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अरुण कुमार

  • तीसरा ट्रैक बिछाने के लिए चाहिए 3500 करोड़ रुपए और पांच साल का समय
    Last Updated: January 23 2017, 08:48 AM

    ग्वालियर। मथुरा से झांसी तक तीसरी रेल लाइन बिछाने के लिए 3500 करोड़ रुपए चाहिए और इसे बनाने में पांच साल का समय लगेगा। इसकी प्रोजेक्ट रिपोर्ट रेल बोर्ड को दी गई है। यह बात शनिवार को उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक अरुण कुमार सक्सेना ने बताई। -उन्होंने शनिवार को संवाददाताओं से चर्चा के दौरान कहा कि इटावा ट्रैक का ट्रायल डीआरएम द्वारा किया जा चुका है। इस ट्रैक पर और भी ट्रेनें की रेलवे तैयारी कर रहा है। -एनसीआर ने ग्वालियर -इटावा के बीच मैमो ट्रेन चलाने तथा भिंड-इंदौर इंटरसिटी को इटावा तक बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा है। रेलवे बोर्ड की मंजूरी मिलते ही इस दिशा में काम शुरू कर दिया जाएगा। तीसरे ट्रैक के लिए बोर्ड को प्रस्ताव भेजा - इलाहाबाद जोन के जीएम ने कहा कि मथुरा-झांसी के बीच लाइन डालने के काम हेतु डीपीआर तैयार होकर रेलवे बोर्ड पहुंचा दी गई है। इसमें काम के लिए भूमि अधिग्रहण व लाइन डालने के लिए लगभग 3500 करोड़ का व्यय बताया गया है और इतने ही बजट का प्रस्ताव बीना-गुना लाइन के लिए भी दिया है। थर्ड लाइन बनने में लगेंगे 5 साल -झांसी-आगरा के बीच थर्ड लाइन बिछाने के संबंध में उन्होंने कहा कि थर्ड लाइन बीते साल स्वीकृत हो चुकी है। -साढ़े तीन हजार करोड़ रुपए कह लागत से बनने वाली थर्ड लाइन के साथ ही डीपीआर बन गई है,जिसे रेलवे बोर्ड को भेज दिया है। -रेलवे लाइन के इस कार्य में थोड़ी परेशानी भूमि अधिग्रहण को लेकर आ रही है,जिसे दूर किया जा रहा है। थर्ड लाइन बिछने का काम पूरा होने में ५ साल का समय लगेगा।

  • चार टांगों के साथ पैदा हुआ ये शख्स, सोशल मीडिया से ऐसे मिली मदद
    Last Updated: November 05 2016, 07:36 AM

    नई दिल्ली. मेडिकल फील्ड में हर दिन कुछ-न-कुछ ताज्जुब कर देने वाला देखने को मिलता ही है। ऐसा ही एक केस 22 साल के अरुण कुमार का है, जो चार पैरों के साथ पैदा हुए। लेकिन, सोशल मीडिया पर दिल्ली के फोर्टिस हॉस्पिटल ने जब इसके बारे में सुना, तो डॉक्टरों की एक टीम मदद के लिए आगे आई। - यूपी के रहने वाले अरुण का कहना है कि इन दो एक्स्ट्रा पैरों की वजह से उसे चलने के साथ बैठने में भी दिक्कत होती है। - अरुण के मुताबिक वो डॉक्टरों से मिले थे, जहां उन्होंने एक ऑपरेशन की बात कही है, जिसके लिए वह तैयार हैं। - उनका इलाज फोर्टिस हॉस्पिटल के डॉ. हेमन्त शर्मा की देखरेख में होगा। वे इस केस को स्टडी कर चुके हैं। माता-पिता ले गए डॉक्टर्स के पास, सर्जरी हो सकती थी जानलेवा - दरअसल जब अरुण पैदा हुए थे, तो उसके इन पैरों को देखकर उनके माता-पिता इलाज के लिए कई डॉक्टरों के पास लेकर गए थे। - मां कोकिला देवी ने ये बात अपने ससुर को बताई, जो अरुण को लेकर फर्रूखाबाद लेकर गए, जहां डॉक्टर ने सर्जरी की बात कही। - हालांकि, डॉक्टर के मुताबिक यह सर्जरी जानलेवा भी हो सकती है। ऐसे में अरुण इन हालातों के साथ रहने का आदी हो गए। सोशल मीडिया ने की मदद - एक दिन अरुण के केस को सोशल मीडिया पर शेयर किया गया। साथ ही इनके इलाज के लिए अपील भी की गई। - इसके बाद फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टिट्यूट ने उनके घरवालों से सम्पर्क किया और इलाज के लिए बुलाया। - फिलहाल डॉक्टर की टीम इस तलाश में जुटे हुए हैं कि अरुण के शरीर से एक्स्ट्रा पैरों को कैसे अलग किया जाए। आगे की स्लाइड्स में देखें, खबर से जुड़ीं Photos...

