काफी तकलीफ देते हैं। वे खाना-पानी छोड़ देते हैं। ऐसा करने वालों को समाज में काफी सम्मान दिया जाता है। लेकिन इस मामले में लड़की नाबालिग थी। यही मेरा आरोप है। अगर ये मर्डर न भी हो तो सुसाइड तो है ही। आराधना के पिता का है ज्वैलरी का बिजनेस - आराधना के पिता की सिकंदराबाद के पोट बाजार इलाके में ज्वैलरी शॉप है। - एक सवाल ये भी उठा था कि इतने दिनों के उपवास रखने वाली आराधना को क्लास में कैसे बैठने दिया गया? - आराधना के दादा मानिकचंद के मुताबिक, हमने किसी से कुछ नहीं छिपाया। सभी जानते थे कि वह उपवास पर है। लोग आते थे और उसके साथ सेल्फी खिंचवाते थे। अब कुछ लोग उंगलियां उठा रहे हैं कि हमने उसे 68 दिन का उपवास क्यों रहने दिया। उपवास खत्म होने का अखबार में दिया गया था ऐड - आराधना के उपवास खत्म होने का अखबार में बाकायदा ऐड भी दिया गया था। - उपवास खोलने वाले कार्यक्रम पारणा में तेलंगाना के मिनिस्टर पद्मराव गौड़ और जहीराबाद के सांसद बीबी पाटिल शामिल हुए थे। - काचीगुड़ा के जैन मुनि रविंद्र स्थानक ने कहा था, संथारा (मृत्यु के लिए उपवास करना) आमतौर पर बुजुर्गों के लिए है, जो अपना जीवन जी चुके हैं और संन्यास लेना चाहते हैं। उपवास या तपस्या के लिए किसी से जबरदस्ती नहीं की जा सकती।

नसीरुद्दीन ने फिर साधा राजेश खन्ना पर निशाना, जानिए इस बार क्या बोले?

नसीरुद्दीन ने फिर साधा राजेश खन्ना पर निशाना, जानिए इस बार क्या बोले?

Last Updated: August 13 2016, 10:38 AM

भास्कर नेटवर्क: राजेश खन्ना को कमजोर एक्टर बताने वाले बयान पर नसीरुद्दीन शाह ने माफी तो मांग ली थी, लेकिन अपने रुख पर वे अब भी टिके हुए हैं। उन्होंने एक बार फिर सवाल किया है कि क्या घर के बाहर जमा होने वाली भीड़ से कोई एक्टर महान बन जाता है? जाहिर तौर पर वे सलीम खान की उस बात को भी गलत ठहरा रहे हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि मेरे बेटे (सलमान खान) के घर के सामने लगने वाली भीड़ से ज्यादा लोग राजेश खन्ना के बंगले के सामने जमा हुआ करते थे। बयान पर कायम हैं नसीरुद्दीन... कुछ दिन पहले नसीरुद्दीन ने राजेश खन्ना को कमजोर एक्टर बताया था। जब राजेश की बेटी ट्विंकल और पत्नी डिंपल कपाड़िया समेत बॉलीवुड की कई हस्तियों ने इस बयान पर आपत्ति जताई तो नसीर ने माफी मांग ली थी। अब नसीर ने कहा है- उन्होंने इसलिए माफी मांगी, क्योंकि उन्हें लगा कि इस बात से खन्ना के परिजनों को तकलीफ पहुंची है, लेकिन वे अपने स्टैंड पर कायम हैं। जब खन्ना जीवित थे तो बॉलीवुड ने उन्हें कितना सम्मान दिया? मुंबई में आयोजित एक मास्टर क्लास के मौके पर नसीर ने कहा कि कुछ लोग राजेश खन्ना के सम्मान को लेकर सवाल उठा रहे हैं। मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि जब तक खन्ना जीवित थे, बॉलीवुड ने उन्हें कितना सम्मान दिया? नसीर ने आगे कहा, 70 के दशक में साहित्यिक चोरी की शुरुआत हुई। संगीत, स्क्रिप्ट राइटिंग, स्टोरीटेलिंग सब कुछ औसत था। खन्ना के अलावा, 70 के दौर में और कौन-से पॉपुलर स्टार थे। जॉय मुखर्जी, बिस्वजीत चटर्जी... क्या कोई भी इन महानुभावों को याद करता है? उस समय जीतेंद्र भी बड़े स्टार थे। इसके अलावा, देव आनंद, राज कपूर और दिलीप कुमार की तिकड़ी का आकर्षण ढल रहा था। बॉलीवुड को एक नए आइकन की जरूरत थी और राजेश खन्ना ने उस मांग को पूरा किया। आराधना और आनंद छोड़ कोई और फिल्म पसंद नहीं... नसीर ने फिल्म इंडस्ट्री को अवसरवादी बताते हुए कहा- बॉलीवुड ने राजेश को क्रिएट किया, इस्तेमाल किया और जब वे पैसा बनाने वाली मशीन नहीं रह गए तो उन्हें दूर फेंक दिया। नसीर से पूछा गया- क्या अवसरवादिता ही बॉलीवुड का स्वभाव है। तब उन्होंने कहा कि राजेश खन्ना सतर्कता बरतते तो ऐसी स्थिति से बच सकते थे। नसीर ने आराधना और आनंद में राजेश खन्ना के अभिनय को अच्छा बताते हुए कहा कि इन दोनों फिल्मों के अलावा, कोई भी और पिक्चर मुझे पसंद नहीं है। एक्टिंग लीजेंड माने जाने वाले नसीर ने रुख साफ किया, अगर आप अपने दिल की बात कहते हैं तो इसमें कोई बुराई नहीं है। बॉलीवुड में ऐसे कई कलाकार हैं, जो अंडररेटेड हैं। यही नहीं, उनके घरों के सामने भीड़ भी नहीं जुटती, फिर भी परफॉर्मेंस के मामले में वे अव्वल नंबर हैं...ऐसे ही स्टार्स के बारे में पढ़ें आगे की स्लाइड्स पर...

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