  • भारत की PAK को वॉर्निंग: हमारे जवानों को छुआ भी तो बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी
    Last Updated: October 23 2016, 17:10 PM

    जम्मू. भारत ने कहा है कि अगर पाकिस्तान ने हमारे किसी भी जवान को अब छुआ भी तो इसकी बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। बीएसएफ के एडिशनल डीजी अरुण कुमार ने रविवार को शहीद जवान गुरनाम सिंह को श्रद्धांजलि देने के बाद कहा- 24 घंटे से बॉर्डर पर शांति है। लेकिन हम जानते हैं कि ये कभी भी खत्म हो सकती है। इसके लिए हम तैयार भी हैं। बेहतर है वो सबक लें.... - 21 अक्टूबर को पाकिस्तानी रेंजर्स के साथ मुठभेड़ में जख्मी होने के बाद गुरनाम को जम्मू के गवर्नमेंट हॉस्पिटल में एडमिट करवाया गया था। उन्हें सिर में गोली लगी थी। तीन दिन इलाज के बाद भी गुरनाम को बचाया नहीं जा सका। गुरनाम ने पाकिस्तानी घुसपैठ को नाकाम किया था। - अरुण कुमार ने गुरनाम को श्रद्धांजलि देने के बाद मीडिया से बात की। एडीजी से मीडिया ने पूछा कि क्या बॉर्डर पर शांति को तूफान के पहले की शांति माना जाना चाहिए? इस सवाल पर कुमार ने कहा, फिलहाल, मैं इस पर कुछ नहीं कहूंगा। लेकिन हम किसी भी हालात का सामना करने के लिए तैयार हैं। - हम पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब दे रहे हैं। लेकिन मैं एक बात साफ कर देना चाहता हूं। अगर हमारे किसी भी जवान को छुआ भी गया तो फिर पड़ोसी को इसकी बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। - कुमार ने कहा- अगर उनकी तरफ से अब कोई भी हरकत होती है तो उन्हें वैसा ही जवाब मिलेगा, जैसा पहले भी दिया गया है। शहीद के पिता बोले- हमें जंग चाहिए - शहीद गुरनाम के पिता कुलबीर सिंह ने कहा- मोदी सरकार से अपील है कि हमें जंग चाहिए। गुरनाम बेहद साधारण परिवार से थे। उनके पिता स्कूल बस ड्राइवर हैं। - शनिवार देर रात बीएसएफ के आईजी डीके उपाध्याय ने कहा, उन्होंने बहादुरी के साथ दुश्मनों का सामना किया, हमने अपना बहादुर जवान खोया है। - बता दें कि गुरनाम रेजीमेंट 173 बीएसएफ (ई कंपनी) में तैनात थे। उन्हें सिर में गोली लगी थी। गुरनाम का जम्मू में इलाज चल रहा था। कैसे जख्मी हुए थे गुरनाम ? - 19-20 अक्टूबर के रात जम्मू के हीरानगर सेक्टर के बोबिया पोस्ट पर गुरनाम तैनात थे। रात में उन्होंने सरहद पर हलचल देखी। - करीब 150 मीटर दूर कुछ धुंधले चेहरे नजर आए। उन्होंने बिना देर किए साथियों को अलर्ट किया और ललकारने पर पता चला कि वह आतंकी है। - इसके बाद दोनों ओर से फायरिंग हुई। आतंकी वापस भाग खड़े हुए। - रिपोर्ट्स के मुताबिक 21 अक्टूबर को सुबह पाकिस्तानी रेंजर्स ने स्नाइपर रायफल्स से गुरनाम पर फायर किया। सिर में गोली लगने से वे जख्मी हो गए थे। साथी की बॉडी घसीटकर ले गए थे आतंकी - कठुआ के हीरानगर इलाके में बुधवार रात को गुरनाम के साथ बीएसएफ जवानों ने पाकिस्तानी घुसपैठ को नाकाम किया था। - इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया। इसमें एक आतंकी जख्मी साथी की बॉडी को घसीटते देखा गया। - बीएसएफ आईजी (जम्मू) डीके उपाध्याय ने बताया था- कठुआ सेक्टर के हीरानगर इलाके में कुछ मूवमेंट नजर आई थी। पता चला कि 6 आतंकी भारतीय सीमा में घुसने की कोशिश कर रहे हैं। - बीएसएफ जवानों ने इन्हें रोकने की कोशिश की। दोनों तरफ से फायरिंग हुई। आगे की स्लाइड में पढ़ें: सर्जिकल स्ट्राइक के बाद कहां-कहां हुए आतंकी हमले...

  • UPSIDC में अब होंगे 2 चीफ इंजीनियर, दागी अफसर पर कसी नकेल
    Last Updated: October 21 2016, 17:10 PM

    लखनऊ. यूपी में यादव सिंह मामले में फजीहत झेल चुकी यूपी सरकार अब यूपीएसआईडीसी (यूपी राज्य औद्योगिक विकास निगम) के चीफ इंजीनियर अरुण कुमार पर नजर गड़ा ली है। करप्शन के मामले में जेल होकर आए यूपीएसआईडीसी के चीफ इंजीनियर अरुण मिश्रा के पर कतरने के लिए विभाग में अब चीफ इंजीनियर के दो पद बना दिए गए हैं। आगे पढ़िए एमडी अमित घोष की पहल पर हुई कार्रवाई... -एमडी अमित घोष ने अभी हाल ही में यूपीएसआईडीसी ज्वाइन किया है। -लेकिन इसके बाद से ही विभाग में टकराव की स्तिथि आ गई थी। -इसके बाद अमित घोष ने इसकी जानकारी शासन में बैठे अधिकारियों को दी। -शासन ने अभी 2 दिन पहले बाई-सर्कुलेशन बोर्ड मीटिंग के जरिये यूपीएसआईडीसी में चीफ इंजीनियर के दो पद बना दिए हैं। -इसके कारण अब चीफ इंजीनियर के पद पर तैनात अरुण मिश्रा के अधिकार भी सीमित हो गए हैं। -अमित घोष ने बताया कि विभाग में अब 2 चीफ इंजीनियर होंगे। इसलिए लिया गया फैसला -दरअसल, अमित घोष ने जब एमडी के रूप में यूपीएसआईडीसी में ज्वाइन किया तो उन्होंने देखा कि एक अधिकारी के आगे सभी बेबस हैं। -ऐसे में विभाग में हाशिये पर पड़े सभी अधिकारियों को उन्होंने पद के हिसाब से काम बांट दिए। -यह फैसला अरुण मिश्रा को मंजूर नहीं हुआ और वह हाईकोर्ट चले गए। -हाईकोर्ट ने याचिका के आधार पर एमडी के आदेश पर रोक लगा दी। -इसके बाद अरुण मिश्रा ने खुद एक विभागीय आदेश जारी कर दिया, जिसमें कहा गया कि सभी पत्रावलियां उनकी अनुमति से ही एमडी को भेजी जाएंगी। -अमित घोष कुछ सोच-समझ पाते, तभी हाईकोर्ट में एक और याचिका अरुण मिश्रा ने डाली कि एमडी उन्हें काम नहीं करने दे रहे हैं। -इसकी सुनवाई अब 26 अक्टूबर को होनी है। -इसके बाद अमित घोष ने विभाग में दो चीफ इंजीनियर के पद बनाने का फैसला किया। यूपीएसआईडीसी के दागी अफसरों में गिनती होती है अरुण मिश्रा की - यूपीएसआईडीसी के चीफ इंजीनियर अरुण कुमार मिश्रा ने विभाग में रहते हुए अरबों की बेनामी संपत्ति बनाई। - इस मामले में जांच भी बैठी, वह जेल भी गए और अब वापस अपने पद पर बहाल हो चुके हैं। - अरुण कुमार मिश्रा के खिलाफ सीबीआई जांच, ईडी और एसआईटी जांच कर रही है। - यूपीएसआईडीसी के दूसरे यादव सिंह अरुण कुमार मिश्रा घोटालों के चक्कर में जेल भी जा चुके हैं। - सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी के अनुसार, अरुण कुमार मिश्रा 27 अप्रैल 2011 से 5 अक्टूबर 2011 तक जेल में भी रह चुके हैं। - जेल जाने के बावजूद अरुण मिश्रा का निलंबन नहीं किया गया था। ना ही उनके खिलाफ कोई विभागीय कारवाई की गई। आगे की स्लाइड्स में पढ़िए हाईकोर्ट ने अरुण कुमार मिश्रा की मार्कशीट को बताया था फर्जी...

  • रालोसपा में मची घमासान: उपेंद्र कुशवाहा ने अरुण कुमार को पद से हटाया
    Last Updated: June 30 2016, 18:20 PM

    पटना. पिछले कुछ दिनों से रालोसपा नेता उपेंद्र कुशवाहा और अरुण कुमार के बीच चल रहे विवाद ने गुरुवार को अहम मोड़ ले लिया। कुशवाहा ने अपने समर्थकों के साथ दिल्ली में बैठक की और अरुण कुमार को पद से हटा दिया। उन्होंने इसके लिए रालोसपा की बिहार प्रदेश कमिटी को भंग कर दिया। हवाला कारोबारी चला रहे पार्टी को-अरूण अरूण कुमार ने कहा कि रालोसपा को अब हवाला कारोबारी चला रहे है। इसी बात को लेकर कई माह से विवाद चल रहा था। प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटाने से बोझ कम हुआ है। मैं जार्ज फर्नाडिस का शिष्य हूं। भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ लड़ता रहूंगा। पार्टी छोड़ने के सवाल पर अरूण ने कहा कि अभी तो मैं पार्टी में हूं। इस पार्टी को मैं और कार्यकर्ता बहुत खून-पसीने से खड़ा किए है। वही रालोसपा विधायक ललन पासवान ने कहा कि यह बहुत ही गलत बात है कि तीन सांसद और दो विधायक की पार्टी में फूट हो गई है। दलालों के कारण यह हाल हुआ है। अरुण को नहीं बुलाया गया बैठक में दिल्ली में उपेंद्र कुशवाहा ने अपने समर्थकों के साथ बैठक में यह निर्णय लिया है। बैठक में न अरुण को बुलाया गया और न उनके समर्थकों को। गौरतलब है कि बिहार विधानसभा चुनाव के समय से ही रालोसपा नेतृत्व में विवाद उभरा था। अरुण के एक समर्थक ने पीएमओ को एक पत्र लिखा था। पत्र में आरोप लगाया गया था कि कुशवाहा के हवाला कारोबारियों के साथ संबंध हैं। उपेंद्र कुशवाहा और अरूण कुमार में चल रहा था विवाद रालोसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय राज्य मंत्री उपेंद्र कुशवाहा और जहानाबाद सांसद अरूण कुमार में विवाद चल रहा था। विवाद के कारण रालोसपा में दो गुट बन गया था। जिसको लेकर कई बार पार्टी के नेता एक साथ नहीं आ पाए। बढ़ गई थी गुटबाजी पिछले दिनों तो पार्टी का विवाद इस कदर सतह पर गया था कि दोनों गुटों के नेता एक दूसरे नेतृत्व से ही इस्तीफा मांगने लगे थे। दोनों गुटों की अलग-अलग कार्यक्रम में एक-दूसरे नेता शरीक भी नहीं हो रहे थे। दोनों गुटों में एक-दूसरे को पीछे छोड़ने के लिए एक साथ कार्यक्रम किए जा रहे थे। विवादों में ही जिलाध्यक्ष का चुनाव भी लटक गया है। प्रदेश कमेटी भंग होने के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष ने प्रदेश युवा अध्यक्ष के तौर पर हिमांशु पटेल को मनोनीत कर दिया। इसके प्रतिक्रिया में प्रदेश अध्यक्ष अरुण कुमार ने प्रदेश की विभिन्न सात कमेटियों के अध्यक्ष का मनोनयन कर दिया। एक माह पहले पार्टी कार्यालय पर दोनों गुटों के नेताओं के बीच कब्जा को लेकर खींचतान शुरू हो गई थी। फोटो- विजय कुमार

  • अब ये संभालेंगे पीएम की सुरक्षा की जिम्मेदारी, मोदी कर चुके हैं तारीफ
    Last Updated: March 19 2016, 06:25 AM

    हजारीबाग. झारखंड के हजारीबाग निवासी IPS अफसर अरुण कुमार सिन्हा अब पीएम मोदी की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालेंगे। सिन्हा SPG (स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप) के नए डायरेक्टर होंगे। इनके नाम की मंजूरी पीएम की अध्यक्षता वाली कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने दी है। वे फिलहाल केरल में एडीजी (प्रशासन) के पद पर तैनात हैं। केरल कैडर के 1987 बैच के अधिकारी हैं सिन्हा सिन्हा को पद संभालने की तारीख से दो साल के कार्यकाल के लिए नियुक्त किया गया है। 1981 बैच के आंध्र प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी के. दुर्गा प्रसाद के 25 नवंबर 2014 को हटने के बाद 1989 बैच के गुजरात कैडर के आईपीएस अधिकारी विवेक श्रीवास्तव एसपीजी का काम देख रहे थे। श्रीवास्तव कार्यकाल पूरा करने के बाद आईबी में वापस चले जाएंगे।

  • गिरिडीह सांसद की बेटी की शादी में शामिल हुए प्रधानमंत्री मोदी
    Last Updated: March 16 2016, 11:02 AM

    रांची. प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सह गिरिडीह सांसद रवींद्र कुमार राय की बेटी व जहानाबाद सांसद अरुण कुमार के बेटे की 10 मार्च को रांची में शादी हुई थी। दोनों सांसदों ने 14 मार्च को दिल्ली में रिसेप्शन पार्टी दी। पार्टी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री अरुण जेटली, वित्त राज्यमंत्री जयंत सिन्हा, रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा, उपेंद्र कुशवाहा, जीतन राम मांझी, अर्जुन मुंडा, दिग्विजय सिंह, सुरेश प्रभु, सुदर्शन भगत आदि शामिल हुए।

  • ये हैं धागे से आर्ट बनाने वाले इकलौते अार्टिस्ट, बनाई 1 करोड़ की पेंटिंग
    Last Updated: February 17 2016, 09:56 AM

    भोपाल. 28 लाख 36 हजार मीटर धागे। 3545 रीलें और 1.5 लाख के मटेरियल से तैयार हुआ 6 बाय 4 फीट का पीस। यह आर्ट पीस है भगवान कृष्ण का, जिसनें लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में जगह बनाई है। इसे आकार दिया है पटियाला के अरुण कुमार ने। जानिए क्या दावा करते हैं आर्टिस्ट... - आर्टिस्ट अरुण का दावा है कि उनके जैसा थ्रेड आर्ट वर्क हिंदुस्तान में कोई नहीं करता। - इनका आर्ट वर्क पेंटिंग और सिलाई का कॉम्बिनेशन है। - जिसे देखकर यह अंदाजा नहीं लगाया जा सकता कि इसमें धागों का इस्तेमाल हुआ है। - काफी देर देखने के बाद भी यह पेंटिंग की तरह ही नज़र आता है। 1 करोड़ की कीमत एक करोड़ की कीमत का यह थ्रेड आर्ट वर्क घरों में इस्तेमाल होने वाली सिलाई मशीन और स्केचिंग के जरिए बनकर तैयार हुआ है। सपने में आए थे भगवान वे बताते हैं, इस आर्ट की शुरुआत साल 2007 में आए एक सपने से हुई, जिसमें भगवान कृष्ण थे। सबसे पहले मैंने फॉर्मल सूट को डिज़ाइन कर उसमें सिलाई मशीन की मदद से भगवान कृष्ण के पैर का अंगूठा थ्रेड वर्क से बनाया। हर दिन छह घंटे सिलाई की तब जाकर तीन साल में यह पीस बनकर तैयार हुआ। 16 साल काम के बाद आई फिनिशिंग मेरे पिता सिलाई का काम करते थे। वे चाहते थे कि मैं भी यही काम करूं, लेकिन मुझे पेंटिंग और स्केचिंग का शौक था। मैंने दोनों कामों को मिलाकर थ्रेड आर्ट वर्क करना शुरू किया। कुछ समय बाद इसमें अच्छा रिस्पॉन्स मिला। लगातार 16 साल काम करने के बाद फिनिशिंग आई है। इस आर्ट पीस के खरीदार 10 हजार से लेकर 5 लाख रुपए तक का पीस ले चुके हैं। बनवा सकते हैं, अपना पोट्रेट थ्रेड वर्क से कोई भी व्यक्ति अपना पोट्रेट बनवा सकता है। इसके लिए आर्टिस्ट को अपना फोटो ई-मेल करना होगा, जिसके बाद हूबहू शक्ल 15 दिनों में तैयार कर दी जाएगी। आगे की स्लाइड्स में देखें थ्रेड आर्ट वर्क से बने फोटोज...

  • कोर्ट ने कॉलोनी के ड्रेनेज सिस्टम के लिए तीन दिन में मांगी रिपोर्ट
    Last Updated: January 12 2016, 06:52 AM

    नीमकाथाना. नगर पालिका का ड्रेनेज सिस्टम फेल होने से रेलवे बुगदा कॉलोनी के घरों तक भरे गंदे पानी के मामले में कोर्ट ने सख्त रवैया दिखाया है। एडीजे अरुण कुमार बेरीवाल ने मामले में एसडीएम, पीडब्ल्यूडी व नगर पालिका अधिकारियों से मौके हालातों का सर्वे कर ड्रेनेज सिस्टम बनाने की रिपोर्ट मांगी हैं। कोर्ट ने तीन दिन में ड्रेनेज सिस्टम की प्रोजेक्ट रिपोर्ट मांगी हैं। वकील मुरारीलाल शर्मा ने बताया कि कॉलोनी के लोगों ने गंदे पानी के भराव व ड्रेनेज सिस्टम फेल होने पर मामला पेश किया था। सुनवाई के दौरान एसडीएम, पीडब्ल्यूडी व नगर पालिका के वकील व अधिकारी उपस्थित हुए। एडीजे ने वादी के प्रतिनिधी के साथ विभागीय अधिकारियों को सर्वे करने के रिपोर्ट देने के आदेश दिये हैं। मामले में अगली सुनवाई 16 जनवरी को होगी। इन तीन दिनों में विभागीय अधिकारियों को ड्रेनेज सिस्टम की रिपोर्ट तैयार करनी होगी। कोर्ट के आदेश पर कॉलोनी के लोगों ने खुशी जताई है। वार्ड पांच के रहने वालों ने बताया कि अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों से दर्जनों बार शिकायत करने व मिलने के बाद भी समस्या दूर नहीं हो रही थी। कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई तो कोर्ट में मामला दाखिल किया, अब कोर्ट के आदेश पर कॉलोनी के लोगों को सुधार की उम्मीद जगी है।

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